Tuesday, 18 March 2014

आन धोखईती शान धोखईती, जहर धोखईती उगले जान ....

"आपिया रोडवेज़" के "चार्टर्ड प्लेन" का बहुत नाम है बड़े-बड़े क्रांतिकारी सूरमा बहुते क्रांति के नाम पर उस प्लेन मे बैठ कर क्रांति मचा चुके हैं वो अलग बात है कि उससे उनका क्या काला-पीला-लाल हुआ। "आपिया रोडवेज़" के लोग भरसक इस बात का प्रयास करते हैं कि उन्हें भरे समुंदर मे तैरती हुई चींटी दिख जाए यकीन मानिए आपियों को दिखती भी है, पूरा का पूरा खंडहर उनको अस्पताल दिखता है जिसे "आपिया गुरु" ताल से ताल मिलाने चल देते हैं। भूकंप के बाद का पार्यटन का मजा लेने वाले "आपिए" हाथी भी पालने का जबरदस्त शौक भी रखते हैं। इस पर एक आपिया कह रहे थे "...भूकंप बाद के पर्यटन मे नीचे उतरने से इनफेक्शन का खतरा है सो हाथी पालना जरूरी है ..." मैंने पूछा "...ये बहुत खर्चीला नहीं है क्या ...?" "आपिया" बोले "...नीचा दिखने के लिए ऊपर बैठना बहुत जरूरी है ..." "लेकिन कहते तो आप रोडवेज़ हैं ...?" मैंने स्पष्टीकरण के लिए पूछा तो "आपिया" बोले "...हाथी के दांत दिखने के और खाने के और होते हैं जी ..." खैर एक बार "आपिया गुरु" अपने रोडवेज़ के "चार्टर्ड प्लेन" से इस्लामाबाद से वाशिंगटन वाया दुबई जा रहे थे तो रास्ते मे जूलियन भाई मिले उन्होने प्लेन को हाथ दिया लेकिन "आपिया रोडवेज़" के गुरु ने प्लेन रोकने से माना कर दिया। जूलियन भाई अभी भी "आपिया गुरु " से खफा ही हैं। वैसे ये वाकया 2011 की ही है जब जूलियन भाई मोदी जी तारीफ करते नहीं अघाते थे। सो भाई "आपिया गुरु" का गुस्सा तो वाजिब है लेकिन समय ने भी "आपिया गुरु" की तरह पलटा खाया बेचारे जूलियन भाई का खराब समय आ गया और वहीं "आपिया गुरु" के पास रोडवेज़ के नाम पर न जाने कितने प्लेन हैं उसमे से बहुत कम भाड़े पर दिये जाते हैं सब के सब निजी उपयोग के लिए 'कृषि कार्य हेतु" ही हैं। ये सब देखकर जूलियन भाई के दिल पर साँप न लोटे ये कैसे हो सकता है ? सो जूलियन भाई ने भी वही सब करने की ठान ली जिसमे "आपिया गुरु" को महारत है। लेकिन कहाँ धोखईती का जन्मजात स्किल जिसमे "आपिया गुरु" माहिर है और कहाँ एडाप्टेड स्किल फर्क तो पड़ेगा ही। सो बेचारे जूलियन बाबू पकड़ गए अरे ईमानदारी है तो कितनी भी झूठ से छिपाओ छिप नहीं सकती। वहीं अगर बेईमानी रग-रग मे दौड़ रहा हो तो कितनी भी ईमानदारी का मुलम्मा चढ़ाओ बहुत क्रांतिकारी तरीके से बहुत जल्दी उतर जाती है। लेकिन "आपिया गुरु" हाथी पर बैठ कर थपरी पीटते इससे पहले ही पुराने "आपिया रोडवेज़" वाले नानवेज़ लेकर पहुँच गए तो "आपिया गुरु" के ईमानदारी का मुलम्मा चढ़ाते हुए "अमेरिकन मुर्गी, पाकिस्तानी भैंसा और अरबी ऊंट-घोड़े को चट करते समय नहीं लगा। चट करते ही अपने प्लेन से जहर उगलने उड़ गए...        

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