'बानर' फाड़े 'बैनर' ममता बोले कांव...
कितने ही लोग ऐसे हैं जो जिस थाली मे खाते हैं उसी मे छेद करने से बाज नहीं आते, काँग्रेस कुमार केजरीवाल भी उसके अपवाद नहीं है। वो बिलकुल अलग तरह की राजनीति करने का दावा करते हैं ईमानदारी के साथ भ्रष्टाचार करते हैं, दुराचार करते हैं आदि आदि ठीक उसी तर्ज पर 'वर्दी वाला गुंडा' जिससे वेद प्रकाश शर्मा मशहूर हो गए जो शायद किसी भ्रष्ट नेता के लिए भी उतना संभव न हो। खैर राजनीति बदल ही नही रही है गुलटिया भी मार रही है। बदलते राजनीति के दौर में एक बात बड़ी मौलिक हैं कुछ तो ऐसे भी हैं जो जिस बैनर के तले रहते हैं उसके प्रति थोड़ी ममता भी दिखाने के बजाय उसी 'बैनर' को फाड़ने पर उतारू हो जाते हैं इसमे गुलटिया वाला तथ्य भी जोड़ देते हैं दूसरों को कसाई बता कर। दीदी की ये दादागिरी कई मायनों 'बहनजी' जी बहकाऊ (बहक आऊ = कृपया एक ही में पढ़ें ) नीति से मेल भी खाती है। खैर अभी तो सब कुछ प्रक्रिया मे ही है लेकिन 'बैनर' फाड़ने के अपने अंदाज का उनका जबर्दस्त प्रगतिकरण है जो इस आशंका में बहुत अधिक सक्रिय हो गया है कि इस सुनामी में खुद उनका ही बैनर खतरे में है। जिसे उनके एक मशहूर दुश्मन जो मोदी को भी अपना दुश्मन मानते हैं हाल मे कह डाला "...अब मोदी और भाजपा को रोक पाना असंभव है ..." यही सुनते ही ममता जी अपने बैनर की लज्जा बचाने के लिए गुलटिया मारने लगीं। एक त्रिमूक्का नेता बता रहे थे "...दीदी का स्टैंड बिलकुल साफ है ..." तो मैंने तपाक से पूछा "...तो हर किसी का बैनर फाड़ डालने का माद्दा रखती हैं ...?" त्रिमूक्का नेता चीखते हुए बोले "... बंगाल के स्वाभिमान पर हम चोट नहीं होने देंगे ..." मैंने कहा "...दूसरे बंगाल के स्वाभिमानी नेता तो मोदी के नाम पर अपना गाल बाजा रहे हैं ..." त्रिमूक्का नेता बोले "...उन लोगों की दुकान बंद हो चुकी है ..." मैंने पूछा "...'बानर' बिना 'जी' वाला अंदाज कैसे लाते हैं आप लोग..." त्रिमूक्का नेता बोले "... आपको गलतफहमी है ..." मैंने उत्सुकतावश पूछा "...कैसे 'बानरजी' से आप लोग उत्पात मचवा लेते हैं ...?" त्रिमूक्का नेता मंद-मंद मूस-काटे हुए बोले "...यही तो राज है हमारी सफलता का ..." मैंने फिर उसी अंदाज में पूछा "...तो क्या आप लोग उसी 'बानरजी' पर पुनः दांव लगाना चाहेगे ..." त्रिमूक्का नेता बोले "...हाँ - हाँ बिल्कुल..." मैंने कहा "...लेकिन अभी तो मोदी जी पार्टी यहाँ है ही नहीं ..." त्रिमूक्का नेता बोले "...लेकिन सहयोग जरूरी है ..." मैंने कहा "...जब आप उससे लड़ रहे हैं जो आपका विपक्ष ही नहीं है ..." त्रिमूक्का नेता बोले "...आप घबराईए बिल्कुल मत कुछ जीतेंगे..." मैंने फिर पूछा "...हवा में तलवारबाजी करने से कहीं आपका आपका ही 'बैनर' फट गया और ममता गायब हो गई तो ...?" त्रिमूक्का नेता उत्तर देते हुए बोले "...इसी हमलोग लोगों को सावधान कर रहे हैं ..." मैंने चुटकी लेते हुए कहा "....लेकिन मोदी तो चैन के विश्राम के साथ विकास की बात कर रहे हैं ..." उसी सामय 'बैनर' के साथ 'बानरों' की फौज भी आ गई जिसमे कोई ममता नहीं थी ...
कितने ही लोग ऐसे हैं जो जिस थाली मे खाते हैं उसी मे छेद करने से बाज नहीं आते, काँग्रेस कुमार केजरीवाल भी उसके अपवाद नहीं है। वो बिलकुल अलग तरह की राजनीति करने का दावा करते हैं ईमानदारी के साथ भ्रष्टाचार करते हैं, दुराचार करते हैं आदि आदि ठीक उसी तर्ज पर 'वर्दी वाला गुंडा' जिससे वेद प्रकाश शर्मा मशहूर हो गए जो शायद किसी भ्रष्ट नेता के लिए भी उतना संभव न हो। खैर राजनीति बदल ही नही रही है गुलटिया भी मार रही है। बदलते राजनीति के दौर में एक बात बड़ी मौलिक हैं कुछ तो ऐसे भी हैं जो जिस बैनर के तले रहते हैं उसके प्रति थोड़ी ममता भी दिखाने के बजाय उसी 'बैनर' को फाड़ने पर उतारू हो जाते हैं इसमे गुलटिया वाला तथ्य भी जोड़ देते हैं दूसरों को कसाई बता कर। दीदी की ये दादागिरी कई मायनों 'बहनजी' जी बहकाऊ (बहक आऊ = कृपया एक ही में पढ़ें ) नीति से मेल भी खाती है। खैर अभी तो सब कुछ प्रक्रिया मे ही है लेकिन 'बैनर' फाड़ने के अपने अंदाज का उनका जबर्दस्त प्रगतिकरण है जो इस आशंका में बहुत अधिक सक्रिय हो गया है कि इस सुनामी में खुद उनका ही बैनर खतरे में है। जिसे उनके एक मशहूर दुश्मन जो मोदी को भी अपना दुश्मन मानते हैं हाल मे कह डाला "...अब मोदी और भाजपा को रोक पाना असंभव है ..." यही सुनते ही ममता जी अपने बैनर की लज्जा बचाने के लिए गुलटिया मारने लगीं। एक त्रिमूक्का नेता बता रहे थे "...दीदी का स्टैंड बिलकुल साफ है ..." तो मैंने तपाक से पूछा "...तो हर किसी का बैनर फाड़ डालने का माद्दा रखती हैं ...?" त्रिमूक्का नेता चीखते हुए बोले "... बंगाल के स्वाभिमान पर हम चोट नहीं होने देंगे ..." मैंने कहा "...दूसरे बंगाल के स्वाभिमानी नेता तो मोदी के नाम पर अपना गाल बाजा रहे हैं ..." त्रिमूक्का नेता बोले "...उन लोगों की दुकान बंद हो चुकी है ..." मैंने पूछा "...'बानर' बिना 'जी' वाला अंदाज कैसे लाते हैं आप लोग..." त्रिमूक्का नेता बोले "... आपको गलतफहमी है ..." मैंने उत्सुकतावश पूछा "...कैसे 'बानरजी' से आप लोग उत्पात मचवा लेते हैं ...?" त्रिमूक्का नेता मंद-मंद मूस-काटे हुए बोले "...यही तो राज है हमारी सफलता का ..." मैंने फिर उसी अंदाज में पूछा "...तो क्या आप लोग उसी 'बानरजी' पर पुनः दांव लगाना चाहेगे ..." त्रिमूक्का नेता बोले "...हाँ - हाँ बिल्कुल..." मैंने कहा "...लेकिन अभी तो मोदी जी पार्टी यहाँ है ही नहीं ..." त्रिमूक्का नेता बोले "...लेकिन सहयोग जरूरी है ..." मैंने कहा "...जब आप उससे लड़ रहे हैं जो आपका विपक्ष ही नहीं है ..." त्रिमूक्का नेता बोले "...आप घबराईए बिल्कुल मत कुछ जीतेंगे..." मैंने फिर पूछा "...हवा में तलवारबाजी करने से कहीं आपका आपका ही 'बैनर' फट गया और ममता गायब हो गई तो ...?" त्रिमूक्का नेता उत्तर देते हुए बोले "...इसी हमलोग लोगों को सावधान कर रहे हैं ..." मैंने चुटकी लेते हुए कहा "....लेकिन मोदी तो चैन के विश्राम के साथ विकास की बात कर रहे हैं ..." उसी सामय 'बैनर' के साथ 'बानरों' की फौज भी आ गई जिसमे कोई ममता नहीं थी ...
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