Thursday, 25 September 2014

चीन तो गया काम से ...

"मेक इन इंडिया" समारोह की जबर्दस्त सफलता के बाद भारत के चोटी उद्योगपतियों में जबर्दस्त उत्साह है। इस समारोह की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चीन को भी अपने कर नीति में बदलाव करने की जबर्दस्त जरूरत पड़ गई। मैंने कल अपने लेख में कहा था मंगल की सफलता चीन को कोमा में जाने का रास्ता प्रशस्त करता है जिसका उपाय वो मात्र 24 घंटों के भीतर ही करना पड़ा "मेड इन चाइना" की घोषणा करके ठीक प्रधानमंत्री मोदी जी की नकल करते हुए। अब चीन कर भी क्या सकता है उसके यहाँ मजदूरी प्रतिवर्ष 10 से 15% की दर से बढ़ रही है 2010 से अबतक 30% की वृद्धि हो चुकी है जो बहुत अधिक महंगा साबित हो रहा है लिहाजा करों में रियायत ही एक रास्ता बचा है लेकिन वो भी निवेश की मात्रा पर निर्भर है जिसे अभी तक स्पष्ट नहीं किया गया है। ये सब उत्पाद गुणवत्ता उन्नयन के निमित्त शोध और विकास को बढ़ावा देकर किया जाएगा। लेकिन समस्या फिर वहीं जस की तस तो है ही कहीं और भी गंभीर भी होती जा रही है चीन के लिए। लोगों की आय बढ्ने के साथ - साथ कीमतों में भी जबरदस्त इजाफा हो रहा है नतीजन लागत में वृद्धि लेकिन कर रियायत से वो कैसे पूरा होगा जबकि 10 से 15% वार्षिक की दर से मजदूरी मंहगी हो रही है और जब यही मजदूरी शोध और विकास में लगती है तो कई गुना हो जाती है जिसका भार सीधे ग्राहक पर पड़ता है। चीन ने रियायत की घोषणा इसलिए नहीं की है कि उसके यहाँ कंपनियों के शेयर के दाम अचानक बहुत बढ़ सकते हैं और लोग के सीधे निवेश करने की संभावना से अर्थव्यवस्था में अचानक बहुत अधिक उछाल आ सकता है जिसकी कोई निश्चितता नहीं है। इसका सीधा परिणाम ये होगा कि निश्चित समय में यदि निवेशक को फायदा नहीं मिला तो चीन पर से निवेशकों का भरोसा सीधे डगमगा जाएगा और फिर अचानक दबाव से अर्थव्यवस्था धराशायी। वास्तव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी जीनियस हैं उन्होने चीन की इसी दुखती रग पर सीधा प्रहार ये कहते हुए किया कि हम निवेशकों का पैसा डूबने नहीं देंगे ...इसे कहते हैं देसी विद्वता जिसके आगे चीन की अर्थव्यवस्था का चरमराना लगभग तय है। मोदी जी की तरह चीन कभी अपने निवेशकों को ये भरोसा नहीं दे सकता कारण जनसंख्या पर कठोर नियंत्रण जिसके कारण युवा वर्ग की भारी कमी जो सीधे बाजार को प्रभावित करता है। भारत में चीन की तुलना में दोगुना युवा वर्ग है और जो प्रवीण भी है। यही कारण है चीन इस समय अपना आपा खोता जा रहा है वो किसी भी कीमत पर एशिया से अपना वर्चस्व कम नहीं होने देना चाहता। आज इंडियन मुजाहिदीन की धमकी और आईएसआईएस का भारत का लक्ष्य बनाना कोई महज संयोग नहीं है इसके पीछे सीधे-सीधे चीन का हाथ देखिये वो। वो हर कीमत पर भारत को अस्थिर करना चाहता है पाकिस्तान के माध्यम से और आतंकवाद के माध्यम से भी। अभी चुनाव से पहले भी ऐसी चर्चा थी कि केजरीवाल जैसे लोगों को भी चीन बहुत बड़े स्तर पर सहयोग कर रहा था। इसके पहले पूर्वोत्तर, नक्सलवादियों आदि के माधायम से भारत को लंबे समय से अस्थिर करने का प्रयास करता रहा है लेकिन मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बात उनपर काफी हद काबू पा लिया गया है लिहाजा सीमा पर परेशानी से और आतंकवाद के माध्यम से भी भारत को परेशान करेगा ही।    

Wednesday, 24 September 2014

चीनी बुद्धि में अमंगल ...

आज मंगल यान की कलम से भारतीय वैज्ञानिकों ने कमाल का अद्भुत नया और बेहद सफल इतिहास लिखा। इस इतिहास की इबारत ऐसी है कि चीन और अमेरिका जैसे खुद को शेर कहने वाले भारत को सवा शेर मानने ही लगे। क्या मजेदार पल होगा जब कल भारत के प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र भाई भाई मोदी अमेरिका से हाथ मिलाएंगे। हमारा हाथ बिलकुल मंगल का होगा लेकिन अमेरिका के हाथ मे 7 - 7 चोट के निशान जिसे ठीक वही मंगल ने दिये जिसने भारतीय वैज्ञानिकों का पालक पावड़े बिछाए जैसे इंतजार कर रहा था। मंगल यान की सफलता ऐसी सफलता है जिसने भारत के लिए अमेरिका जैसों के लिए सोच हमेशा के लिए बदल देने के लिए पर्याप्त है। अभी तो चीन वैसे ही परेशान था जापान-भारत-अमेरिका के बेहद मजबूत अक्ष से इसीलिए वो परेशान है और किसी भी कीमत पर सीमा पर स्थानीय युद्ध जैसी स्थिति पैदा करना चाहता है ताकि प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा मे खलल डाला जा सके। उसे पता है कि कारगिल मे पाकिस्तान से युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने अमेरिका की यात्रा रद्द कर दी थी। कहीं न कहीं चीन वैसी ही स्थिति बनाना चाहता है ताकि मोदी जी को अमेरिका यात्रा रद्द करनी पड़े लेकिन चीन की दाल कहीं से भी गलती दिखाई नहीं दे रही है। वैसे भी चीन पहले 100 लाख करोड़ के निवेश का वादा किया था लेकिन किया 20 लाख करोड़ वो ऐसे सैक्टर में कर रहा है जिसमे उसे उम्मीद है भारत का भ्रष्टाचार उसे सफल नहीं होने देगा। शायद उसे ये पता नहीं है कॉंग्रेस जैसे अब तेल लेने जा चुके हैं जल्दी ही निजाम सहित जेल मे तेल पेरेंगे लिहाजा भ्रष्टाचार तो अब गुजरे जमाने की बात है। मंगल की सफलता ने चीन को जैसे कोमा में ही भेजने का रास्ता दिखा दिया है हालाँ चीनी मीडिया अभी इस मुद्दे पर चुप ही है लेकिन उम्मीद है जब इस विषय कुछ बकेंगे तो वही बकेगे जो भारत के लिए समस्या परक ही होगा। लिहाजा अब चीन किसी भी स्थिति में भारत को परोक्ष रूप से उलझाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगा ये तय है। अतः भारत बेहद चौकन्ना रहने की जरूरत है पाकिस्तानी आतंकवादियों से क्यों कि भारत की शांति में जितना अधिक खलल पड़ेगा निवेश पर उतना ही अधिक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और अब मंगल यान की सफलता ने शोध और विकास के लिए बहुत बड़ी संभावनाओं के द्वार खोल दिये हैं अगर ये हो गया तो आने वाले निकट भविष्य में विश्व में केवल दो धुव दिखेंगे जापान और भारत और दोनों ही चीन के कट्टर दुश्मन। अमेरिका के मजबूरी यही है कि उसे दोनों के साथ जुड़कर रहना ही होगा नहीं तो मुसीबत ही खड़ी हो जाएगी। खबर तो यहाँ तक मिलने शुरू हो चुके हैं एयरबस जैसी कंपनी भी भारत में प्रत्यक्ष निवेश की संभावनाएं शिद्दत से तलाश रही है बोइंग लॉकहीड मार्टिन जैसे कंपनियों की बात छोड़ दीजिये। अगर ऐसा हुआ तो चीन खड़े - खड़े दिवालिया होने की कगार पर खड़ा होगा क्योंकि ऐसे कंपनियों के लिए आपूर्ति भी इस कंपनी के प्रत्यक्ष रोजगार की तुलना कई गुना और उच्चतकनीकि वाला होते हैं लिहाजा रोजगार और उत्पाद के लिए बहुत बड़ी संभावनाओं का सृजन इसे आप ऐसे समझिए कि आपकी कार का अलाय व्हील टाइटेनियम धातु का बना होता है जो सीधे-सीधे हवाई जहाज की टेक्नोलोजी से लिया गया है। अतः चीन तो किसी भी कीमत पर चुप नहीं बैठेगा उल्टे भारत के लिए नई मुसीबत खड़ी करने की पूरी कोशिश करेगा। एक बार भारतीय वैज्ञानिकों को कोटि-कोटि नमन और धन्यवाद हमें सपने देखने के का अवसर प्रदान केरने के लिए साथ ही प्रधानमंत्री मोदी जी को भी बहुत शुभकामनाएँ अमेरिका यात्रा के लिए ....