Sunday, 5 January 2014

काँग्रेस के आउटसोर्स सेनापति केजरीवाल !!

काँग्रेस कुमार केजरीवाल से ज्यादा ईमानदार लालू प्रसाद यादव जिस भैंस की सींग पकड़ का उसकी पीठ पर बैठ कर सवारी करते थे ठीक उसी भैंस ने उनको उसी जगह पहुंचा दिया जहां से बाहर निकलने के बाद भगवान की बड़ी याद आती है। लालू यादव तो खैर आमने - सामने की लड़ाई लड़ने के लिए मशहूर रहे हैं लेकिन काँग्रेस कुमार केजरीवाल भागते तेजी से भागते घोड़े को उसका पूंछ पकड़ उसे रोकने का खवाब देख रहे हैं। बड़ा हिम्मत का काम है ऐसा ख्वाब देखना ही। "आपा" का कंठलंगोट बांधे एक खाँटी भाई कोंग्रेसी कह रहे थे "...केजरीवाल ऐसा कर सकते हैं ..." मैंने उनसे पूछा "... वो कैसे ...?" खाँटी भाई बोले "...उनको अमेरिका की शक्ति मिली हुई है ..." मैंने बीच मे ही बात काटते हुए पूछा "...जिनको अमेरिका की शक्ति मिलती है क्या उनको भागते घोड़े की दुलत्ती नहीं पड़ती क्या ...?" खाँटी भाई ने उत्तर देते कहा "... इसके लिए उन्हे पूरी - पूरी कीमत दी गई है ..." मैंने उनसे पूछा "...भागते घोड़े की पूंछ भी पकड़ने के लिए पूरी - पूरी दौड़ लगानी पड़ती है ..." खाँटी भाई बोले "...हैं तो वो मैदान मे ..." मैंने उनसे कहा "...वैसे दिल्ली के मैदान से वो भाग रहे थे तो आपको बड़ी मेहनत से जबरदस्ती उनको हांक कर कर मैदान मे लाना पड़ा ..." खाँटी भाई बोले "... आते कहे नहीं...!" मैंने उनसे पूछा "... क्या मतलब ..." खाँटी भाई बोले "...मतलब साफ है इसी दिल्ली की जनता से उनका वादा है ..." मैंने पलट कर उनसे पूछा "..लेकिन दावा आप कैसे कर सकते हैं ..." खाँटी भाई थोड़ा सकपकाए फिर उन्होने पलटकर मुझसे ही पूछा "...क्यों दावा हम क्यों नहीं कर सकते ...?" मैंने कहा "...इसके लिए आपके शाहजादे ..." खाँटी भाई ने बीच मे बात काटते हुए कहा "... देखिये उन्होने ने भी बहुत त्याग किया है ..." मैंने प्रतिऊत्तर स्वरूप कहा "...केजरीवाल साहब ने भी त्याग कर दिया अपने डुलेक्स महल का ..." खाँटी भाई बोले "... ये सब तो उनको करना ही था ..." मैंने उनसे पूछा "... तो क्या कलमाड़ी, मनमोहन सिंह, शीला जी आदि सभी अपने घोटाले का पैसा वापस करके माफी की उम्मीद करने वाले हैं जैसी उम्मीद केजरीवाल महल वापस करके कर रहे हैं ...?" खाँटी भाई बोले "... हम लोग भी किसी से कम नहीं हैं ..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...क्या मतलब है आपके कहने का ..." खाँटी भाई मतलब समझते हुए कहा "... युद्ध मे राजा पहले कभी भी आगे नहीं रहता और हर राजा की अपनी फौज रहती है और..." मैंने फिर आश्चर्य से पूछा "...और मतलब ...?" खाँटी भाई बोले "... और मतलब सेना के सेनापति कभी - कभी उधार भी लिए जाते हैं ..." मैंने संतुष्टि जताते हुए कहा "... मतलब केजरीवाल आपके आउटसोर्स सेनापति हैं ..." खाँटी भाई बोले "...दुलत्ती खाने की पूरी कीमत उनको दे दी गई है ..." मैंने आश्चर्य से कहा "...अमेरिका से करोड़ों की कीमत, पाकिस्तान से फंडिंग, काँग्रेस से अरबों की वसूली ...कहीं दुलत्ती की कीमत बहुत ज्यादा तो नहीं है ...?" खाँटी भाई कुछ बोले नहीं तो मैंने उनसे फिर पूछा "...लेकिन दुलत्ती पड़ने के डर से केजरीवाल तो मैदान छोड़ कर भाग रहे हैं ..." खाँटी भाई गुस्से मे बोले "...अगर भागेंगे तो फिर काँग्रेस की लत्ती पड़ेगी ...आखिर उनको पैसा किस बात का दिया गया है " ये कहते ही गुस्से मे कहीं चले गए मुझे उनको नमस्कार करने का भी मौका नहीं मिला .....खैर        

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