Sunday, 21 December 2014

आतंकवाद महज आर्थिक और राजनीतिक हित और कुछ भी नहीं

अगर कोई ये सोचता है कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, कोई जाति नहीं होती या किसी समुदाय से वो लोग सम्बद्ध नहीं होते बिल्कुल सही हैं वो लोग। जैसे आतंकवाद बिल्कुल धर्मनिरपेक्ष, जातिनिरपेक्ष और समुदाय निरपेक्ष होता है वैसे ही निरपेक्षता भी अपने साथ गज़ब का आतंकवाद है। जवाहर लाल नेहरू का जब गुटनिरपेक्ष आंदोलन उन्ही की जेब में जब चवन्नी के भार तले अपना दम तोड़ रहा था तभी धर्मनिरपेक्ष आतंकवाद ने अपनी आँखें खोलनी शुरू कीं। वैसे तो जवाहर लाल के पास इतना भी दिमाग ही नहीं था कि वो नीतिगत फैसलों की समीक्षा भी कर सकें लिहाजा आतंकवाद के मुद्दे पर उस समय की तत्कालीन काँग्रेस नेहरू के साथ चुप रही और इसे बकलोल कोंग्रेसियों द्वारा विदेशनीति का अहम हिस्सा मान लिया गया जिसे मूर्खवे नेहरूवाद कहते हैं जिसका नतीजा था चीन के हाथों पराजय हालांकि कई मोर्चों पर भारतीय सेना के वीरों ने चीन को धूल भी चटाई थी लेकिन नेहरूवादियों ने इसे दबाने की पूरी कोशिश की और वो सफल भी रहे। पाकिस्तान ने हमारी जमीन इसी नेहरूवाद के कारण हड़प ली उसका कुछ हिस्सा चीन को भी दे दिया लेकिन आगे क्या हुआ सबको दिखता है।
अमेरिका ने तत्कालीन सोवियत संघ आगे बढ्ने से रोकने के लिए आतंकवाद को सबसे पहले बढ़ावा दिया और फिर आगे चल अपने हथियार बेचने के लिए भारत के खिलाफ पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा पूरे ज़ोरशोर से दिया और साथ ही उसको पूरी उम्मीद भी थी कि इससे वो बचने में सफल रहेगा लेकिन तब तक नहीं खुल के बोला जब तक लादेन ने अमेरिका को उसकी औकात नहीं दिखा दी। फिलिस्तीन के मामले में मामला ये है कि इसराईल अद्भुत वैज्ञानिक विकास बेहद आकर्षक है और इसी आकर्षण से कहीं अरब के नागरिकों में कहीं इसराईल के प्रति आकर्षण न पैदा हो जाए इसी से बचने के लिए फिलिस्तीन के आतंकवाद इस्लाम के नाम पर अरब के हुक्मरानों ने जिंदा रखा हुआ है।
उन्हीं अरब के उद्योगपतियों को जब ये लगा कि तेल अब खत्म होने वाला है और 25 - 30 साल में इसका उत्पादन अरब के देशों में नहीं होगा तो उन्होने रियल इस्टेट में पैसा लगाया और अकूत पैसा लगाया जो लगभग 23 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है और अरब के बजट एक तिहाई है अब इतना पैसा लगाने के बाद अगर वो कहीं डूब गया तो अरब के शेख खड़े - खड़े कंगाल हो जाएंगे उनको पुराने कबीले वाली जिंदगी में जाने से कोई नहीं रोक सकता। भारत-पाकिस्तान-अफगानिस्तान-नेपाल-श्रीलंका-भूटान-मालदीव में ऐसी बेहद खूबसूरत जगहों की भरमार है कि जो अगर विकसित हो गए तो इन अरब के देखों दिवाला पिटना तय है। यही कारण है कि ये अरब देश के अमीर पाकिस्तान को मोहरा बना कर आतंकवाद का वित्तपोषण कर रहे हैं जिससे भारत कहीं से भी विकास के रास्ते पर ण बढ़ सके और अरब देशों के शेखों की अमीरी कायम रहे। आतंकवाद को विशुद्ध आर्थिक और कूटनीतिक मामला है जिसे उसी तरीके से आसानी से निपटा जा सकता है आर्थिक स्रोतों के तबाह करके ... 

Thursday, 18 December 2014

पैसे के लिए कत्लेआम आम पाकिस्तान में ....

क्या महज एक संयोग ही है कि मई 2011 में ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद अचानक पाकिस्तान में अच्छे और बुरे दोनों तालिबान बहुत अधिक सक्रिय हो गए और पाकिस्तान में आतंकवादी घटनाओं की बाढ़ सी आ गई। वैसे सामान्यतः लादेन के मारे जाने के बाद आतंकवादियों के हौसले कमजोर पड़ने चाहिए थे लेकिन हो बिलकुल उल्टा रहा है। पाकिस्तान की आतंकवादी घटनाएं फिलिस्तीन की आतंकवादी घटानाओं से काफी हद तक समान हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि फिलिस्तीन को जब पैसे की जरूरत होती है तब उसके आतंकवादी इस्राईल पर हमला करते हैं और अरब पैसे की बरसात शुरू हो जाती है और कुछ निर्दोष नागरिक हलाल होने के बाद हमले रुक जाते हैं। पाकिस्तान जब भारत में बड़ी वारदात को अंजाम देने में नकबयाब या कामयाब रहता है तो भी अपने ही देश में अपने ही नागरिकों को मरने में उसे कोई झिझक नहीं होती। वस्तुतः जब तक लादेन जिंदा था और पाकिस्तान में था उसे इस्लाम के विस्तार के नाम पर अरब देशों से मिलने वाले धन की कोई कमी नहीं थी यही कारण है लाहौर में हाफ़िज़ सईद के जलसे को सफल बनाने के लिए पूरी सरकारी मशीनरी सक्रिय हो गई थी यहाँ तक कि ट्रेनों तक की व्यवस्था कर दी गई। ये सब अरब देशों से पैसा उगाहने के लिए किया गया था। लेकिन लादेन के मारे जाने के बाद अब उसमे दिक्कत हो रही है एक सभी लादेन की तरह दिलेर नहीं नहीं है जो अमेरिका के खिलाफ बगावत कर सकें और इतने जीवट भी नहीं हैं कि तोरबोरा की पहाड़ियों और मिस्र के रेगिस्तान में वर्षों गुजार दें वो सिर्फ इस्लाम के नाम पर और फिर इस बीच आई एस भी उभर गया है लिहाजा पाकिस्तान पहले कहीं ज्यादा अब अमेरिकी अनुदान पर निर्भर है लेकिन अमेरिका ने लादेन के मारे जाने के बाद पाकिस्तान को मिलने वाला 800 मिलियन डालर के अनुदान विचार करते हुए  रोक लगा दी। तभी से पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय मंचो पर ये लगातार ये जताने में लगा हुआ है कि वो आतंकवाद से बुरी तरह ग्रस्त है और से फंड की जरूरत है। इधर 26 जनवरी के अतिथि के तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा की भारत यात्रा पर आने वाले हैं उसके पीछे सीधे-सीधे अमेरिका का अपना हित है उनको अधिक बिज़नेस की सख्त जरूरत है और इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि अमेरिका के लिए सोना नहीं हीरा उगलने वाली लॉकहीड मार्टिन और बोइंग जैसे कंपनिया सीधे उच्च तकनीक के साथ भारत में निवेश के लिए आतुर हैं अब इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि आतंकवाद के खिलाफ जंग में पाकिस्तान अमरीका से कितनी कौड़ी मिल रही होगी। चीन और पाकिस्तान में एक बात समान है कि वहाँ की राजनीति में नागरिक भावनाओं के लिए कोई जगह नहीं है। सत्ता के निमित्त वो अपने लोगों को भी मार डालने में कोई संकोच नहीं करते। पेशावर के आर्मी स्कूल में आतंकवादी हमले का एक बेहद तार्किक और मजबूत पक्ष ये भी है।

Friday, 12 December 2014

अपना घर जिंदगी...दूसरों का गंदगी

घर वापसी पसंद नहीं ...खाँटी भाई कोंग्रेसी सहित सभी सिकउल्लूर शोषनिष्टों ने आज कल आसमान सर पे उठा रखा है ...एक वामपंथी सिकउल्लूर जिनको और दूसरे कोंग्रेसी और शोषनिस्टों की तरह दूसरों का घर, दूसरों का धन, दूसरों की लुगाई, दूसरों की मलाई बहुत पसंद है इसीलिए अभिषेक मनु जैसे खाँटी भाई शोषनिस्ट कम्युनिष्ट रात-बिरात अपने घर के बजाय दूसरों के घर पहुँच जाते हैं। एक बार तो हद ही हो गई एक खाँटी भाई शोषनिस्ट-कम्युनिस्ट-सिकउल्लू बहुत दिनो तक घर वापसी नहीं किए तो उनकी श्रीमती जी पहुँच गई  तो जबरन उनको भी दूसरो के घर का सदस्य बना दिया गया फिर क्या था विदेशों के उनको दौरे पड़ने लगे दूसरों की लुगाईयां मार-मलाईयां लेकर इनके पास आने लगीं ...अरे इनकी भी लुगाई मय परिवार दूसरों के घर मलाई लेकर जाने लगी। पैसे का तो अंबार लग गया ...माहौल ऐसा बना दिया इन सिकउल्लरों ने कि कोई अपने घर वापस जाना भी चाहे तो न जा सके आज बहुत बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो अपने घर वापस जाना चाहते हैं जमनादास अख्तर, नज़म सेठी, तसलीमा, आदि संख्या बहुत बड़ी है लेकिन ये सिकउल्लू अपना उल्लू सीधा करने से बाज नहीं आएंगे क्योकि इससे  ....एक तो वोट बैंक का खतरा दूसरे इसी बहाने गोरा-गोरा-काला-काला धन भी इनको मिलता है। ये नाजायज ताल्लुकात इतना तगड़ा है कि ए॰ एस॰ दिलीप कुमार उर्फ ए आर रहमान दूसरों के घर का सदस्य बनते ही  दाऊद के इशारे पर बॉलीवुड में इनको दनादन काम मिलने लगा , दनादन ग्रॅमी अवार्ड से नवाज दिया गया और भी बहुत कुछ हुआ दूसरों के घर का सदस्य बनते ही जबकि उस घर में संगीत गुनाह है तब किसी सिकउल्लू र की आवाज नहीं उठी थी ... मैडम टेरेसा को सिर्फ इसलिए नोबल पुरस्कार दिया गया क्योंकि वो सेवा के बहाने इन किसी सिकउल्लूरों के इशारे पर दूसरों का घर बसा रही थी ...इसके लिए गोरा-गोरा-काला-काला धन अकूत मात्रा में आता था। जबकि टेरेसा की अम्मा इस भारत माता की गोद में हजारों माता अमृतमयी, माता ऋतंभरा जैसी हैं जिनको किसी पुरस्कार की लालसा नहीं निस्वार्थ भाव की ममता है जो जिनकी सेवा के आगे मैडम टेरेसा कुछ भी नहीं ...म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) थोप कर थोक के भाव से न सिर्फ लोगों को गुलाम बनाया जा रहा है बल्कि मानसिक रूप से कुंद करके मूर्ख भी बनाया जा रहा है (इसकी पुष्टि के लिए गुड़गाँव स्थित मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र से संपर्क किया जा सकता है ) ऊपर ये इतना खतरनाक है कि जिसे म्लेच्छ बोली नहीं आती वो हींन भावना का शिकार हो कर कुंठित हो चुका है। बहुत आवशयक है स्वाभिमान जागरण की और उसके साथ-साथ घर वापसी की ...

Tuesday, 9 December 2014

हालांकि ये इतना संवेदनशील विषय है कि मेरी लिखने की इच्छा बिलकुल नहीं थी लेकिन मूर्ख आपिए और उनका महामूर्ख बास की हरकतों ने लिखने पर विवश कर दिया है ...

यूं ही नहीं आपियों को मूर्ख और जरीवाल को महामूर्ख कहा जाता है ...

कभी मूर्ख आपियों ने अपने महामूर्ख बास जरीवाल के इशारे इस मुद्दे पर मोमबत्ती-मार्च निकाल कर लोगों को अप्रैल-फूल बनाने का प्रयास किया है कि जो पियक्कड़ नशे में धुत हो कर सड़क पर ऐश फरमाते हैं उनका सब कुछ क्यों लुट जाता है ? उसका जेब में रखा रुपया - पैसा सब कुछ लूट लिया जाता और वो धुत नशे में सड़क के किनारे पड़ा रहता है ...दिल्ली में ये नजारा आम है ...टैक्सी में यात्रा करने वाली लड़की यदि शाम से देर रात तक नशा नहीं कर रही होती तो दिल्ली के आम जनता की पूरी सहानुभूति उसके साथ होती। लेकिन अपराध तो अपराध है जो नहीं होना चाहिए लेकिन पुलिस काम अपराध के पहले नहीं बाद में शुरू होता है और उसने पूरी मुस्तैदी दिखते हुए अपराधी को पकड़ लिया। एक आपिया चिल्ला रहा था "...दिल्ली में महिलाएं दारू पीने के बाद भी सुरक्षित नहीं हैं ..." मैंने उससे कहा "...तो गब्बर केजरीवाल के घर जा कर हल्ला करो ..." इस पर मूर्ख आपिया सकपका गया बोला "...नहीं हम यहीं हल्ला बोलेंगे..." मैंने उससे पूछा "...क्यों ??? अपराधी तो पकड़ा जा चुका है ...! " मूर्ख आपिया बोला "...तो क्या हुआ हमे लगता है जो कुछ हुआ उसके लिए सरकार दोषी है ..." मैंने कहा "...अगर सरकार दोषी है तो इसके लिए महामूर्ख केजरीवाल को फांसी पर लटका देना चाहिए ..." ये सुनते ही मूर्ख आपिया भड़क गया और गुस्से में बोला "...दोष है सरकार का तो फांसी पर केजरीवाल क्यों लटकेंगे ...?" मैंने आराम से उत्तर देते हुए कहा "... क्योंकि कभी केजरीवाल पियक्कड़ों की लूट के खिलाफ कभी आवाज नहीं उठाई और इसीलिए इस तरह के अपराध बढ़ रहे हैं जिसके लिए सीधे महामूर्ख केजरीवाल जिम्मेदार है ...समझे मूर्खाधिराज ..." इसपर वो मूर्ख आपिया ज़ोर-ज़ोर से अपना कपार खजुआने लगा बहुत देर तक खजुआने के बाद सफाई देते हुए बोला "...कॉंग्रेस वाले भी तो धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं ..." मैंने उसका उत्तर देते हुए कहा "...जैसा गुरु वैसा चेला ...पीए दारू मारे ढेला ..." आपिया फिर कनफ्यूज़ हो गया और मुझसे पूछा "...आपके कहने का क्या मतलब है ...?" मैंने उसका उत्तर देते हुए कहा "...मतलब यही कि दारू में ढेलाबाजी और नारेबाजी दोनों का कोई मतलब नहीं ...?" "...लेकिन इस घटना के लिए सरकार जिम्मेदार है ..." उसने फिर वही रट लगाई तो मैंने उसे डांटते हुए कहा "...तो क्या टैक्सी में उसके साथ कोई पुलिस वाला आता या होममिनिस्टर को आना चाहिए था मूर्ख कहीं के ...?  इस पर मूर्ख आपिया टोपी उतार कर कपार खजुआते हुए चुप हो गया....    

Sunday, 7 December 2014

बकलोल धनिया को 3 लाख , 15 लाख पुदीना को.... 

फोर्ब्स ने अभी कुछ दिन पहले केजरीवाल छाप बहुत बुद्धिमान और खाँटी भाई छाप बहुत अमीर लोगों के लिए अजीब जा नायाब तोहफा देने की पेशकश की। ये उसका दूसरा प्रयास था लूट का पैसा हराम में हजम करने वालों के लिए। अब देखिये न जैसी उसने कहा 77.18 बिल्लियन डालर के मालिक बिल गेटेस के पास इतनी संपत्ति है कि वो रोज 3 फेरारी कार 273 साल तक खरीद सकते हैं तो केजरीवाल और बकलोल बबुआ छाप उसके मैनेजर बिल गेट्स को डांडा करने करने के लिए फेरारी कंपनी के मालिक को उकसाने लगे... कहने लगे "...जैसी मांग केजरीवाल, बकलोल बबुआ और बहुत से समाजवादी छाप बुद्धिमान सेकुलरिस्ट अपने खाते में काले-धन से  3 या 15 लाख की मांग कर रहे हैं उसी आधार पर बिल गेट्स को ऐसा करना चाहिये वो रोज तीन फेरारी कार खरीदें ...".इसी फोर्ब्स ने कुछ साल पहले बिल गेट्स के बारे में कहा था कि यदि गेट्स के जेब से 100 डालर गिर जाए तो वो उठाएंगे नहीं क्योंकि उठाने में जितना समय वो बरबाद करेंगे उतने समय में उनका 300 डालर का नुकसान हो जाएगा जो उन्हें पसंद नहीं। बस क्या था काँग्रेस के बड़े-बड़े नेता, केजरीवाल छाप बहुत बुद्धिमान, सेकुलरिस्ट  गेट्स के पीछे ही पड़े हुए हैं कि कब उनकी जेब से हर सेकेंड 100-100 डालर गिरेगे और वो उठाएंगे नहीं ठीक उसी तर्ज पर ये पुदीना पांड़े, धनिया नरेश आदि छाप नकारा मीडिया वाले और बकलोल बबुआ छाप सेकुलरिस्ट मोदी के पीछे काले-धन के नाम पर पड़े हैं। पता नहीं कौन बुद्धिमान है और कौन बकलोल फेरारी वाले वाले बकलोल हैं या केजरीवाल-कोग्रेस-समाजवादी सेकुलरिस्ट या वो सब अमेरिकी जिनहोने कभी ये उम्मीद नहीं की कि बिल गेट्स अपनी जेब से हर सेकेंड 100-100 डालर गिराते फिरेंगे। सुना है कुछ सेकुलरिस्ट धनिया नरेश, पुदीना पांडे आदि साथ इटली की यात्रा पर जाने वाले हैं फेरारी कंपनी को फायदा पाहुचने के निमित्त ट्रेनिंग देने के लिए कि गेट्स को वो 3 कार रोज खरीदने के लिए मजबूर कर सके। केजरीवाल अमेरिका गए हैं सुना है भगवत मान सिंह के ट्राफिक जाम जिसमे उमड़ने वाली भीड़ मोदी के रैली में आने वाली भीड़ से भी ज्यादा होती है में ओबामा नहीं थे जिससे केजरीवाल को बहुत निराशा हुई है लिहाजा वो गेट्स के सामने भी फेरारी कंपनी की मौलिक जरूरत को नहीं रख पाएंगे भले ही कंपनी इसकी मांग न करती हो। लेकिन भारत में उनके जैसे बहुत बुद्धिमान कतरों की कमी नहीं जिनकी नजर हमेशा बिल गेट्स की जेब से 100 डालर की उम्मीद बनी रहती है और मौका मिलते ही ...पुदीना पांदे, धनिया नरेश आदि छाप मीडिया के लोग और नेता जी क्या करते हैं सबको पता है ...  

Friday, 5 December 2014

बानर नचावे भालू - फेके पैसा भौकालू

गब्बर का धनभोज ...रामनगर की तर्ज पर दिल्लीवालों ने जब गब्बर केजरीवाल के आगे दाना डालना बंद कर दिया ...लेकिन फिर भी गब्बर ने 50 लाख दिखाया ये कहते हुए कि भोज खाने वालों ने न्योता में दिया है ....खैर खाना कौन खाया कहाँ से आया था इन सबका पता आपिया वैबसाइट पर नहीं मिला तो मेरा माथा ठनका तो मैने जांच शुरू की तो  एक समर्पित आपिया कर्मचारी से पता चला कि ये 50 लाख दरअसल वो पैसे हैं जो आपिया पार्टी के टिकट बेच कर जुटाए गए थे जिसे दिखाना मुश्किल हो रहा था लिहाजा गब्बर केजरीवाल ने धनभोज के माध्यम से उस काले धन को सफ़ेद बना डाला...मतलब काले धन के बावजूद अब टिकट लेने वालों के भी लाले पड़ने लगे हैं गब्बर केजरीवाल को ... तो गब्बर डूबे जी से मिलने डुबई के लिए उड़ गए...बिजनेस क्लास में गए हैं ...मैंने डूबे जी से पूछा तो कहने लगे "...मुझे कुत्ता थोड़े न काटा है कि मैं केजरीवाल को बुलाउंगा वो भी बिजनेस क्लास का टिकट पर ..." खैर मौज-मस्ती कराने में भगवत जी का क्या काम ? उन्हीं के नाम पर गब्बर बड़ा हाथ मारने के फिराक में है ... ठीक उसी तर्ज पर "...नाच मेरी बुलबुल कि पैसा मिलेगा ..." गब्बर केजरीवाल के नाम पर तो जो मिल रहा है उससे गब्बर के जूते का फीता भी नहीं मिलेगा ..एक आपिया बता रहा था कि केजरीवाल का न्यूयार्क में भी बहुत बड़ा कार्यक्रम है ...तो मैंने पूछा "...क्यों भारत में तमाशा दिखाने के लिए आँगन टेढ़ा है क्या ..." इस पर बेचारा आपिया खिसिया गया और लगा खंभा नोचने खैर ...उसी मे से एक से मैने पूछा भगवत बाबू का क्या काम है ? तो आपिए कुछ बोल नहीं पा रहे थे तभी किसी ने कहा को वो हमारे सांसद हैं ... तो मैंने कहा जानकारी देने के लिए धन्यवाद वैसे मैंने सुना है कि कहते फिरते हैं हैं जिनती भीड़ मोदी को सुनने नहीं आती उससे कई गुना तो रेड लाइट पर भगवत बाबू को देखने चले आते हैं ... इस पर आपिया खुश होकर बोला "...हाँ ये सत्य है ..." तो मैंने पूछा "...तो क्या  रेड लाइट की भीड़ में ओबामा नहीं थे क्या जो भगवत बाबू न्यूयार्क गए है ओबामा को अपना ..." इस पर आपिए मुझे घूरने लगे तो फुट लिया वहाँ से ...आपिए कापार खजुआते ही रह गए ....

Tuesday, 2 December 2014

मार दुलत्ती मार ....

मौका मिलते ही अपने गुरु को पूरे गुरूर से लतियाने की जो परम्परा केजरीवाल ने शुरू की वो अपने आप अनोखा इसलिए है क्योंकि गुरु को लतियाने की परम्परा प्रकृति में अन्यन्त्र कहीं भी नहीं दिखती सभी 87 लाख जीव गुरु का पूरा-पूरा सम्मान करते हैं सिवाय केजरीवाल छाप बकलोल बबुआ की बिरादरी के। देखिये न जैसे ही मेरे लेख से पता चला कि केजरीवाल की विश्वसनीयता खरतनक स्तर तक घट चुकी है और आपियों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है तो झट से बकलोल बबुआ ठीक अपने गुरु की तर्ज पर ठीक गुरु को को ही लतियाने निकाल पड़ा मजबूरी है बकलोल बबुआ को किसी भी स्थिति में दिल्ली की सत्ता चाहिए ताकि इज्जत बची रहे। बड़ी अजीब सी स्थिति है और वाकई मुझे समझ में नही आता कि आखिर क्या कारण है ये बिरादरी अपने गुरुओं को कायदे से लतियाने के लिए "गांधी जी" से आशीर्वाद क्यों मांगती है ? केजरीवाल अपने गुरु को लतियाने से पहले गांधी जी की मूर्ति के सामने खड़े हो कर पूरा-पूरा आशीर्वाद लिया था पूरे दल बल के साथ ठीक उससे तर्ज पर बकलोल बबुआ भी संसद परिसर में ही "गांधी जी" के आशीर्वाद लिया ताकि अपने गुरु केजरीवाल को कायदे से लतिया कर दिल्ली में कम से कम नंबर 2 पर आ सकें। बकलोल बबुआ के इस हरकत पर लतियाने वाली टिप्पणी की तो एक बकलोल आपिया बहुत गुस्से मुझे नसीहत देते हुए बोला "...राहुल जी का ये मोदी सरकार पर हमला है ..." मैंने थोड़ा मज़ाकिया आश्चर्य लहजे में कहा "...बहुत अच्छे ... ये भी प्रकृति की एक अद्भुत घटना है जब एक बुरी तरह घायल गीदड़ ठीक उसी शेर पर हमला कर रहा है जिसने हाथपैर तोड़ के उसे अधमरा करके छोड़ा है ..." इसपर बकलोल आपिया सकपका गया और पूछा "...तो आपके हिसाब से क्या है ..." मैंने फिर मज़ाकिया लहजे में कहा "...दिल्ली में केजरीवाल को नंबर तीन पर खसकाने की बकलोल बबुआ की रणनीति है ..." ये सुनते ही मूर्ख आपिया बौखला गया और पूछा "...आपका मतलब है हम दिल्ली मे सत्ता में नहीं आएंगे ...?" मैंने उससे आराम से कहा "...बकलोल बबुआ तो यही चाहता हैं अपने गुरु को लतियाने के बाद केवल केजरीवाल की विजय हो आपियों को कम से कम एक सीट तो मिल जाए ..." ये सुनते ही बकलोल आपिया अपना कापार ज़ोर-ज़ोर से खजुआने लगा ....तभी पास में एक खाँटी भाई कोंग्रेसी भी आ गए बोले "...केजरीवाल से नहीं हमारा संघर्ष नहीं है ...हम मोदी से लड़ रहे हैं ...." मैंने कहा इसीलिए "...आपके उपाध्यक्ष जी अपने गुरू  केजारीवाल को लतिया के 28 सीटे जीतने का ख्वाब देख रहे हैं कि नहीं ... ठीक वैसे ही जैसे केजरीवाल अपने गुरु को लतिया के 28 सीटें जीत लिए थी ...." खाँटी भाई और बकलोल आपिया दोनो एक दूसरे को घूर रहे थे ......      

Monday, 1 December 2014

केजरी का जायका-रा - कौआ बोले कांव

कोग्रेसी युवराज यानी बकलोल बबुआ केजरीवाल को अपना गुरु मानते हैं तो जाहिर है कुछ न कुछ तो होगा ही। एक कहावत है जितनी जरूरत चेला को गुरु की नहीं होती उससे ज्यादा कहीं जरूरत गुरु को योग्य चेले की होती है। कमाल देखिये बकलोल बबुआ काँग्रेस के लिए सरदर्द बना हुआ है ठीक वैसे ही केजरीवाल भी अपिया पार्टी के सरदर्द बन गए है। आपिया पार्टी के स्वनामधान्य विश्व के सबसे बुद्धिमान प्रोफेसर, चिंतक और विचारक भी ये मानते हैं कि वास्तव में केजरीवाल की विश्वसनीयता लगातार घटती जा रही है लोकप्रियता घटना उतना बुरा नहीं है लेकिन विश्वसनीयता का घटना  बेहद खतरनाक है। लेकिन बकलोल बबुआ की तर्ज पर कोई ये बात कहने को तैयार नहीं था लिहाजा केजरीवाल औकात दिखाने के लिए पिछली बार की तर्ज पर धन-भोज का आयोजन कर डाला केजरीवाल धन-भोज से पहले कहते फिर रहे थे कि कम से कम 5 करोड़ तो उगाह ही लेंगे लेकिन मिले सिर्फ 50 लाख  वो भी फीस 20 हजार रखने बाद जबकि पिछली बार सिर्फ एक ही धन-भीज में 90 लाख मिल गए थे और फीस भी केवल 10 हजार थी। बेंकेट हाल में आने वाले लोग जब पर्याप्त संख्या में नहीं आ पाए तो आपियों से भरी संख्या दिखाने की कोशिश की गई फिर भी हाल भरा हुआ नहीं था तो वेटरों को टोपी ओढ़ाकर कुर्सी पर बैठाया दिया गया और फोटो खीचा गया । सवाल ये उठता है कि जब संख्या पूरी थी और हाल भरा हुआ था तो धन उगाही भी 5 करोड़ से ज्यादा होनी चाहिए थी। इस दुर्घटना ने आपिया पार्टी की कार्यकारिणी  को सकते में डाल दिया है। आपिया पार्टी के सलीम चचा के बहुत करीबी बता रहे थे कि उनके साथ बहुत से लोगों ने केजरीवाल से कई बार आपिया पार्टी छोडने की इच्छा जाहिर की लेकिन केजरीवाल हैं कि मानने को तैयार नहीं हैं। पहले कई बार इस बात की चर्चा थी कि केजरीवाल को सीएम पद का उम्मीदवार नहीं बनना चाहिए लेकिन केजरीवाल को किसी भी कीमत पर मुख्यमंत्री पद की कुर्सी चाहिए लिहाजा तानाशाही वाले अंदाज में केजरीवाल इस आवाज को बेरहमी से दबा दिया लेकिन कल के धन-भोज दुर्घटना के बाद फिर इस हवा को ज़ोर मिल गया कि दिल्ली का मुख्यमंत्री केजरीवाल के अलावा किसी और को घोषित करना चाहिए यदि आप पार्टी का वजूद बचाना है तो ...देखते हैं केजरीवाल किसी और को CM पद का उम्मीदवार घोषित करते हैं या तानाशाही से इस आवाज को दबा देते हैं ...वैसे आपिया पार्टी के एक अदना कार्यकर्ता से लेकर चोटी के आपिया नेता भी ये खुल कर ये मानने लगे हैं कि केजरीवाल आप पार्टी के लिए बकलोल बबुआ की तर्ज पर बोझ बनते जा रहे हैं बड़ी ईमानदारी से ...विश्वसनीयता घटने की रफ्तार यही रही तो 10-12 सीट भी मिलना मुश्किल है ...