लुआठी दुन्नों पूंछ मे ...सवार बकलोल बजावे बीन
बिहार की स्थिति ऐसी हो गई है कि दो बहरे गदहे आपस मे पूंछ बांध उसमे लुआठी फंसा के राजनीति मे नया रास्ता खोजने निकल वाले हैं। मजे की बात ये है ये दोनों गदहे अभी हाल तक एक दूसरे को खूब दुलत्ती मारते थे। दोनों जानी दुश्मन अब जानी दोस्त बनने जा रहे हैं। एक वैज्ञानिक बिहारी बता रहे थे अब दोनों मिलके फिर से बिहार मे आग लगाएंगे। तो मैंने उनके वक्तव्य पर टिप्पणी की थी कि पूंछ तो मोदी की आग मे कबकी जल चुकी है फिर ये नकली पूंछ मे लुआठी कब तक टिकेगी ये पूंछ भी जल जाएगी। तो वैज्ञानिक ने कहा था कि शायद इसीलिए एक और बकलोल गदहा का इन दोनो गदहों जिनके दोनों आगे वाले पैर मोदी-बेड़ी बंधे हुए है, की सवारी करने को आतुर दिख रहा है सवारी की सवारी, पूंछ की देखभाल भी। खैर एक बकलोल गदहे द्वारा दो गदहों की सवारी करते देखना कितना सुखद अनुभव होगा ये कल्पना ही अपने आप मे ही अद्भुत है। वैसे सबसे बड़ा सवाल ये भी है कि वो बकलोल गदहा अपने आप को बकलोल समझता ही नहीं और तो और ये दोनों जानी नवीन दोस्त गदहे उसे अपना युवराज भी मानते हैं। सवाल उठता है जिस गधों के पुंछ मे लुआठी बंधी है और दोनों गदहों की सवारी एक तीसरा बकलोल कर रहा है तो रास्ता कैसे दिखेगा? इस सवाल जवाब देते हुए जदयू नेता बोल रहे थे "...बिहार मे सेकुलरिज़्म का उजाला हमेशा रहा है और रहेगा ..." मैंने पूछा "...तो पूंछ मे लुआठी क्यों बांध रहे हैं ..." जदयू नेता उत्तर देते हुए प्रतिप्रश्न मे बोले "...दिन मे टेल लाइट नहीं जलती है क्या ..." मुझे अच्छा लगा उनकी बुद्धिमत्तापूर्ण उत्तर सुन के विश्वास कीजिये जिंदगी मे पहली बार किसी जदयू नेता ने बुद्धिमानी वाली बात की, खैर मैंने कहा "..लुआठी तो आपने साथ-साथ अपने विरोधी के पूंछ मे भी बांधने की तैयारी कर रहे हैं ..." जदयू नेता उत्तर देते हुए बोले "...वो विरोधी नहीं रहे अब ..." मैंने कटाक्ष करते हुए उनसे पूछा '..ठीक है लेकिन लुआठी वाली हेड लाइट पूंछ में...?" उनको कुछ समझ मे नहीं आया तो स्पष्टीकरण के पूछा "...मैं समझा नहीं ..." मैंने उनको समझाते हुए कहा "...भाई हेड लाइट पूंछ आप दोनों पर तीसरा गदहा सवर ...रास्ता कैसे दिखेगा ...?" जदयू नेता उखाड़ गए थोड़ा गुस्से मे बोले "...देखिये आप वो हमारी सवारी नहीं कर रहे हैं ..." मैंने भी उसी टोन मे जवाब देते हुए कहा "...बकलोल गदहा तो सवारी का ही बहाना खोज रहा है ...मय खाँटी कग्रेसिए जोकर और पता नहीं क्या - क्या बोल रहे हैं ..." जदयू नेता थोड़ा अनमने मन से बोले "...देखिये हम लोगो को सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए जो करना पड़े करेंगे ..." मैंने कहा "...लेकिन आप लोगों को तो मोदी जी ने बिलकुल ताकत विहीन कर दिया और खुद इतने ताकतवर हो गए कि आप लोग ताकते रह गए ..." जदयू नेता बोले "...हम ताकतहीन बिलकुल नहीं हुए है ..." मैंने कटाक्ष करते हुए कहा "...मैंने कब कहा अब ताक नहीं सकते ...ताकिये चरो ओर ताकिए ...मोदी ने आप लोगों का अस हाल किया है कि अब पूंछ मे लुआठी बांध के रास्ता खोजना पड़ रहा है...ऊपर से बकलोल का खाज अलग से ..." जदयू नेता कुछ बोल नहीं रहे थे ...
बिहार की स्थिति ऐसी हो गई है कि दो बहरे गदहे आपस मे पूंछ बांध उसमे लुआठी फंसा के राजनीति मे नया रास्ता खोजने निकल वाले हैं। मजे की बात ये है ये दोनों गदहे अभी हाल तक एक दूसरे को खूब दुलत्ती मारते थे। दोनों जानी दुश्मन अब जानी दोस्त बनने जा रहे हैं। एक वैज्ञानिक बिहारी बता रहे थे अब दोनों मिलके फिर से बिहार मे आग लगाएंगे। तो मैंने उनके वक्तव्य पर टिप्पणी की थी कि पूंछ तो मोदी की आग मे कबकी जल चुकी है फिर ये नकली पूंछ मे लुआठी कब तक टिकेगी ये पूंछ भी जल जाएगी। तो वैज्ञानिक ने कहा था कि शायद इसीलिए एक और बकलोल गदहा का इन दोनो गदहों जिनके दोनों आगे वाले पैर मोदी-बेड़ी बंधे हुए है, की सवारी करने को आतुर दिख रहा है सवारी की सवारी, पूंछ की देखभाल भी। खैर एक बकलोल गदहे द्वारा दो गदहों की सवारी करते देखना कितना सुखद अनुभव होगा ये कल्पना ही अपने आप मे ही अद्भुत है। वैसे सबसे बड़ा सवाल ये भी है कि वो बकलोल गदहा अपने आप को बकलोल समझता ही नहीं और तो और ये दोनों जानी नवीन दोस्त गदहे उसे अपना युवराज भी मानते हैं। सवाल उठता है जिस गधों के पुंछ मे लुआठी बंधी है और दोनों गदहों की सवारी एक तीसरा बकलोल कर रहा है तो रास्ता कैसे दिखेगा? इस सवाल जवाब देते हुए जदयू नेता बोल रहे थे "...बिहार मे सेकुलरिज़्म का उजाला हमेशा रहा है और रहेगा ..." मैंने पूछा "...तो पूंछ मे लुआठी क्यों बांध रहे हैं ..." जदयू नेता उत्तर देते हुए प्रतिप्रश्न मे बोले "...दिन मे टेल लाइट नहीं जलती है क्या ..." मुझे अच्छा लगा उनकी बुद्धिमत्तापूर्ण उत्तर सुन के विश्वास कीजिये जिंदगी मे पहली बार किसी जदयू नेता ने बुद्धिमानी वाली बात की, खैर मैंने कहा "..लुआठी तो आपने साथ-साथ अपने विरोधी के पूंछ मे भी बांधने की तैयारी कर रहे हैं ..." जदयू नेता उत्तर देते हुए बोले "...वो विरोधी नहीं रहे अब ..." मैंने कटाक्ष करते हुए उनसे पूछा '..ठीक है लेकिन लुआठी वाली हेड लाइट पूंछ में...?" उनको कुछ समझ मे नहीं आया तो स्पष्टीकरण के पूछा "...मैं समझा नहीं ..." मैंने उनको समझाते हुए कहा "...भाई हेड लाइट पूंछ आप दोनों पर तीसरा गदहा सवर ...रास्ता कैसे दिखेगा ...?" जदयू नेता उखाड़ गए थोड़ा गुस्से मे बोले "...देखिये आप वो हमारी सवारी नहीं कर रहे हैं ..." मैंने भी उसी टोन मे जवाब देते हुए कहा "...बकलोल गदहा तो सवारी का ही बहाना खोज रहा है ...मय खाँटी कग्रेसिए जोकर और पता नहीं क्या - क्या बोल रहे हैं ..." जदयू नेता थोड़ा अनमने मन से बोले "...देखिये हम लोगो को सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए जो करना पड़े करेंगे ..." मैंने कहा "...लेकिन आप लोगों को तो मोदी जी ने बिलकुल ताकत विहीन कर दिया और खुद इतने ताकतवर हो गए कि आप लोग ताकते रह गए ..." जदयू नेता बोले "...हम ताकतहीन बिलकुल नहीं हुए है ..." मैंने कटाक्ष करते हुए कहा "...मैंने कब कहा अब ताक नहीं सकते ...ताकिये चरो ओर ताकिए ...मोदी ने आप लोगों का अस हाल किया है कि अब पूंछ मे लुआठी बांध के रास्ता खोजना पड़ रहा है...ऊपर से बकलोल का खाज अलग से ..." जदयू नेता कुछ बोल नहीं रहे थे ...
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