Wednesday, 24 September 2014

चीनी बुद्धि में अमंगल ...

आज मंगल यान की कलम से भारतीय वैज्ञानिकों ने कमाल का अद्भुत नया और बेहद सफल इतिहास लिखा। इस इतिहास की इबारत ऐसी है कि चीन और अमेरिका जैसे खुद को शेर कहने वाले भारत को सवा शेर मानने ही लगे। क्या मजेदार पल होगा जब कल भारत के प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र भाई भाई मोदी अमेरिका से हाथ मिलाएंगे। हमारा हाथ बिलकुल मंगल का होगा लेकिन अमेरिका के हाथ मे 7 - 7 चोट के निशान जिसे ठीक वही मंगल ने दिये जिसने भारतीय वैज्ञानिकों का पालक पावड़े बिछाए जैसे इंतजार कर रहा था। मंगल यान की सफलता ऐसी सफलता है जिसने भारत के लिए अमेरिका जैसों के लिए सोच हमेशा के लिए बदल देने के लिए पर्याप्त है। अभी तो चीन वैसे ही परेशान था जापान-भारत-अमेरिका के बेहद मजबूत अक्ष से इसीलिए वो परेशान है और किसी भी कीमत पर सीमा पर स्थानीय युद्ध जैसी स्थिति पैदा करना चाहता है ताकि प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा मे खलल डाला जा सके। उसे पता है कि कारगिल मे पाकिस्तान से युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने अमेरिका की यात्रा रद्द कर दी थी। कहीं न कहीं चीन वैसी ही स्थिति बनाना चाहता है ताकि मोदी जी को अमेरिका यात्रा रद्द करनी पड़े लेकिन चीन की दाल कहीं से भी गलती दिखाई नहीं दे रही है। वैसे भी चीन पहले 100 लाख करोड़ के निवेश का वादा किया था लेकिन किया 20 लाख करोड़ वो ऐसे सैक्टर में कर रहा है जिसमे उसे उम्मीद है भारत का भ्रष्टाचार उसे सफल नहीं होने देगा। शायद उसे ये पता नहीं है कॉंग्रेस जैसे अब तेल लेने जा चुके हैं जल्दी ही निजाम सहित जेल मे तेल पेरेंगे लिहाजा भ्रष्टाचार तो अब गुजरे जमाने की बात है। मंगल की सफलता ने चीन को जैसे कोमा में ही भेजने का रास्ता दिखा दिया है हालाँ चीनी मीडिया अभी इस मुद्दे पर चुप ही है लेकिन उम्मीद है जब इस विषय कुछ बकेंगे तो वही बकेगे जो भारत के लिए समस्या परक ही होगा। लिहाजा अब चीन किसी भी स्थिति में भारत को परोक्ष रूप से उलझाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगा ये तय है। अतः भारत बेहद चौकन्ना रहने की जरूरत है पाकिस्तानी आतंकवादियों से क्यों कि भारत की शांति में जितना अधिक खलल पड़ेगा निवेश पर उतना ही अधिक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और अब मंगल यान की सफलता ने शोध और विकास के लिए बहुत बड़ी संभावनाओं के द्वार खोल दिये हैं अगर ये हो गया तो आने वाले निकट भविष्य में विश्व में केवल दो धुव दिखेंगे जापान और भारत और दोनों ही चीन के कट्टर दुश्मन। अमेरिका के मजबूरी यही है कि उसे दोनों के साथ जुड़कर रहना ही होगा नहीं तो मुसीबत ही खड़ी हो जाएगी। खबर तो यहाँ तक मिलने शुरू हो चुके हैं एयरबस जैसी कंपनी भी भारत में प्रत्यक्ष निवेश की संभावनाएं शिद्दत से तलाश रही है बोइंग लॉकहीड मार्टिन जैसे कंपनियों की बात छोड़ दीजिये। अगर ऐसा हुआ तो चीन खड़े - खड़े दिवालिया होने की कगार पर खड़ा होगा क्योंकि ऐसे कंपनियों के लिए आपूर्ति भी इस कंपनी के प्रत्यक्ष रोजगार की तुलना कई गुना और उच्चतकनीकि वाला होते हैं लिहाजा रोजगार और उत्पाद के लिए बहुत बड़ी संभावनाओं का सृजन इसे आप ऐसे समझिए कि आपकी कार का अलाय व्हील टाइटेनियम धातु का बना होता है जो सीधे-सीधे हवाई जहाज की टेक्नोलोजी से लिया गया है। अतः चीन तो किसी भी कीमत पर चुप नहीं बैठेगा उल्टे भारत के लिए नई मुसीबत खड़ी करने की पूरी कोशिश करेगा। एक बार भारतीय वैज्ञानिकों को कोटि-कोटि नमन और धन्यवाद हमें सपने देखने के का अवसर प्रदान केरने के लिए साथ ही प्रधानमंत्री मोदी जी को भी बहुत शुभकामनाएँ अमेरिका यात्रा के लिए ....     

No comments:

Post a Comment