हाथी की दुम पर "आपा" की धुन
आपाई बन्नों ने बिन्नी को खदेड़ कर थपरी पीट रहे हैं ये ठीक वैसा ही है जैसे हाथी की पुंछ पकड़ कर लटके थे और हाथी ने जब गोबर कर दिया तो उल्टे हाथी को ही गरियाने लगे। बड़े दिनो तक पूंछ पकड़ कर लटक रहे थे ये तो हाथी की मेहरबानी ही समझिए कि उसने आपाई बन्नों का जलाभिषेक नहीं किया वरना इस ठंड उन आपाईयों की क्या हालत होती भगवान ही जाने। भैंस के बजाय हाथी पालने के शौकीन आपाई यादव जी से मैंने इस बारे मे पूछा तो वो आपा खो बैठे और कहने लगे "...हमारी हाथी किसी और के हुकुम की गुलाम हो गई थी ..." मैंने फिर उनसे पूछा "... भैंस पालने मे क्या बुराई थी ..." आपाई यादव जी बोले "... हम लोग सबसे अलग किस्म के लोग हैं ..." मैंने कहा "... ये दावा तो लालू यादव भी कर रहे थे ..." आपाई यादव जी ने इस पर नाराज होते हुए कहा "...आप लालू यादव से हमारी तुलना न करें ..." मैंने उत्तर देते हुए कहा "...बिलकुल तुलना नहीं हो सकती वो तो 15 साल बिहार मे राज किए और आपका डेढ़ महीना भी नहीं बीता और हाथी ने आप पर गोबर कर दिया ..." आपाई यादव जी और भड़क गए बोले "...आपको क्या पता है राजनीति बदल रही है ..." मैंने कहा "...लालू यादव ने भी राजनीति को बहुत हद तक बदला था और 15 साल तक राज किया ..." आपाई यादव जी और गुस्से मे आ गए बोले "...लालू यादव एक भ्रष्ट नेता है आपको पता है ..." मैंने उनका उत्तर देते हुए कहा "... उनकी भ्रष्टता के बावजूद किसी भैंस की इतनी हिम्मत नहीं पड़ी गोबर कर सके ..." अपाई बोले "... ये हमारा लोकतन्त्र है ..." मैंने कड़ाई से पूछा "...लोकतन्त्र का मतलब ये हैं आपके बन्ने हर जगह गंदगी फैलते फिरेंगे ...?" आपाई यादव जी गुस्से मे मुझसे पूछा "...कौन गंदगी फैला रहा है ...?" मैंने कहा "...भारती जैसे लोग सभी को अपने जैसा समझते हैं सबको अपनी तरह भरी सड़क पर सरे आम गंदगी फैलाने को मजबूर करते हैं ये भी नहीं देखते कि गंदगी स्वदेशी है या विदेशी, नर की है या नारी की ..." आपाई यादव जी बोले "...देखिये आपको सच्चाई पता नहीं है ..." मैंने कहा "... यही दावा तो लालू यादव भी करते हैं कि लोगों को सच्चाई का नहीं पता ..." यादव जी रहा नहीं गया बोले "... लालू यादव ईमानदार नहीं है ..." मैंने कहा "...लेकिन लोगों का स्पष्ट मानना हैं लालू यादव आप लोगों से फिर भी कहीं ज्यादा ईमानदार हैं ..." आपाई यादव जी आँखों मे चमक आ गई और आँखें चमकाते हुए उन्होने मुझसे पूछा "...वो कैसे ...?" मैंने आराम से उत्तर देते हुए कहा "...उनका आंतरिक लोकपाल कभी भी उनको दोषी नहीं माना ..." मैंने आगे जोड़ते हुए कहा "... बावजूद इसके उन्होने बिहार मे 15 साल तक राज किया ..." आपाई यादव जी बोले '...लेकिन चारा घोटाला...?" मैंने उनकी बात बीच मे ही काटते हुए कहा "...उससे भी बड़े - बड़े घोटाले तो आपके नाम हैं इसीलिए आपके बन्नों ने बिन्नी को खदेड़ डाला ..." आपाई यादव जी को कहीं से फोन आ गया और फोन मे व्यस्त हो गए ... थोड़ी ही देर वो अपने बीसहजारी कर्मचारियों को बुलाने लगे तो मुझे वहाँ से भागने के सिवा कोई और चारा ही नहीं था ...
आपाई बन्नों ने बिन्नी को खदेड़ कर थपरी पीट रहे हैं ये ठीक वैसा ही है जैसे हाथी की पुंछ पकड़ कर लटके थे और हाथी ने जब गोबर कर दिया तो उल्टे हाथी को ही गरियाने लगे। बड़े दिनो तक पूंछ पकड़ कर लटक रहे थे ये तो हाथी की मेहरबानी ही समझिए कि उसने आपाई बन्नों का जलाभिषेक नहीं किया वरना इस ठंड उन आपाईयों की क्या हालत होती भगवान ही जाने। भैंस के बजाय हाथी पालने के शौकीन आपाई यादव जी से मैंने इस बारे मे पूछा तो वो आपा खो बैठे और कहने लगे "...हमारी हाथी किसी और के हुकुम की गुलाम हो गई थी ..." मैंने फिर उनसे पूछा "... भैंस पालने मे क्या बुराई थी ..." आपाई यादव जी बोले "... हम लोग सबसे अलग किस्म के लोग हैं ..." मैंने कहा "... ये दावा तो लालू यादव भी कर रहे थे ..." आपाई यादव जी ने इस पर नाराज होते हुए कहा "...आप लालू यादव से हमारी तुलना न करें ..." मैंने उत्तर देते हुए कहा "...बिलकुल तुलना नहीं हो सकती वो तो 15 साल बिहार मे राज किए और आपका डेढ़ महीना भी नहीं बीता और हाथी ने आप पर गोबर कर दिया ..." आपाई यादव जी और भड़क गए बोले "...आपको क्या पता है राजनीति बदल रही है ..." मैंने कहा "...लालू यादव ने भी राजनीति को बहुत हद तक बदला था और 15 साल तक राज किया ..." आपाई यादव जी और गुस्से मे आ गए बोले "...लालू यादव एक भ्रष्ट नेता है आपको पता है ..." मैंने उनका उत्तर देते हुए कहा "... उनकी भ्रष्टता के बावजूद किसी भैंस की इतनी हिम्मत नहीं पड़ी गोबर कर सके ..." अपाई बोले "... ये हमारा लोकतन्त्र है ..." मैंने कड़ाई से पूछा "...लोकतन्त्र का मतलब ये हैं आपके बन्ने हर जगह गंदगी फैलते फिरेंगे ...?" आपाई यादव जी गुस्से मे मुझसे पूछा "...कौन गंदगी फैला रहा है ...?" मैंने कहा "...भारती जैसे लोग सभी को अपने जैसा समझते हैं सबको अपनी तरह भरी सड़क पर सरे आम गंदगी फैलाने को मजबूर करते हैं ये भी नहीं देखते कि गंदगी स्वदेशी है या विदेशी, नर की है या नारी की ..." आपाई यादव जी बोले "...देखिये आपको सच्चाई पता नहीं है ..." मैंने कहा "... यही दावा तो लालू यादव भी करते हैं कि लोगों को सच्चाई का नहीं पता ..." यादव जी रहा नहीं गया बोले "... लालू यादव ईमानदार नहीं है ..." मैंने कहा "...लेकिन लोगों का स्पष्ट मानना हैं लालू यादव आप लोगों से फिर भी कहीं ज्यादा ईमानदार हैं ..." आपाई यादव जी आँखों मे चमक आ गई और आँखें चमकाते हुए उन्होने मुझसे पूछा "...वो कैसे ...?" मैंने आराम से उत्तर देते हुए कहा "...उनका आंतरिक लोकपाल कभी भी उनको दोषी नहीं माना ..." मैंने आगे जोड़ते हुए कहा "... बावजूद इसके उन्होने बिहार मे 15 साल तक राज किया ..." आपाई यादव जी बोले '...लेकिन चारा घोटाला...?" मैंने उनकी बात बीच मे ही काटते हुए कहा "...उससे भी बड़े - बड़े घोटाले तो आपके नाम हैं इसीलिए आपके बन्नों ने बिन्नी को खदेड़ डाला ..." आपाई यादव जी को कहीं से फोन आ गया और फोन मे व्यस्त हो गए ... थोड़ी ही देर वो अपने बीसहजारी कर्मचारियों को बुलाने लगे तो मुझे वहाँ से भागने के सिवा कोई और चारा ही नहीं था ...
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