बिसुकत भैंस लटकत जान ...
खान साहब की बिसुकती भैंसें जब दूध देना बंद करने लगीं तो डांडा बरसाने लगे भैंसों पर, इससे भैंसें और नाराज हो गईं। भैंसों की नाराजगी के साथ-साथ मोदी नाम के भूत के डर का आलम ये था कि बड़े-बड़े उघटापैची करने वालों ने भी खान साहब का आपा बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे । लेकिन खान साहब की भैंसे कारगिल जैसी जगह में शानदार दूध देती है ये दिव्य ज्ञान उनको कैसे अचानक मिल गया ये अभी भी रहस्य ही है। एक सांपिया बता रहे कि सेकुलरिज़्म के बुर्के का कमाल है ये सब। ये बुर्का बड़े कमाल की चीज है बड़े - बड़े बलात्कारियों को भी मंत्री बनाने का माद्दा रखती है फिर क्या मजाल है भैंसों की। खान साहब भी बहुत पहुंचे फकीर हैं बिसुकी भैंसों से भी दूध बुर्का ओढ़ाकर दूह लेने का माद्दा रखते हैं। लेकिन वो इस बार भैंसों को कारगिल और द्रास जैसी जगह पर ले जाकर बुर्का ओढ़ाने की योजना है उनकी। वैसे इस बारे में किसी घोड़ा-डाक्टर ने बताया कि भैंसों का मूड चेंज करने के लिए कुछ तूफानी करना चाहिए। तो खान साहब को पता चला कि तूफानी तो कोई और करके जेल की हवा खा चुका है चुनावी दारोगा ने तूफानी करने वाले को मय जिंदा बोटी-बोटी सहित जेल मे डाल दिया था। लेकिन मजबूरी ये है कि खान साहब को भैंसो के लिए पहलवानी का डंका उसी के खिलाफ बजाना पड़ रहा है जिससे उनको बेपनाह मोहब्बत है और दोनों मिल कर भैंस की सवारी करते रहते हैं। इसी सवारी करने के चक्कर में तो कितनी भैंसें बिलकुल मरियल हो गईं दूध देना तो कबका बंद कर दिया लिहाजा उनको "पिंक रिवोलूशन" के लिए बूचड़खाना भेजने के बजाय कारगिल भेजना ज्यादा मुफीद और कारगर लग रहा है। बड़े - बड़े नाजायज कसीदे पढे जा रहे हैं लेकिन भैंसे हैं कि भैंसत्व छोडने का नाम ही नहीं ले रहीं, लिहाजा उसी के निमित्त आधिकारिक बयान जारी करना पड़ा जिसका सीधा मतलब यही था कि कोई भी बलात्कारी को जेल नहीं भेजा जाएगा लिहाजा भैंसों को भी तैयार रहना चाहिए। सांपियों के समझ में ही नहीं आ रहा है कि बचाव किसका करें बिसुकती भैंसों का, डांडा बरसाने वालों का, कारगिल का या फिर बलात्कारियों का। खैर एक सांपिया बता रहे थे "...देखिए हमारा स्टैंड बिलकुल साफ है कि नेता जी स्टैंड साफ कर दिया है ..." मुझे समझ में नहीं आया तो स्पष्ट करने का अनुरोध किया तो वे बोले "...हमारे सहयोग के बिना सरकार नहीं बनेगी ..." मुझे उनके उत्तर पर बहुत आश्चर्य हुआ फिर भी मैंने उनसे पूछा "...बिसुकती भैंसों का क्या होगा ...?" सापिए बोले "...हम कोशिश करेंगे कि वो अपना काम करें ..." मैंने कहा "...यानी अब भैंसों को आपकी चिंता बिल्कुल छोड़ देनी चाहिए ..." इस पर सांपिए सकते में आ गए और तिलमिला कर बोले "...हमने ही सब कुछ किया है वो जो भी हैं हमारी ही बदौलत हैं ..." मैंने बीच में ही बात काटते हुए पूछा "...लेकिन अब बदौलत का प्रश्न किधर है ...?" वो कुछ बोल नहीं रहे थे ...कुछ भी नहीं बोल रहे थे ...
खान साहब की बिसुकती भैंसें जब दूध देना बंद करने लगीं तो डांडा बरसाने लगे भैंसों पर, इससे भैंसें और नाराज हो गईं। भैंसों की नाराजगी के साथ-साथ मोदी नाम के भूत के डर का आलम ये था कि बड़े-बड़े उघटापैची करने वालों ने भी खान साहब का आपा बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे । लेकिन खान साहब की भैंसे कारगिल जैसी जगह में शानदार दूध देती है ये दिव्य ज्ञान उनको कैसे अचानक मिल गया ये अभी भी रहस्य ही है। एक सांपिया बता रहे कि सेकुलरिज़्म के बुर्के का कमाल है ये सब। ये बुर्का बड़े कमाल की चीज है बड़े - बड़े बलात्कारियों को भी मंत्री बनाने का माद्दा रखती है फिर क्या मजाल है भैंसों की। खान साहब भी बहुत पहुंचे फकीर हैं बिसुकी भैंसों से भी दूध बुर्का ओढ़ाकर दूह लेने का माद्दा रखते हैं। लेकिन वो इस बार भैंसों को कारगिल और द्रास जैसी जगह पर ले जाकर बुर्का ओढ़ाने की योजना है उनकी। वैसे इस बारे में किसी घोड़ा-डाक्टर ने बताया कि भैंसों का मूड चेंज करने के लिए कुछ तूफानी करना चाहिए। तो खान साहब को पता चला कि तूफानी तो कोई और करके जेल की हवा खा चुका है चुनावी दारोगा ने तूफानी करने वाले को मय जिंदा बोटी-बोटी सहित जेल मे डाल दिया था। लेकिन मजबूरी ये है कि खान साहब को भैंसो के लिए पहलवानी का डंका उसी के खिलाफ बजाना पड़ रहा है जिससे उनको बेपनाह मोहब्बत है और दोनों मिल कर भैंस की सवारी करते रहते हैं। इसी सवारी करने के चक्कर में तो कितनी भैंसें बिलकुल मरियल हो गईं दूध देना तो कबका बंद कर दिया लिहाजा उनको "पिंक रिवोलूशन" के लिए बूचड़खाना भेजने के बजाय कारगिल भेजना ज्यादा मुफीद और कारगर लग रहा है। बड़े - बड़े नाजायज कसीदे पढे जा रहे हैं लेकिन भैंसे हैं कि भैंसत्व छोडने का नाम ही नहीं ले रहीं, लिहाजा उसी के निमित्त आधिकारिक बयान जारी करना पड़ा जिसका सीधा मतलब यही था कि कोई भी बलात्कारी को जेल नहीं भेजा जाएगा लिहाजा भैंसों को भी तैयार रहना चाहिए। सांपियों के समझ में ही नहीं आ रहा है कि बचाव किसका करें बिसुकती भैंसों का, डांडा बरसाने वालों का, कारगिल का या फिर बलात्कारियों का। खैर एक सांपिया बता रहे थे "...देखिए हमारा स्टैंड बिलकुल साफ है कि नेता जी स्टैंड साफ कर दिया है ..." मुझे समझ में नहीं आया तो स्पष्ट करने का अनुरोध किया तो वे बोले "...हमारे सहयोग के बिना सरकार नहीं बनेगी ..." मुझे उनके उत्तर पर बहुत आश्चर्य हुआ फिर भी मैंने उनसे पूछा "...बिसुकती भैंसों का क्या होगा ...?" सापिए बोले "...हम कोशिश करेंगे कि वो अपना काम करें ..." मैंने कहा "...यानी अब भैंसों को आपकी चिंता बिल्कुल छोड़ देनी चाहिए ..." इस पर सांपिए सकते में आ गए और तिलमिला कर बोले "...हमने ही सब कुछ किया है वो जो भी हैं हमारी ही बदौलत हैं ..." मैंने बीच में ही बात काटते हुए पूछा "...लेकिन अब बदौलत का प्रश्न किधर है ...?" वो कुछ बोल नहीं रहे थे ...कुछ भी नहीं बोल रहे थे ...
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