Tuesday, 2 December 2014

मार दुलत्ती मार ....

मौका मिलते ही अपने गुरु को पूरे गुरूर से लतियाने की जो परम्परा केजरीवाल ने शुरू की वो अपने आप अनोखा इसलिए है क्योंकि गुरु को लतियाने की परम्परा प्रकृति में अन्यन्त्र कहीं भी नहीं दिखती सभी 87 लाख जीव गुरु का पूरा-पूरा सम्मान करते हैं सिवाय केजरीवाल छाप बकलोल बबुआ की बिरादरी के। देखिये न जैसे ही मेरे लेख से पता चला कि केजरीवाल की विश्वसनीयता खरतनक स्तर तक घट चुकी है और आपियों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है तो झट से बकलोल बबुआ ठीक अपने गुरु की तर्ज पर ठीक गुरु को को ही लतियाने निकाल पड़ा मजबूरी है बकलोल बबुआ को किसी भी स्थिति में दिल्ली की सत्ता चाहिए ताकि इज्जत बची रहे। बड़ी अजीब सी स्थिति है और वाकई मुझे समझ में नही आता कि आखिर क्या कारण है ये बिरादरी अपने गुरुओं को कायदे से लतियाने के लिए "गांधी जी" से आशीर्वाद क्यों मांगती है ? केजरीवाल अपने गुरु को लतियाने से पहले गांधी जी की मूर्ति के सामने खड़े हो कर पूरा-पूरा आशीर्वाद लिया था पूरे दल बल के साथ ठीक उससे तर्ज पर बकलोल बबुआ भी संसद परिसर में ही "गांधी जी" के आशीर्वाद लिया ताकि अपने गुरु केजरीवाल को कायदे से लतिया कर दिल्ली में कम से कम नंबर 2 पर आ सकें। बकलोल बबुआ के इस हरकत पर लतियाने वाली टिप्पणी की तो एक बकलोल आपिया बहुत गुस्से मुझे नसीहत देते हुए बोला "...राहुल जी का ये मोदी सरकार पर हमला है ..." मैंने थोड़ा मज़ाकिया आश्चर्य लहजे में कहा "...बहुत अच्छे ... ये भी प्रकृति की एक अद्भुत घटना है जब एक बुरी तरह घायल गीदड़ ठीक उसी शेर पर हमला कर रहा है जिसने हाथपैर तोड़ के उसे अधमरा करके छोड़ा है ..." इसपर बकलोल आपिया सकपका गया और पूछा "...तो आपके हिसाब से क्या है ..." मैंने फिर मज़ाकिया लहजे में कहा "...दिल्ली में केजरीवाल को नंबर तीन पर खसकाने की बकलोल बबुआ की रणनीति है ..." ये सुनते ही मूर्ख आपिया बौखला गया और पूछा "...आपका मतलब है हम दिल्ली मे सत्ता में नहीं आएंगे ...?" मैंने उससे आराम से कहा "...बकलोल बबुआ तो यही चाहता हैं अपने गुरु को लतियाने के बाद केवल केजरीवाल की विजय हो आपियों को कम से कम एक सीट तो मिल जाए ..." ये सुनते ही बकलोल आपिया अपना कापार ज़ोर-ज़ोर से खजुआने लगा ....तभी पास में एक खाँटी भाई कोंग्रेसी भी आ गए बोले "...केजरीवाल से नहीं हमारा संघर्ष नहीं है ...हम मोदी से लड़ रहे हैं ...." मैंने कहा इसीलिए "...आपके उपाध्यक्ष जी अपने गुरू  केजारीवाल को लतिया के 28 सीटे जीतने का ख्वाब देख रहे हैं कि नहीं ... ठीक वैसे ही जैसे केजरीवाल अपने गुरु को लतिया के 28 सीटें जीत लिए थी ...." खाँटी भाई और बकलोल आपिया दोनो एक दूसरे को घूर रहे थे ......      

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