कजरी के कांव पर बगुला मारे दांव ...!
नरेन्द्र भाई मोदी को पूर्ण बहुमत से प्रधानमंत्री बनने से रोकना अब मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। यह ब्रम्ह सत्य जैसे जैसे प्रबल और स्पष्ट होता जा रहा है "आप सबका" "आपा" देखने लायक है। काँग्रेस कुमार केजरीवाल एंड कमपानी सहित उनकी "आपा" के खटिया का उड़ीचन ही ढीला हो गया और "आपाई" अपने ही बनाए खटिए मे धसने और फँसने लगे तो अपने खटिए के पायों को ही धमकी और चेतावनी देने लगे। मजबूरी ये है कि यदि वे खटिया का उड़ीचन कसते हैं घुन लगे पायों के टूटने की पूरी - पूरी गारंटी है। इधर मोदी की आँधी मे आपा के खटिया के उधियाना बहुत हास्यास्पद भी नहीं लग रहा है। वैसे भी काँग्रेस कुमार केजरीवाल ने अपने खटिए ऐसे ऐसे लोगों को बैठाया जिनका वजूद सिर्फ इस मामले मे महत्वपूर्ण था कि कैसे हर काम मे उंगली किया जाये। महात्मा गांधी तो अंग्रेजों के खिलाफ दक्षिण अफ्रीका मे स्वतन्त्रता और रंगभेद के खिलाफ आवाज बुलंद कर के भारत आए और उन्होने जो कुछ भी किया वो सबके सामने है लेकिन उनके पोते पता नहीं दक्षिण अफ्रीका के किस जंगल से पकड़ कर लाये गए हैं, पता नहीं वो किस रंगभेद मे डूबे हुए थे। जैसा उनका गांधीत्व है उससे तो यही लगता है आपा की टोपी के रंग और उस पर काले रंग से लिखी आयात मे फर्क ही नहीं पता, फिर आपाई काले रंगभेद का वो क्या करेंगे पता नहीं। अन्य आपियों की तरह उनका भी मुंह तो काला होना पक्का है। खोपड़ी पर से काला रंग चू कर मुंह पर आने मे अधिक से अधिक सिर्फ 49 दिन ही लगते हैं। आपा के ढीली उड़ीचन वाली खटिया मे फंस कर देश को धँसाने का उनका प्रयास पता नहीं उनके दादा जी को कैसे पसंद आएगा ? खैर इसकी चिंता उनको थोड़े ही है। पता नहीं इन एनजीओ वाले स्वनामधन्य लोगों को क्या हो गया कि बजाय मोदी को रोकने के सोमनाथ भारती बनने का चस्का पाले घूम रहे हैं। पता नहीं शास्त्री जी के पोते किसका और कहाँ किस खिड़की से कूद कर किसकी सारेआम जांच के बहाने क्या करेंगे भगवान जाने। एक आपाई अपने ढीले उड़ीचन वाले खटिए बड़ी की बड़ी तारीफ किए जा रहा था तब बाद मे पता चला कि सारे दुष्कर्म करने के ऐसे खटिए मे धंस जाने के बाद ऐसे बकलोल अपाईयों को उम्मीद है कि कोई उनको देख नहीं पाएगा लेकिन फर्जी आईआरएस कमीशनर ने अपने आपियों को ये नहीं बातया ज्यादा लोड हो जाने पर नीचे की पथरीली जमीन बड़ी तगड़ी और दर्दनाक प्रतिक्रिया देती है। एक पत्रकार मुझे बता रहे थे काँग्रेस कुमार केजरीवाल ने बहुत पैसा खर्च करके नाती-पोतों, उघटापैची गवनियों, घोटालेबाज एनजीओ और जमीर बेच कर घी पीने वालों ने आपा से प्रमाण-पत्र लेने की लाईन मे खड़ा कर दिया है। दिल्ली से महाराष्ट्र तक आपाई खटिए के बकलोल चौपायों ने जिस तरह से अपनी ही खटिया तोडनी शुरू की है उससे तो आपाई काँग्रेस कुमार केजरीवाल एंड कमपानी सहित रिंग मास्टर उर्फ फर्जी पोल मास्टर यादव जी, आपाई मफ़लर की फंसरी लगाए असंतोष गुप्ता सोर्री असुतोष गुप्ता जैसे लोग भी सकते यानी संकटे में हैं। हालाँकि फेरहिस्ट बहुत लंबी है मनीष सिसोदिया, प्रशांत भूषण, खुद काँग्रेस कुमार केजरवाल परवीन अमानुल्लाह से लेकर मेघा पाटकर तक सभी को अपने अनाचार-भ्रष्टाचार को आपाई खटिया पर बैठ कर ईमानदारी की चट्टी से अपना मुंह ढकना बहुत जरूरी है। इस हद का एक हृदयविदारक नमूना देखिये लिपिस्टिक कुमार विश्वास का जो खुदको लोकप्रिय कवि बताते फिरते हैं जबकि वास्तविकता ये है वो बिलकुल ही लोकप्रिय नहीं, क्या कोई बताएगा कि इससे पहले किस कवि ने काव्य-पाठ करके मारुति 800 भी खरीदने की हैसियत जुटा पाया ? अरे हरवंश राय बच्चन भी अपने मधुशाला से फिएट तक नहीं खरीद पाये फिर इस छिछोर छाप कवि के पास अरबों रुपये की संपत्ति अचानक मात्र दो साल मे ही कहाँ से आ गई वो भी मात्र काव्य-पाठ करके जबकि सभी कवि कविता को शौक के तौर पर रखते हैं मुख्य काम तो उनका कुछ और ही होता है। दरअसल ये सब अन्ना का हड़पा चंदा और विदेशों से आने वाला धन है जिसे ये फर्जी तरीके से काव्य-पाठ की कमाई बता रहे हैं मुझे नहीं मालूम कि लिपिस्टिक कुमार विश्वास के अलावा कोई कवि लम्बोर्गिनी जैसी गाड़ी से चलता हो और महलनुमा बंगले रहता हो। आपा के खटिए पर ऐसे ही भ्रष्ट और गंदे लोगों का जमावड़ा है जिसका पाया आपाई ही तोड़ने पर उतारू हैं।
नरेन्द्र भाई मोदी को पूर्ण बहुमत से प्रधानमंत्री बनने से रोकना अब मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। यह ब्रम्ह सत्य जैसे जैसे प्रबल और स्पष्ट होता जा रहा है "आप सबका" "आपा" देखने लायक है। काँग्रेस कुमार केजरीवाल एंड कमपानी सहित उनकी "आपा" के खटिया का उड़ीचन ही ढीला हो गया और "आपाई" अपने ही बनाए खटिए मे धसने और फँसने लगे तो अपने खटिए के पायों को ही धमकी और चेतावनी देने लगे। मजबूरी ये है कि यदि वे खटिया का उड़ीचन कसते हैं घुन लगे पायों के टूटने की पूरी - पूरी गारंटी है। इधर मोदी की आँधी मे आपा के खटिया के उधियाना बहुत हास्यास्पद भी नहीं लग रहा है। वैसे भी काँग्रेस कुमार केजरीवाल ने अपने खटिए ऐसे ऐसे लोगों को बैठाया जिनका वजूद सिर्फ इस मामले मे महत्वपूर्ण था कि कैसे हर काम मे उंगली किया जाये। महात्मा गांधी तो अंग्रेजों के खिलाफ दक्षिण अफ्रीका मे स्वतन्त्रता और रंगभेद के खिलाफ आवाज बुलंद कर के भारत आए और उन्होने जो कुछ भी किया वो सबके सामने है लेकिन उनके पोते पता नहीं दक्षिण अफ्रीका के किस जंगल से पकड़ कर लाये गए हैं, पता नहीं वो किस रंगभेद मे डूबे हुए थे। जैसा उनका गांधीत्व है उससे तो यही लगता है आपा की टोपी के रंग और उस पर काले रंग से लिखी आयात मे फर्क ही नहीं पता, फिर आपाई काले रंगभेद का वो क्या करेंगे पता नहीं। अन्य आपियों की तरह उनका भी मुंह तो काला होना पक्का है। खोपड़ी पर से काला रंग चू कर मुंह पर आने मे अधिक से अधिक सिर्फ 49 दिन ही लगते हैं। आपा के ढीली उड़ीचन वाली खटिया मे फंस कर देश को धँसाने का उनका प्रयास पता नहीं उनके दादा जी को कैसे पसंद आएगा ? खैर इसकी चिंता उनको थोड़े ही है। पता नहीं इन एनजीओ वाले स्वनामधन्य लोगों को क्या हो गया कि बजाय मोदी को रोकने के सोमनाथ भारती बनने का चस्का पाले घूम रहे हैं। पता नहीं शास्त्री जी के पोते किसका और कहाँ किस खिड़की से कूद कर किसकी सारेआम जांच के बहाने क्या करेंगे भगवान जाने। एक आपाई अपने ढीले उड़ीचन वाले खटिए बड़ी की बड़ी तारीफ किए जा रहा था तब बाद मे पता चला कि सारे दुष्कर्म करने के ऐसे खटिए मे धंस जाने के बाद ऐसे बकलोल अपाईयों को उम्मीद है कि कोई उनको देख नहीं पाएगा लेकिन फर्जी आईआरएस कमीशनर ने अपने आपियों को ये नहीं बातया ज्यादा लोड हो जाने पर नीचे की पथरीली जमीन बड़ी तगड़ी और दर्दनाक प्रतिक्रिया देती है। एक पत्रकार मुझे बता रहे थे काँग्रेस कुमार केजरीवाल ने बहुत पैसा खर्च करके नाती-पोतों, उघटापैची गवनियों, घोटालेबाज एनजीओ और जमीर बेच कर घी पीने वालों ने आपा से प्रमाण-पत्र लेने की लाईन मे खड़ा कर दिया है। दिल्ली से महाराष्ट्र तक आपाई खटिए के बकलोल चौपायों ने जिस तरह से अपनी ही खटिया तोडनी शुरू की है उससे तो आपाई काँग्रेस कुमार केजरीवाल एंड कमपानी सहित रिंग मास्टर उर्फ फर्जी पोल मास्टर यादव जी, आपाई मफ़लर की फंसरी लगाए असंतोष गुप्ता सोर्री असुतोष गुप्ता जैसे लोग भी सकते यानी संकटे में हैं। हालाँकि फेरहिस्ट बहुत लंबी है मनीष सिसोदिया, प्रशांत भूषण, खुद काँग्रेस कुमार केजरवाल परवीन अमानुल्लाह से लेकर मेघा पाटकर तक सभी को अपने अनाचार-भ्रष्टाचार को आपाई खटिया पर बैठ कर ईमानदारी की चट्टी से अपना मुंह ढकना बहुत जरूरी है। इस हद का एक हृदयविदारक नमूना देखिये लिपिस्टिक कुमार विश्वास का जो खुदको लोकप्रिय कवि बताते फिरते हैं जबकि वास्तविकता ये है वो बिलकुल ही लोकप्रिय नहीं, क्या कोई बताएगा कि इससे पहले किस कवि ने काव्य-पाठ करके मारुति 800 भी खरीदने की हैसियत जुटा पाया ? अरे हरवंश राय बच्चन भी अपने मधुशाला से फिएट तक नहीं खरीद पाये फिर इस छिछोर छाप कवि के पास अरबों रुपये की संपत्ति अचानक मात्र दो साल मे ही कहाँ से आ गई वो भी मात्र काव्य-पाठ करके जबकि सभी कवि कविता को शौक के तौर पर रखते हैं मुख्य काम तो उनका कुछ और ही होता है। दरअसल ये सब अन्ना का हड़पा चंदा और विदेशों से आने वाला धन है जिसे ये फर्जी तरीके से काव्य-पाठ की कमाई बता रहे हैं मुझे नहीं मालूम कि लिपिस्टिक कुमार विश्वास के अलावा कोई कवि लम्बोर्गिनी जैसी गाड़ी से चलता हो और महलनुमा बंगले रहता हो। आपा के खटिए पर ऐसे ही भ्रष्ट और गंदे लोगों का जमावड़ा है जिसका पाया आपाई ही तोड़ने पर उतारू हैं।
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