Saturday, 19 July 2014

वाह चंद्रिका जी, इसे कहते हैं राजनीति को अपने उँगलियों पर नचाना, इधर आपने मनीष सिसोदिया की चाल का खुलासा किया नहीं कि उधर आसिफ खान को वास्तविकता बतानी पड़ी। हालाँकि वो एक दिन पहले ही ये बयान दे रहे थे कि कुछ आम आदमी पार्टी के नेता उनसे संपर्क कर किसी भी तरह सरकार के लिए कॉंग्रेस के समर्थन का जुगाड़ करने को कह रहे थे, लेकिन नाम बताने से कतरा रहे थे अगर उनको नाम बताना ही था तो उसी दिन बता दिये होते लेकिन आपने सब भंडा फोड़ दिया और आसिफ साहब ये बताने पर मजबूर होना पड़ा कि मनीष सिसोदिया खुद दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने की जुगाड़ मे हैं। ये तय है कि यदि आपने अपने इस पोस्ट से सिसोदिया की चाल का खुलासा नहीं किया होता तो आसिफ खान सिसोदिया का नाम नहीं लेते ये शकील अहमद के बयान से सिद्ध होता है। आपकी कमाल की विश्लेषण क्षमता ने दिल्ली के राजनीति की दिशा ही बदल के रख दी।

इसके पहले भी मैंने कई बार राजनीति को आपके विलक्षण उँगलियों पर नाचते हुए देखा है जिसका प्रमाण आपके टाइमलाइन वाल पर मौजूद है और आसानी से उन सभी का अवलोकन किया जा सकता है। वास्तव मे मैं तो कायल हूँ आपके अद्भुत और विलक्षण विश्लेषण क्षमता का जो पत्रकारिता जगत मे कहीं दिखती ही नहीं।      

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