आपे हाथ-आपे हंता, हंता-हंता देख मैं महन्ता....
अभी बहुत दिन नहीं बीते जब नरेन्द्र भाई मोदी ने कहा था कि उनकी कार के नीचे कोई पिल्ला भी आ कर दाब जाए तो उनको बहुत दुख होगा। पता नहीं क्यों कमीडिया अंदाज मे मीडिया वालों उस वक्तव्य का जो निष्कर्ष निकाला था जिससे उनकी ही पूंछ उनके नाक मे जा घुसी थी और मजा देखिये छींक भी इतनी कमीनी हो गई थी कि ससुरी आने का नाम ही नहीं ले रही थी। खैर आज आलम ये है उनकी कार के आगे आत्महत्या करने वाले पिल्लों की कुछ लाईन लगी है। एक पिल्ले जिसकी हमेशा तबियत ही खराब रहती है कहने लगा "...मुझे तो आत्महत्या करने के लिए उकसाया गया है ..." तो फिर एक बुद्धिमान पिल्ले ने पूछा "...तो आप उकस क्यों गए...?" आत्महत्या करने वाले पिल्ले ने जवाब दिया "...उसी उकसने को जास्टीफाई करने के लिए कुत्तागर्दी करना जरूरी है ..." बुद्धिमान पिल्ले ने फिर जिज्ञासावश पूछा "...ये क्या होता है...?" आत्महत्या वाले पिल्ले ने जवाब दिया "... मजमागिरी कर के सियार की तरह भौकेंगे..." बुद्धिमान पिल्ले ने कहा "...वो तो रोने की आवाज होती है ..." आत्महत्या वाला पिल्ला बोला "...ये नाटक बहुत जरूरी है इसमे कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि उसमे केवल हमारे लोग रहेंगे जो दूर-दूर से आएंगे ..." खैर, यही पिल्ला कुछ दिन पहले आत्महत्या के इरादे से जबरदस्ती गुजरात पहुँच गया था लेकिन वो तो मोदी जी की महानता थी कि उसे ऐसा नहीं करने दिया गया। जब ऐसा नहीं हुआ यही पिल्ला गुस्से मे आ कर खंडहर मे घुसकर भौकने लगा, फिर किसी विद्यालय मे घुस गया वहाँ से भौकने लगा वो तो गनीमत थी कि विद्यालय की छुट्टी हो चुकी थी, न जाने कितनी जगहों पर वो घुसा और भौंका गिनती नहीं। दरअसल आत्महत्या करने से पहले इस पिल्ले को बहुत भूख लग गई थी लेकिन मजबूरी ये थी इसे बढ़िया भोजन पसंद ही नहीं है हमेशा कूड़े मे ही कुछ न कुछ खाने के लिए ही खोजता है लिहाजा गुजरात मे उसे भूखा ही रहना पड़ा क्योंकि वहाँ कूड़ा उसे मिला ही नहीं। इसीलिए ये पिल्ला अब ठान चुका है कि अब तो आत्महत्या कर के ही दम लेगा वैसे भी ये पिल्ला अपने दम फूलने से परेशान हो चुका है।
अभी कल की खबर है एक मोटा-तगड़ा पिल्ला मोदी जी के कार के नीचे आकार आत्महत्या करने की तैयारी कर रहा है। लेकिन आलम ये है कि उसके समूह बहुत से बुद्धिमान पिल्ले मोदी जी के डर से सड़क पर उतरने से ही मना कर रहे हैं। भाई आराम से सुकून की जिंदगी जीने का अधिकार सभी को है लेकिन घोटाले के लिए जगह - जगह मुंह मरने वाले पिल्ले पता नहीं क्या सोचते हैं और आत्महत्या करने पर उतारू हो जाते हैं। उसके समूह का कोई बता रहा था कि ये मोटा-तगड़ा पिल्ला बहुत बड़ा सन्यासी छाप छिछोर भी है दस साल का आत्मघोषित सन्यास भुगत चुका लिहाजा इसके लिए तो आत्महत्या बहुत जरूरी लगता है। किसी को दुखी होने की कोई जरूरत नहीं ... धरती माता का बोझ कम हो जाएगा ...
अभी बहुत दिन नहीं बीते जब नरेन्द्र भाई मोदी ने कहा था कि उनकी कार के नीचे कोई पिल्ला भी आ कर दाब जाए तो उनको बहुत दुख होगा। पता नहीं क्यों कमीडिया अंदाज मे मीडिया वालों उस वक्तव्य का जो निष्कर्ष निकाला था जिससे उनकी ही पूंछ उनके नाक मे जा घुसी थी और मजा देखिये छींक भी इतनी कमीनी हो गई थी कि ससुरी आने का नाम ही नहीं ले रही थी। खैर आज आलम ये है उनकी कार के आगे आत्महत्या करने वाले पिल्लों की कुछ लाईन लगी है। एक पिल्ले जिसकी हमेशा तबियत ही खराब रहती है कहने लगा "...मुझे तो आत्महत्या करने के लिए उकसाया गया है ..." तो फिर एक बुद्धिमान पिल्ले ने पूछा "...तो आप उकस क्यों गए...?" आत्महत्या करने वाले पिल्ले ने जवाब दिया "...उसी उकसने को जास्टीफाई करने के लिए कुत्तागर्दी करना जरूरी है ..." बुद्धिमान पिल्ले ने फिर जिज्ञासावश पूछा "...ये क्या होता है...?" आत्महत्या वाले पिल्ले ने जवाब दिया "... मजमागिरी कर के सियार की तरह भौकेंगे..." बुद्धिमान पिल्ले ने कहा "...वो तो रोने की आवाज होती है ..." आत्महत्या वाला पिल्ला बोला "...ये नाटक बहुत जरूरी है इसमे कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि उसमे केवल हमारे लोग रहेंगे जो दूर-दूर से आएंगे ..." खैर, यही पिल्ला कुछ दिन पहले आत्महत्या के इरादे से जबरदस्ती गुजरात पहुँच गया था लेकिन वो तो मोदी जी की महानता थी कि उसे ऐसा नहीं करने दिया गया। जब ऐसा नहीं हुआ यही पिल्ला गुस्से मे आ कर खंडहर मे घुसकर भौकने लगा, फिर किसी विद्यालय मे घुस गया वहाँ से भौकने लगा वो तो गनीमत थी कि विद्यालय की छुट्टी हो चुकी थी, न जाने कितनी जगहों पर वो घुसा और भौंका गिनती नहीं। दरअसल आत्महत्या करने से पहले इस पिल्ले को बहुत भूख लग गई थी लेकिन मजबूरी ये थी इसे बढ़िया भोजन पसंद ही नहीं है हमेशा कूड़े मे ही कुछ न कुछ खाने के लिए ही खोजता है लिहाजा गुजरात मे उसे भूखा ही रहना पड़ा क्योंकि वहाँ कूड़ा उसे मिला ही नहीं। इसीलिए ये पिल्ला अब ठान चुका है कि अब तो आत्महत्या कर के ही दम लेगा वैसे भी ये पिल्ला अपने दम फूलने से परेशान हो चुका है।
अभी कल की खबर है एक मोटा-तगड़ा पिल्ला मोदी जी के कार के नीचे आकार आत्महत्या करने की तैयारी कर रहा है। लेकिन आलम ये है कि उसके समूह बहुत से बुद्धिमान पिल्ले मोदी जी के डर से सड़क पर उतरने से ही मना कर रहे हैं। भाई आराम से सुकून की जिंदगी जीने का अधिकार सभी को है लेकिन घोटाले के लिए जगह - जगह मुंह मरने वाले पिल्ले पता नहीं क्या सोचते हैं और आत्महत्या करने पर उतारू हो जाते हैं। उसके समूह का कोई बता रहा था कि ये मोटा-तगड़ा पिल्ला बहुत बड़ा सन्यासी छाप छिछोर भी है दस साल का आत्मघोषित सन्यास भुगत चुका लिहाजा इसके लिए तो आत्महत्या बहुत जरूरी लगता है। किसी को दुखी होने की कोई जरूरत नहीं ... धरती माता का बोझ कम हो जाएगा ...
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