Saturday, 16 August 2014

पाले जीजी जंजाल... लटके खाँटी झंखाड़ पर...

आज कल गदहे भी ऊंचे-ऊंचे झंखाड़ पुलुई पर चढ़ कर हवा का रूख भापने की कोशिश कर रहे हैं ...ये सब किसके निर्देशन में हो रहा है कहने की जरूरत नहीं। कुछ गधे चने की झाड़ जैसे झंखाड़ पर चढ़ भी गए और जब वाकई उन्होने हवा का रूख भाँप ही लिया तो उन्हें अनुशासन के नाम पर गधे के पिछले दोनों पैरों को बांध कर दूसरे गधे से दुलत्ती मरवाई गई फिर अधमरा करके छोड़ दिया गया। लेकिन मुसीबत ये है झाड़ पर चढ़ना भी है, गिरना भी है और वही देखना है जो दिखता ही नहीं खाँटी भाईयों के गैंग में यही सब चलता है राजमा-ता के नाम में "ता" जोड़कर टल्ली पीटनी ही है लेकिन अब टल्ली की आवाज भी आनी ही बंद हो चुकी है जो बहुत बड़ी मुसीबत है तब जीजी ने टल्ली की आवाज सुनाने का बीड़ा उठाया है। कहा जा रहा है कि ये खाँटी भाइयों का "ट्रम्प कार्ड" है जो अब तब तक पता नहीं किस "ट्रंक यार्ड" में इस "ट्रम्प कार्ड" तेल सोखनी का काम चलाया जा रहा था। लेकिन जीजी ने तेल सोखनी का काम छोड़ कर जंजाल पालने की ज़िम्मेदारी उठा रही हैं। एक खाँटी भाई कांग्रेसी जीजी के नाम पर अपना गाल बजते हुए कह रहे थे "...अब तो हम सत्ता में जरूर वापसी करेंगे ..."  मैंने चुटकी लेते हुए पूछा "...क्यों कचौड़ी से तेल कुछ ज्यादा सोख लिए हैं क्या...?" खाँटी भाई इस पर भन्ना गए बोले "...कचौड़ी खाने के लिए होती है उस पर बैठ के तेल सोखने के लिए नहीं ..." मैंने फिर सवाल दागा "...तो काहें जीजी को परेशान कर रहे हैं ...?" खाँटी भाई बोले "...हम कहाँ ऐसा कर रहे हैं ...वो तो खुद ही ..." मैंने बीच में बात काटते हुए कहा "...नहीं चवन्नी को अठन्नी की तरह आप ही लोग उछाल रहे हैं ..." खाँटी भाई भड़क गए बोले "...वो लोग चवन्नी अठन्नी नहीं हैं ..." मैंने आराम से कहा "...यही तो मेरा भी कहना है चवन्नी को तेल में डुबा कर उछालने से उसकी औकात नहीं बढ़ती ...." खाँटी भाई को कुछ समझ में नहीं आया तो पूछा "...आपके कहने का मतलब क्या है ..." मैंने उनको उत्तर देते हुए कहा "...लैला पहलवान के भरोसे अब कौन सी कुश्ती जीतेंगे ...?" खाँटी भाई का गुस्सा भड़क रहा था उसी गुस्से मे उन्होने मुझसे पूछा "...आप साफ-साफ कहिए जो भी आपको कहना है ..." मैंने साफ-साफ कहा "...एक पहलवान के भरोसे 44 के आंकड़े की झाड़ी पर अटक गए ...कहीं आगे कप्तानी बदली तो कहीं आपिया का दस्तूर न हो जाए ..." खाँटी भाई बोले "...हम आपिया नहीं हैं ..." मैंने कहा "...जैसे आपका जंजाल जीजी को खाए जा रहा है उससे तो ..." खाँटी भाई बोले "...बोलिए बोलिए उससे तो ...का क्या मतलब ...?" मैंने कहा "...जब जीजाजी का तोप अब चूहे के बिल में भी फायर करने लायक नहीं बचा...जीजाजी समेत बाकी लोग का भी कचहरी में कचूमर निकल ही रहा है तो जीजी कैसे ताकत का आशीर्वाद बरसाएंगी खाँटी भाई लोगों पर  ..." खाँटी भाई बोलते बोलते रूंआसे होने लगे तो मैंने विदा ले लिया ....           

Friday, 15 August 2014

जय हो .....

आज लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी का ओजस्वी, तेजस्वी और उत्साहपूर्ण सम्बोधन सुन के ऐसा लगा जैसे माँ भारती साक्षात अपने वीर पुत्रों का आह्वान करते हुए विश्वविजय के लिए प्रेरित करने लगी हो। जीवंतता ऐसा प्रस्फुटन स्वतत्न्त्र भारत में कभी देखने को नहीं मिला। युवा पूरे उत्साह से भरपूर दिख रहे थे ऐसा उत्साह का संचार इसके पहले कभी किसी ने नहीं किया जवाहर लाल नेहरू या इन्दिरा गांधी ने भी ने नहीं। कैसे कर कर पाते वो ऐसा जब मन में सिर्फ सेवा भाव के बजाय केवल शासन करने की इच्छा हो तो ! अब देखिये खाँटी भाई कोंग्रेसियों तक को जोश आ गया मोदी जी का ओजस्वी सम्बोधन सुन के ऐसे एक जोश से भरे हुए खाँटी भाई से जब मैंने पूछा तो कहने लगे "...मोदी जी को चुनावी मोड से बाहर निकालना चाहिए ..." इसपर मैंने उनसे पूछा "...भाषण सुन के आपका उत्साह इतना बढ़ गया कि फिर से चुनाव की बात कर रहे हैं अभी बहुत दिन बाकी है ..." खाँटी भाई बोले "...मोदी तो हमेशा वन स्टेप फॉरवर्ड क्यों चलते हैं... ?" मैंने कहा "..यही तो गनीमत है खाँटी भाई लोगों की कि कभी मनमोहन सिंह भाषण देते हुए गश खा कर लाल किले प्राचीर से गिरे नहीं ..." खाँटी भाई को कुछ समझ मे नहीं आया तो पूछा "...आपके कहने का मतलब क्या है ..." मैंने उनका उत्तर देते हुए कहा "...यही तो इतिहास रहा है कॉंग्रेस का कि हमेशा वन स्टेप फॉरवर्ड के चक्कर में खाँटी भाई लोग गश खा के गिर जाते रहे हैं ..." खाँटी भाई थोड़ा अपसेट हो गए बोले "...ऐसा कभी नहीं हुआ ..." मैंने उनका उत्तर देते हुए कहा "...इसीलिए तो खाँटी भाई लोगों को भ्रष्टाचार की चर्बी पीने की आदत पड़ी है कि गश खा कर गिरे नहीं ...ईमानदारी की ताकत तो है नहीं ..." खाँटी भाई उखड़ गए और गुस्से में बोले "... आपके कहने का मतलब है कि कॉंग्रेस केवल भ्रष्टाचार की ताकत पर खड़ी है ...?" मैंने उनका उत्तर देते हुए कहा "...हाँ बिल्कुल आज तो ये साबित भी हो गया ..." खाँटी भाई बोले "...क्या साबित हो गया ...?" मैंने कहा "...क्यों उत्तर अपने बकलोल बबुआ से पूछिए कि कितनी बार उसने अपने अपने प्रधानमंत्री का लिखा भाषण फाड़ -फाड़ के उसमे अपनी मनमानी की है और मनमानी भी ऐसी कि मनमोहन सिंह हमेशा 15 अगस्त के बाद पूरे साल भर बेचारे चुप ही रहते थे ..." खाँटी भाई अब रहा नहीं जा रहा था तो गुस्से मे उन्होने पूछा "...आपके कहने का मतलब उनका भाषण भी राहुल गांधी ही लिखते थे ...?" मैंने बड़े आराम से उत्तर देते हुए कहा "...लिखते ही नहीं थे भ्रष्टाचार की रोटी भी वो अपने हाथ से ही खिलते थे लेकिन खिलाने से पहले वो रोटी को भी फाड़-फाड़ के टुकड़े-टुकड़े कर देते थे ..." खाँटी भाई हताशा में बोले "...खैर जो भी मोदी जी को चुनावी मोड से बाहर निकाल ही जाना चाहिए ..." मैंने कहा "...अरे काहें घबरा रहे हैं अभी पूरे पाँच साल बाकी हैं इतना उत्साह भी ठीक नहीं ...रोज ब रोज महंगाई घटती जा रही है तो सांप्रदायिकता को भाड़े पर ले लिए उस पर भी वन स्टेप फॉरवर्ड के बजाय वापस बैक टू चूहे वाला बिल ..."   खाँटी भाई का उत्साह इतना बढ़ गया था कि अब शायद उनको अंतरात्मा की आवाज सुनाई देने लगी थी ...लिहाजा वो चुप हो गए ...         

Monday, 11 August 2014

मन चंगा तो....पटना में दरभंगा ...

पटना का घटना आ हाजीपुर में सटना...तीजन बाई ने अपनी पंडवानी गायकी से तहलका मचा दिया था...वैसा ही कुछ नमूना जीतन राम मांझी पेश करने फिराक में हैं ...वैसे मांझी की करामात है की दोनों टोपोरियात के सिक-उल्लर उस्ताद टोपी ओढ़ने के बावजूद गंगा पर कर ही लिए...मजे से दोनों आपस में गर्दन भी मिले लेकिन पता नहीं किसी ने जीतन राम माझी को धन्यवाद दिया या नहीं...लेकिन दोनो के दोनों बड़े खुश थे आज। एक राजद्दू नेता चिल्ला रहे थे "...देखियेगा बिहार में सेकुलर ताकतों की ही जीत होगी ..." मैंने इस पर उल्टे सवाल किया "...मांझी साहब मजे हुए नहीं हैं क्या...." राजद्दू नेता उत्तर देते हुए बोले "...वो महादलित हैं आपको पता होना चाहिए..." मैंने उनकी बात बीच में ही काटते हुए टोका "...मतलब अब महाभारत मांझी गाएँगे ..." राजद्दू नेता थोड़ा गुस्से में आ गए बोले  "...आपको क्या वो गवनिया लगते हैं ..." मैंने शांत स्वभाव से उत्तर देते हुए कहा "...नहीं नहीं गवनियाँ नहीं ...वो हाजीपुर के सटना में उनका नाम तारीफ में किसी ने नहीं लिया न इसीलिए ..." राजद्दू नेता फिर उखड़ गए और गुस्से में बोले "...बिहार की जनता सब देख रहा है ..." मैंने जवाब मे प्रतिप्रश्न पूछा "...क्या ये चरवाहा विश्वविद्यालय मे हुए शोध का निष्कर्ष है ...? " राजद्दू नेता से रहा नहीं गया वो उसी खीज में बोले "...यहाँ अब मौसम वैज्ञानिकों को दिन में तारे दिखेंगे ..." मैंने उनके इस वक्तव्य का मज़ाक उड़ाते हुए कहा "...सबको अपने जैसा ही समझते हैं क्या ..." राजद्दू नेता बोले "...सब लोग हमारे जैसा कहे नहीं हैं ..." मैंने उनका उत्तर देते हुए कहा "...क्योंकि किसी को जंगल प्यारा नहीं है..." राजद्दू नेता को शायद कुछ समझ में नहीं आया तो पूछा "...आपके कहने का क्या मतलब है ...?" मैंने सीधा और सपाट उत्तर दिया "...उड़ि - उड़ि जहाज का पंछी पुनि - पुनि जहाज पर आवे ..." शायद ये राजद्दू नेता को समझ में नहीं आया बोले "...आप साफ - साफ कहिए ..." मैंने उन्हें स्पष्ट करते हुए कहा "...नितीश नाम का पंछी पुनः अपने जहाज पर लौट आया ..." राजद्दू नेता बोले "...वो तो होना ही था ..." मैंने कहा "...लेकिन ये जहाज तो जंगल मे खड़ा है ..." राजद्दू नेता फिर अपना आपा खोने लगे बोले "...आपको जंगल-झाड़ी के अलावा कुछ दिखाता नहीं ..." मैंने कहा "...उसका शौक तो आपके दुःशासन सारी सुशासन बाबू तो कम लेकिन लालू के  चरवाहा विश्वविद्यालय के छात्र कुछ ज्यादा ही पालते हैं ..." राजद्दू नेता बोले "...अब सब ठीक हो गया है ..." मैंने उन्हें उत्तर में कहा "...हाँ इसीलिए अब नीतीश बाबू और लालू बाबू को गोदी-गोदी खेलने में कोई दिक्कत नहीं है भले ही मौसम कितना ही खराब क्यों न हो ..." राजद्दू नेता बोले "...ये तो वक्त ही बताएगा ..." मैंने कहा "...वक्त बताएगा नहीं बता रहा है ...आपके लिए मोदी जी ने मौसम इतना खराब कर दिया है कि जीतन राम मांझी को लाना पड़ा ...नाम की व्यख्या ही पर्याप्त है ...लेकिन केवल व्याख्या से क्या होता है जब आख्या ही ढ़ोल पीट रही हो ...राजद्दू नेता को फिर कुछ समझ मे नहीं आया शायद...वो कुछ बोल नहीं रहे थे ... 

Wednesday, 6 August 2014

"प्राण" गए पर ...जान न जाई ...

प्राण कुमार शर्मा का आज 5 अगस्त को निधन हो गया मैंने उन्हें भावभीनी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि दी मन बड़ा ही उदास था बचपन मे रंग भरने वाला वो चितेरा अब नहीं रहा। खैर ये दुनिया की रीति है कि हर कोई मरने के लिए ही पैदा हुआ है स्वीकार तो करना ही पड़ेगा लेकिन "हंस कर व्यंग मे" शायद यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी प्राण साहब को। मैंने तो मन को समझा लिया लेकिन बकलोल बबुआ जो युवराज के नाम से भी मशहूर है बेचैन हो उठा उसे इतना गुस्सा आया कि बजाय श्रद्धांजलि देने के कुएं में कूद गया और लगा ढेंचू-ढेंचू करने पीछे - पीछे सारे खाँटी भाई कोंग्रेसी भी ढेंचू-ढेंचू करने लगे। ये बहुत कम लोग जानते हैं कि प्राण कुमार शर्मा की मृत्यु 1 बजकर 44 मिनट पर हुई थी और लोग बताते हैं कि उनके जीवन के यही 44 मिनट बेहद महत्वपूर्ण थे जिसमे उनकी मृत्यु हुई। अब 44 के साथ बकलोल बबुआ यानी युवराज का क्या नाता है ये कहने की जरूरत नहीं... यकीनन युवराज भी यही चाहेगा कि ये 44 का आंकड़ा उसकी पार्टी के भी "प्राण" का जंजाल न बन जाए इसीलिए वो आज बहुत गुस्से मे था और कुएं में कूद गया। वैसे भी वो तो अभी तक प्राण कुमार शर्मा का वैसा ही फैन है जैसा 40 साल पहले हुआ करता था लेकिन आज भी वो सोचता है कि काँग्रेस पार्टी तो साबू है जैसा कि दादी जी कहानियों मे सुनाया करती थीं। लेकिन अब इसपर तो साबूदाने के पेड़ उग गए हैं जिन्हें म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) में साईकस कहा जाता है और उसके आगे गाईगांटिया जोड़ दीजिये तो "वैज्ञानिक अंधविश्वास" का वो नमूना सामने आता है कि आज इसी विज्ञान के नाते मानव जाति ही खतरे में है...वैसे साबूदाने के पेड़ का फूल कभी चड्डी नहीं पहनता तो वैसे ही बहुत से खाँटी भाई लोग जोकर की उपाधि दे चुके हैं और वही जोकर आज उन खाँटी भाई कोग्रेसियों को मोगली बन के नचा रहा है ...यकीन मानिए इस नाच का जब 44 चक्कर पूरा हो जाएगा तो सभी को मुक्ति मिल जाएगी ठीक वैसे ही जैसे कपिला पशु वाले अलवी जैसे बहुत से लोगों को मिल गई। वैसे प्राण साहब की मृत्यु 01॰44 पर हुई थी लिहाजा बकलोल बबुआ का 10.44 बजे ही फार्म मे आना शुरू हो गया था और 11.44 बजे वो कुएं मे कूद चुका था ...बहुत से लोग इसे दिखावा कह रहे हैं उनको ऐसा नहीं करना चाहिए आखिर एक बच्चे की भावना की बात है जिसका ख्याल रखा जाना चाहिए ..."प्राण कुमार शर्मा" आज भी बच्चों के उतने ही चहेते हैं जितना वे 40 साल पहले थे ...ये अच्छा हुआ कि प्राण साहब ने 5 तारीख को दुनिया से विदा लिया अगर कहीं एक दिन पहले 4 तारीख को विदा लिए होते तो आपियों को का क्या हाल होता ??? सोचिए जरा कॉंग्रेस कुमार केजरीवाल को तो प्राण साहब के मृत्युशैय्या पर ही जौहर करने नौबत आ जाती ...यकीनन मूर्ख आपिए और  महामूर्ख कॉंग्रेस कुमार केजरीवाल सकते से बाहर निकल कर चैन की सांस ले रहे हैं...लेकिन चाणक्य ने उनकी नींद ही हराम कर दी ये बोल के कि भाजपा ही दिल्ली मे सरकार बनाएगी ...साबू के कंधे पर दुनिया देखने का शौक रफूचक्कर हो गया ...वैसे अभी भी चाचा चौधरी डांडा लिए बैठे है जिसमे अभी बहुत "प्राण" बाकी है आपियों ... 

Sunday, 3 August 2014

छ्छुन्नर के चिल्लपों...तेल मारे लंगड़

One life is not enough नाम की अल्प मश-हूर किताब के जवाब में किताब लिखा जाएगा। वाकई कितना सुखद अनुभव होगा नटवर सिंह को उनकी हैसियत दिखाई जाएगी... क्यों भाई आखिर नटवर सिंह की सिर्फ यही गलती है कि उनके नाम के आगे लाल के बजाय सिंह लगा हुआ है या फिर कुछ और ? ...वैसे भी उनकी 10 जनपथ से घनिष्ठता आज भी उतना ही बड़ा रहस्य है जितनी बड़ी दुश्मनी ...खैर मेंने एक खाँटी कोंग्रेसी से पूछा तो बताने लगे "...ये सब हथकंडा है चर्चा मे आने के लिए..." मैंने इसपर उनसे पूछा "...लेकिन सिंह साहब के साथ तो ऐसा व्यवहार किया जा रहा है मानो हथगोला फेंक दिये हों 10 जनपथ पर ..." खाँटी कोंग्रेसी बोलते पूछे "...ये कब से राजनीतिज्ञ हो गए ...?" मैंने उनसे शालीनता से पूछा "...वैसे आपके युवराज हथकंडा और हथगोला मे अंतर जानते हैं ...?" खाँटी भाई उखड़ गए और कड़े हो कर पूछे "...क्यों इसमे भी कोई शक है क्या ...?" मैंने बिल्कुल ठंडे दिमाग से कहा "...नहीं भाई नहीं मुझे तो पूरा विश्वास है ..." खाँटी भाई बोले "...देखिये भले ही नटवर सिंह आज कुछ भी हों आज भी वो हमारे अपने ही हैं ..." मैंने कहा "...हाँ वो तो है ही किताब से ही लगता है ..." खाँटी भाई बोले "...वही तो ..." मैंने कहा "...सही कहा आपने सुब्रमनियन स्वामी के प्रयास मे पलीता लगाने की असफल कोशिश ही है ..." खाँटी भाई इस बार स्वामी का नाम सुनते ही पूरी तरह उखड़ गए बोले "...आप लोगो भी बात का बतंगड़ बनाने मे बहुत मजा आता है ..." मैंने शालीनता से पूछा "...क्यों स्वामी ने श्री एपीजे अबुल कलाम से मिलकर कानून का हवाला देते हुए 10 जनपथ को प्रधानमंत्री बनने नहीं रोका था ...और उसके बाद स्वामी ने कई बार कहा है आपने युवराज भी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते ...क्या ये सत्य नहीं है ..." खाँटी भाई को कुछ बोले "...अगर उनको तारीफ ही करनी थी तो बुराई क्यों की ...? मैंने आश्चर्य दर्शाते हुए कहा "...वाह पहलवान को भी बुद्धि ...!" खाँटी भाई खुश हो गए बोले "...और क्या ...पहलवान के पास बुद्धि नहीं होगी तो क्या आप जैसे ढांचे मे होगी ...?" मैंने उत्तर देते हुए कहा "...हाँ वो तो है ...इसीलिए नटवर जी भी खुद को पहलवान ही समझते हैं ...शायद कुछ ज्यादा ही ..." खाँटी भाई और खुश हो गए बोले "... बहुत सही कहे हैं राहुल बाबा ने ही सोनिया जी पीएम बनने नहीं दिया ..." मैंने पूछा  "...तो मतलब बाकी सब झूठ है किताब में..." खाँटी भाई बोले "...जी बिलकुल इसीलिए सोनिया जी बहत आहात हैं ..." मैंने अनमने मन से जवाब दिया "...तो क्या हुआ ...दुनियाँ बहुत से लोग आहात और मर्माहत हैं ...इनके खून लोहा के बजाय सोना बहता है क्या ...?" खाँटी भाई बोले "...नटवर जी को पूरा सच लिखना चाहिए था ..." मैंने कहा "...सही कहा एक किताब से सारे देश को स्वामी के मुद्दे पर भरमाया नहीं जा सकता ...इसीलिए One Book is not Enough ...."  खाँटी भाई फिर उखड़ने लगे "...अजी लानत है आप पर ...वैसे मैं आपको बता दूँ कि सोनिया जी भी किताब लिखने वाली हैं ..." मैंने कुछ बोला नहीं सिवाय इसके "...उस किताब का नाम है A Penny in Bar is not Enough..." इतिहास खुद को दोहराता है ...शायद शुरुआत भी ...दोहरा ही दे...A Penny in a Bar.... पता नहीं किताब मश-हूर होगी या नहीं ...