ये चीलम है अलबेला, पीए गुरु मस्त रहे चेला ...
आखिर जीजी ने चीलम फूँक ही दिया दिया क्या करे बेचारी, जीजा जो पहले अलकतरा लिए बड़े शान से घूमते थे जहां मौका मिला निकाला अलकतरा और चिपका लिया जितना चाहा उतना। एक बिलायती अखबार जिसके बारे मे लोगबाग बताते हैं उसकी बिल्ली जैसी आँखें हैं लिहाजा कोई भी 'चूहा' अलकतराबाजी करके यूं ही नहीं निकल सकता। फिर तो अखबार ने जीजाजी के लेखाजोखा का आंखो देखा हाल छाप डाला। जीजाजी ने भी बहुत अवसर बनाया खूब बनाया। बिल्लौरी आँखों वाला अखबार बताता है कि कोई यही 300 करोड़ मात्र 5 साल मे मात्र 1 लाख से बनाया जीजा जी ने। जब इसका धुआँ उठने लगा तो उसे दबाने के लिए जीजी ने चीलम फूँक दिया। एक खाँटी भाई कोंग्रेसी चीखते हुए दावा जता रहे थे "...कोई लहर नहीं है ..." मैंने प्रतिप्रश्न मे कहा "...किसने लहर की बात की ..." खाँटी भाई खुश हो गए बोले "...यही तो कोई लहर-वहर नहीं है ..." मैंने प्रतिप्रश्न मे कहा "...लहर नहीं है तो चिल्ला क्यों रहे हैं...?" खाँटी भाई बोले "... मैं नहीं विपक्ष के लोग चिल्ला रहे हैं ..." मैंने कहा "...तूफान आता है सजीव की तो छोड़िए निर्जीव चीजें भी ज़ोर-ज़ोर से आवाज करने लगती हैं..." खाँटी भाई गुस्से मे आ गए बोले "...आपका मतलब क्या है ...?" मैंने उत्तर देते हुए कहा "...जो तूफान को नहीं मानते उनको बड़ी तेज चोट लगती है ..." खाँटी भाई थोड़ा तैश मे बोले "...हम इस तूफान को रोक देंगे ..." मैंने चुटकी लेते हुए कहा "...तो क्या इसीलिए जीजी ने चीलम फूँक दिया ..." खाँटी बही बोले "...मैं फिर कह रहा हूँ कोई लहर नहीं है ..." मैंने कहा "...लेकिन जीजाजी का धुआँ तो है ही ..." खाँटी बही बोले "...आपको जो धुआँ -धुआँ दिख रहा है वो दरअसल हमारा प्रभाव है ..." मैंने उसी अंदाज मे कहा "...जब आपका प्रभाव है तो जीजी ने चीलम क्यों फूँक दिया ...." खाँटी भाई बोले "...हमारे काम करने की अपनी शैली है ..." मैंने उनसे पूछा "...तो क्या जीजी के चीलम से जीजाजी के धुएं की दुर्गंध दाब जाएगी ...?" खाँटी भाई फिर चीखते हुए बोले "...हम मोदी की लहर को रोक देंगे ..." मैंने उन्हें टोकते हुए कहा "...कोई भी जानवर चाहे कितना भी पालतू क्यों न हो बैक गियर मे नहीं चलता ..." खाँटी भाई धमकी देते हुए बोले "...अगर मोदी प्रधानमंत्री बन गए तो देश जल उठेगा ..." मैंने फिर चुटकी लेते हुए पूछा "...क्या जीजी के चीलम में इतना दम है ...?" खाँटी भाई और तैश में बोले "....सारे अखबार वाले बिके हुए हैं, मीडिया को खरीद लिया गया है सब झूठ बोल रहे हैं ..." मैंने कहा "...जीजी से बोल दीजिये चीलम का धुआँ उधर भी फिरा दें ..." खाँटी भाई उसी धमकी वाले अंदाज में कहा "... सरकार काँग्रेस की ही बनेगी चाहे कुछ भी हो जाए आप देखिएगा ..." मैंने कहा "...लगता है जीजी के चीलम का असर खाँटी भाई कोंग्रेसियों पर हो रहा है ..." खाँटी भाई बोले "...देखिये जीजाजी ने कोई गलत काम नहीं किया ..." मैंने कहा "...बिलायती अखबार की बिल्लौरी काँखों से कोई भी चूहा बच नहीं सकता ...लिहाजा जीजी के चीलम का ही सहारा बचा है ...!" खाँटी भाई कोंग्रेसी केजरीवाल को फोन लगाने लगे तो मुझे वहाँ निकलना पड़ा...
आखिर जीजी ने चीलम फूँक ही दिया दिया क्या करे बेचारी, जीजा जो पहले अलकतरा लिए बड़े शान से घूमते थे जहां मौका मिला निकाला अलकतरा और चिपका लिया जितना चाहा उतना। एक बिलायती अखबार जिसके बारे मे लोगबाग बताते हैं उसकी बिल्ली जैसी आँखें हैं लिहाजा कोई भी 'चूहा' अलकतराबाजी करके यूं ही नहीं निकल सकता। फिर तो अखबार ने जीजाजी के लेखाजोखा का आंखो देखा हाल छाप डाला। जीजाजी ने भी बहुत अवसर बनाया खूब बनाया। बिल्लौरी आँखों वाला अखबार बताता है कि कोई यही 300 करोड़ मात्र 5 साल मे मात्र 1 लाख से बनाया जीजा जी ने। जब इसका धुआँ उठने लगा तो उसे दबाने के लिए जीजी ने चीलम फूँक दिया। एक खाँटी भाई कोंग्रेसी चीखते हुए दावा जता रहे थे "...कोई लहर नहीं है ..." मैंने प्रतिप्रश्न मे कहा "...किसने लहर की बात की ..." खाँटी भाई खुश हो गए बोले "...यही तो कोई लहर-वहर नहीं है ..." मैंने प्रतिप्रश्न मे कहा "...लहर नहीं है तो चिल्ला क्यों रहे हैं...?" खाँटी भाई बोले "... मैं नहीं विपक्ष के लोग चिल्ला रहे हैं ..." मैंने कहा "...तूफान आता है सजीव की तो छोड़िए निर्जीव चीजें भी ज़ोर-ज़ोर से आवाज करने लगती हैं..." खाँटी भाई गुस्से मे आ गए बोले "...आपका मतलब क्या है ...?" मैंने उत्तर देते हुए कहा "...जो तूफान को नहीं मानते उनको बड़ी तेज चोट लगती है ..." खाँटी भाई थोड़ा तैश मे बोले "...हम इस तूफान को रोक देंगे ..." मैंने चुटकी लेते हुए कहा "...तो क्या इसीलिए जीजी ने चीलम फूँक दिया ..." खाँटी बही बोले "...मैं फिर कह रहा हूँ कोई लहर नहीं है ..." मैंने कहा "...लेकिन जीजाजी का धुआँ तो है ही ..." खाँटी बही बोले "...आपको जो धुआँ -धुआँ दिख रहा है वो दरअसल हमारा प्रभाव है ..." मैंने उसी अंदाज मे कहा "...जब आपका प्रभाव है तो जीजी ने चीलम क्यों फूँक दिया ...." खाँटी भाई बोले "...हमारे काम करने की अपनी शैली है ..." मैंने उनसे पूछा "...तो क्या जीजी के चीलम से जीजाजी के धुएं की दुर्गंध दाब जाएगी ...?" खाँटी भाई फिर चीखते हुए बोले "...हम मोदी की लहर को रोक देंगे ..." मैंने उन्हें टोकते हुए कहा "...कोई भी जानवर चाहे कितना भी पालतू क्यों न हो बैक गियर मे नहीं चलता ..." खाँटी भाई धमकी देते हुए बोले "...अगर मोदी प्रधानमंत्री बन गए तो देश जल उठेगा ..." मैंने फिर चुटकी लेते हुए पूछा "...क्या जीजी के चीलम में इतना दम है ...?" खाँटी भाई और तैश में बोले "....सारे अखबार वाले बिके हुए हैं, मीडिया को खरीद लिया गया है सब झूठ बोल रहे हैं ..." मैंने कहा "...जीजी से बोल दीजिये चीलम का धुआँ उधर भी फिरा दें ..." खाँटी भाई उसी धमकी वाले अंदाज में कहा "... सरकार काँग्रेस की ही बनेगी चाहे कुछ भी हो जाए आप देखिएगा ..." मैंने कहा "...लगता है जीजी के चीलम का असर खाँटी भाई कोंग्रेसियों पर हो रहा है ..." खाँटी भाई बोले "...देखिये जीजाजी ने कोई गलत काम नहीं किया ..." मैंने कहा "...बिलायती अखबार की बिल्लौरी काँखों से कोई भी चूहा बच नहीं सकता ...लिहाजा जीजी के चीलम का ही सहारा बचा है ...!" खाँटी भाई कोंग्रेसी केजरीवाल को फोन लगाने लगे तो मुझे वहाँ निकलना पड़ा...
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