Saturday, 3 May 2014

धूल उड़ावे धुरिया झारे, पाथर जीवै जान....... ?

जीजी को मोदी जी ने 'बेटी' कहा तो जीजी को बिलकुल अच्छा नहीं लगा। कॉंग्रेस मे कोई किसी का पुत्र, पुत्री, भाई, बहन, माता के रिश्ते नहीं बनते। ये कोंग्रेसी संस्कृति है जिसका नमूना आए दिन बुजुर्ग खाँटी भाई कोंग्रेसी लोग पेश करते जा रहे हैं। अब शहजादे के घोषित गुरु दिग्गी राजा को जरा लोक - लाज की दुहाई देंगे तो क्या होगा ? बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि दिग्गी राजा आपका मुंह नोच लेंगे ठीक उसी मूर्ख और पाजी बंदर की तरह जिसे किसी चिड़िया ने अपना घर बनाने को कहा तो बंदर न सिर्फ उसका घोसला नोच कर फेंक डाला बल्कि उस चिड़िया और उसके बच्चों को भी खा लिया। वैसे भी काँग्रेस के जीवित आदर्शों पुरुषों( लिविंग लेजेंड जैसे ना॰ द॰ तिवारी आदि ) ने  पिता होने बिलकुल प्रमाणिक और वैज्ञानिक आयाम प्रदान किया जिसे "जैविक पिता" की संज्ञा दी गई है। एक खाँटी भाई कोंग्रेसी ललकार रहे थे "...प्रियंका जी ने मोदी को बहुत सही जवाब दिया है ..." मैंने पूछा "...तो क्या पूरी काँग्रेस 'ना॰ द॰ तिवारी प्रोविटी थ्योरी' पर स्थापित कर चुकी है ..." खाँटी भाई बोले "...हम बेहद वैज्ञानिक लोग हैं प्रमाणिकता मे विश्वास करते हैं ..." मैंने ज़ोर देकर पूछा "...किसी भी मान्यता और विश्वास पर भी नहीं...?" खाँटी भाई बोले "...विश्वास का प्रामाणिक आधार होना चाहिए ..." मैंने कहा "...इसीलिए मोदी जी की मान्यता को जीजी ने सिरे से खारिज कर दिया...!" खाँटी भाई बोले "...हाँ बिलकुल..." मैंने जिज्ञासावश पूछा "...मतलब ये है की जीजी को ना॰ द॰ तिवारी, शाहजादे के गुरु दिग्गी राजा, प्रमाणिक कानूनची मनु सिंघवी आदि जैसे मूर्धन्य कोंग्रेसियों की ही मान्यता पसंद है...!" खाँटी भाई बोले "...नेहरू ने ही भारत की खोज की थी, राजीव गांधी ने कम्प्युटर की, मनमोहन सिंह ने मोबाईल की लिहाजा हमे तो प्रामाणिक और वैज्ञानिक तो होना ही होगा ..." मेरा सर चकराने लगा था खोजकर्ताओं के नाम सुन कर मैंने पूछा  "...आपकी काफी डिमांड है चुनाव प्रचार मे...?" खाँटी भाई सीना चौड़ा करते हुए बोले "...हाँ वो चुनाव मे जीजी के साथ - साथ रहना पड़ता है न ..." मैंने कहा "...हाँ वो तो है लेकिन आप काफी थक गए हैं ..." खाँटी भाई ज़ोर देकर बोले "...अरे नहीं नहीं! हम बिलकुल तरोताजा हैं चुनाव प्रचार अलग चीज है मानसिक और शारीरिक शक्ति बिलकुल अलग ..." मैंने कहा "...नहीं आपके ज्ञान को देखकर लगा था खैर छोड़िए ..." मैंने आगे पूछा "...तो पूरी कॉंग्रेस ना॰ द॰ तिवारी के बाद सिर्फ 'जैविक पिता' के सिद्धान्त पर एक मत से कायम है ...?" खाँटी भाई बोले "... कॉंग्रेस की ये समृद्ध परंपरा ही नहीं संस्कृति भी रही है कि हम हमेशा सत्य का साथ देते हैं असत्य का नहीं ...मोदी जीजी के पिता कैसे हो सकते हैं ...?" मैंने आश्चर्य से कहा "...हाँ ! हो तो नहीं सकते लेकिन मान तो सकते ही हैं ..." खाँटी भाई अपना प्रचंड तर्क देते हुए बोले "...जो है ही नहीं उसे मानने की क्या जरूरत है ...? बोलिए " मेरे पास उनके तर्क का कोई जवाब नहीं था ... 

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