देखा है पहली बार ...नमस्कार
उधार की लंगोटी से पहलवानी का काम चलाने वाले आपाई केजरीवाल ने जब रेल भवन से अपनी लंगोटी हवा मे लहराई और लोगों का आह्वान किया तो ऊपर आसमान मे चील-कौओं की आवाज़े सुनाई देने लगीं। इसलिए नहीं कि उन्हें भोजन की उम्मीद थी बल्कि इसलिए कि उस क्षेत्र का नाम ही "लोटियन्स ज़ोन" है जहां आज तक किसी ने लोटा नहीं बड़े भाग्य से तो कोई लोटने जा रहा है और बहुत से लोगों को लोटने के लिए बुला भी रहा है बड़ा अद्भुत नजारा होगा शायद यही सोच कर चील - कौवों की आवाज सुनाई दे रही थी। लेकिन एक आली छाप पशु-पक्षी विशेषज्ञ तो कुछ और ही दावा कर रहे थे वो बता रहे थे कि ये "लोटियन्स ज़ोन" नहीं बल्कि "लुटियन्स ज़ोन" है जहां लूटने के मकसद से अंग्रेज़ यहाँ आए थे तो उन्होने अपना ठिकाना यहीं बनाया था चूंकि लूट-खसोट उनका काम था और बनाने वाला उसी लुटेरा अंग्रेज़ बिरदारी का था इसलिए उसका नाम भी लुटियन्स ही था इसीलिए इस क्षेत्र को "लुटियन्स ज़ोन" कहते हैं आगे वो बताते हैं कि दरअसल मामला ये है कि आज तक कभी सड़क पर कोई लूट-पाट की वारदात हुई नहीं थी क्यों कि अंग्रेज़ लुटेरों के जाने के बाद ये वीआईपी ज़ोन भी घोषित हो जाने के कारण बहुत हाइ स्क्यूरिटी रहती है इसलिए किसी लूट-खसोट की वारदात अभी तक नहीं हुई थी लेकिन चील-कौवों की जिज्ञासा हमेशा बनी रहती थी उस अद्भुत नजारे को देखने की। पशु - पक्षी विशेषज्ञ आगे बताते हैं कि उनकी पक्षियों को घोटालों और घपलों की आवाजें सुनाई देती थीं लेकिन वो सब लुटियन्स ज़ोन के पत्थरों के पीछे ही दब के रह जाती थीं ये पहली बार था कि कोई संवैधानिक डकैती, कानून का घोटाला और लोकतान्त्रिक लूट-खसोट की सारी वारदात सरे आम "लुटियन्स ज़ोन" मे होने जा रही थी जिसे देखने के लिए पूरे आसमान मे चील - कौवों की भरमार हो गई। इसी मे किसी लालची चील को बहुत भूख लगी तो चालबाजी दिखाने लगा और मौके की तलाश मे छिप गया लेकिन पता चला कि थोड़ी देर बाद केजरीवाल सोने के लिए अपने कार मे चले गए और अपना शीशा बंद कर लिया फिर सबेरे अपने लूट-खसोट वाली जगह पर आकर सबको गुड मार्निंग कहने लगे। उस चालबाज चील ने कहा "...ये तो हमसे भी बड़ा चालबाज और धूर्त निकाला ...!" खैर उसके अरमान तो पूरे नहीं हुए लेकिन लूट-खसोट अद्भुत नजारा देखने वाले चील-कौवों की कुछ समय तक चाँदी जरूर रही। पानी का बरसाना थोड़ी बाधा पहुंचाया लेकिन बहुत ज्यादा नहीं क्योंकि "लुटियन्स ज़ोन" मे तो गिद्धों के भी छिपने की पर्याप्त जगह है यही नहीं उस छिपने की जगह से बड़े आराम से उधार की लंगोटी से लूट-खसोट के अद्भुत नजारे का आनंद लिया जा सकता है। उधार की लंगोटी के पाहलवानी पर झूठ जब एक कौवे से बर्दाश्त नहीं हुआ तो उसने आत्महत्या करने की ही कोशिश करने लगा लेकिन सुसाईड नोट टाइप करने के लिए कोई खाली नहीं था सब अद्भुत नजारे को देखने मे व्यस्त थे बेचारे को आत्महत्या ख्याल ही टालना पड़ा। चील-कौवों की ख़्वाहिश थी नजारा कुछ दिन और चले लेकिन बढ़िया दृश्य देर तक सामने कहाँ रहता है। बेचारे चील-कौवे मन मसोस कर अपने-अपने घर चले गए।
उधार की लंगोटी से पहलवानी का काम चलाने वाले आपाई केजरीवाल ने जब रेल भवन से अपनी लंगोटी हवा मे लहराई और लोगों का आह्वान किया तो ऊपर आसमान मे चील-कौओं की आवाज़े सुनाई देने लगीं। इसलिए नहीं कि उन्हें भोजन की उम्मीद थी बल्कि इसलिए कि उस क्षेत्र का नाम ही "लोटियन्स ज़ोन" है जहां आज तक किसी ने लोटा नहीं बड़े भाग्य से तो कोई लोटने जा रहा है और बहुत से लोगों को लोटने के लिए बुला भी रहा है बड़ा अद्भुत नजारा होगा शायद यही सोच कर चील - कौवों की आवाज सुनाई दे रही थी। लेकिन एक आली छाप पशु-पक्षी विशेषज्ञ तो कुछ और ही दावा कर रहे थे वो बता रहे थे कि ये "लोटियन्स ज़ोन" नहीं बल्कि "लुटियन्स ज़ोन" है जहां लूटने के मकसद से अंग्रेज़ यहाँ आए थे तो उन्होने अपना ठिकाना यहीं बनाया था चूंकि लूट-खसोट उनका काम था और बनाने वाला उसी लुटेरा अंग्रेज़ बिरदारी का था इसलिए उसका नाम भी लुटियन्स ही था इसीलिए इस क्षेत्र को "लुटियन्स ज़ोन" कहते हैं आगे वो बताते हैं कि दरअसल मामला ये है कि आज तक कभी सड़क पर कोई लूट-पाट की वारदात हुई नहीं थी क्यों कि अंग्रेज़ लुटेरों के जाने के बाद ये वीआईपी ज़ोन भी घोषित हो जाने के कारण बहुत हाइ स्क्यूरिटी रहती है इसलिए किसी लूट-खसोट की वारदात अभी तक नहीं हुई थी लेकिन चील-कौवों की जिज्ञासा हमेशा बनी रहती थी उस अद्भुत नजारे को देखने की। पशु - पक्षी विशेषज्ञ आगे बताते हैं कि उनकी पक्षियों को घोटालों और घपलों की आवाजें सुनाई देती थीं लेकिन वो सब लुटियन्स ज़ोन के पत्थरों के पीछे ही दब के रह जाती थीं ये पहली बार था कि कोई संवैधानिक डकैती, कानून का घोटाला और लोकतान्त्रिक लूट-खसोट की सारी वारदात सरे आम "लुटियन्स ज़ोन" मे होने जा रही थी जिसे देखने के लिए पूरे आसमान मे चील - कौवों की भरमार हो गई। इसी मे किसी लालची चील को बहुत भूख लगी तो चालबाजी दिखाने लगा और मौके की तलाश मे छिप गया लेकिन पता चला कि थोड़ी देर बाद केजरीवाल सोने के लिए अपने कार मे चले गए और अपना शीशा बंद कर लिया फिर सबेरे अपने लूट-खसोट वाली जगह पर आकर सबको गुड मार्निंग कहने लगे। उस चालबाज चील ने कहा "...ये तो हमसे भी बड़ा चालबाज और धूर्त निकाला ...!" खैर उसके अरमान तो पूरे नहीं हुए लेकिन लूट-खसोट अद्भुत नजारा देखने वाले चील-कौवों की कुछ समय तक चाँदी जरूर रही। पानी का बरसाना थोड़ी बाधा पहुंचाया लेकिन बहुत ज्यादा नहीं क्योंकि "लुटियन्स ज़ोन" मे तो गिद्धों के भी छिपने की पर्याप्त जगह है यही नहीं उस छिपने की जगह से बड़े आराम से उधार की लंगोटी से लूट-खसोट के अद्भुत नजारे का आनंद लिया जा सकता है। उधार की लंगोटी के पाहलवानी पर झूठ जब एक कौवे से बर्दाश्त नहीं हुआ तो उसने आत्महत्या करने की ही कोशिश करने लगा लेकिन सुसाईड नोट टाइप करने के लिए कोई खाली नहीं था सब अद्भुत नजारे को देखने मे व्यस्त थे बेचारे को आत्महत्या ख्याल ही टालना पड़ा। चील-कौवों की ख़्वाहिश थी नजारा कुछ दिन और चले लेकिन बढ़िया दृश्य देर तक सामने कहाँ रहता है। बेचारे चील-कौवे मन मसोस कर अपने-अपने घर चले गए।
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