Sunday, 21 December 2014

आतंकवाद महज आर्थिक और राजनीतिक हित और कुछ भी नहीं

अगर कोई ये सोचता है कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, कोई जाति नहीं होती या किसी समुदाय से वो लोग सम्बद्ध नहीं होते बिल्कुल सही हैं वो लोग। जैसे आतंकवाद बिल्कुल धर्मनिरपेक्ष, जातिनिरपेक्ष और समुदाय निरपेक्ष होता है वैसे ही निरपेक्षता भी अपने साथ गज़ब का आतंकवाद है। जवाहर लाल नेहरू का जब गुटनिरपेक्ष आंदोलन उन्ही की जेब में जब चवन्नी के भार तले अपना दम तोड़ रहा था तभी धर्मनिरपेक्ष आतंकवाद ने अपनी आँखें खोलनी शुरू कीं। वैसे तो जवाहर लाल के पास इतना भी दिमाग ही नहीं था कि वो नीतिगत फैसलों की समीक्षा भी कर सकें लिहाजा आतंकवाद के मुद्दे पर उस समय की तत्कालीन काँग्रेस नेहरू के साथ चुप रही और इसे बकलोल कोंग्रेसियों द्वारा विदेशनीति का अहम हिस्सा मान लिया गया जिसे मूर्खवे नेहरूवाद कहते हैं जिसका नतीजा था चीन के हाथों पराजय हालांकि कई मोर्चों पर भारतीय सेना के वीरों ने चीन को धूल भी चटाई थी लेकिन नेहरूवादियों ने इसे दबाने की पूरी कोशिश की और वो सफल भी रहे। पाकिस्तान ने हमारी जमीन इसी नेहरूवाद के कारण हड़प ली उसका कुछ हिस्सा चीन को भी दे दिया लेकिन आगे क्या हुआ सबको दिखता है।
अमेरिका ने तत्कालीन सोवियत संघ आगे बढ्ने से रोकने के लिए आतंकवाद को सबसे पहले बढ़ावा दिया और फिर आगे चल अपने हथियार बेचने के लिए भारत के खिलाफ पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा पूरे ज़ोरशोर से दिया और साथ ही उसको पूरी उम्मीद भी थी कि इससे वो बचने में सफल रहेगा लेकिन तब तक नहीं खुल के बोला जब तक लादेन ने अमेरिका को उसकी औकात नहीं दिखा दी। फिलिस्तीन के मामले में मामला ये है कि इसराईल अद्भुत वैज्ञानिक विकास बेहद आकर्षक है और इसी आकर्षण से कहीं अरब के नागरिकों में कहीं इसराईल के प्रति आकर्षण न पैदा हो जाए इसी से बचने के लिए फिलिस्तीन के आतंकवाद इस्लाम के नाम पर अरब के हुक्मरानों ने जिंदा रखा हुआ है।
उन्हीं अरब के उद्योगपतियों को जब ये लगा कि तेल अब खत्म होने वाला है और 25 - 30 साल में इसका उत्पादन अरब के देशों में नहीं होगा तो उन्होने रियल इस्टेट में पैसा लगाया और अकूत पैसा लगाया जो लगभग 23 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है और अरब के बजट एक तिहाई है अब इतना पैसा लगाने के बाद अगर वो कहीं डूब गया तो अरब के शेख खड़े - खड़े कंगाल हो जाएंगे उनको पुराने कबीले वाली जिंदगी में जाने से कोई नहीं रोक सकता। भारत-पाकिस्तान-अफगानिस्तान-नेपाल-श्रीलंका-भूटान-मालदीव में ऐसी बेहद खूबसूरत जगहों की भरमार है कि जो अगर विकसित हो गए तो इन अरब के देखों दिवाला पिटना तय है। यही कारण है कि ये अरब देश के अमीर पाकिस्तान को मोहरा बना कर आतंकवाद का वित्तपोषण कर रहे हैं जिससे भारत कहीं से भी विकास के रास्ते पर ण बढ़ सके और अरब देशों के शेखों की अमीरी कायम रहे। आतंकवाद को विशुद्ध आर्थिक और कूटनीतिक मामला है जिसे उसी तरीके से आसानी से निपटा जा सकता है आर्थिक स्रोतों के तबाह करके ... 

No comments:

Post a Comment