नाचहिं लै लै भाव ते , सागरो होत जवान ...
जैसे कभी भैंस बूढ़ी नहीं होती वैसे ही नेताजी भी कभी बूढ़े नहीं हो सकते भले ही उनके बुढ़ौती का टिकट बहुत पहले ही कट गया हो। जैसे-जैसे नरेन्द्र भाई मोदी का रंग उत्तर प्रदेश पर गहराता जा रहा है वैसे-वैसे नेता जी भैंसो की सींग मे भैंस पूंछ बांधने की असफल कोशिश कर रहे हैं और लगातार किए जा रहे हैं । लेकिन वो तो नेताजी का व्यक्तित्व है की कोशिश मरते दम तक करेंगे। उनके बहुत निकट के सपाई जो सैफई हुए नाच से तरो-ताजा होकर लोटे हैं, बता रहे थे "...नेताजी नेताजी हैं कोई कैसे उल्टा-सीधा कह सकता है ...!" मैंने कहा "...बघेल जी ने उल्टा कहाँ कहा था ...?" सपाई बोले "...क्यों नेताजी बूढ़े हैं क्या ...?" मैंने उनका प्रतिउत्तर देते हुए कहा "...हाँ सही बात है यदि वो बूढ़े हो चुके होते तो सैफई मे नाच-गाना क्यों होता ..." सपाई बोले "...बिल्कुल सही बात है बघेल जी को ये बात समझ मे ही नहीं आई ..." मैंने कहा "...125 करोड़ का नाच-गाना देखकर तो मुर्दे भी जी उठते हैं और जवान हो जाते हैं फिर नेताजी तो नेताजी हैं लगे हाथ भैंसें भी रिफ्रेश हो गईं ..." सपाई बोले "...ये तो हमारी उदारता है ..." मैंने कटाक्ष करते हुए कहा "...हाँ इसी उदारता का फायदा जब भैंसें भी उठाने लगीं तो परेशानी खड़ी हो गई ..." सपाई ने आश्चर्य से पूछा "...क्या मतलब मैं समझा नहीं ...?" मैंने उन्हें समझते हुए कहाँ "...इसमे न समझ मे आने वाली बात क्या है ...भाई जबतक नेताजी भैंस के सींग मे उसका पूंछ नहीं बांध लेंगे प्रधानमंत्री कैसे बन सकते हैं ...?" सपाई ने मुझसे पूछा "...हमारा लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है ..." मैंने कहा "...मैंने ये कब घोषणा कर दी कि भैंसो के साथ आप लोग भी दिग्भ्रमित हैं ...?" सपाई थोड़ा गुस्से मे मुझसे पूछा "...आपके कहने का मतलब ये कि भैंसें दूध देना बंद कर दें ..." मैंने सपाई से आराम से कहा "...जब उनके बुढ़ौती का वीजा मिल जाएगा तो अपने आप दूध भी पानी फिर हवा हो जाएगा तीसरे मोर्चे की तरह ..." सपाई का गुस्सा कम नहीं लिहाजा उसी गुस्से मे बोले '...आपका मतलब है भैंस ..." मैंने बीच मे ही बात काटते हुए कहा "...आप ये तय मानिए नेताजी बहुत जीवट व्यक्तित्व वाले हैं ..." सपाई ने उसी गुस्से मे मुझसे पूछा "...वो तो है तो ...?" मैंने शांति से उत्तर देते हुए कहा "...मुझे पूरा यकीन है एक दिन नेताजी जरूर भैंस के सींग मे उसकी पूंछ बांध देंगे..." सपाई खुन्नस मे पूछा "...मन लिया यदि बांध दिया तो क्या होगा ...?" मैंने बड़े आराम से उत्तर देते हुए कहा "...भाई मैंने पहले ही कहा जिस दिन ऐसा हो गया उस निश्चित रूप से नेताजी देश के प्रधानमंत्री बन जाएंगे ..." सपाई भाईसाब का सीधा कहना था "...उनको तो प्रधानमंत्री बनना ही है ..." मैंने कहा "...तब तो भैंसें खुशी के मारे नाचने लगेंगी नेताजी का बहुत पैसा बच जाएगा ..." सपाई थोड़ा कनफ्यूज होकर पूछने लगे "...खर्चे की बचत का हिसाब कुछ समझ मे नहीं आया थोड़ा स्पष्ट करें..." मैंने स्पष्ट करते हुए कहा "...सारी भैंसों को जवानी लौट आएगी, वे खुशी के मारे नाचने-गाने लगेंगी फिर आपके 125 करोड़ की सीधी बचत है ..." सपाई गुस्से से मुझे नमस्कार करके चले गए ....
जैसे कभी भैंस बूढ़ी नहीं होती वैसे ही नेताजी भी कभी बूढ़े नहीं हो सकते भले ही उनके बुढ़ौती का टिकट बहुत पहले ही कट गया हो। जैसे-जैसे नरेन्द्र भाई मोदी का रंग उत्तर प्रदेश पर गहराता जा रहा है वैसे-वैसे नेता जी भैंसो की सींग मे भैंस पूंछ बांधने की असफल कोशिश कर रहे हैं और लगातार किए जा रहे हैं । लेकिन वो तो नेताजी का व्यक्तित्व है की कोशिश मरते दम तक करेंगे। उनके बहुत निकट के सपाई जो सैफई हुए नाच से तरो-ताजा होकर लोटे हैं, बता रहे थे "...नेताजी नेताजी हैं कोई कैसे उल्टा-सीधा कह सकता है ...!" मैंने कहा "...बघेल जी ने उल्टा कहाँ कहा था ...?" सपाई बोले "...क्यों नेताजी बूढ़े हैं क्या ...?" मैंने उनका प्रतिउत्तर देते हुए कहा "...हाँ सही बात है यदि वो बूढ़े हो चुके होते तो सैफई मे नाच-गाना क्यों होता ..." सपाई बोले "...बिल्कुल सही बात है बघेल जी को ये बात समझ मे ही नहीं आई ..." मैंने कहा "...125 करोड़ का नाच-गाना देखकर तो मुर्दे भी जी उठते हैं और जवान हो जाते हैं फिर नेताजी तो नेताजी हैं लगे हाथ भैंसें भी रिफ्रेश हो गईं ..." सपाई बोले "...ये तो हमारी उदारता है ..." मैंने कटाक्ष करते हुए कहा "...हाँ इसी उदारता का फायदा जब भैंसें भी उठाने लगीं तो परेशानी खड़ी हो गई ..." सपाई ने आश्चर्य से पूछा "...क्या मतलब मैं समझा नहीं ...?" मैंने उन्हें समझते हुए कहाँ "...इसमे न समझ मे आने वाली बात क्या है ...भाई जबतक नेताजी भैंस के सींग मे उसका पूंछ नहीं बांध लेंगे प्रधानमंत्री कैसे बन सकते हैं ...?" सपाई ने मुझसे पूछा "...हमारा लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है ..." मैंने कहा "...मैंने ये कब घोषणा कर दी कि भैंसो के साथ आप लोग भी दिग्भ्रमित हैं ...?" सपाई थोड़ा गुस्से मे मुझसे पूछा "...आपके कहने का मतलब ये कि भैंसें दूध देना बंद कर दें ..." मैंने सपाई से आराम से कहा "...जब उनके बुढ़ौती का वीजा मिल जाएगा तो अपने आप दूध भी पानी फिर हवा हो जाएगा तीसरे मोर्चे की तरह ..." सपाई का गुस्सा कम नहीं लिहाजा उसी गुस्से मे बोले '...आपका मतलब है भैंस ..." मैंने बीच मे ही बात काटते हुए कहा "...आप ये तय मानिए नेताजी बहुत जीवट व्यक्तित्व वाले हैं ..." सपाई ने उसी गुस्से मे मुझसे पूछा "...वो तो है तो ...?" मैंने शांति से उत्तर देते हुए कहा "...मुझे पूरा यकीन है एक दिन नेताजी जरूर भैंस के सींग मे उसकी पूंछ बांध देंगे..." सपाई खुन्नस मे पूछा "...मन लिया यदि बांध दिया तो क्या होगा ...?" मैंने बड़े आराम से उत्तर देते हुए कहा "...भाई मैंने पहले ही कहा जिस दिन ऐसा हो गया उस निश्चित रूप से नेताजी देश के प्रधानमंत्री बन जाएंगे ..." सपाई भाईसाब का सीधा कहना था "...उनको तो प्रधानमंत्री बनना ही है ..." मैंने कहा "...तब तो भैंसें खुशी के मारे नाचने लगेंगी नेताजी का बहुत पैसा बच जाएगा ..." सपाई थोड़ा कनफ्यूज होकर पूछने लगे "...खर्चे की बचत का हिसाब कुछ समझ मे नहीं आया थोड़ा स्पष्ट करें..." मैंने स्पष्ट करते हुए कहा "...सारी भैंसों को जवानी लौट आएगी, वे खुशी के मारे नाचने-गाने लगेंगी फिर आपके 125 करोड़ की सीधी बचत है ..." सपाई गुस्से से मुझे नमस्कार करके चले गए ....
No comments:
Post a Comment