Saturday, 24 May 2014

चमकावे करैली आपिया, खाए धोबी पाट...

अपनी जेब से हमेशा करैली निकाल चमकाने वाले आपियों के मुंह में जब भाजपईयों ने मिर्ची ठूँसी तो आपिए करैली अपने जेब में रख के भाग खड़े हुए। आलम ये है भागते आपिए भूत की लंगोटी भी नीलाम होने के कगार पर है। इसी निलामी को टालने के लिए आपियों ने नौटंकी करने की सोची। कहा जाता है कि मूर्ख हमेशा दूसरों को महामूर्ख ही समझता है सामने वाला चाहे कोई भी हो। इसीलिए मूर्ख आपियों के बास केजरीवाल न्यायालय के सामने ही करैली चमकने लगे बस उसके बाद जो होना था वो सबके सामने ही है। लेकिन अफसोस इस हाई वोल्टेज ड्रामे में कोई आइटम नहीं है हालाँकि इसके लिए प्रयास आपियों ने बहुत किया लेकिन तभी कुछ लोगों ने पार्टी छोड़ दिया। उनका मन अब करैलीबाजी करने का नहीं करता। एक मूर्ख आपीया मुझसे पूछ रहा था "...केजरीवाल का दोष क्या है ..." मैंने उससे कहा '...ये आप न्यायालय से पूछिए ..." वो मूर्ख आपिया फिर लगा करैली चमकाने और बोला "...भ्रष्टाचारी बाहर हैं और आवाज उठाने वाला अंदर, चोर को चोर कहना कहाँ का गुनाह है ..." मैंने उसे समझाते हुए कहा "...बिलकुल गलत नहीं है लेकिन पहले चोर को चोर तो साबित करो ..." मूर्ख आपिया बोला "...अब भी सुबूत चाहिए क्या ये सबको पता है ..." मैंने उससे कहा "... लेकिन न्यायालय को नहीं पता है कृपया उसे बताईए..." आपिया बोला "...इसमे भी चाल है काँग्रेस भाजपा की..." मैंने उसे उत्तर देते हुए कहा "...चाल कम से कम भाजपा की तो नहीं है कॉंग्रेसी माता जी सदमे में हैं हाँ आपके वकील साहब की चाल जरूर है लेजरीवाल को जेल में सड़ाने का ..." मूर्ख आपीया आगबबूला होते हुए कहा "...ये नहीं हो सकता..." मैंने पूछा "...काहें नहीं हो सकता .. 56 मूर्ख आपिए जमानत लेकर जेल से बाहर आ गए केजरीवाल क्यों नहीं ..." मूर्ख आपीया बोला "...ये पार्टी के सिद्धान्त के खिलाफ है ..." मैंने पूछा "...फिर 56 पर वो सिद्धान्त लागू नहीं होता ...? मूर्ख आपीया ज़ोर - ज़ोर से अपना कापार खजुआने लगा काफी देर तक खजुआता रहा तो मैंने उसे समझते हुए कहा "...देखो जो वकील केजरीवाल का केस लड़ रहे हैं उन्होने ही कहा है बेल न लेने के लिए ये समझाते हुए कि इससे सहानुभूति की लहर उठेगी और विधान सभा चुनाव में जीत सकते हैं ..." आपिया बोला "...हाँ तो इसमे चाल कहाँ से आ गई ..." मैंने उसे समझाते हुए कहा "...जब अपना जूता अपने गाल पर मारने मतलब झांपड खाने के बाद भी कोई सहानुभूति नहीं उपजी तो इससे क्या खाक उपजेगी सोचो जरा..." मूर्ख आपिया वाकई सोचने लगा तो मैंने फिर कहा "...अगर यही बात होती तो बाकी 56 आपिए भी जेल मे रह के सहानुभूति लेते ..." मूर्ख आपिया चुप हो कर मेरी बात सुनने लगा तो मैंने आगे कहा "...मामला ये है कि वकील साहब पार्टी पर कब्जा करना चाहते हैं और केजरीवाल के बाहर रहते ये संभव नहीं था ...आप देखिये कि हर पोस्टर पर केवल केजरीवाल की फोटो लगी थी किसी और पदाधिकारी की क्यों नहीं ...? " आपिया फिर अपना सिर खजुआने लगा बोला "...मुझे भी कुछ शक हुआ था..." मैंने कहा "...पूरे चुनाव में कहीं वकील साहब दिखे नहीं न ... दरअसल केजरीवाल इगनोर कर रहे थे ...उसी का बदला वकील साहब ले रहे हैं ...समझे ..." आपिया मुझसे पूछा "...लेकिन आप पर विश्वास कैसे किया जाए ..." मैंने कहा "...जो लोग पार्टी छोड़ रहे हैं उनसे पूछो और जो जमानत पर बाहर आ गए उनसे भी पूछो ..." आपिया शांति से सोचने लगा तो मैंने फिर कहा "...वकील साहब को कुछ लोग चाहिए सिवा केजरीवाल के सो उन लोगों से जमानत लेने को कह दिया ..."  आपिया मन ही मन केजरीवाल का नाम लेकर बुदबुदाने लगा तो मैंने भी नमस्कार कर के राह पकड़ ली ।           

Thursday, 22 May 2014

लिये लुआठी बगावत वीर, हड़कावे आला कमान

काँग्रेस में आलाकमान के विरुद्ध बगावत अब सतह पर आ गया है और ज़ोर से सा गया है। घोर खाँटी कोंग्रेसी मिलिंद देवड़ा ने राहुल गांधी और उनकी टीम के खिलाफ खुल के बोला है। आज से करीब 9 महीने पहले ही मैंने 18 जुलाई 2013  को अपने एक "काँग्रेस बगावत के बारूद पर" लेख मे कारण सहित साफ-साफ कह दिया था काँग्रेस बगावत के मुहाने पर खड़ी है जो कभी भी फट सकता है मैंने उसी समय ये कहा था काँग्रेस में एक वर्ग ऐसा भी है जो पार्टी को सोनिया-राहुल-प्रियंका और उस परिवार से मुक्त करना चाहता है। उस समय से लेकर काँग्रेस के शर्मनाक पराजय तक किसी भी प्रिंट मीडिया या चैनल चाहे वो राष्ट्रीय हो स्थानीय में इस तरह की कोई खबर नहीं चली। उसके बाद से ही जगदंबिका पाल सहित करीब दो दर्जन सांसदों ने काँग्रेस छोड कर भाजपा में आने का प्रयास शुरू कर दिया था जो चुनाव की अधिसूचना के बाद तक भाजपा मे शामिल हो चुके थे। मेरे उस लेख को मेरे टाइमलाइन पर उक्त तिथि की पोस्ट में देखा जा सकता है। मेरे इस लेख पर एक राष्ट्रीय स्तर बहुत बड़े अखबार के संपादक ने खिल्ली भी उड़ाई थी और मेरा मज़ाक भी बनाया था। क्या मीडिया कोई ऐसा है ही नहीं जो जन मनोभावों (Public Attitude) को पढ़ने की थोड़ी भी क्षमता रखता हो ? वैसे उन संपादक की प्रोफ़ाइल और पोस्टिंग से ऐसा बिलकुल नहीं लगता को काँग्रेस समर्थक हैं फिर भी पता नहीं क्यों मेरे आलेख पर उनको विश्वास ही नहीं हो रहा था। मेरे हिसाब से यदि भारत की पत्रकारिता निर्भीक और जीवंत है तो ऐसे लेख और इससे संबन्धित समाचार साल भर पहले ही मीडिया में प्रमुखता से चलने चाहिए थे। आज की तारीख में भी राष्ट्रीय स्तर पर बहुत से ऐसे पत्रकार भी हैं जिनको इस चुनाव परिणाम से बहुत दुख है और वे अपनी पीड़ा छिपा नहीं पा रहे हैं। इसी से पता चलता है मीडिया में पत्रकारों का स्तर क्या है ऐसे लोग पत्रकारिता के नाम पर जो कर रहे हैं वो किसी से छिपा नहीं है। इसीलिए ज़्यादातर विश्लेषण और उनके निष्कर्ष सिरे से गलत साबित होते हैं और वे निरंतर अपनी विश्वसनीयता खोते जा रहे हैं। पुष्टि के लिए मेरे टाइमलाइन पर 18 जुलाई 2013 की मेरी "काँग्रेस बगावत के बारूद पर" शीर्षक की पोस्ट देखें ....

Wednesday, 21 May 2014

रेंगत सैम करे मनुहार...

पिछले वर्ष 6 फरवरी 2013 को जब मैंने पहली बार श्रीराम कालेज, नई दिल्ली में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी को विशुद्ध नीतिगत मामलों पर बोलते हुए सुना था तभी मैंने सर्वप्रथम अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा से उनकी तुलना करते हुए कहा था कि नरेन्द्र भाई मोदी कई मामलों में बराक ओबामा से काफी बेहतर हैं यद्यपि इसके लिए मैंने सिर्फ 5 मौलिक बिन्दु ही लिए थे तुलना करने के लिए जिसे मेरे टाइमलाइन पर 8 फरवरी 2013 की तिथि को देखा जा सकता है। वैसे ऐसे दर्जनो बिन्दु हैं जिन पर मोदी जी के आगे बराक ओबामा कहीं ठहरते ही नहीं। कमाल देखिये जब केवल मामूली से धन्यवाद ट्वीट के मामले में जब ओबामा को मोदी जी ने प्राथमिकता नहीं दी और काफी नीचे रखा तो उसी पर पूरा अमेरिकी प्रशासन हिल गया। अभी तो मोदी जी सरकार भी नहीं बनी है और प्रचंड और आक्रामक विदेश नीति के संकेत मिलने लगे हैं। अमेरिकी सीनेटर जॉन मैक्केन ने प्रधानमंत्री मोदी को बधाई देते हुए सम्बन्धों को पुनर्जीवित की गुहार लगाई है। वहीं उधर अमेरिका के विदेश जॉन एफ॰ केर्री भी मोदी की मनुहार करने में रेगते नजर आ रहे हैं बार - बार दुहाई दे रहे हैं कि मोदी जी वीजा प्रकरण को अतीत मान कर भूल जाएँ। क्या इसके पहले किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रशासन ने कभी भी किसीकी ऐसी मनुहार करते देखा या पढ़ा ? अभी तो ये आलम है मामूली से मात्र ट्वीट के मुद्दे पर ही मोदी ने पूरे ओबामा प्रशासन हिला के रख दिया जब बड़े मुद्दे आएंगे तब ओबामा क्या करेंगे ? देखने वाली बात होगी ओबामा या अमेरिकी प्रशासन भारत के प्रधानमंत्री मोदी का कैसे सामना करता है। वैसे भी मोदी के रूप में जैसा शक्तिशाली प्रधानमंत्री मिला है उससे अमेरिका और चीन का चिंतित होना अप्रत्याशित बिलकुल नहीं लग रहा है। जैसा मैंने फरवरी 2013 में नरेन्द्र भाई मोदी को विश्वनेता कहा था प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी को विश्वनेता के रूप मे स्थापित करने से कोई रोक सकता है कम से कम आज के तारीख में तो किसी भी देश में कोई भी मुझे तो नहीं दिखता।

Monday, 12 May 2014

मारे त्रिपुंड मूंढ़िया, चियारे दाँत बकलोल...

जैसे छछूंदर अपने सर पर चमेली का तेल लगा कर निकलता है ठीक वैसे ही काँग्रेस कुमार केजरीवाल अपने माथे पर त्रिपुंड लगाए बनारस में घूम रहे हैं। जैसे छछूंदरों को हमेशा भोजन की तलाश रहती है वैसे ही तलाश केजरीवाल को वोटों की है छछूंदर अपने सर पर चमेली का तेल लगा लेता है तो उसे लगता है भोजन स्वादिष्ट मिलेगा ठीक यही उम्मीद केजरीवाल को भी है कि कम से कम वोट कायदे का मिल जाए। केजरीवाल ब्रांड एक बकलोल आपिया बता रहा था "...केजरीवाल के आने से राजनीति में परिवर्तन तो आया है ..." मुझे उस बकलोल की दलील बड़ी अजीब सी लगी मैंने कहा "...हाँ आया तो है केजरीवाल को त्रिपुंड लगा कर घूमना पड़ रहा है ...लानत है ऐसे परिवर्तन को आपिया जी ..." बकलोल आपिया थोड़ा तैश में आ और आपा खोते हुए ऊंची आवाज में बोलते हुए बोला "...आपको भ्रष्टाचार नहीं दिखता ..." मैंने उसका उत्तर देते हुए कहा "...चुनाव के दिन त्रिपुंड लगा कर तुम्हारा बॉस केजरीवाल घूम रहा है इससे बड़ा भ्रष्टाचार और क्या हो सकता है ...?" बकलोल आपिया बोला "...ये किसी का मौलिक अधिकार है इससे कोई वंचित नहीं कर सकता ..." मैंने कहा "...बिलकुल भ्रष्टाचार आपका अधिकार है और कोई आपको इससे वंचित नहीं कर सकता ...त्रिपुंड लगा कर घूमना उसी का नमूना है..." बकलोल आपिया और गुस्से मे आ गया और पूछा "...वो कैसे ..." मैंने उसे समझाते हुए कहा "...बकलोल दास आपिया ! तुमहरा बॉस तो तुम लोगों से भी गया -गुजारा बकलोल है उसे तो ये भी नहीं पता कि चुनाव के दिन त्रिपुंड लगा कर घूमने से लोग उसे ठग समझ लेंगे ..." बकलोल आपिये की जिज्ञासा बढ़ गई , पूछने लगा "...वो कैसे...?" मैंने उसका उत्तर देते हुए कहा "...जैसे छछूंदर सर पर तेल लगाता है वैसे केजरीवाल ने त्रिपुंड लगाया है आज..." बकलोल आपिया बोला "...तो इसमे ठगई वाली बात कहाँ से आ गई ...?" मैंने ज़ोर देते हुए उससे पूछा "... अरे बकलोल दास आपिया ! छछूंदर सर पर साल मे कितने दिन चमेली का तेल लगता है..." बकलोल आपिया बोला "...पता नहीं ..." मैंने उसपर तंज़ कसते हुए कहा "...इसीलिए तुम बकलोल हो और तुम्हारा बॉस महाबकलोल...लानत है तुम्हारी डिग्री पर..." बकलोल आपिया बोला "...देखिये हमको बकलोल मत कहिए ..." मैंने कहा "...आपसे ज्यादा बुद्धिमान तो वो छछूंदर है जो चमेली का तेल लगा कर निकलता है ..." बकलोल आपिया ने मुझे पूछा "...आपने बताया नहीं केजरीवाल के ठगई के बारे में ..." मैंने कहा "...जैसे तुमने जितनी बार छछूंदर को चमेली का तेल लगा के घूमते हुए देखा है उसी प्रकार केजरीवाल को भी दिखना चाहिए था ...महामूर्ख ठग...वैसे मैंने तो सुना था कि ठग बहुत बुद्धिमान होते हैं लेकिन केजरीवाल निरा महाँमूर्ख ठग निकला ..." बकलोल आपिया ज़ोर -ज़ोर से अपना कपार खजुआने लगा तो मैंने वहाँ से खिसक लिया ... 

Saturday, 10 May 2014

आँख देखावे ममता, छाती पीटे बंगाल ...

ममता जी नेरेन्द्र भाई मोदी को जेल मे बंद कर देतीं...अगर वो दिल्ली में होती ऐसे उन्होने कई बयान दिये ...क्या जमाना आ गया पता नहीं सारे अंडों की अकल कहाँ चली गई कि वे सब अपनी माँताओं को हड़काने पर उतारू दिखने लगे...अंडे हड़काते हुए कह रहे हैं "..चू-चू न कर..." बेचारी ममता तो ममता की भूखी हैं बंगाल की जनता की ममता भी मोदी की ओर मुड़ने लगे समझ लीजिये ममता को गमछा भी कम पड़ जाएगा पसीना पोछने के लिए। ममता भरी गमछा तो उसी दिन हवा हो गया जब दिल्ली मे वो अन्ना बाबा के साथ रैली रामलीला मैदान मे करने वाली थीं लेकिन मोदिमय जनता और अन्ना बाबा ने जब ठेंगा दिखा दिखा दिया तो सारी उनकी सारी ममता मातम मनाने लगी और उद्गार निकले वो भारतीय लोकतन्त्र पर ढेला और पत्थर फेंकेने जैसा ही है जैसा आपिए कर रहे हैं। उनके एक पुराने त्रिमूक्का नेता बता रहे थे "...बंगाल में तो ममता ही हैं ..." मैंने पूछा "...फिर उनको गरियाने की क्या जरूरत है ..." त्रिमूक्का नेता उत्तर देते हुए बोले "...वो गाली नहीं ममता की ममता है ..." "...अगर यही ममता है तो निर्ममता क्या है ...?" त्रिमूक्का नेता अचकचाते हुए बोले "... बंगाल की जनता अपनी ममता और निर्ममता दिखा देगी ..." मैंने फिर "...आपको इतना कॉन्फ़िडेंस कैसे है ...?" त्रिमूक्का नेता उत्तर देते हुए बोले "...बंगाल की जनता बहुत बुद्धिजीवी है ..." मैंने प्रश्न पूछते हुए कहा "...इसीलिए ममता जी को गाली की भाषा का इस्तेमाल करना पड़ रहा है ...!" त्रिमूक्का नेता बोले "...वो गाली नहीं दे रही हैं ..." मैंने प्रतिप्रश्न मे कहा "...क्या बंगाल के जनता की यही बुद्धिजीविता है ...?" त्रिमूक्का नेता से अब रहा नहीं गया वो उन्होने सीधे मुझसे पूछा "...आपके कहने का क्या मतलब है...?" मैंने बड़ी सफाई और शांति से कहा "...मेरे कहने का वही मतलब है जो आपको समझ में आ रहा है ..." त्रिमूक्का नेता बोले "...क्या समझ मे आ रहा है ..." मैंने उत्तर देते हुए कहा "... बंगाल को कंगाल करें आप जेल जाएँ मोदी ...?" त्रिमूक्का नेता बोले "...हमने बंगाल की जनता को उसका हक दिया है ...?" मैंने कहा "...अच्छा ! तो हक देने के बाद गाली देने की कौन से बंगाल सी समृद्ध परंपरा का आप निर्वहन कर रहे हैं ..." त्रिमूक्का नेता तिलमिला कर बोले "...आपको अंदाजा नहीं है ..." मैंने पूछा "...क्या अंदाजा नहीं है ..." त्रिमूक्का नेता बोले "...ममता के खिलाफ कोई नहीं जा सकता ..." मैंने पूछा "...क्यों भाई ! ये धमकी किस लिए ...?" नेता अपने ओरिजनल अंदाज में आ गए "...जब दिल्ली में अन्ना धरना देने रामलीला मैदान नहीं आए तो आपने देख लिया न ..." मैंने उत्तर देते हुए कहा "...हाँ देखा तो आप लोग त्रिमूक्का नेताओं ने अन्ना बाबा की ऐसी-तैसी कर दी थी ..." नेता बोले उसी तरह ऐंठते हुए बोले "...हाँ अब कभी भी अन्ना हम लोगो से पंगा नहीं लेंगे ..." मैंने कहा "...एक बात बताईए उसका खुन्नस मोदी पर क्यों ..." नेता बोले "...क्योंकि सब एक ही हैं ..." मैंने त्रिमूक्का नेता को कहा नमस्कार आपकी बुद्धि को नमस्कार...बारंबार नमसकार  

Saturday, 3 May 2014

धूल उड़ावे धुरिया झारे, पाथर जीवै जान....... ?

जीजी को मोदी जी ने 'बेटी' कहा तो जीजी को बिलकुल अच्छा नहीं लगा। कॉंग्रेस मे कोई किसी का पुत्र, पुत्री, भाई, बहन, माता के रिश्ते नहीं बनते। ये कोंग्रेसी संस्कृति है जिसका नमूना आए दिन बुजुर्ग खाँटी भाई कोंग्रेसी लोग पेश करते जा रहे हैं। अब शहजादे के घोषित गुरु दिग्गी राजा को जरा लोक - लाज की दुहाई देंगे तो क्या होगा ? बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि दिग्गी राजा आपका मुंह नोच लेंगे ठीक उसी मूर्ख और पाजी बंदर की तरह जिसे किसी चिड़िया ने अपना घर बनाने को कहा तो बंदर न सिर्फ उसका घोसला नोच कर फेंक डाला बल्कि उस चिड़िया और उसके बच्चों को भी खा लिया। वैसे भी काँग्रेस के जीवित आदर्शों पुरुषों( लिविंग लेजेंड जैसे ना॰ द॰ तिवारी आदि ) ने  पिता होने बिलकुल प्रमाणिक और वैज्ञानिक आयाम प्रदान किया जिसे "जैविक पिता" की संज्ञा दी गई है। एक खाँटी भाई कोंग्रेसी ललकार रहे थे "...प्रियंका जी ने मोदी को बहुत सही जवाब दिया है ..." मैंने पूछा "...तो क्या पूरी काँग्रेस 'ना॰ द॰ तिवारी प्रोविटी थ्योरी' पर स्थापित कर चुकी है ..." खाँटी भाई बोले "...हम बेहद वैज्ञानिक लोग हैं प्रमाणिकता मे विश्वास करते हैं ..." मैंने ज़ोर देकर पूछा "...किसी भी मान्यता और विश्वास पर भी नहीं...?" खाँटी भाई बोले "...विश्वास का प्रामाणिक आधार होना चाहिए ..." मैंने कहा "...इसीलिए मोदी जी की मान्यता को जीजी ने सिरे से खारिज कर दिया...!" खाँटी भाई बोले "...हाँ बिलकुल..." मैंने जिज्ञासावश पूछा "...मतलब ये है की जीजी को ना॰ द॰ तिवारी, शाहजादे के गुरु दिग्गी राजा, प्रमाणिक कानूनची मनु सिंघवी आदि जैसे मूर्धन्य कोंग्रेसियों की ही मान्यता पसंद है...!" खाँटी भाई बोले "...नेहरू ने ही भारत की खोज की थी, राजीव गांधी ने कम्प्युटर की, मनमोहन सिंह ने मोबाईल की लिहाजा हमे तो प्रामाणिक और वैज्ञानिक तो होना ही होगा ..." मेरा सर चकराने लगा था खोजकर्ताओं के नाम सुन कर मैंने पूछा  "...आपकी काफी डिमांड है चुनाव प्रचार मे...?" खाँटी भाई सीना चौड़ा करते हुए बोले "...हाँ वो चुनाव मे जीजी के साथ - साथ रहना पड़ता है न ..." मैंने कहा "...हाँ वो तो है लेकिन आप काफी थक गए हैं ..." खाँटी भाई ज़ोर देकर बोले "...अरे नहीं नहीं! हम बिलकुल तरोताजा हैं चुनाव प्रचार अलग चीज है मानसिक और शारीरिक शक्ति बिलकुल अलग ..." मैंने कहा "...नहीं आपके ज्ञान को देखकर लगा था खैर छोड़िए ..." मैंने आगे पूछा "...तो पूरी कॉंग्रेस ना॰ द॰ तिवारी के बाद सिर्फ 'जैविक पिता' के सिद्धान्त पर एक मत से कायम है ...?" खाँटी भाई बोले "... कॉंग्रेस की ये समृद्ध परंपरा ही नहीं संस्कृति भी रही है कि हम हमेशा सत्य का साथ देते हैं असत्य का नहीं ...मोदी जीजी के पिता कैसे हो सकते हैं ...?" मैंने आश्चर्य से कहा "...हाँ ! हो तो नहीं सकते लेकिन मान तो सकते ही हैं ..." खाँटी भाई अपना प्रचंड तर्क देते हुए बोले "...जो है ही नहीं उसे मानने की क्या जरूरत है ...? बोलिए " मेरे पास उनके तर्क का कोई जवाब नहीं था ... 

Thursday, 1 May 2014

मंतर मारे मरघट , बुढ़ऊ करे बियाह...

बनारस के चचा चिरौंजी बताते हुए पूछ रहे थे "...अबकी बार दिग्गी बहार, तो अजय राय का क्या विचार ...?" खाँटी भाई कोंग्रेसी लोग तो आपिए बन नहीं सकते कि पथराव कर देंगे अपने ही गार्जियन पर लिहाजा खाँटी भाई लोग के मुंह से लुआठी पानी बन के बहता जा रहा है जिसे कुछ लोग काँग्रेस की फितरत ही बताते हैं एन॰ डी॰ तिवारी से लेकर अभिषेक मनु सिंघवी तक बिना अपवाद लंबी फेरहिस्त है। लगे हाथ चचा चिरौंजी से एक अति दुर्लभ बनारसी खाँटी भाई से पिल पड़े पूछने लगे "...का गुरु वर पक्ष के हौ कि कन्या पक्ष के ...?" खाँटी भाई  काफी असहज हो गए कुछ बोलते ही नहीं बन रहा था वो अस्सी घाट से मणिकर्णिका घाट की ओर निहारने लगे तो फिर चचा चिरौंजी चुटकी लेते हुए बोले "...गुरु बारात  मणिकर्णिका घाट से हरिश्चंद्र घाट जाई कि हरिश्चंद्र घाट घाट से मणिकर्णिका घाट...?" खाँटी भाई अपने चेहरा छुपाते हुए बोले "...चचा हम नारी सशक्तिकरण के बारे में सोचत रहली ...?" चचा चिरौंजी चुटकी लेते हुए बोले "...दिग्गी राजा के मोदी के डर से ऊहे सशक्त नारी बचाई का ...?" खाँटी भाई लज्जा से बोले "...अब का कहीं चचा कुच्छू समझ ना आवत हौ ..." चिरौंजी चचा ने पूछा "...कब्बो दिल्ली के मेट्रो मे बाईठल हौ गुरु ...?" खाँटी भाई उत्तर देते हुए बोले "...काहें उहसे एहसे का मतलब ...?" चिरौंजी चचा बोले "...मेट्रो मे कुल निर्लज्ज कुवांर जोड़ा बाईठले असामाजिक हरकत करेलन और अगर उनके बगल कौनों शरीफ आदमी या औरत बाईठल हौ त उनके सुत्ते के बहाना बानवे के पड़ेला मारे लाज के ..." चिरौंजी चचा ने आगे सहमति लेने के लिए पूछा "...सुनतहौ गुरु ...?" खाँटी भाई ने सहमति दर्शाई तो फिर चचा चिरौंजी बोले "...मने निर्लज्ज कुवांर जोड़वन के कौनों शरम लाज नहीं लेकिन देखे वालन के मारे लाजन आँख मूदे के बहाना करे के पडत हौ दिल्ली मेट्रो मे..." खाँटी भाई ने पूछा "...तो चचा...?" चचा बोले "...तौ माने ई कि दिग्गी राजा उहे हाल काईले हवन ऊ मेट्रो के निलज्ज जोड़ा हौ और बाकी सब देखे वाले अब सबके मारे लाज सुत्ते के बहाना करे के पड़ी आँख मूदे के पड़ी...!" खाँटी भाई चिरौंजी चचा से आग्रह करते हुए बोले "...चचा अब चुप्प हो जा ..." चचा बोले "...एन॰ डी॰ तिवारी, अभिषेक मनु सिंघवी ऊपर से लेके नीचे तक तू केहू के तब चुप ना कराईला अब हमसे चुप्पी साधे के कहथौ...!" खाँटी भाई अपना बचाव करते हुए बोले "...अब हमरे हाथ मे त कुछ हौ ना चचा ..." चिरौंजी चचा चुटकी लेते हुए बोले "...अब त लगत हौ कि मय काँग्रेस पार्टी नारी सशक्ति मे व्यस्त हौ ..." खाँटी भाई बोले "...दिग्विजय सिंह के छोड़ दिहाल जाऔ त राहुल जी का पसंदीदा प्रोजेक्ट हौ ..." चचा चिरौंजी कटाक्ष करते हुए बोले "...इसलिए बुढ़वन के भी युवा जोश चढ़ गईल हौ ..." ये सुन कर खाँटी भाई कोंग्रेसी वहाँ से जाने लगे...