Wednesday, 21 May 2014

रेंगत सैम करे मनुहार...

पिछले वर्ष 6 फरवरी 2013 को जब मैंने पहली बार श्रीराम कालेज, नई दिल्ली में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी को विशुद्ध नीतिगत मामलों पर बोलते हुए सुना था तभी मैंने सर्वप्रथम अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा से उनकी तुलना करते हुए कहा था कि नरेन्द्र भाई मोदी कई मामलों में बराक ओबामा से काफी बेहतर हैं यद्यपि इसके लिए मैंने सिर्फ 5 मौलिक बिन्दु ही लिए थे तुलना करने के लिए जिसे मेरे टाइमलाइन पर 8 फरवरी 2013 की तिथि को देखा जा सकता है। वैसे ऐसे दर्जनो बिन्दु हैं जिन पर मोदी जी के आगे बराक ओबामा कहीं ठहरते ही नहीं। कमाल देखिये जब केवल मामूली से धन्यवाद ट्वीट के मामले में जब ओबामा को मोदी जी ने प्राथमिकता नहीं दी और काफी नीचे रखा तो उसी पर पूरा अमेरिकी प्रशासन हिल गया। अभी तो मोदी जी सरकार भी नहीं बनी है और प्रचंड और आक्रामक विदेश नीति के संकेत मिलने लगे हैं। अमेरिकी सीनेटर जॉन मैक्केन ने प्रधानमंत्री मोदी को बधाई देते हुए सम्बन्धों को पुनर्जीवित की गुहार लगाई है। वहीं उधर अमेरिका के विदेश जॉन एफ॰ केर्री भी मोदी की मनुहार करने में रेगते नजर आ रहे हैं बार - बार दुहाई दे रहे हैं कि मोदी जी वीजा प्रकरण को अतीत मान कर भूल जाएँ। क्या इसके पहले किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रशासन ने कभी भी किसीकी ऐसी मनुहार करते देखा या पढ़ा ? अभी तो ये आलम है मामूली से मात्र ट्वीट के मुद्दे पर ही मोदी ने पूरे ओबामा प्रशासन हिला के रख दिया जब बड़े मुद्दे आएंगे तब ओबामा क्या करेंगे ? देखने वाली बात होगी ओबामा या अमेरिकी प्रशासन भारत के प्रधानमंत्री मोदी का कैसे सामना करता है। वैसे भी मोदी के रूप में जैसा शक्तिशाली प्रधानमंत्री मिला है उससे अमेरिका और चीन का चिंतित होना अप्रत्याशित बिलकुल नहीं लग रहा है। जैसा मैंने फरवरी 2013 में नरेन्द्र भाई मोदी को विश्वनेता कहा था प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी को विश्वनेता के रूप मे स्थापित करने से कोई रोक सकता है कम से कम आज के तारीख में तो किसी भी देश में कोई भी मुझे तो नहीं दिखता।

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