चमकावे करैली आपिया, खाए धोबी पाट...
अपनी जेब से हमेशा करैली निकाल चमकाने वाले आपियों के मुंह में जब भाजपईयों ने मिर्ची ठूँसी तो आपिए करैली अपने जेब में रख के भाग खड़े हुए। आलम ये है भागते आपिए भूत की लंगोटी भी नीलाम होने के कगार पर है। इसी निलामी को टालने के लिए आपियों ने नौटंकी करने की सोची। कहा जाता है कि मूर्ख हमेशा दूसरों को महामूर्ख ही समझता है सामने वाला चाहे कोई भी हो। इसीलिए मूर्ख आपियों के बास केजरीवाल न्यायालय के सामने ही करैली चमकने लगे बस उसके बाद जो होना था वो सबके सामने ही है। लेकिन अफसोस इस हाई वोल्टेज ड्रामे में कोई आइटम नहीं है हालाँकि इसके लिए प्रयास आपियों ने बहुत किया लेकिन तभी कुछ लोगों ने पार्टी छोड़ दिया। उनका मन अब करैलीबाजी करने का नहीं करता। एक मूर्ख आपीया मुझसे पूछ रहा था "...केजरीवाल का दोष क्या है ..." मैंने उससे कहा '...ये आप न्यायालय से पूछिए ..." वो मूर्ख आपिया फिर लगा करैली चमकाने और बोला "...भ्रष्टाचारी बाहर हैं और आवाज उठाने वाला अंदर, चोर को चोर कहना कहाँ का गुनाह है ..." मैंने उसे समझाते हुए कहा "...बिलकुल गलत नहीं है लेकिन पहले चोर को चोर तो साबित करो ..." मूर्ख आपिया बोला "...अब भी सुबूत चाहिए क्या ये सबको पता है ..." मैंने उससे कहा "... लेकिन न्यायालय को नहीं पता है कृपया उसे बताईए..." आपिया बोला "...इसमे भी चाल है काँग्रेस भाजपा की..." मैंने उसे उत्तर देते हुए कहा "...चाल कम से कम भाजपा की तो नहीं है कॉंग्रेसी माता जी सदमे में हैं हाँ आपके वकील साहब की चाल जरूर है लेजरीवाल को जेल में सड़ाने का ..." मूर्ख आपीया आगबबूला होते हुए कहा "...ये नहीं हो सकता..." मैंने पूछा "...काहें नहीं हो सकता .. 56 मूर्ख आपिए जमानत लेकर जेल से बाहर आ गए केजरीवाल क्यों नहीं ..." मूर्ख आपीया बोला "...ये पार्टी के सिद्धान्त के खिलाफ है ..." मैंने पूछा "...फिर 56 पर वो सिद्धान्त लागू नहीं होता ...? मूर्ख आपीया ज़ोर - ज़ोर से अपना कापार खजुआने लगा काफी देर तक खजुआता रहा तो मैंने उसे समझते हुए कहा "...देखो जो वकील केजरीवाल का केस लड़ रहे हैं उन्होने ही कहा है बेल न लेने के लिए ये समझाते हुए कि इससे सहानुभूति की लहर उठेगी और विधान सभा चुनाव में जीत सकते हैं ..." आपिया बोला "...हाँ तो इसमे चाल कहाँ से आ गई ..." मैंने उसे समझाते हुए कहा "...जब अपना जूता अपने गाल पर मारने मतलब झांपड खाने के बाद भी कोई सहानुभूति नहीं उपजी तो इससे क्या खाक उपजेगी सोचो जरा..." मूर्ख आपिया वाकई सोचने लगा तो मैंने फिर कहा "...अगर यही बात होती तो बाकी 56 आपिए भी जेल मे रह के सहानुभूति लेते ..." मूर्ख आपिया चुप हो कर मेरी बात सुनने लगा तो मैंने आगे कहा "...मामला ये है कि वकील साहब पार्टी पर कब्जा करना चाहते हैं और केजरीवाल के बाहर रहते ये संभव नहीं था ...आप देखिये कि हर पोस्टर पर केवल केजरीवाल की फोटो लगी थी किसी और पदाधिकारी की क्यों नहीं ...? " आपिया फिर अपना सिर खजुआने लगा बोला "...मुझे भी कुछ शक हुआ था..." मैंने कहा "...पूरे चुनाव में कहीं वकील साहब दिखे नहीं न ... दरअसल केजरीवाल इगनोर कर रहे थे ...उसी का बदला वकील साहब ले रहे हैं ...समझे ..." आपिया मुझसे पूछा "...लेकिन आप पर विश्वास कैसे किया जाए ..." मैंने कहा "...जो लोग पार्टी छोड़ रहे हैं उनसे पूछो और जो जमानत पर बाहर आ गए उनसे भी पूछो ..." आपिया शांति से सोचने लगा तो मैंने फिर कहा "...वकील साहब को कुछ लोग चाहिए सिवा केजरीवाल के सो उन लोगों से जमानत लेने को कह दिया ..." आपिया मन ही मन केजरीवाल का नाम लेकर बुदबुदाने लगा तो मैंने भी नमस्कार कर के राह पकड़ ली ।
अपनी जेब से हमेशा करैली निकाल चमकाने वाले आपियों के मुंह में जब भाजपईयों ने मिर्ची ठूँसी तो आपिए करैली अपने जेब में रख के भाग खड़े हुए। आलम ये है भागते आपिए भूत की लंगोटी भी नीलाम होने के कगार पर है। इसी निलामी को टालने के लिए आपियों ने नौटंकी करने की सोची। कहा जाता है कि मूर्ख हमेशा दूसरों को महामूर्ख ही समझता है सामने वाला चाहे कोई भी हो। इसीलिए मूर्ख आपियों के बास केजरीवाल न्यायालय के सामने ही करैली चमकने लगे बस उसके बाद जो होना था वो सबके सामने ही है। लेकिन अफसोस इस हाई वोल्टेज ड्रामे में कोई आइटम नहीं है हालाँकि इसके लिए प्रयास आपियों ने बहुत किया लेकिन तभी कुछ लोगों ने पार्टी छोड़ दिया। उनका मन अब करैलीबाजी करने का नहीं करता। एक मूर्ख आपीया मुझसे पूछ रहा था "...केजरीवाल का दोष क्या है ..." मैंने उससे कहा '...ये आप न्यायालय से पूछिए ..." वो मूर्ख आपिया फिर लगा करैली चमकाने और बोला "...भ्रष्टाचारी बाहर हैं और आवाज उठाने वाला अंदर, चोर को चोर कहना कहाँ का गुनाह है ..." मैंने उसे समझाते हुए कहा "...बिलकुल गलत नहीं है लेकिन पहले चोर को चोर तो साबित करो ..." मूर्ख आपिया बोला "...अब भी सुबूत चाहिए क्या ये सबको पता है ..." मैंने उससे कहा "... लेकिन न्यायालय को नहीं पता है कृपया उसे बताईए..." आपिया बोला "...इसमे भी चाल है काँग्रेस भाजपा की..." मैंने उसे उत्तर देते हुए कहा "...चाल कम से कम भाजपा की तो नहीं है कॉंग्रेसी माता जी सदमे में हैं हाँ आपके वकील साहब की चाल जरूर है लेजरीवाल को जेल में सड़ाने का ..." मूर्ख आपीया आगबबूला होते हुए कहा "...ये नहीं हो सकता..." मैंने पूछा "...काहें नहीं हो सकता .. 56 मूर्ख आपिए जमानत लेकर जेल से बाहर आ गए केजरीवाल क्यों नहीं ..." मूर्ख आपीया बोला "...ये पार्टी के सिद्धान्त के खिलाफ है ..." मैंने पूछा "...फिर 56 पर वो सिद्धान्त लागू नहीं होता ...? मूर्ख आपीया ज़ोर - ज़ोर से अपना कापार खजुआने लगा काफी देर तक खजुआता रहा तो मैंने उसे समझते हुए कहा "...देखो जो वकील केजरीवाल का केस लड़ रहे हैं उन्होने ही कहा है बेल न लेने के लिए ये समझाते हुए कि इससे सहानुभूति की लहर उठेगी और विधान सभा चुनाव में जीत सकते हैं ..." आपिया बोला "...हाँ तो इसमे चाल कहाँ से आ गई ..." मैंने उसे समझाते हुए कहा "...जब अपना जूता अपने गाल पर मारने मतलब झांपड खाने के बाद भी कोई सहानुभूति नहीं उपजी तो इससे क्या खाक उपजेगी सोचो जरा..." मूर्ख आपिया वाकई सोचने लगा तो मैंने फिर कहा "...अगर यही बात होती तो बाकी 56 आपिए भी जेल मे रह के सहानुभूति लेते ..." मूर्ख आपिया चुप हो कर मेरी बात सुनने लगा तो मैंने आगे कहा "...मामला ये है कि वकील साहब पार्टी पर कब्जा करना चाहते हैं और केजरीवाल के बाहर रहते ये संभव नहीं था ...आप देखिये कि हर पोस्टर पर केवल केजरीवाल की फोटो लगी थी किसी और पदाधिकारी की क्यों नहीं ...? " आपिया फिर अपना सिर खजुआने लगा बोला "...मुझे भी कुछ शक हुआ था..." मैंने कहा "...पूरे चुनाव में कहीं वकील साहब दिखे नहीं न ... दरअसल केजरीवाल इगनोर कर रहे थे ...उसी का बदला वकील साहब ले रहे हैं ...समझे ..." आपिया मुझसे पूछा "...लेकिन आप पर विश्वास कैसे किया जाए ..." मैंने कहा "...जो लोग पार्टी छोड़ रहे हैं उनसे पूछो और जो जमानत पर बाहर आ गए उनसे भी पूछो ..." आपिया शांति से सोचने लगा तो मैंने फिर कहा "...वकील साहब को कुछ लोग चाहिए सिवा केजरीवाल के सो उन लोगों से जमानत लेने को कह दिया ..." आपिया मन ही मन केजरीवाल का नाम लेकर बुदबुदाने लगा तो मैंने भी नमस्कार कर के राह पकड़ ली ।