मारे त्रिपुंड मूंढ़िया, चियारे दाँत बकलोल...
जैसे छछूंदर अपने सर पर चमेली का तेल लगा कर निकलता है ठीक वैसे ही काँग्रेस कुमार केजरीवाल अपने माथे पर त्रिपुंड लगाए बनारस में घूम रहे हैं। जैसे छछूंदरों को हमेशा भोजन की तलाश रहती है वैसे ही तलाश केजरीवाल को वोटों की है छछूंदर अपने सर पर चमेली का तेल लगा लेता है तो उसे लगता है भोजन स्वादिष्ट मिलेगा ठीक यही उम्मीद केजरीवाल को भी है कि कम से कम वोट कायदे का मिल जाए। केजरीवाल ब्रांड एक बकलोल आपिया बता रहा था "...केजरीवाल के आने से राजनीति में परिवर्तन तो आया है ..." मुझे उस बकलोल की दलील बड़ी अजीब सी लगी मैंने कहा "...हाँ आया तो है केजरीवाल को त्रिपुंड लगा कर घूमना पड़ रहा है ...लानत है ऐसे परिवर्तन को आपिया जी ..." बकलोल आपिया थोड़ा तैश में आ और आपा खोते हुए ऊंची आवाज में बोलते हुए बोला "...आपको भ्रष्टाचार नहीं दिखता ..." मैंने उसका उत्तर देते हुए कहा "...चुनाव के दिन त्रिपुंड लगा कर तुम्हारा बॉस केजरीवाल घूम रहा है इससे बड़ा भ्रष्टाचार और क्या हो सकता है ...?" बकलोल आपिया बोला "...ये किसी का मौलिक अधिकार है इससे कोई वंचित नहीं कर सकता ..." मैंने कहा "...बिलकुल भ्रष्टाचार आपका अधिकार है और कोई आपको इससे वंचित नहीं कर सकता ...त्रिपुंड लगा कर घूमना उसी का नमूना है..." बकलोल आपिया और गुस्से मे आ गया और पूछा "...वो कैसे ..." मैंने उसे समझाते हुए कहा "...बकलोल दास आपिया ! तुमहरा बॉस तो तुम लोगों से भी गया -गुजारा बकलोल है उसे तो ये भी नहीं पता कि चुनाव के दिन त्रिपुंड लगा कर घूमने से लोग उसे ठग समझ लेंगे ..." बकलोल आपिये की जिज्ञासा बढ़ गई , पूछने लगा "...वो कैसे...?" मैंने उसका उत्तर देते हुए कहा "...जैसे छछूंदर सर पर तेल लगाता है वैसे केजरीवाल ने त्रिपुंड लगाया है आज..." बकलोल आपिया बोला "...तो इसमे ठगई वाली बात कहाँ से आ गई ...?" मैंने ज़ोर देते हुए उससे पूछा "... अरे बकलोल दास आपिया ! छछूंदर सर पर साल मे कितने दिन चमेली का तेल लगता है..." बकलोल आपिया बोला "...पता नहीं ..." मैंने उसपर तंज़ कसते हुए कहा "...इसीलिए तुम बकलोल हो और तुम्हारा बॉस महाबकलोल...लानत है तुम्हारी डिग्री पर..." बकलोल आपिया बोला "...देखिये हमको बकलोल मत कहिए ..." मैंने कहा "...आपसे ज्यादा बुद्धिमान तो वो छछूंदर है जो चमेली का तेल लगा कर निकलता है ..." बकलोल आपिया ने मुझे पूछा "...आपने बताया नहीं केजरीवाल के ठगई के बारे में ..." मैंने कहा "...जैसे तुमने जितनी बार छछूंदर को चमेली का तेल लगा के घूमते हुए देखा है उसी प्रकार केजरीवाल को भी दिखना चाहिए था ...महामूर्ख ठग...वैसे मैंने तो सुना था कि ठग बहुत बुद्धिमान होते हैं लेकिन केजरीवाल निरा महाँमूर्ख ठग निकला ..." बकलोल आपिया ज़ोर -ज़ोर से अपना कपार खजुआने लगा तो मैंने वहाँ से खिसक लिया ...
जैसे छछूंदर अपने सर पर चमेली का तेल लगा कर निकलता है ठीक वैसे ही काँग्रेस कुमार केजरीवाल अपने माथे पर त्रिपुंड लगाए बनारस में घूम रहे हैं। जैसे छछूंदरों को हमेशा भोजन की तलाश रहती है वैसे ही तलाश केजरीवाल को वोटों की है छछूंदर अपने सर पर चमेली का तेल लगा लेता है तो उसे लगता है भोजन स्वादिष्ट मिलेगा ठीक यही उम्मीद केजरीवाल को भी है कि कम से कम वोट कायदे का मिल जाए। केजरीवाल ब्रांड एक बकलोल आपिया बता रहा था "...केजरीवाल के आने से राजनीति में परिवर्तन तो आया है ..." मुझे उस बकलोल की दलील बड़ी अजीब सी लगी मैंने कहा "...हाँ आया तो है केजरीवाल को त्रिपुंड लगा कर घूमना पड़ रहा है ...लानत है ऐसे परिवर्तन को आपिया जी ..." बकलोल आपिया थोड़ा तैश में आ और आपा खोते हुए ऊंची आवाज में बोलते हुए बोला "...आपको भ्रष्टाचार नहीं दिखता ..." मैंने उसका उत्तर देते हुए कहा "...चुनाव के दिन त्रिपुंड लगा कर तुम्हारा बॉस केजरीवाल घूम रहा है इससे बड़ा भ्रष्टाचार और क्या हो सकता है ...?" बकलोल आपिया बोला "...ये किसी का मौलिक अधिकार है इससे कोई वंचित नहीं कर सकता ..." मैंने कहा "...बिलकुल भ्रष्टाचार आपका अधिकार है और कोई आपको इससे वंचित नहीं कर सकता ...त्रिपुंड लगा कर घूमना उसी का नमूना है..." बकलोल आपिया और गुस्से मे आ गया और पूछा "...वो कैसे ..." मैंने उसे समझाते हुए कहा "...बकलोल दास आपिया ! तुमहरा बॉस तो तुम लोगों से भी गया -गुजारा बकलोल है उसे तो ये भी नहीं पता कि चुनाव के दिन त्रिपुंड लगा कर घूमने से लोग उसे ठग समझ लेंगे ..." बकलोल आपिये की जिज्ञासा बढ़ गई , पूछने लगा "...वो कैसे...?" मैंने उसका उत्तर देते हुए कहा "...जैसे छछूंदर सर पर तेल लगाता है वैसे केजरीवाल ने त्रिपुंड लगाया है आज..." बकलोल आपिया बोला "...तो इसमे ठगई वाली बात कहाँ से आ गई ...?" मैंने ज़ोर देते हुए उससे पूछा "... अरे बकलोल दास आपिया ! छछूंदर सर पर साल मे कितने दिन चमेली का तेल लगता है..." बकलोल आपिया बोला "...पता नहीं ..." मैंने उसपर तंज़ कसते हुए कहा "...इसीलिए तुम बकलोल हो और तुम्हारा बॉस महाबकलोल...लानत है तुम्हारी डिग्री पर..." बकलोल आपिया बोला "...देखिये हमको बकलोल मत कहिए ..." मैंने कहा "...आपसे ज्यादा बुद्धिमान तो वो छछूंदर है जो चमेली का तेल लगा कर निकलता है ..." बकलोल आपिया ने मुझे पूछा "...आपने बताया नहीं केजरीवाल के ठगई के बारे में ..." मैंने कहा "...जैसे तुमने जितनी बार छछूंदर को चमेली का तेल लगा के घूमते हुए देखा है उसी प्रकार केजरीवाल को भी दिखना चाहिए था ...महामूर्ख ठग...वैसे मैंने तो सुना था कि ठग बहुत बुद्धिमान होते हैं लेकिन केजरीवाल निरा महाँमूर्ख ठग निकला ..." बकलोल आपिया ज़ोर -ज़ोर से अपना कपार खजुआने लगा तो मैंने वहाँ से खिसक लिया ...
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