"आपाहि" पाप थूकहि लै जान
30 दिसंबर तक भ्रष्टाचार वाला नंबर मिलना था लेकिन 11 दिनो बाद वो नंबर मिला वो भी अधूरा इसी बीच स्टिंग ऑपरेशन चला तो पता चला की हर कार्यालय मे जबर्दस्त घूसखोरी चल रही है वैसे दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष भी "आपा" के मुखिया ही हैं तो फिर घूस का हिस्सा तो उनको कैसे नहीं मिला होगा ? सवाल ये है कि इसपर संदेह क्यों न किया जाए ? बिरला होता या होती तो भी क्या होता लेकिन बिडलान बिरला या बिड़ला हो जाए तो फिर कोई आपत्ति न आवे तो शक होना स्वाभाविक है ये कैसे न मान लिया जाए कि
"आपा' ने जब बुर्का ओढ़कर चवन्नी उछाला तो खाँटी भाई कोंग्रेसी लोग गड्डी के गड्डी नोट "आपा" पर लुटाने लगे तो "आपा" मारे खुशी के निहाल हो गई। "आपा" के पति केजरीवाल के आँखों से मारे खुशी के आँसू ही छलक पड़े और इतने छलके कि खाँटी भाई कोंग्रेसियों के सारे पाप धुल गए। अब लोटा ले कर कहते फिर रहे हैं कि फ़ाईलों का अध्ययन कर रहे हैं ... पता नहीं अध्ययन करने का अधिकार उनका है या जांच एजेसियों का "आपा" जाने। अगर मंशा है जांच का आदेश दीजिये नहीं तो अपने मफ़लर मे मुंह छुपा के बैठिए बिन्नी के अलावा कोई कुछ नहीं कहेगा। एक बकलोल बुद्धिमान पता नहीं क्यों "धुलना" को "घुलना" बोल रहा था। मैंने उसे कहा कि देखो पाप धुल गए हैं लेकिन वो अपनी बात पर अड़ते हुए बार-बार कहे जा रहा था " पाप घुल गए हैं" मैंने फिर कहा काँग्रेस के पाप धुलने की बात है इसपर उन बकलोल बुद्धिमान का सीधा सा वक्तव्य था "...बात एक ही है आपा वास्तव मे काँग्रेस मे घुली ही हुई है..." खैर आपा के चवन्नी उछल पर खाँटी भाई लोग बड़ा अजीब सा बुर्का वाला 'आबरा का डबरा ' छाप जादू "आपा" के पति केजरीवाल से चलवाना चाहते हैं ताकि मोदी के तेज को कम किया जा सके। इसके लिए केजरीवाल ने "बुर्का कवच" भी ओढ़ लिया ताकि मोदी के तेज से बच सकें ... बकलोल बुद्धिमान ये भी बता रहे थे कि मोदी का तेज ऐसा है कि उससे केवल सहानुभूति से थोड़ी क्या बहुत राहत मिल सकती है इसीलिए "आपा" खास लोग बार - बार ये पाकिस्तान से पैसा लेने के बाद उसी की गवनाई करते रहते हैं कि हम तो आम लोग हैं हमारी क्या औकात ! हाँ भाई औकात को प्रशांत भूषण की है कश्मीर पर बोलने की। भाई ये लोकतन्त्र है यदि आपको कुछ बोलने की आजादी है तो हर किसी को प्रतिक्रिया भी देने की आजादी है सो जूता तो पड़ना ही था। ऐसी ही प्रतिक्रिया पर 1984 मे शहजादे के अब्बा ने 404 सीटें जीत ली थीं खैर उस समय उनकी अम्मी की हत्या कर दी गई थी कोई क्या कर सकता था उसी तर्ज पर "आप" भी फिर से काँग्रेसी के नोट के सहारे चवन्नी उछाल कर खुद भी उछलने की तैयारी कर रही है पूरी मणि अय्यारी के साथ चाय पीना को कबका वो लोग छोड़ ही चुके हैं। पहले भी चवन्नी उछाल पर बड़े-बड़े अय्यार विदेशों से बुलाए गए थे लेकिन भरी सड़क पर सोमरस भारती के नेतृत्व मे सरेआम उनकी इज्जत उतार देंगे ये "आपा" ही कर सकती है। जनधोखा मे भी "आपा" का कोई जवाब नहीं धोखईती का आलम ये है कि "मुख्यमंत्री के लिए केजरीवाल और प्रधानमंत्री के लिए मोदी" कह कर वोट मांगा था लेकिन ये भस्मासुर तो मोदी जी के ही पीछे पड़ गए खैर जैसे भस्मासुर खत्म हो गया ये भी खत्म हो जाएंगे इतिहास ही नहीं सत्य भी अपने आपको दोहराता है।
30 दिसंबर तक भ्रष्टाचार वाला नंबर मिलना था लेकिन 11 दिनो बाद वो नंबर मिला वो भी अधूरा इसी बीच स्टिंग ऑपरेशन चला तो पता चला की हर कार्यालय मे जबर्दस्त घूसखोरी चल रही है वैसे दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष भी "आपा" के मुखिया ही हैं तो फिर घूस का हिस्सा तो उनको कैसे नहीं मिला होगा ? सवाल ये है कि इसपर संदेह क्यों न किया जाए ? बिरला होता या होती तो भी क्या होता लेकिन बिडलान बिरला या बिड़ला हो जाए तो फिर कोई आपत्ति न आवे तो शक होना स्वाभाविक है ये कैसे न मान लिया जाए कि
"आपा' ने जब बुर्का ओढ़कर चवन्नी उछाला तो खाँटी भाई कोंग्रेसी लोग गड्डी के गड्डी नोट "आपा" पर लुटाने लगे तो "आपा" मारे खुशी के निहाल हो गई। "आपा" के पति केजरीवाल के आँखों से मारे खुशी के आँसू ही छलक पड़े और इतने छलके कि खाँटी भाई कोंग्रेसियों के सारे पाप धुल गए। अब लोटा ले कर कहते फिर रहे हैं कि फ़ाईलों का अध्ययन कर रहे हैं ... पता नहीं अध्ययन करने का अधिकार उनका है या जांच एजेसियों का "आपा" जाने। अगर मंशा है जांच का आदेश दीजिये नहीं तो अपने मफ़लर मे मुंह छुपा के बैठिए बिन्नी के अलावा कोई कुछ नहीं कहेगा। एक बकलोल बुद्धिमान पता नहीं क्यों "धुलना" को "घुलना" बोल रहा था। मैंने उसे कहा कि देखो पाप धुल गए हैं लेकिन वो अपनी बात पर अड़ते हुए बार-बार कहे जा रहा था " पाप घुल गए हैं" मैंने फिर कहा काँग्रेस के पाप धुलने की बात है इसपर उन बकलोल बुद्धिमान का सीधा सा वक्तव्य था "...बात एक ही है आपा वास्तव मे काँग्रेस मे घुली ही हुई है..." खैर आपा के चवन्नी उछल पर खाँटी भाई लोग बड़ा अजीब सा बुर्का वाला 'आबरा का डबरा ' छाप जादू "आपा" के पति केजरीवाल से चलवाना चाहते हैं ताकि मोदी के तेज को कम किया जा सके। इसके लिए केजरीवाल ने "बुर्का कवच" भी ओढ़ लिया ताकि मोदी के तेज से बच सकें ... बकलोल बुद्धिमान ये भी बता रहे थे कि मोदी का तेज ऐसा है कि उससे केवल सहानुभूति से थोड़ी क्या बहुत राहत मिल सकती है इसीलिए "आपा" खास लोग बार - बार ये पाकिस्तान से पैसा लेने के बाद उसी की गवनाई करते रहते हैं कि हम तो आम लोग हैं हमारी क्या औकात ! हाँ भाई औकात को प्रशांत भूषण की है कश्मीर पर बोलने की। भाई ये लोकतन्त्र है यदि आपको कुछ बोलने की आजादी है तो हर किसी को प्रतिक्रिया भी देने की आजादी है सो जूता तो पड़ना ही था। ऐसी ही प्रतिक्रिया पर 1984 मे शहजादे के अब्बा ने 404 सीटें जीत ली थीं खैर उस समय उनकी अम्मी की हत्या कर दी गई थी कोई क्या कर सकता था उसी तर्ज पर "आप" भी फिर से काँग्रेसी के नोट के सहारे चवन्नी उछाल कर खुद भी उछलने की तैयारी कर रही है पूरी मणि अय्यारी के साथ चाय पीना को कबका वो लोग छोड़ ही चुके हैं। पहले भी चवन्नी उछाल पर बड़े-बड़े अय्यार विदेशों से बुलाए गए थे लेकिन भरी सड़क पर सोमरस भारती के नेतृत्व मे सरेआम उनकी इज्जत उतार देंगे ये "आपा" ही कर सकती है। जनधोखा मे भी "आपा" का कोई जवाब नहीं धोखईती का आलम ये है कि "मुख्यमंत्री के लिए केजरीवाल और प्रधानमंत्री के लिए मोदी" कह कर वोट मांगा था लेकिन ये भस्मासुर तो मोदी जी के ही पीछे पड़ गए खैर जैसे भस्मासुर खत्म हो गया ये भी खत्म हो जाएंगे इतिहास ही नहीं सत्य भी अपने आपको दोहराता है।
No comments:
Post a Comment