Wednesday, 16 July 2014

मौजि अधेली - घंटाल खियावे कुक्कुर भिंडी....

बकलोल बबुआ के लिए हमेशा गुरु - घंटाली दिखाने वाले दिग्गी राज्जा ने जब अपनी असली रूप दिखाया तो किसी खाँटी भाई कोंग्रेसी ने चू तक नहीं की उल्टे अपनी ही मस्ती मे मगन रहे। मस्ती का आलम ये था कि बस "बेगानी शादी मे अब्दुल्ला दीवाना"। अपने ही नाज-नखरों से खाँटी भाईयों ने पाकिस्तान को खड़ा किया, आतंकवाद को खड़ा किया लेकिन अब जब सदमा लगा तो दिग्गी राज्जा के हनीमून के लिए परेशानी खड़ी हो गई। तब दिग्गी राज्जा गुरु - घंटाल से अधेली - घंटाल हो गए इसलिए बेचारे कई अब्दुल्ला पाकिस्तान पंहुच गए लेकिन उन्हीं का पालतू हाफिज़ सईद कहाँ मानने वाला था सो उसे मनाने के लिए पुराने खाँटी भाई कोंग्रेसी "भेद प्रकाश भैदिक" को वहीं पाकिस्तान में रुकना पड़ा। हाफिज़ सईद तो पूरी तरह दिग्गी राज्जा की भूमिका निभाना चाह रहा था ठीक दिग्गी राज्जा के ही खिलाफ। अब पता नहीं मामला सल्टा की नहीं लेकिन ये तो तय है कि दिग्गी राज्जा बुढ़ौती मे बियाह के बाद हनीमून पाकिस्तान मे ही मनाएंगे। इस पर कोई खाँटी भाई कोंग्रेसी कुछ बोलने को तैयार नहीं था। बड़ी मुश्किल से एक खाँटी भाई तैयार हुए तो मैंने पूछा "...स्विट्ज़रलैंड मे कोई परेशानी है क्या दिग्गी राज्जा को ...?" खाँटी भाई बोले "...वैसे तो कोई खास नहीं लेकिन अब सोचना पड रहा है ..." मैंने उसी जिज्ञासा से पूछा "...क्यों...?" खाँटी भाई उत्तर देते हुए बोले "...काले धन पर SIT ..." मैंने कहा "...हाँ वो तो है मतलब तब तो चीन भी नहीं जा सकते वो ..." खाँटी भाई बोले "...चीन पंचशील का पालन नहीं करता ..." मुझे उनके इस उत्तर से थोड़ी भी संतुष्टि नहीं हुई सो मैंने पूछा "...काले धन और पंचशील मे क्या समानता है ...?" खाँटी भाई उत्तर देते हुए बोले "...ब्राज़ील मे चीन से प्रधानमंत्री की बात हो रही है ..." मेरी असंतुष्टि कायम रही तो मैंने प्रतिप्रश्न किया "...मामला उस मुलाक़ात का है या सुब्रमनियन स्वामी के खुलासे का ...?" इस पर खाँटी को थोड़ा गुस्सा आ गया बोले "...देखिये वो सब आरोप झूठे हैं ..." मैंने कहा "...लेकिन वो तो न्यायालय में हैं ..." खाँटी भाई मामले को रफा-दफा करने के अंदाज मे बोले "...छोड़िए वो सब पाकिस्तान सबसे सुरक्षित है ..." मैंने इस पर पूछा "...भैदिक जी ने हाफिज़ सईद को मना लिया क्या ...?" खाँटी भाई बोले "...हाँ लगता तो है वैसे हमारा प्रयास ये भी है वो कश्मीर मे भी परेशानी न खड़ी करे ..." मैंने कहा "...हाँ दिग्गी राज्जा हनीमून के लिए न तो स्विट्ज़रलैंड जा सकते हैं, न यूरोप जा सकते हैं, न अमेरिका जा सकते हैं, न आस्ट्रेलिया, न न्यूजीलैंड..." तभी खाँटी को कोई होश आया बोले "...अमेरिका तो जा ही सकते थे लेकिन डर ये कि कहीं अमेरिका वाले पकड़ कर उनके और उनके श्रीमती जी के गुप्त बीमारी का आपरेशन न करने लगें ..." मैंने सहमति जताते हुए कहा "...हाँ वो तो है ..." मैंने आगे जोड़ते हुए कहा "...अगर हाफिज़ सईद दिग्गी राज्जा के लिए पाकिस्तान और कश्मीर परेशानी न खड़ी करने लिए तैयार हो जाता है भले ही उसकी आजादी की बात जैसी घिनौनी हरकत के नाम पर तो आप खाँटी भाई लोगों भैदिक जी का अहसानमंद होना चाहिए ..." खाँटी भाई ये सुन कर अंदर चले गए बिना नमस्कार किए ही ।  

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