Friday, 18 July 2014

यूं ही नहीं आपियों को मूर्ख केजरीवाल को महामूर्ख कहा जाता है ....

मैंने पहले कई बार ये सिद्ध किया है और एक लेख भी लिखा है कि जनांदोलनों से उपजी पार्टियां आला दर्जे की अनैतिक, भ्रष्ट, सत्ता की लालची और मूर्खों का जमावड़ा रही हैं। ये सत्ता के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं इसी का नमूना है मनीष सिसोदिया का केजरीवाल को ठिकाने लगाते हुए दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने का प्रयास करना। मैंने 20 घंटे पहले ही इसका खुलासा कर दिया था  कि सिसोदिया केजरीवाल को ठीक उसी तरह लात मार कर मुख्यमंत्री बनने का ख्वाब देख रहे हैं जैसे केजरीवाल ने अन्ना को लात मारी थी। मेरे उस खुलासे को आज ABP News के बड़ी बहस ने पुष्टि कर दी। खाँटी कोंग्रेसी आसिफ मोहम्म्द खान ने साफ-साफ कहा कि मनीष सिसोदिया खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं जिसे बाद मे संजय सिंह ने भी खान साहब से मुलाक़ात करके केजरीवाल के विकल्प की बात की थी।

इसके पहले भी मैंने कई बार इन मूर्ख और भ्रष्ट आपियों की पोल सिरे से खोली है जिसका प्रभाव है कि इनकी दुकान बिलकुल बंद होने के कगार पर है इसीलिए ये अस्तित्व बचाने के लिए किसी भी तरीके से कम से कम दिल्ली मे सत्ता हथियाना चाहते हैं। सवाल ये है कि जब मनीष और अन्य मूर्ख आपिए किसी तरह सत्ता हथियाना चाह रहे हैं तो छोटे आपिया विधायक ऐसा क्यों नहीं करेंगे ? आखिर उनको भी सत्ता सुख चाहिए ही चाहे जैसे भी हो भले ही आपिया का ठप्पा मिटा कर किसी और का ठप्पा लगाना पड़े। किस मुंह से ये मूर्ख आपिए ये कह सकते कि उनके विधायक अनैतिकता का रास्ता नहीं अपना रहे हैं। शायद महामूर्ख  केजरीवाल को ये आश्चर्य लगे लेकिन ये सत्य है कि 19 विधायक आपिया पार्टी तोड़ कर नयी पार्टी बनाने के लिए एकदम तैयार हैं और सभी बिन्नी के संपर्क में हैं।

वैसे मूर्ख आपिए ईमानदारी का चोला ओढ़ कर ईमानदारी का दिखावा भी नहीं कर पा रहे। नीति शास्त्र मे लिखा है "अतिविनयम महाधूर्तस्य लक्षणम"। ये सूक्ति मूर्ख आपियों पर अक्षरशः लागू होती है। केजरीवाल, योगेंद्र यादव और अन्य आपियों के अतिविनयशीलता से सभी परिचित हैं। अतः इन महाभ्रष्ट, लालची और हमेशा झूठ बोलने वाले नौटंकीबाज आपियों की महाधूर्तता से बचने की जरूरत है।  

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