Sunday, 20 July 2014

MH-17 हादसा चीन की चाल ....

हमारे खाँटी भाई कोंग्रेसी और नौटंकीबाज आपिए गाजा पर संसद मे बहस करवाना चाहते हैं पता नहीं सेकुलरिज़्म के गाँजा का नशा कब उतरेगा उनपर से। इधर मलेशियाई विमान को निशाना बनाया गया इस पर उन लोगों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी जबकि वास्तविकता ये है हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा जुड़ा ये सीधा मामला है। आखिर मूर्खता और पागलपन की भी हद होती है।

आप जरा ध्यान दीजिये जब MH 17 को यूक्रेन के दमेतस्क मे दो दिन पहले मार गिराया गया था तभी भारत के प्रधानमंत्री भी इसी रूट से 90 मिनट पहले लौटे थे और फिर जिस समय ये हादसा हुआ उसके ठीक 90 मिनट की दूरी पर एक एयरइंडिया का विमान भी उड़ रहा था। जब ये हादसा हुआ उसके कुछ घंटों के बाद ही विरोधियों ने जांच मे सहयोग का वादा किया लेकिन अब ये कहा जा रहा है कि विरोधियों ने सुबूत नष्ट कर दिये है जो समझ से परे है आखिर ब्लैक-बॉक्स तो मिल ही गया जो सबसे बड़ा सुबूत होता है। तो कहीं ये एक अंतर्राष्ट्रीय साजिश तो नहीं थी भारत के भी खिलाफ मतलब एक तीर से कई निशाने ? वैसे जिस प्रकार ब्रिक्स सम्मेलन में बिक्स बैंक के मुद्दे पर चीन से भारत का जो भी विवाद हुआ और उसमे पहले अध्यक्ष के तौर पर चीन को भारत के आगे झुकना पड़ा, संदेह उत्पन्न करता है। आखिर क्या कारण है कि उधर चीन के राष्ट्रपति जी जीनपिंग भारत के प्रधानमंत्री से हाथ मिला रहे थे और इधर चीनी सेना भारत मे घुसपैठ करने की कोशिश कर रही थी ?

शक का कारण ये भी है कि चीन ने यूक्रेन में 3 मिलियन एकड़ ( हांगकांग से भी बड़ा क्षेत्र ) जमीन खरीद रखी है। ये ख़रीदारी उसके यूक्रेन के केजीएस एग्रो के साथ सितंबर 2013 मे की थी ये चीन की विस्तारवादी नीति का ही हिस्सा है उसके बाद चीन ने उस जमीन पर अपनी सेना तैनात करना शुरू कर दिया। जिसपर रूस को आपत्ति थी। क्रीमीया का रूस मे शामिल होना भी चीन पचा नहीं पा रहा है उसे डर है कि उसके 3 मिलियन जमीन हाथ से निकल भी सकती है। अपने एक चाल से चीन किसी भी तरह रूस को पस्त करना चाहता ताकि वो इस क्षेत्र मे हस्तक्षेप बंद करे। अब सवाल उठता है कि मलेशियाई विमान ही निशाना क्यों बना ? कारण साफ है चीन पश्चिमी फिलीपीन्स सागर पर अपना दावा जताता है और इसके विरोध के निमित्त फिलीपींस के राष्ट्रपति जेजोमार बिनय और विएतनाम के राजदूत तुरुङ्ग तीयू डुओंग के बीच सार्थक बैठक 6 मार्च 2014 को चुकी थी जिसका समर्थन मलेशिया ने भी किया था। मतलब मलेशिया ने सीधा-सीधा चीन का विरोध किया था। आप ध्यान दीजिये एक मलेशियाई विमान MH-370 जो मलेशिया से बीजिंग की उड़ान पर था, का अपरण ठीक उसी समय हुआ था जिसका आजतक पता नहीं चला।

भारत सरकार को चाहिए कि चीन विस्तारवादी नीति पर रोक लगाने के लिए पूरे मनोयोग से रूस के साथ न सिर्फ खड़ा रहे बल्कि उसे सहयोग भी करे और उधर आतंकवाद पर प्रभावी मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए इसराईल के साथ खड़ा तो रहे ही फिलिस्तीन की राष्ट्र के रूप में मान्यता भी समाप्त करे। कॉंग्रेस-कम्युनिस्ट चिल्लाते हैं तो चिल्लाते रहें ।

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