Monday, 11 August 2014

मन चंगा तो....पटना में दरभंगा ...

पटना का घटना आ हाजीपुर में सटना...तीजन बाई ने अपनी पंडवानी गायकी से तहलका मचा दिया था...वैसा ही कुछ नमूना जीतन राम मांझी पेश करने फिराक में हैं ...वैसे मांझी की करामात है की दोनों टोपोरियात के सिक-उल्लर उस्ताद टोपी ओढ़ने के बावजूद गंगा पर कर ही लिए...मजे से दोनों आपस में गर्दन भी मिले लेकिन पता नहीं किसी ने जीतन राम माझी को धन्यवाद दिया या नहीं...लेकिन दोनो के दोनों बड़े खुश थे आज। एक राजद्दू नेता चिल्ला रहे थे "...देखियेगा बिहार में सेकुलर ताकतों की ही जीत होगी ..." मैंने इस पर उल्टे सवाल किया "...मांझी साहब मजे हुए नहीं हैं क्या...." राजद्दू नेता उत्तर देते हुए बोले "...वो महादलित हैं आपको पता होना चाहिए..." मैंने उनकी बात बीच में ही काटते हुए टोका "...मतलब अब महाभारत मांझी गाएँगे ..." राजद्दू नेता थोड़ा गुस्से में आ गए बोले  "...आपको क्या वो गवनिया लगते हैं ..." मैंने शांत स्वभाव से उत्तर देते हुए कहा "...नहीं नहीं गवनियाँ नहीं ...वो हाजीपुर के सटना में उनका नाम तारीफ में किसी ने नहीं लिया न इसीलिए ..." राजद्दू नेता फिर उखड़ गए और गुस्से में बोले "...बिहार की जनता सब देख रहा है ..." मैंने जवाब मे प्रतिप्रश्न पूछा "...क्या ये चरवाहा विश्वविद्यालय मे हुए शोध का निष्कर्ष है ...? " राजद्दू नेता से रहा नहीं गया वो उसी खीज में बोले "...यहाँ अब मौसम वैज्ञानिकों को दिन में तारे दिखेंगे ..." मैंने उनके इस वक्तव्य का मज़ाक उड़ाते हुए कहा "...सबको अपने जैसा ही समझते हैं क्या ..." राजद्दू नेता बोले "...सब लोग हमारे जैसा कहे नहीं हैं ..." मैंने उनका उत्तर देते हुए कहा "...क्योंकि किसी को जंगल प्यारा नहीं है..." राजद्दू नेता को शायद कुछ समझ में नहीं आया तो पूछा "...आपके कहने का क्या मतलब है ...?" मैंने सीधा और सपाट उत्तर दिया "...उड़ि - उड़ि जहाज का पंछी पुनि - पुनि जहाज पर आवे ..." शायद ये राजद्दू नेता को समझ में नहीं आया बोले "...आप साफ - साफ कहिए ..." मैंने उन्हें स्पष्ट करते हुए कहा "...नितीश नाम का पंछी पुनः अपने जहाज पर लौट आया ..." राजद्दू नेता बोले "...वो तो होना ही था ..." मैंने कहा "...लेकिन ये जहाज तो जंगल मे खड़ा है ..." राजद्दू नेता फिर अपना आपा खोने लगे बोले "...आपको जंगल-झाड़ी के अलावा कुछ दिखाता नहीं ..." मैंने कहा "...उसका शौक तो आपके दुःशासन सारी सुशासन बाबू तो कम लेकिन लालू के  चरवाहा विश्वविद्यालय के छात्र कुछ ज्यादा ही पालते हैं ..." राजद्दू नेता बोले "...अब सब ठीक हो गया है ..." मैंने उन्हें उत्तर में कहा "...हाँ इसीलिए अब नीतीश बाबू और लालू बाबू को गोदी-गोदी खेलने में कोई दिक्कत नहीं है भले ही मौसम कितना ही खराब क्यों न हो ..." राजद्दू नेता बोले "...ये तो वक्त ही बताएगा ..." मैंने कहा "...वक्त बताएगा नहीं बता रहा है ...आपके लिए मोदी जी ने मौसम इतना खराब कर दिया है कि जीतन राम मांझी को लाना पड़ा ...नाम की व्यख्या ही पर्याप्त है ...लेकिन केवल व्याख्या से क्या होता है जब आख्या ही ढ़ोल पीट रही हो ...राजद्दू नेता को फिर कुछ समझ मे नहीं आया शायद...वो कुछ बोल नहीं रहे थे ... 

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