Saturday, 18 January 2014

कुक्कुर की पूंछ पर - बकलोल ताव मूंछ पर

बहुत ज्यादा सभ्य व्यक्ति को आज मंच पर चढ़ कर घोषणा करना पड़ा कि उसे भी कपड़े पहनने हैं पता नहीं पिछले दस साल उसने बिना कपड़ों के कैसे गुजार दिये? ...खैर वैसे उसे ये भी साबित करने की जरूरत पड़ी कि उसने कपड़े पहने हुए भी हैं। बेचारा बकलोल बबुआ अपने पितरों-पिता की याद से मुक्त ही नहीं हो पा रहा है ... अभी तो माँ के सट्टा का जहर पीने से भाग रहा था ... अब पिता जी की कंघी याद आ गई ... इसके पहले क्या - क्या याद आई सभी को पता है। मैंने खाँटी भाई कोंग्रेसी से पूछा तो कहने लगे "...उन्होने तो आज पार्टी मे जान डाल दी ..." मैंने खाँटी भाई से पूछा "... इसके लिए इतना देरी करने की क्या जरूरत थी ...?" खाँटी भाई ने आश्चर्य से मुझसे पूछा "...देरी से आपका क्या मतलब ..." मैंने उत्तर देते हुए कहा "... मुर्दा तो लगभग सड़ चुका है जान कहाँ से पड़ेगी ...?" खाँटी भाई ने थोड़ा अचकचाते हुए उत्तर दिया "...देखिये कुछ तो सुधार हुआ ही है ..." मैंने कटाक्ष करते हुए पूछा "...हाथी की पूंछ और सूंढ मे काफी अंतर होता है ..." खाँटी भाई बोले "...सुधार तो दिख ही रहा है ..." मैंने सहमति जताते हुए कहा "...हाँ अपने गुरु से तो आगे निकल ही रहे हैं ..." खाँटी भाई मुसकुराते हुए बोले "... जिसने अपने गुरु को धोखा दे दिया उसको भी तो उसका चेला धोखा देगा ही ..." मैंने फिर पूछा "... लेकिन इसके लिए बिन्नी ..." खाँटी भाई बीच मे ही बात काटते हुए बोले "...ये तो दस्तूर है जैसे को तैसा ..." मैंने थोड़ा आश्चर्य जताते हुए पूछा "... क्या ये बहुत जरूरी था ..." खाँटी भाई उत्तर देते हुए बोले "...मोदी तो खैर मोदी हैं लेकिन आपाई केजरीवाल भी आगे निकल जाए ये हम बर्दाश्त नहीं कर सकते ..." मैंने कहा "...हाँ मैंने देखा इस समय केजरीवाल की लोकप्रियता 5% है आपके उपाध्यक्ष की 6% ...जबकि नरेंद्र भाई मोदी 89% पर हैं ..." खाँटी भाई सीना चौड़ा करते हुए बोले "... ये अभी 2 दिन का कमाल है ... आगे - आगे देखिये होता है क्या ..." मैंने भी सहमति जताते हुए कहा "...हाँ वो देखने वाली बात होगी ..." खाँटी भाई बोले "...एक बात तय है मिट गए हमे मिटाने वाले ..." मैंने इस पर कहा "...तो इसी बात का खामियाजा केजरीवाल भुगत रहे हैं ...?" खाँटी भाई बोले "... ये ऐतिहासिक तथ्य भी है ..." मैंने तल्ख पुष्टिपरक अंदाज मे खाँटी भाई से पूछा "... महात्मा गांधी ने भी काँग्रेस को नष्ट करने की जबरदस्त वकालत की थी ...!" खाँटी भाई का चेहरा इस पर देखने लायक था वो बगलें झाँकने लगे तो मैंने फिर पूछा "... यदि आपका ये ऐतिहासिक तथ्य सही है तो फिर महात्मा गांधी की तस्वीर क्यों लगी थी मंच पर ...?" असामान्य हो चुके खाँटी भाई से रहा नहीं गया वो बोले "...महात्मा गांधी हमारे आदर्श हैं ..." मैंने फिर उनसे पूछा "... फिर मोदी को अपना आदर्श मानने मे आपको क्या दिक्कत है ..." इस पर खाँटी भाई भड़क गए बोले "...गांधी जी और मोदी की तुलना कैसे हो सकती है ...?" मैंने शांत भाव से उत्तर देते हुए कहा "... भाई दोनों काँग्रेस को नष्ट करने की जबरदस्त वकालत करते है इसलिए ..."  खाँटी भाई कोंग्रेसी उत्तर देने के बजाय दिग्विजय सिंह को फोन लगाने लगे ... मैंने भी उनको नमस्कार करके विदा लिया ....          

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