Tuesday, 29 April 2014

'बानर' फाड़े 'बैनर' ममता बोले कांव...

कितने ही लोग ऐसे हैं जो जिस थाली मे खाते हैं उसी मे छेद करने से बाज नहीं आते, काँग्रेस कुमार केजरीवाल  भी उसके अपवाद नहीं है। वो बिलकुल अलग तरह की राजनीति करने का दावा करते हैं ईमानदारी के साथ भ्रष्टाचार करते हैं, दुराचार करते हैं आदि आदि ठीक उसी तर्ज पर 'वर्दी वाला गुंडा' जिससे वेद प्रकाश शर्मा मशहूर हो गए जो शायद किसी भ्रष्ट नेता के लिए भी उतना संभव न हो। खैर राजनीति बदल ही नही रही है गुलटिया भी मार रही है। बदलते राजनीति के दौर में एक बात बड़ी मौलिक हैं कुछ तो ऐसे भी हैं जो जिस बैनर के तले रहते हैं उसके प्रति थोड़ी ममता भी दिखाने के बजाय उसी 'बैनर' को फाड़ने पर उतारू हो जाते हैं इसमे गुलटिया वाला तथ्य भी जोड़ देते हैं दूसरों को कसाई बता कर। दीदी की ये दादागिरी कई मायनों 'बहनजी' जी बहकाऊ (बहक आऊ = कृपया एक ही में पढ़ें ) नीति से मेल भी खाती है। खैर अभी तो सब कुछ प्रक्रिया मे ही है लेकिन 'बैनर' फाड़ने के अपने अंदाज का उनका जबर्दस्त प्रगतिकरण है जो इस आशंका में बहुत अधिक सक्रिय हो गया है कि इस सुनामी में खुद उनका ही बैनर खतरे में है। जिसे उनके एक मशहूर दुश्मन जो मोदी को भी अपना दुश्मन मानते हैं हाल मे कह डाला "...अब मोदी और भाजपा को रोक पाना असंभव है ..." यही सुनते ही ममता जी अपने बैनर की लज्जा बचाने के लिए गुलटिया मारने लगीं। एक त्रिमूक्का नेता बता रहे थे "...दीदी का स्टैंड बिलकुल साफ है ..." तो मैंने तपाक से पूछा "...तो हर किसी का बैनर फाड़ डालने का माद्दा रखती हैं ...?" त्रिमूक्का नेता चीखते हुए बोले "... बंगाल के स्वाभिमान पर हम चोट नहीं होने देंगे ..." मैंने कहा "...दूसरे बंगाल के स्वाभिमानी नेता तो मोदी के नाम पर अपना गाल बाजा रहे हैं ..." त्रिमूक्का नेता बोले "...उन लोगों की दुकान बंद हो चुकी है ..." मैंने पूछा "...'बानर' बिना 'जी' वाला अंदाज कैसे लाते हैं आप लोग..." त्रिमूक्का नेता बोले "... आपको गलतफहमी है ..." मैंने उत्सुकतावश पूछा "...कैसे 'बानरजी' से आप लोग उत्पात मचवा लेते हैं ...?" त्रिमूक्का नेता मंद-मंद मूस-काटे हुए बोले "...यही तो राज है हमारी सफलता का ..." मैंने फिर उसी अंदाज में पूछा "...तो क्या आप लोग उसी 'बानरजी' पर पुनः दांव लगाना चाहेगे ..." त्रिमूक्का नेता बोले "...हाँ - हाँ बिल्कुल..." मैंने कहा "...लेकिन अभी तो मोदी जी पार्टी यहाँ है ही नहीं ..." त्रिमूक्का नेता बोले "...लेकिन सहयोग जरूरी है ..." मैंने कहा "...जब आप उससे लड़ रहे हैं जो आपका विपक्ष ही नहीं है ..." त्रिमूक्का नेता बोले "...आप घबराईए बिल्कुल मत कुछ जीतेंगे..." मैंने फिर पूछा "...हवा में तलवारबाजी करने से कहीं आपका आपका ही 'बैनर' फट गया और ममता गायब हो गई तो ...?"  त्रिमूक्का नेता उत्तर देते हुए बोले "...इसी हमलोग लोगों को सावधान कर रहे हैं ..." मैंने चुटकी लेते हुए कहा "....लेकिन मोदी तो चैन के विश्राम के साथ विकास की बात कर रहे हैं ..." उसी सामय 'बैनर' के साथ 'बानरों' की फौज भी आ गई जिसमे कोई ममता नहीं थी ...

Monday, 28 April 2014

ये चीलम है अलबेला, पीए गुरु मस्त रहे चेला ...

आखिर जीजी ने चीलम फूँक ही दिया दिया क्या करे बेचारी, जीजा जो पहले अलकतरा लिए बड़े शान से घूमते थे जहां मौका मिला निकाला अलकतरा और चिपका लिया जितना चाहा उतना। एक बिलायती  अखबार जिसके बारे मे लोगबाग बताते हैं उसकी बिल्ली जैसी आँखें हैं लिहाजा कोई भी 'चूहा' अलकतराबाजी करके यूं ही नहीं निकल सकता। फिर तो अखबार ने जीजाजी के लेखाजोखा का आंखो देखा हाल छाप डाला। जीजाजी ने भी बहुत अवसर बनाया खूब बनाया। बिल्लौरी आँखों वाला अखबार बताता है कि कोई यही 300 करोड़ मात्र 5 साल मे मात्र 1 लाख से बनाया जीजा जी ने। जब इसका धुआँ उठने लगा तो उसे दबाने के लिए जीजी ने चीलम फूँक दिया। एक खाँटी भाई कोंग्रेसी चीखते हुए दावा जता रहे थे "...कोई लहर नहीं है ..." मैंने प्रतिप्रश्न मे कहा "...किसने लहर की बात की ..." खाँटी भाई खुश हो गए बोले "...यही तो कोई लहर-वहर नहीं है ..." मैंने प्रतिप्रश्न मे कहा "...लहर नहीं है तो चिल्ला क्यों रहे हैं...?" खाँटी भाई बोले "... मैं नहीं विपक्ष के लोग चिल्ला रहे हैं ..." मैंने कहा "...तूफान आता है सजीव की तो छोड़िए निर्जीव चीजें भी ज़ोर-ज़ोर से आवाज करने लगती हैं..." खाँटी भाई गुस्से मे आ गए बोले "...आपका मतलब क्या है ...?" मैंने उत्तर देते हुए कहा "...जो तूफान को नहीं मानते उनको बड़ी तेज चोट लगती है ..." खाँटी भाई थोड़ा तैश मे बोले "...हम इस तूफान को रोक देंगे ..." मैंने चुटकी लेते हुए कहा "...तो क्या इसीलिए जीजी ने चीलम फूँक दिया ..." खाँटी बही बोले "...मैं फिर कह रहा हूँ कोई लहर नहीं है ..." मैंने कहा "...लेकिन जीजाजी का धुआँ तो है ही ..." खाँटी बही बोले "...आपको जो धुआँ -धुआँ दिख रहा है वो दरअसल हमारा प्रभाव है ..." मैंने उसी अंदाज मे कहा "...जब आपका प्रभाव है तो जीजी ने चीलम क्यों फूँक दिया ...." खाँटी भाई बोले "...हमारे काम करने की अपनी शैली है ..." मैंने उनसे पूछा "...तो क्या जीजी के चीलम से जीजाजी के  धुएं की दुर्गंध दाब जाएगी ...?" खाँटी भाई फिर चीखते हुए बोले "...हम मोदी की लहर को रोक देंगे ..." मैंने उन्हें टोकते हुए कहा "...कोई भी जानवर चाहे कितना भी पालतू क्यों न हो बैक गियर मे नहीं चलता ..." खाँटी भाई धमकी देते हुए बोले "...अगर मोदी प्रधानमंत्री बन गए तो देश जल उठेगा ..." मैंने फिर चुटकी लेते हुए पूछा "...क्या जीजी के चीलम में इतना दम है ...?" खाँटी भाई और तैश में बोले "....सारे अखबार वाले बिके हुए हैं, मीडिया को खरीद लिया गया है सब झूठ बोल रहे हैं ..." मैंने कहा "...जीजी से बोल दीजिये चीलम का धुआँ उधर भी फिरा दें ..." खाँटी भाई उसी धमकी वाले अंदाज में कहा "... सरकार काँग्रेस की ही बनेगी चाहे कुछ भी हो जाए आप देखिएगा ..." मैंने कहा "...लगता है जीजी के चीलम का असर खाँटी भाई कोंग्रेसियों पर हो रहा है ..." खाँटी भाई बोले "...देखिये जीजाजी ने कोई गलत काम नहीं किया ..." मैंने कहा "...बिलायती अखबार की बिल्लौरी काँखों से कोई भी चूहा बच नहीं सकता ...लिहाजा जीजी के चीलम का ही सहारा बचा है ...!" खाँटी भाई कोंग्रेसी केजरीवाल को फोन लगाने लगे तो मुझे वहाँ निकलना पड़ा...

Sunday, 13 April 2014

अतिबुद्धिजीवी और उनके जैसे लोग चीख-चीख कहते फिर रहे हैं "... मोदी की लहर नहीं है...कोई बताए कहाँ है मोदी की लहर ..." मैंने उनसे पूछा "...आप इतने चिल्ला क्यों रहे हैं ..." बुद्धिजीवी बोले "...नहीं जहां देखिये मोदी की लहर मोदी की लहर ...मैं पूछता हूँ कहाँ है लहर... " मैंने बुद्धिजीवी को समझते हुए कहा "...लहर है तभी तो आप इंकार कर रहे हैं ...नहीं क्या जरूरत थी इंकार करने की ..." बुद्धिजीवी जी की बुद्धि जवाब देने लगी बोले "...आप लोगों झूठ-मूठ मे हवा बना रखी है ... वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं है ..." मैंने कहा "...ऐसा कुछ नहीं है तो फिर क्या बात है ..आप क्यों इतना चिल्लपों मचाए हुए हैं ...."  बुद्धिजीवी जी बोले "...किसी अच्छे नेता की चर्चा नहीं हो रही है सारे मीडिया वाले बिक चुके हैं..." मैंने पूछा "...कौन से अच्छे नेता की चर्चा नहीं हो रही ...अभषेक मनु सिंघवी की चर्चा नहीं हो रही, एन॰डी॰ तिवारी की चर्चा नहीं हो रही, क्या राहुल बाबा चर्चे में नहीं है ...अब मुलाम सींग आदो भी जानबूझ कर कूद गए बिना किसी गलती के ...सबकी तो चर्चा तो रही है ..." बुद्धिजीवी थोड़ा चिढ़ गए बोले "...क्या मज़ाक है ..." मैंने कहा "...आपका कहना बिलकुल सही है, आपके हिसाब से जब लहर नहीं है तो ऐसे नेताओं की चर्चा मज़ाक ही तो है ..." बुद्धिजीवी ने पलट कर मुझसे पूछा "...क्या मतलब है तुम्हारे कहने है ..." मैंने कहा "...सीधा मतलब है लहर की आवाज में आपकी आवाज कोई कैसे सुनेगा..."    

Thursday, 10 April 2014

बिसुकत भैंस लटकत जान ...

खान साहब की बिसुकती भैंसें जब दूध देना बंद करने लगीं तो डांडा बरसाने लगे भैंसों पर, इससे भैंसें और नाराज हो गईं। भैंसों की नाराजगी के साथ-साथ मोदी नाम के भूत के डर का आलम ये था कि बड़े-बड़े उघटापैची करने वालों ने भी खान साहब का आपा बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे । लेकिन खान साहब की भैंसे कारगिल जैसी जगह में शानदार दूध देती है ये दिव्य ज्ञान उनको कैसे अचानक मिल गया ये अभी भी रहस्य ही है। एक सांपिया बता रहे कि सेकुलरिज़्म के बुर्के का कमाल है ये सब। ये बुर्का बड़े कमाल की चीज है बड़े - बड़े बलात्कारियों को भी मंत्री बनाने का माद्दा रखती है फिर क्या मजाल है भैंसों की। खान साहब भी बहुत पहुंचे फकीर हैं बिसुकी भैंसों से भी दूध बुर्का ओढ़ाकर दूह लेने का माद्दा रखते हैं। लेकिन वो इस बार भैंसों को कारगिल और द्रास जैसी जगह पर ले जाकर बुर्का ओढ़ाने की योजना है उनकी। वैसे इस बारे में किसी घोड़ा-डाक्टर ने बताया कि भैंसों का मूड चेंज करने के लिए कुछ तूफानी करना चाहिए। तो खान साहब को पता चला कि तूफानी तो कोई और करके जेल की हवा खा चुका है चुनावी दारोगा ने तूफानी करने वाले को मय जिंदा बोटी-बोटी सहित जेल मे डाल दिया था। लेकिन मजबूरी ये है कि खान साहब को भैंसो के लिए पहलवानी का डंका उसी के खिलाफ बजाना पड़ रहा है जिससे उनको बेपनाह मोहब्बत है और दोनों मिल कर भैंस की सवारी करते रहते हैं। इसी सवारी करने के चक्कर में तो कितनी भैंसें बिलकुल मरियल हो गईं दूध देना तो कबका बंद कर दिया लिहाजा उनको "पिंक रिवोलूशन" के लिए बूचड़खाना भेजने के बजाय कारगिल भेजना ज्यादा मुफीद और कारगर लग रहा है। बड़े - बड़े नाजायज कसीदे पढे जा रहे हैं लेकिन भैंसे हैं कि भैंसत्व छोडने का नाम ही नहीं ले रहीं, लिहाजा उसी के निमित्त आधिकारिक बयान जारी करना पड़ा जिसका सीधा मतलब यही था कि कोई भी बलात्कारी को जेल नहीं भेजा जाएगा लिहाजा भैंसों को भी तैयार रहना चाहिए। सांपियों के समझ में ही नहीं आ रहा है कि बचाव किसका करें बिसुकती भैंसों का, डांडा बरसाने वालों का, कारगिल का या फिर बलात्कारियों का। खैर एक सांपिया बता रहे थे "...देखिए हमारा स्टैंड बिलकुल साफ है कि नेता जी स्टैंड साफ कर दिया है ..." मुझे समझ में नहीं आया तो स्पष्ट करने का अनुरोध किया तो वे बोले "...हमारे सहयोग के बिना सरकार नहीं बनेगी ..." मुझे उनके उत्तर पर बहुत आश्चर्य हुआ फिर भी मैंने उनसे पूछा "...बिसुकती भैंसों का क्या होगा ...?" सापिए बोले "...हम कोशिश करेंगे कि वो अपना काम करें ..." मैंने कहा "...यानी अब भैंसों को आपकी चिंता बिल्कुल छोड़ देनी चाहिए ..." इस पर सांपिए सकते में आ गए और तिलमिला कर बोले "...हमने ही सब कुछ किया है वो जो भी हैं हमारी ही बदौलत हैं ..." मैंने बीच में ही बात काटते हुए पूछा "...लेकिन अब बदौलत का प्रश्न किधर है ...?"  वो कुछ बोल नहीं रहे थे ...कुछ भी नहीं बोल रहे थे ... 

Tuesday, 8 April 2014

बजावे जूता अपने हि गाल, देखि गदहवा हुआ निहाल ...

नरेन्द्र भाई मोदी का ऐसा डर कि काँग्रेस कुमार केजरीवाल समुद्र मंथन करवाने लगे।  जब उन्होने इसकी वाराणसी में घोषणा की थी तभी ये शंका हुई थी कि इस घोर कलियुग में शेषनाग कहाँ से लेके आएंगे? लेकिन कमाल देखिये एक कुटिल खाँटी भाई कांग्रेसी का गोवा के जेल में बंद भांजा जेल से ही कोबारा की व्यवस्था करवा दिया और समुद्र मंथन चालू हो गया और दस दिन के बाद मय काँग्रेस आपिए मंथन के बाद निकले जहर को छिड़कने निकल पड़े। कोई बता रहा था कि मंथन के लिए समुद्र भी तैयार नहीं हुआ था लिहाजा गटर में ही वह सब करना पड़ा जिसके छींटे केजरीवाल और अन्य आपियों पर समय-समय पड़ते रहते हैं जिसे स्याही, सड़ा अंडा, सड़ा टमाटर और न जाने क्या - क्या कहा जाता है। खैर एक आपिया बता रहा था कि समुद्र सॉरी गटर - मंथन में उसका और उसके जैसे लोगों का जम कर इस्तेमाल काँग्रेस कुमार केजरीवाल ने किया उसी का नतीजा है कि बहुत से आपियों में खून की खतरनाक कमी देखी जा रही है। ऐसे में गुस्सा तो वाजिब है अब वही आपिए काँग्रेस कुमार केजरीवाल को थूरने पर उतारू हैं जहां भी मौका मिलता हैं लात-घूंसा बरसाना शुरू कर देते हैं। मैंने एक आपिए से इस बारे में पूछा तो बताने लगा "...ये सब साजिश है ..." मैंने कहा "...जब गदहा अपनी पीठ पर से कपड़े का गट्ठर गिराएगा तो धोबी तो डांडा बरसाएगा ही ..इसमे साजिश वाली बात कहाँ से आ गई ...?"  आपिया थोड़ा ऊंची आवाज में बोला "...देखिये काँग्रेस और भाजपा दोनों बौखला गए हैं इसलिए ..." मैंने उत्तर देते हुए कहा "...गधे को धोबी का सम्मान करना आना चाहिए ..." आपिया बोला "...सब के सब चोर हैं भ्रष्ट हैं ..." मैंने आराम से शांति से उत्तर देते हुए कहा "...गीता में भगवान कृष्ण ने कहा है हर जीव अपनी करनी का फल भोग रहा है ..." आपिया और गुस्से में आ गया बोला "...केजरीवाल का क्या दोष है ...?" मैंने कहा "...चंदा उगलवाने के लिए ये सब नौटंकी है..." आपिया उसी गुस्से में बोला "...तो क्या केजरीवाल पैसा लेने के लिए ये सब कर रहे हैं ...?" मैंने कहा "...आंकड़े तो यही कहते हैं जब-जब वो अपना जूता अपने गाल पर मारते हैं चंदे की रकम बढ़ जाती है ..." आपिया और गुस्से में आ गया बोला "...वो ऐसा नहीं कर सकते ..." मैंने कहा "...काहे नहीं कर सकते ...?" आपिया बोला "...वो आईआईटी से बी टेक हैं आईआरएस कमिश्नर रहे हैं ..." मैंने कहा "...इसीलिए तो कर रहे हैं ..कांग्रेसी कोबारा के सहयोग से गटर-मंथन करवाने के बाद अपने जूते से अपना गाल बजाना ये काँग्रेस कुमार केजरीवाल की ही फितरत हो सकती है ..." आपिया अपना आपा खोने लगा था और लोगों को दनादन एसएमएस करने लगा और बहुत से लोग जब पत्थर ले कर जमा होने लगे तो मुझे वहाँ से भाग लेना बेहतर लगा ...        

Wednesday, 2 April 2014

मय चांपे हड्डी चाकर, भाईंस दधीचि बीन ?

दुःशासन बाबू अपनी भैंस की फोटो गाहे - बगाहे ये कह कर दिखते रहते रहे हैं कि देखिये हमारी भैंस भूखी है इसको खान चाहिए, इसपर किसी ने कहा था कि इसके लिए भैंस का एक्सरे लेकर चलने की क्या जरूरत है। लेकिन मोदी जी के प्रचंड करिश्माई जादू ने जब अपना असर दिखाया तो दुःशासन बाबू ने भैंस का एक्सरे दिखाना बंद कर दिया और अब चीख - चीख कह रहे हैं "...अब चाहे कुछ भी हो जाए हम भैंस को खाने नहीं देंगे ही नहीं ..." न जाने क्यों दुःशासन बाबू अपने सटकल दिमाग से ये सोचते हैं कि उनकी भैंस के लिए भटकल जैसे लोग ही पर्याप्त हैं। खैर वो अपने गोरू ब्रांड गुरु लालू प्रसाद से पता नहीं कौन सा गुरु-प्रसाद लिया था कि उनके खुद के मुजाहिद्दीनों ने उनका ही दाना-पानी सर पर उठा कर अपने तीरंदाजी करना शुरू किया तो वे आग-बबूला हो गए नरेन्द्र भाई मोदी पर। उनके आग-बबूलेपन पर एक जदयू नेता बोल रहे थे "...हम कुछ नहीं लेंगे कुछ लेबे नहीं करेंगे ...मोदी देंगे तब्बो कुछ नहीं लेंगे ..." मैंने कहा "...आपको कौन कुछ दे ही रहा है ...?" जदयू नेता बोले "...हमने अपनी संभावनाएं खुली रखी हैं ..." इस पर मैंने पूछा "...तो क्या आपकी भैंस की भूख मुजाहिद्दीन मिटाएँगे ...?" जदयू नेता थोड़ा भड़क गए और बोले "...ये बिहार के मानस पुत्र और मानस पुत्रियों का  अपमान है ..." मैंने भी कड़े आवाज में कहा "...सारे बिहार को मुजाहिद्दीन के भरोसे छोडना अपमान नहीं है ...?" जदयू नेता चीखते हुए बोले "... लेकिन हम किसी भी कीमत पर मोदी के भरोसे नहीं छोड़ेंगे ..." मैंने उसी टोन में पूछा "...किसी भी कीमत का क्या अर्थ है ...?" जदयू नेता बोले "...आप देखिये बिहार के लोग बहुत महान हैं त्याग करने में पीछे नहीं रहते ..." मैंने कहा "...तो सिर्फ लालू और दुःशासन बाबू जैसे लोगों की सुविधा के लिए बिहार के लोगों को मुजाहिद्दीनों को अपना सिर सौंप देना चाहिए त्याग के नाम पर ...?" जदयू नेता सकपकाते हुए बोले "...आपको तो बिहार का विकास दिखाता नहीं ..." मैंने कहा "...दुःशासन बाबू तो बिहार का चीरहरण करके ही विकास करना चाहते हैं और वही कर रहे हैं ..." जदयू नेता बोले "...लालू से तो ठीके है ..." मैंने कहा "...हाँ वो तो हालत ऐसी थी कि सवाल खड़ा हो गया ..." जदयू नेता ने पूछा "...कैसा सवाल ...?" मैंने उत्तर देते हुए कहा "...कि भैंसों का भी चीरहरण कैसे हो ...?" जदयू नेता ने उल्टे मुझसे पूछा "...इसका क्या मतलब ..." मैंने सपाट उत्तर देते हुए कहा "...अरे भाई जबतक चीरहरण करेंगे नहीं बिहार का विकास कैसे होगा ..." जदयू नेता बोले "...सब होगा और ठीक से होगा आप बस देखते रहिए ..." मैंने कहा "...हाँ जब आप लोग खुद ही मुजाहिद्दीनो से अपनी भैंस को सानी चलवा रहे हैं तो ठीके होना चाहिए ..."  जदयू नेता किसी के मिस्डकॉल का इंतजार करने लगे तो मैंने विदा ले लिया।