Sunday, 21 December 2014

आतंकवाद महज आर्थिक और राजनीतिक हित और कुछ भी नहीं

अगर कोई ये सोचता है कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, कोई जाति नहीं होती या किसी समुदाय से वो लोग सम्बद्ध नहीं होते बिल्कुल सही हैं वो लोग। जैसे आतंकवाद बिल्कुल धर्मनिरपेक्ष, जातिनिरपेक्ष और समुदाय निरपेक्ष होता है वैसे ही निरपेक्षता भी अपने साथ गज़ब का आतंकवाद है। जवाहर लाल नेहरू का जब गुटनिरपेक्ष आंदोलन उन्ही की जेब में जब चवन्नी के भार तले अपना दम तोड़ रहा था तभी धर्मनिरपेक्ष आतंकवाद ने अपनी आँखें खोलनी शुरू कीं। वैसे तो जवाहर लाल के पास इतना भी दिमाग ही नहीं था कि वो नीतिगत फैसलों की समीक्षा भी कर सकें लिहाजा आतंकवाद के मुद्दे पर उस समय की तत्कालीन काँग्रेस नेहरू के साथ चुप रही और इसे बकलोल कोंग्रेसियों द्वारा विदेशनीति का अहम हिस्सा मान लिया गया जिसे मूर्खवे नेहरूवाद कहते हैं जिसका नतीजा था चीन के हाथों पराजय हालांकि कई मोर्चों पर भारतीय सेना के वीरों ने चीन को धूल भी चटाई थी लेकिन नेहरूवादियों ने इसे दबाने की पूरी कोशिश की और वो सफल भी रहे। पाकिस्तान ने हमारी जमीन इसी नेहरूवाद के कारण हड़प ली उसका कुछ हिस्सा चीन को भी दे दिया लेकिन आगे क्या हुआ सबको दिखता है।
अमेरिका ने तत्कालीन सोवियत संघ आगे बढ्ने से रोकने के लिए आतंकवाद को सबसे पहले बढ़ावा दिया और फिर आगे चल अपने हथियार बेचने के लिए भारत के खिलाफ पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा पूरे ज़ोरशोर से दिया और साथ ही उसको पूरी उम्मीद भी थी कि इससे वो बचने में सफल रहेगा लेकिन तब तक नहीं खुल के बोला जब तक लादेन ने अमेरिका को उसकी औकात नहीं दिखा दी। फिलिस्तीन के मामले में मामला ये है कि इसराईल अद्भुत वैज्ञानिक विकास बेहद आकर्षक है और इसी आकर्षण से कहीं अरब के नागरिकों में कहीं इसराईल के प्रति आकर्षण न पैदा हो जाए इसी से बचने के लिए फिलिस्तीन के आतंकवाद इस्लाम के नाम पर अरब के हुक्मरानों ने जिंदा रखा हुआ है।
उन्हीं अरब के उद्योगपतियों को जब ये लगा कि तेल अब खत्म होने वाला है और 25 - 30 साल में इसका उत्पादन अरब के देशों में नहीं होगा तो उन्होने रियल इस्टेट में पैसा लगाया और अकूत पैसा लगाया जो लगभग 23 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है और अरब के बजट एक तिहाई है अब इतना पैसा लगाने के बाद अगर वो कहीं डूब गया तो अरब के शेख खड़े - खड़े कंगाल हो जाएंगे उनको पुराने कबीले वाली जिंदगी में जाने से कोई नहीं रोक सकता। भारत-पाकिस्तान-अफगानिस्तान-नेपाल-श्रीलंका-भूटान-मालदीव में ऐसी बेहद खूबसूरत जगहों की भरमार है कि जो अगर विकसित हो गए तो इन अरब के देखों दिवाला पिटना तय है। यही कारण है कि ये अरब देश के अमीर पाकिस्तान को मोहरा बना कर आतंकवाद का वित्तपोषण कर रहे हैं जिससे भारत कहीं से भी विकास के रास्ते पर ण बढ़ सके और अरब देशों के शेखों की अमीरी कायम रहे। आतंकवाद को विशुद्ध आर्थिक और कूटनीतिक मामला है जिसे उसी तरीके से आसानी से निपटा जा सकता है आर्थिक स्रोतों के तबाह करके ... 

Thursday, 18 December 2014

पैसे के लिए कत्लेआम आम पाकिस्तान में ....

क्या महज एक संयोग ही है कि मई 2011 में ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद अचानक पाकिस्तान में अच्छे और बुरे दोनों तालिबान बहुत अधिक सक्रिय हो गए और पाकिस्तान में आतंकवादी घटनाओं की बाढ़ सी आ गई। वैसे सामान्यतः लादेन के मारे जाने के बाद आतंकवादियों के हौसले कमजोर पड़ने चाहिए थे लेकिन हो बिलकुल उल्टा रहा है। पाकिस्तान की आतंकवादी घटनाएं फिलिस्तीन की आतंकवादी घटानाओं से काफी हद तक समान हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि फिलिस्तीन को जब पैसे की जरूरत होती है तब उसके आतंकवादी इस्राईल पर हमला करते हैं और अरब पैसे की बरसात शुरू हो जाती है और कुछ निर्दोष नागरिक हलाल होने के बाद हमले रुक जाते हैं। पाकिस्तान जब भारत में बड़ी वारदात को अंजाम देने में नकबयाब या कामयाब रहता है तो भी अपने ही देश में अपने ही नागरिकों को मरने में उसे कोई झिझक नहीं होती। वस्तुतः जब तक लादेन जिंदा था और पाकिस्तान में था उसे इस्लाम के विस्तार के नाम पर अरब देशों से मिलने वाले धन की कोई कमी नहीं थी यही कारण है लाहौर में हाफ़िज़ सईद के जलसे को सफल बनाने के लिए पूरी सरकारी मशीनरी सक्रिय हो गई थी यहाँ तक कि ट्रेनों तक की व्यवस्था कर दी गई। ये सब अरब देशों से पैसा उगाहने के लिए किया गया था। लेकिन लादेन के मारे जाने के बाद अब उसमे दिक्कत हो रही है एक सभी लादेन की तरह दिलेर नहीं नहीं है जो अमेरिका के खिलाफ बगावत कर सकें और इतने जीवट भी नहीं हैं कि तोरबोरा की पहाड़ियों और मिस्र के रेगिस्तान में वर्षों गुजार दें वो सिर्फ इस्लाम के नाम पर और फिर इस बीच आई एस भी उभर गया है लिहाजा पाकिस्तान पहले कहीं ज्यादा अब अमेरिकी अनुदान पर निर्भर है लेकिन अमेरिका ने लादेन के मारे जाने के बाद पाकिस्तान को मिलने वाला 800 मिलियन डालर के अनुदान विचार करते हुए  रोक लगा दी। तभी से पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय मंचो पर ये लगातार ये जताने में लगा हुआ है कि वो आतंकवाद से बुरी तरह ग्रस्त है और से फंड की जरूरत है। इधर 26 जनवरी के अतिथि के तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा की भारत यात्रा पर आने वाले हैं उसके पीछे सीधे-सीधे अमेरिका का अपना हित है उनको अधिक बिज़नेस की सख्त जरूरत है और इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि अमेरिका के लिए सोना नहीं हीरा उगलने वाली लॉकहीड मार्टिन और बोइंग जैसे कंपनिया सीधे उच्च तकनीक के साथ भारत में निवेश के लिए आतुर हैं अब इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि आतंकवाद के खिलाफ जंग में पाकिस्तान अमरीका से कितनी कौड़ी मिल रही होगी। चीन और पाकिस्तान में एक बात समान है कि वहाँ की राजनीति में नागरिक भावनाओं के लिए कोई जगह नहीं है। सत्ता के निमित्त वो अपने लोगों को भी मार डालने में कोई संकोच नहीं करते। पेशावर के आर्मी स्कूल में आतंकवादी हमले का एक बेहद तार्किक और मजबूत पक्ष ये भी है।

Friday, 12 December 2014

अपना घर जिंदगी...दूसरों का गंदगी

घर वापसी पसंद नहीं ...खाँटी भाई कोंग्रेसी सहित सभी सिकउल्लूर शोषनिष्टों ने आज कल आसमान सर पे उठा रखा है ...एक वामपंथी सिकउल्लूर जिनको और दूसरे कोंग्रेसी और शोषनिस्टों की तरह दूसरों का घर, दूसरों का धन, दूसरों की लुगाई, दूसरों की मलाई बहुत पसंद है इसीलिए अभिषेक मनु जैसे खाँटी भाई शोषनिस्ट कम्युनिष्ट रात-बिरात अपने घर के बजाय दूसरों के घर पहुँच जाते हैं। एक बार तो हद ही हो गई एक खाँटी भाई शोषनिस्ट-कम्युनिस्ट-सिकउल्लू बहुत दिनो तक घर वापसी नहीं किए तो उनकी श्रीमती जी पहुँच गई  तो जबरन उनको भी दूसरो के घर का सदस्य बना दिया गया फिर क्या था विदेशों के उनको दौरे पड़ने लगे दूसरों की लुगाईयां मार-मलाईयां लेकर इनके पास आने लगीं ...अरे इनकी भी लुगाई मय परिवार दूसरों के घर मलाई लेकर जाने लगी। पैसे का तो अंबार लग गया ...माहौल ऐसा बना दिया इन सिकउल्लरों ने कि कोई अपने घर वापस जाना भी चाहे तो न जा सके आज बहुत बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो अपने घर वापस जाना चाहते हैं जमनादास अख्तर, नज़म सेठी, तसलीमा, आदि संख्या बहुत बड़ी है लेकिन ये सिकउल्लू अपना उल्लू सीधा करने से बाज नहीं आएंगे क्योकि इससे  ....एक तो वोट बैंक का खतरा दूसरे इसी बहाने गोरा-गोरा-काला-काला धन भी इनको मिलता है। ये नाजायज ताल्लुकात इतना तगड़ा है कि ए॰ एस॰ दिलीप कुमार उर्फ ए आर रहमान दूसरों के घर का सदस्य बनते ही  दाऊद के इशारे पर बॉलीवुड में इनको दनादन काम मिलने लगा , दनादन ग्रॅमी अवार्ड से नवाज दिया गया और भी बहुत कुछ हुआ दूसरों के घर का सदस्य बनते ही जबकि उस घर में संगीत गुनाह है तब किसी सिकउल्लू र की आवाज नहीं उठी थी ... मैडम टेरेसा को सिर्फ इसलिए नोबल पुरस्कार दिया गया क्योंकि वो सेवा के बहाने इन किसी सिकउल्लूरों के इशारे पर दूसरों का घर बसा रही थी ...इसके लिए गोरा-गोरा-काला-काला धन अकूत मात्रा में आता था। जबकि टेरेसा की अम्मा इस भारत माता की गोद में हजारों माता अमृतमयी, माता ऋतंभरा जैसी हैं जिनको किसी पुरस्कार की लालसा नहीं निस्वार्थ भाव की ममता है जो जिनकी सेवा के आगे मैडम टेरेसा कुछ भी नहीं ...म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) थोप कर थोक के भाव से न सिर्फ लोगों को गुलाम बनाया जा रहा है बल्कि मानसिक रूप से कुंद करके मूर्ख भी बनाया जा रहा है (इसकी पुष्टि के लिए गुड़गाँव स्थित मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र से संपर्क किया जा सकता है ) ऊपर ये इतना खतरनाक है कि जिसे म्लेच्छ बोली नहीं आती वो हींन भावना का शिकार हो कर कुंठित हो चुका है। बहुत आवशयक है स्वाभिमान जागरण की और उसके साथ-साथ घर वापसी की ...

Tuesday, 9 December 2014

हालांकि ये इतना संवेदनशील विषय है कि मेरी लिखने की इच्छा बिलकुल नहीं थी लेकिन मूर्ख आपिए और उनका महामूर्ख बास की हरकतों ने लिखने पर विवश कर दिया है ...

यूं ही नहीं आपियों को मूर्ख और जरीवाल को महामूर्ख कहा जाता है ...

कभी मूर्ख आपियों ने अपने महामूर्ख बास जरीवाल के इशारे इस मुद्दे पर मोमबत्ती-मार्च निकाल कर लोगों को अप्रैल-फूल बनाने का प्रयास किया है कि जो पियक्कड़ नशे में धुत हो कर सड़क पर ऐश फरमाते हैं उनका सब कुछ क्यों लुट जाता है ? उसका जेब में रखा रुपया - पैसा सब कुछ लूट लिया जाता और वो धुत नशे में सड़क के किनारे पड़ा रहता है ...दिल्ली में ये नजारा आम है ...टैक्सी में यात्रा करने वाली लड़की यदि शाम से देर रात तक नशा नहीं कर रही होती तो दिल्ली के आम जनता की पूरी सहानुभूति उसके साथ होती। लेकिन अपराध तो अपराध है जो नहीं होना चाहिए लेकिन पुलिस काम अपराध के पहले नहीं बाद में शुरू होता है और उसने पूरी मुस्तैदी दिखते हुए अपराधी को पकड़ लिया। एक आपिया चिल्ला रहा था "...दिल्ली में महिलाएं दारू पीने के बाद भी सुरक्षित नहीं हैं ..." मैंने उससे कहा "...तो गब्बर केजरीवाल के घर जा कर हल्ला करो ..." इस पर मूर्ख आपिया सकपका गया बोला "...नहीं हम यहीं हल्ला बोलेंगे..." मैंने उससे पूछा "...क्यों ??? अपराधी तो पकड़ा जा चुका है ...! " मूर्ख आपिया बोला "...तो क्या हुआ हमे लगता है जो कुछ हुआ उसके लिए सरकार दोषी है ..." मैंने कहा "...अगर सरकार दोषी है तो इसके लिए महामूर्ख केजरीवाल को फांसी पर लटका देना चाहिए ..." ये सुनते ही मूर्ख आपिया भड़क गया और गुस्से में बोला "...दोष है सरकार का तो फांसी पर केजरीवाल क्यों लटकेंगे ...?" मैंने आराम से उत्तर देते हुए कहा "... क्योंकि कभी केजरीवाल पियक्कड़ों की लूट के खिलाफ कभी आवाज नहीं उठाई और इसीलिए इस तरह के अपराध बढ़ रहे हैं जिसके लिए सीधे महामूर्ख केजरीवाल जिम्मेदार है ...समझे मूर्खाधिराज ..." इसपर वो मूर्ख आपिया ज़ोर-ज़ोर से अपना कपार खजुआने लगा बहुत देर तक खजुआने के बाद सफाई देते हुए बोला "...कॉंग्रेस वाले भी तो धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं ..." मैंने उसका उत्तर देते हुए कहा "...जैसा गुरु वैसा चेला ...पीए दारू मारे ढेला ..." आपिया फिर कनफ्यूज़ हो गया और मुझसे पूछा "...आपके कहने का क्या मतलब है ...?" मैंने उसका उत्तर देते हुए कहा "...मतलब यही कि दारू में ढेलाबाजी और नारेबाजी दोनों का कोई मतलब नहीं ...?" "...लेकिन इस घटना के लिए सरकार जिम्मेदार है ..." उसने फिर वही रट लगाई तो मैंने उसे डांटते हुए कहा "...तो क्या टैक्सी में उसके साथ कोई पुलिस वाला आता या होममिनिस्टर को आना चाहिए था मूर्ख कहीं के ...?  इस पर मूर्ख आपिया टोपी उतार कर कपार खजुआते हुए चुप हो गया....    

Sunday, 7 December 2014

बकलोल धनिया को 3 लाख , 15 लाख पुदीना को.... 

फोर्ब्स ने अभी कुछ दिन पहले केजरीवाल छाप बहुत बुद्धिमान और खाँटी भाई छाप बहुत अमीर लोगों के लिए अजीब जा नायाब तोहफा देने की पेशकश की। ये उसका दूसरा प्रयास था लूट का पैसा हराम में हजम करने वालों के लिए। अब देखिये न जैसी उसने कहा 77.18 बिल्लियन डालर के मालिक बिल गेटेस के पास इतनी संपत्ति है कि वो रोज 3 फेरारी कार 273 साल तक खरीद सकते हैं तो केजरीवाल और बकलोल बबुआ छाप उसके मैनेजर बिल गेट्स को डांडा करने करने के लिए फेरारी कंपनी के मालिक को उकसाने लगे... कहने लगे "...जैसी मांग केजरीवाल, बकलोल बबुआ और बहुत से समाजवादी छाप बुद्धिमान सेकुलरिस्ट अपने खाते में काले-धन से  3 या 15 लाख की मांग कर रहे हैं उसी आधार पर बिल गेट्स को ऐसा करना चाहिये वो रोज तीन फेरारी कार खरीदें ...".इसी फोर्ब्स ने कुछ साल पहले बिल गेट्स के बारे में कहा था कि यदि गेट्स के जेब से 100 डालर गिर जाए तो वो उठाएंगे नहीं क्योंकि उठाने में जितना समय वो बरबाद करेंगे उतने समय में उनका 300 डालर का नुकसान हो जाएगा जो उन्हें पसंद नहीं। बस क्या था काँग्रेस के बड़े-बड़े नेता, केजरीवाल छाप बहुत बुद्धिमान, सेकुलरिस्ट  गेट्स के पीछे ही पड़े हुए हैं कि कब उनकी जेब से हर सेकेंड 100-100 डालर गिरेगे और वो उठाएंगे नहीं ठीक उसी तर्ज पर ये पुदीना पांड़े, धनिया नरेश आदि छाप नकारा मीडिया वाले और बकलोल बबुआ छाप सेकुलरिस्ट मोदी के पीछे काले-धन के नाम पर पड़े हैं। पता नहीं कौन बुद्धिमान है और कौन बकलोल फेरारी वाले वाले बकलोल हैं या केजरीवाल-कोग्रेस-समाजवादी सेकुलरिस्ट या वो सब अमेरिकी जिनहोने कभी ये उम्मीद नहीं की कि बिल गेट्स अपनी जेब से हर सेकेंड 100-100 डालर गिराते फिरेंगे। सुना है कुछ सेकुलरिस्ट धनिया नरेश, पुदीना पांडे आदि साथ इटली की यात्रा पर जाने वाले हैं फेरारी कंपनी को फायदा पाहुचने के निमित्त ट्रेनिंग देने के लिए कि गेट्स को वो 3 कार रोज खरीदने के लिए मजबूर कर सके। केजरीवाल अमेरिका गए हैं सुना है भगवत मान सिंह के ट्राफिक जाम जिसमे उमड़ने वाली भीड़ मोदी के रैली में आने वाली भीड़ से भी ज्यादा होती है में ओबामा नहीं थे जिससे केजरीवाल को बहुत निराशा हुई है लिहाजा वो गेट्स के सामने भी फेरारी कंपनी की मौलिक जरूरत को नहीं रख पाएंगे भले ही कंपनी इसकी मांग न करती हो। लेकिन भारत में उनके जैसे बहुत बुद्धिमान कतरों की कमी नहीं जिनकी नजर हमेशा बिल गेट्स की जेब से 100 डालर की उम्मीद बनी रहती है और मौका मिलते ही ...पुदीना पांदे, धनिया नरेश आदि छाप मीडिया के लोग और नेता जी क्या करते हैं सबको पता है ...  

Friday, 5 December 2014

बानर नचावे भालू - फेके पैसा भौकालू

गब्बर का धनभोज ...रामनगर की तर्ज पर दिल्लीवालों ने जब गब्बर केजरीवाल के आगे दाना डालना बंद कर दिया ...लेकिन फिर भी गब्बर ने 50 लाख दिखाया ये कहते हुए कि भोज खाने वालों ने न्योता में दिया है ....खैर खाना कौन खाया कहाँ से आया था इन सबका पता आपिया वैबसाइट पर नहीं मिला तो मेरा माथा ठनका तो मैने जांच शुरू की तो  एक समर्पित आपिया कर्मचारी से पता चला कि ये 50 लाख दरअसल वो पैसे हैं जो आपिया पार्टी के टिकट बेच कर जुटाए गए थे जिसे दिखाना मुश्किल हो रहा था लिहाजा गब्बर केजरीवाल ने धनभोज के माध्यम से उस काले धन को सफ़ेद बना डाला...मतलब काले धन के बावजूद अब टिकट लेने वालों के भी लाले पड़ने लगे हैं गब्बर केजरीवाल को ... तो गब्बर डूबे जी से मिलने डुबई के लिए उड़ गए...बिजनेस क्लास में गए हैं ...मैंने डूबे जी से पूछा तो कहने लगे "...मुझे कुत्ता थोड़े न काटा है कि मैं केजरीवाल को बुलाउंगा वो भी बिजनेस क्लास का टिकट पर ..." खैर मौज-मस्ती कराने में भगवत जी का क्या काम ? उन्हीं के नाम पर गब्बर बड़ा हाथ मारने के फिराक में है ... ठीक उसी तर्ज पर "...नाच मेरी बुलबुल कि पैसा मिलेगा ..." गब्बर केजरीवाल के नाम पर तो जो मिल रहा है उससे गब्बर के जूते का फीता भी नहीं मिलेगा ..एक आपिया बता रहा था कि केजरीवाल का न्यूयार्क में भी बहुत बड़ा कार्यक्रम है ...तो मैंने पूछा "...क्यों भारत में तमाशा दिखाने के लिए आँगन टेढ़ा है क्या ..." इस पर बेचारा आपिया खिसिया गया और लगा खंभा नोचने खैर ...उसी मे से एक से मैने पूछा भगवत बाबू का क्या काम है ? तो आपिए कुछ बोल नहीं पा रहे थे तभी किसी ने कहा को वो हमारे सांसद हैं ... तो मैंने कहा जानकारी देने के लिए धन्यवाद वैसे मैंने सुना है कि कहते फिरते हैं हैं जिनती भीड़ मोदी को सुनने नहीं आती उससे कई गुना तो रेड लाइट पर भगवत बाबू को देखने चले आते हैं ... इस पर आपिया खुश होकर बोला "...हाँ ये सत्य है ..." तो मैंने पूछा "...तो क्या  रेड लाइट की भीड़ में ओबामा नहीं थे क्या जो भगवत बाबू न्यूयार्क गए है ओबामा को अपना ..." इस पर आपिए मुझे घूरने लगे तो फुट लिया वहाँ से ...आपिए कापार खजुआते ही रह गए ....

Tuesday, 2 December 2014

मार दुलत्ती मार ....

मौका मिलते ही अपने गुरु को पूरे गुरूर से लतियाने की जो परम्परा केजरीवाल ने शुरू की वो अपने आप अनोखा इसलिए है क्योंकि गुरु को लतियाने की परम्परा प्रकृति में अन्यन्त्र कहीं भी नहीं दिखती सभी 87 लाख जीव गुरु का पूरा-पूरा सम्मान करते हैं सिवाय केजरीवाल छाप बकलोल बबुआ की बिरादरी के। देखिये न जैसे ही मेरे लेख से पता चला कि केजरीवाल की विश्वसनीयता खरतनक स्तर तक घट चुकी है और आपियों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है तो झट से बकलोल बबुआ ठीक अपने गुरु की तर्ज पर ठीक गुरु को को ही लतियाने निकाल पड़ा मजबूरी है बकलोल बबुआ को किसी भी स्थिति में दिल्ली की सत्ता चाहिए ताकि इज्जत बची रहे। बड़ी अजीब सी स्थिति है और वाकई मुझे समझ में नही आता कि आखिर क्या कारण है ये बिरादरी अपने गुरुओं को कायदे से लतियाने के लिए "गांधी जी" से आशीर्वाद क्यों मांगती है ? केजरीवाल अपने गुरु को लतियाने से पहले गांधी जी की मूर्ति के सामने खड़े हो कर पूरा-पूरा आशीर्वाद लिया था पूरे दल बल के साथ ठीक उससे तर्ज पर बकलोल बबुआ भी संसद परिसर में ही "गांधी जी" के आशीर्वाद लिया ताकि अपने गुरु केजरीवाल को कायदे से लतिया कर दिल्ली में कम से कम नंबर 2 पर आ सकें। बकलोल बबुआ के इस हरकत पर लतियाने वाली टिप्पणी की तो एक बकलोल आपिया बहुत गुस्से मुझे नसीहत देते हुए बोला "...राहुल जी का ये मोदी सरकार पर हमला है ..." मैंने थोड़ा मज़ाकिया आश्चर्य लहजे में कहा "...बहुत अच्छे ... ये भी प्रकृति की एक अद्भुत घटना है जब एक बुरी तरह घायल गीदड़ ठीक उसी शेर पर हमला कर रहा है जिसने हाथपैर तोड़ के उसे अधमरा करके छोड़ा है ..." इसपर बकलोल आपिया सकपका गया और पूछा "...तो आपके हिसाब से क्या है ..." मैंने फिर मज़ाकिया लहजे में कहा "...दिल्ली में केजरीवाल को नंबर तीन पर खसकाने की बकलोल बबुआ की रणनीति है ..." ये सुनते ही मूर्ख आपिया बौखला गया और पूछा "...आपका मतलब है हम दिल्ली मे सत्ता में नहीं आएंगे ...?" मैंने उससे आराम से कहा "...बकलोल बबुआ तो यही चाहता हैं अपने गुरु को लतियाने के बाद केवल केजरीवाल की विजय हो आपियों को कम से कम एक सीट तो मिल जाए ..." ये सुनते ही बकलोल आपिया अपना कापार ज़ोर-ज़ोर से खजुआने लगा ....तभी पास में एक खाँटी भाई कोंग्रेसी भी आ गए बोले "...केजरीवाल से नहीं हमारा संघर्ष नहीं है ...हम मोदी से लड़ रहे हैं ...." मैंने कहा इसीलिए "...आपके उपाध्यक्ष जी अपने गुरू  केजारीवाल को लतिया के 28 सीटे जीतने का ख्वाब देख रहे हैं कि नहीं ... ठीक वैसे ही जैसे केजरीवाल अपने गुरु को लतिया के 28 सीटें जीत लिए थी ...." खाँटी भाई और बकलोल आपिया दोनो एक दूसरे को घूर रहे थे ......      

Monday, 1 December 2014

केजरी का जायका-रा - कौआ बोले कांव

कोग्रेसी युवराज यानी बकलोल बबुआ केजरीवाल को अपना गुरु मानते हैं तो जाहिर है कुछ न कुछ तो होगा ही। एक कहावत है जितनी जरूरत चेला को गुरु की नहीं होती उससे ज्यादा कहीं जरूरत गुरु को योग्य चेले की होती है। कमाल देखिये बकलोल बबुआ काँग्रेस के लिए सरदर्द बना हुआ है ठीक वैसे ही केजरीवाल भी अपिया पार्टी के सरदर्द बन गए है। आपिया पार्टी के स्वनामधान्य विश्व के सबसे बुद्धिमान प्रोफेसर, चिंतक और विचारक भी ये मानते हैं कि वास्तव में केजरीवाल की विश्वसनीयता लगातार घटती जा रही है लोकप्रियता घटना उतना बुरा नहीं है लेकिन विश्वसनीयता का घटना  बेहद खतरनाक है। लेकिन बकलोल बबुआ की तर्ज पर कोई ये बात कहने को तैयार नहीं था लिहाजा केजरीवाल औकात दिखाने के लिए पिछली बार की तर्ज पर धन-भोज का आयोजन कर डाला केजरीवाल धन-भोज से पहले कहते फिर रहे थे कि कम से कम 5 करोड़ तो उगाह ही लेंगे लेकिन मिले सिर्फ 50 लाख  वो भी फीस 20 हजार रखने बाद जबकि पिछली बार सिर्फ एक ही धन-भीज में 90 लाख मिल गए थे और फीस भी केवल 10 हजार थी। बेंकेट हाल में आने वाले लोग जब पर्याप्त संख्या में नहीं आ पाए तो आपियों से भरी संख्या दिखाने की कोशिश की गई फिर भी हाल भरा हुआ नहीं था तो वेटरों को टोपी ओढ़ाकर कुर्सी पर बैठाया दिया गया और फोटो खीचा गया । सवाल ये उठता है कि जब संख्या पूरी थी और हाल भरा हुआ था तो धन उगाही भी 5 करोड़ से ज्यादा होनी चाहिए थी। इस दुर्घटना ने आपिया पार्टी की कार्यकारिणी  को सकते में डाल दिया है। आपिया पार्टी के सलीम चचा के बहुत करीबी बता रहे थे कि उनके साथ बहुत से लोगों ने केजरीवाल से कई बार आपिया पार्टी छोडने की इच्छा जाहिर की लेकिन केजरीवाल हैं कि मानने को तैयार नहीं हैं। पहले कई बार इस बात की चर्चा थी कि केजरीवाल को सीएम पद का उम्मीदवार नहीं बनना चाहिए लेकिन केजरीवाल को किसी भी कीमत पर मुख्यमंत्री पद की कुर्सी चाहिए लिहाजा तानाशाही वाले अंदाज में केजरीवाल इस आवाज को बेरहमी से दबा दिया लेकिन कल के धन-भोज दुर्घटना के बाद फिर इस हवा को ज़ोर मिल गया कि दिल्ली का मुख्यमंत्री केजरीवाल के अलावा किसी और को घोषित करना चाहिए यदि आप पार्टी का वजूद बचाना है तो ...देखते हैं केजरीवाल किसी और को CM पद का उम्मीदवार घोषित करते हैं या तानाशाही से इस आवाज को दबा देते हैं ...वैसे आपिया पार्टी के एक अदना कार्यकर्ता से लेकर चोटी के आपिया नेता भी ये खुल कर ये मानने लगे हैं कि केजरीवाल आप पार्टी के लिए बकलोल बबुआ की तर्ज पर बोझ बनते जा रहे हैं बड़ी ईमानदारी से ...विश्वसनीयता घटने की रफ्तार यही रही तो 10-12 सीट भी मिलना मुश्किल है ...

Sunday, 16 November 2014

नाचै मूढ़ खुद मूढ़ बखाना .....

सरे आम नाच गा के डायलाग मारने का अपना ही महत्व है इसको केजरीवाल ने साबित कर दिया और अगर जगह गले मे जब बंदर का जंतर हो तो मंतर भी गज़ब का फूंका जा सकता है। नकल मरने में जैसे बंदर सबसे आगे रहते हैं जो नकल कोई नहीं कर सकता वो केजरीवाल कर सकते हैं क्या करिएगा दिल्ली को वो पूरी तरह रामनगर जैसा ग्रामीण इलाका समझते हैं। एक आपिया  बहुत बुद्धिमान बता रहे थे "...हम दिल्ली को एक विकसित शहर के रूप मे विकसित करेंगे ..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...क्या सारे उड्पथों (फ़्लाइ ओवर) को गिरा देंगे ...?" बहुत बुद्धिमान आपिया बोले "...हम दिल्ली का विकास करेंगे ..!" मेरा आश्चर्य फिर भी कम नहीं हुआ "...तो क्या मेट्रो को भी गिराएँगे ..." बहुत बुद्धिमान आपिया थोड़ा झन्नाते हुए बोले "...मैंने कहा न हम दिल्ली का विकास करेंगे ..." मैंने भी कायदे से पूछा "..कैसे करेंगे ...?" बहुत बुद्धिमान आपिया बोले "...पहले हमको कुर्सी दीजिये फिर हम बताएँगे कि कैसे ..." माने टांट कसते हुए कहा "...बहुत सही गुरु ...दिल्ली वालों को गोरू-बछरू समझते हो ..." बहुत बुद्धिमान आपिया विषय बदलते हुए बोले "...हम रामराज्य लाएँगे ..." मैंने पूछा "... केजरीवाल को भी राम का नाम भाने लगा ...? बहुत बुद्धिमान आपिया बोले "...राम हमारे आदर्श हैं ..." मैंने तपाक से पूछा " ... मतलब बीजेपी से राम मंदिर का मुद्दा छीनने के लिए दिल्ली मे अयोध्या बसा कर राम मंदिर बनवाएंगे ...? बहुत बुद्धिमान आपिया बोले "...अगर जनता हमे वोट दे तो करने में क्या दिक्कत हैं ..." मैंने कहा "...मतलब दिल्ली के विकास की पूरी रूपरेखा है केजरीवाल के पास ..." बहुत बुद्धिमान आपिया बोले "...हम स्कूल भी खोलेंगे ..." मैंने पूछा "...दिल्ली में स्कूलों की कमी है क्या ..." बहुत बुद्धिमान आपिया बोले "...वो सब बीजेपी काँग्रेस के स्कूल हैं ....आम आदमी पार्टी अपना स्कूल खोलेगी ..." मैंने उसके जोड़ते हुए हुए कहा "...और स्टिंग ऑपरेशन  ..." बहुत बुद्धिमान आपिया बोले "...उसके लिए भी ट्रेनिंग स्कूल खोलेंगे ..." मैनी उनसे पूछा "...पूरी दिल्ली को गुजरात की तर्ज पर वाई - फ़ाई से भी जोड़ेंगे ..." बहुत बुद्धिमान आपिया सीना चौड़ा करते हुए बोले "... हाँ बिलकुल ..." मैंने कहा "... इससे तो आपिया सरकार बनेगी नहीं और बनी भी तो गिर सकती है ..." बहुत बुद्धिमान आपिया चौंक गए पूछे "...वो कैसे ..." मैंने समझते हुए कहा "...ये अवधारणा है ही गुजरात की तो जाहिर इससे तो भाजपा का ही प्रचार होता है और दूसरे यदि आप सत्ता मे हैं तो भी आपकी सरकार वाई - फाई के कारण ही गिर जाएगी...." बहुत बुद्धिमान आपिया कनफ्यूज हो रहे थे लेकिन उन्होने अपना कन्फ़्यूजन छिपाते हुए हिम्मत दिखते हुए कहा "...हम संभाल लेंगे ..." मैंने कहा "...चलिए अच्छा है भगवान आपको रोजर बिन्नी के यार्कर से बचाए..." बहुत बुद्धिमान आपिया बोले "...दिल्ली में हमारी ही सरकार बनेगी ..." मैंने कहा "...हाँ हम भी देख रहे हैं..." बहुत बुद्धिमान आपिया बोले " ...सारे युवा हमको ही वोट देंगे देखियेगा ..." मैंने उनसे आश्चर्य जताते हुए पूछा "...लेकिन युवक तो लोन और मुफ्त में अंतर जानते है ..." बहुत बुद्धिमान आपिया इस पर असहज हो गए बोले "...हम युवाओं को समझा लेंगे ..." बहुत बुद्धिमान आपिया बोले "...हम दिल्ली को सबसे ईमानदार शहर बनाएँगे...." मैंने उनको उत्तर देते हुए कहा "... आपका यही वक्तव्य केजरीवाल को सत्ता में आने रोकेगा  ...." बहुत बुद्धिमान आपिया ने आश्चर्य से पूछा "... वो कैसे ...?" मैंने बड़े आराम से कहा "...क्योंकि आपके एजेंडा से जनलोकपाल गायब है ...और फिर मोदी की नकल करेंगे तो मोदी यानी भाजपा का ही प्रचार होगा ...आप तो गए काम से ..." बहुत बुद्दिमान आपिया अपना कपार खजुआने लगे ... ज़ोर - ज़ोर से और बहुत देर तक खजुआते ही रहे ....मैंने उन्हें नमस्कार कहा       

Wednesday, 12 November 2014

गब्बर, सांभा खेतान और 50 सूत्री डायलाग

8 फरवरी 2013 को जब मैंने विश्व मे सबसे पहले प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र भाई मोदी को जब बराक ओबामा से तुलना करते हुए उनसे से भी बेहतर विश्वनेता कहा था तब उस समय केजरीवाल ऐसे गैस की तलाश में थे जिससे अपने गुरु अन्ना हज़ारे का खटिया फूँक सकें लेकिन कुछ मिला नहीं हालांकि उन्होने कोशिशें बहुत कीं। आज जब नरेंद्र भाई मोदी जब पूरी दुनिया को अपना मुरीद बना कर मुट्ठी मे करने करने जा रहे हैं तो केजरीवाल ये उम्मीद कर रहे हैं कि दिल्ली उस प्रभाव से मुक्त रहेगा और दिल्ली में उनकी आपिया सरकार बनेगी। दिल्ली में केजरीवाल 50 सूत्री "शोले का डायलाग" मारेंगे इसके लिए उन्होने आपिया मैक मोहन सांभा खेतान को इसकी ज़िम्मेदारी सौंप दी है जिनको आजतक चैनल वालों ने अनियमितता के आरोप में अपने चैनल से बाहर निकाल दिया था। ये वही खेतान जी हैं जो कपिल सिब्बल द्वारा वित्तपोषित तहलका में थे और इनके गुरु तरुण तेजपाल एक बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के प्रयास में जेल बंद हैं फिर उसके बाद गुलेल डाट काम चला रहे हैं उसके भी वित्तपोषक सिब्बल और अन्य कोंग्रेसी हैं मतलब काँग्रेस ही पूरी शोले फिल्म चलाएगी "गब्बर केजरीवाल और सांभा खेतान"। गब्बर पूछेगा "...अरे ओ सांभा कितने दिन सरकार चली थी रे ..." सांभा खेतान "...सरदार 49 दिन ..." गब्बर केजरीवाल "...और बाकी  को 1825 दिन ...हूँ ये बहुत नाइंसाफी है ...क्या सोचा दिल्ली की जनता बहुत खुश होगी ईनाम देगी ..." ईनाम का तो सभी को पता है लेकिन हाथकटे ठाकुर कौन है ये अभी रहस्य ही है। आपिया रहीम चाचा उर्फ सलीम उर्फ यादव जी बहुत दिनो से चीखते फिर रहे हैं कि "...दिल्ली में इतना सन्नाटा क्यों है भाई ..." अब देखिये वही गब्बर केजरीवाल और सांभा खेतान अपनी जबानी गुलेल से काँग्रेस के इशारे पर सन्नाटा तोड़ कर रहीम चाचा उर्फ सलीम यानी यादव जी को मुक्ति प्रदान करेंगे। वैसे हफ्ता वसूली जिसका थोड़ा बहुत लेकिन पूरी तरह आडिटविहीन ब्यौरा आपिया वेबसाइट पर रामनगर यानी दिल्ली वालों को बेवकूफ़ बनाने के लिए डाल रखा है जिसका नतीजा ये होता है गब्बर केजरीवाल हमेशा भूखा ही रहता है और सांभा खेतान सलीम चाचा की मौजूदगी मे जेब से पाँच सौ का नोट निकाल के कहता है कि मेरे पास पैसा नहीं है। क्या डायलाग है। वैसे गब्बर केजरीवाल दिल्ली वालों से कहते फिर रहे हैं कि कि गब्बर के कहर से अगर कोई बचा सकता है तो वो खुद गब्बर ही है भले ही अभी 5 महीने पहले गब्बर का फेचकुल और पूरा गुबार निकल गया लेकिन हेकड़ी अभी बहुत बाकी है। दिल्ली वाले इसी 50 सूत्री शोले के डायलग में बसंती को भी खोज रहे हैं लेकिन अभी तक पता नहीं चल पाया है यकीन मानिए जैसे ही पता चलेगा आपको बता दिया जाएगा। दिल्ली वाले हफ्ता वसूली पर आए गब्बर केजरीवाल को हफ्ता देने से मना कर रहे हैं तो केजरीवाल ने अपने कुछ आदमियों को दिल्ली की जनता में घुसा दिया और कह दिया है कि देखें कि कौन- कौन से लोग हफ्ता देने से मना कर रहे हैं उनका विडियो तैयार करें ताकि समय आने पर कायदे से उनसे हफ्ता वसूल किया जा सके जैसे पहले करते थे पहले लूपहोल पता करो फिर ब्लैकमेल करते हुए हफ्ता वसूलो वो अठन्नी चवन्नी नहीं लाखों करोड़ों में। दिल्ली वाले पूरी शोले फिर से देखेंगे ठीक गब्बर केजरीवाल, सांभा खेतान, रहीम चाचा उर्फ सलीम आदि के सौजन्य से तो देखिये 50 सूत्री "दिल्ली शोले डायलाग"... 

Tuesday, 11 November 2014

काँग्रेस भौके सीधा ...केजरी चाभे पोंछ...

सुन रहे हैं शीला जी अपने दत्तक पुत्र काँग्रेस कुमार केजरीवाल को इस बार दीक्षा देने के लिए केरल से वापस दिल्ली आ गई हैं वैसे पिछली बार तो अपने दत्तक पुत्र को अपनी सीट भिक्षा मे दे दीं थीं और दत्तक पुत्र ने उनके केरल जाने का रास्ता साफ कर दिया था। केजरीवाल ने तो पहले ईमानदारी के नाम पर ऐसा भ्रष्टाचार किया कि एक पुलिस चौकी वाले खुद ही डांडा ले कर चौकी के बाहर पहरा देने लगे और भ्रष्टाचार  यानी एफ़आईआर रोकने के लिए केजरीवाल को धन्यवाद ज्ञापित  लगे। केजरीवाल अपने ईमानदारी पर बहुत खुश हुए थे दिल्ली वालों ने तो उनको मोटर सहित कंधे पर उठा लिया था और लोकसभा चुनाव तक उठाए रहे और "राम राम सत्य" का जाप करते रहे यकीन मानिए आज भी दिल्ली वाले केजरीवाल को कंधे पर उठाए हुए हैं और वही राम राम सत्य का जाप कर रहे हैं। उसी का नतीजा है कि चार अपिया पहलवान पंजाब से आ पाए बाकी को तो शमशान पर भी जगह नहीं मिली और जमानत जब्त हो गई। खैर एक आपिया सीकिया पहलवान बोल रहा था "...हमरे 49 दिनो को लो बहुत शिद्दत से याद कर रहे हैं ..." मैंने कहा "...बिलकुल कर रहे हैं इसीलिए केजरीवाल 'मोदी नाम त्राहि माम' की रट लगा रहे हैं..." इस पर आपिया पहलवान बोला "...दिल्ली मे हमारी सरकार बनेगी देखियेगा ..." मैंने कहा "...तो इसमे इतना चीखने की क्या जरूरत है ..." आपिया पहलवान बोला "...हम चीख चीख भाजपा की पोल खोलेंगे ..." मैंने पूछा "...क्या पोल खोलोगे भाई ..." आपिया पहलवान बोला "...भाजपा जोड़ तोड़ के सरकार नहीं बना पाई तो चुनाव करवा रही है ..." मैंने टांट कसते हुए कहा "...यूं नहीं आपियों को मूर्ख और केजरीवाल को महामूर्ख कहा जाता है ..." आपिया पहलवान भड़क गया और गुस्से मे धम्की देते हुए बोला "...देखिये आप अपनी औकात मे रहिए नहीं तो बहुत बुरा होगा ..." मैंने शांति से उत्तर देते हुए कहा "...केजरीवाल अगर उच्चतम न्यायालय नहीं गए होते तो ये चुनाव तीन महीने पहले ही हो गए होते दिल्ली वालों का बुरा तो केजरीवाल ने ही किया ..." आपिया पहलवान अपना कपार खजुआने लगा और पूछा "...वो कैसे ...?" मैंने उत्तर देते हुए कहा "...दिल्ली सरकार गठन के बारे में कोई भी फैसला न्यायालय के अनुमति के बिना कैसे होता मामला तो न्यायालय मे था ठीक वैसे ही जैसे 1947 नेहरू कश्मीर के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र संघ मे चले गए थे ...आखिर हैं तो काँग्रेस कुमार केजरीवाल ही न समस्या तो खड़ी करेंगे ही काँग्रेस की तर्ज पर ...." आपिया पहलवान कनफ्यूज हो गया बोला "..मुझे समझ में नहीं आया ..." मैंने उसे समझते हुए कहा "...केजरीवाल मायावती बनने की फिराक मे थे ..." इस पर आपिया पहलवान और कनफ्यूज हो गया और ज़ोर ज़ोर से अपना कपार खुजुआते.हुए बोला "...वो कैसे ..." मैंने उसे समझते हुई कहा "...बसपा जितनी बार टूटी है वो उतनी ही मजबूत होती गई ठीक उसी तर्ज पर केजरीवाल भी चाहते थे कि भाजपा आपिया पार्टी तोड़ ले और सरकार बना ले ...लेकिन भाजपा ने ऐसा नहीं किया ...19 आपिया विधायक अभी भी पार्टी से अलग होने को तैयार है आपिया पार्टी में बगावत इसी का प्रमाण है ..." आपिया पहलवान बोला "...लेकिन केजरीवाल के पास तो स्टिंग की सीडी है ..." मैंने उत्तर देते हुए कहा "...वो सब केजरीवाल के कहने पर आए थे भाजपा मे शामिल हो कर पार्टी तोड़ने के लिए ...लेकिन केजरीवाल की चाल नाकाम हो गई ..."  आपिया पहलवान बोला "...लेकिन दिल्ली में हमारी ही सरकार बनेगी ..." मैंने कहा "...हाँ ये तब भी नहीं हो सकता है जब शीला दीक्षित केजरीवाल को दीक्षित कर दें ...." आपिया ने पूछा "...क्यों ..." मैंने कहा "...क्योंकि केजरीवाल मायावती नहीं है वो शीला दीक्षित हैं ..." आपिया पहलवान बुरी तरह कनफ्यूज था बहुत देर तक मेरा मुंह ताकता रहा ...कुछ नहीं बोल रहा था ..... 

Thursday, 25 September 2014

चीन तो गया काम से ...

"मेक इन इंडिया" समारोह की जबर्दस्त सफलता के बाद भारत के चोटी उद्योगपतियों में जबर्दस्त उत्साह है। इस समारोह की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चीन को भी अपने कर नीति में बदलाव करने की जबर्दस्त जरूरत पड़ गई। मैंने कल अपने लेख में कहा था मंगल की सफलता चीन को कोमा में जाने का रास्ता प्रशस्त करता है जिसका उपाय वो मात्र 24 घंटों के भीतर ही करना पड़ा "मेड इन चाइना" की घोषणा करके ठीक प्रधानमंत्री मोदी जी की नकल करते हुए। अब चीन कर भी क्या सकता है उसके यहाँ मजदूरी प्रतिवर्ष 10 से 15% की दर से बढ़ रही है 2010 से अबतक 30% की वृद्धि हो चुकी है जो बहुत अधिक महंगा साबित हो रहा है लिहाजा करों में रियायत ही एक रास्ता बचा है लेकिन वो भी निवेश की मात्रा पर निर्भर है जिसे अभी तक स्पष्ट नहीं किया गया है। ये सब उत्पाद गुणवत्ता उन्नयन के निमित्त शोध और विकास को बढ़ावा देकर किया जाएगा। लेकिन समस्या फिर वहीं जस की तस तो है ही कहीं और भी गंभीर भी होती जा रही है चीन के लिए। लोगों की आय बढ्ने के साथ - साथ कीमतों में भी जबरदस्त इजाफा हो रहा है नतीजन लागत में वृद्धि लेकिन कर रियायत से वो कैसे पूरा होगा जबकि 10 से 15% वार्षिक की दर से मजदूरी मंहगी हो रही है और जब यही मजदूरी शोध और विकास में लगती है तो कई गुना हो जाती है जिसका भार सीधे ग्राहक पर पड़ता है। चीन ने रियायत की घोषणा इसलिए नहीं की है कि उसके यहाँ कंपनियों के शेयर के दाम अचानक बहुत बढ़ सकते हैं और लोग के सीधे निवेश करने की संभावना से अर्थव्यवस्था में अचानक बहुत अधिक उछाल आ सकता है जिसकी कोई निश्चितता नहीं है। इसका सीधा परिणाम ये होगा कि निश्चित समय में यदि निवेशक को फायदा नहीं मिला तो चीन पर से निवेशकों का भरोसा सीधे डगमगा जाएगा और फिर अचानक दबाव से अर्थव्यवस्था धराशायी। वास्तव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी जीनियस हैं उन्होने चीन की इसी दुखती रग पर सीधा प्रहार ये कहते हुए किया कि हम निवेशकों का पैसा डूबने नहीं देंगे ...इसे कहते हैं देसी विद्वता जिसके आगे चीन की अर्थव्यवस्था का चरमराना लगभग तय है। मोदी जी की तरह चीन कभी अपने निवेशकों को ये भरोसा नहीं दे सकता कारण जनसंख्या पर कठोर नियंत्रण जिसके कारण युवा वर्ग की भारी कमी जो सीधे बाजार को प्रभावित करता है। भारत में चीन की तुलना में दोगुना युवा वर्ग है और जो प्रवीण भी है। यही कारण है चीन इस समय अपना आपा खोता जा रहा है वो किसी भी कीमत पर एशिया से अपना वर्चस्व कम नहीं होने देना चाहता। आज इंडियन मुजाहिदीन की धमकी और आईएसआईएस का भारत का लक्ष्य बनाना कोई महज संयोग नहीं है इसके पीछे सीधे-सीधे चीन का हाथ देखिये वो। वो हर कीमत पर भारत को अस्थिर करना चाहता है पाकिस्तान के माध्यम से और आतंकवाद के माध्यम से भी। अभी चुनाव से पहले भी ऐसी चर्चा थी कि केजरीवाल जैसे लोगों को भी चीन बहुत बड़े स्तर पर सहयोग कर रहा था। इसके पहले पूर्वोत्तर, नक्सलवादियों आदि के माधायम से भारत को लंबे समय से अस्थिर करने का प्रयास करता रहा है लेकिन मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बात उनपर काफी हद काबू पा लिया गया है लिहाजा सीमा पर परेशानी से और आतंकवाद के माध्यम से भी भारत को परेशान करेगा ही।    

Wednesday, 24 September 2014

चीनी बुद्धि में अमंगल ...

आज मंगल यान की कलम से भारतीय वैज्ञानिकों ने कमाल का अद्भुत नया और बेहद सफल इतिहास लिखा। इस इतिहास की इबारत ऐसी है कि चीन और अमेरिका जैसे खुद को शेर कहने वाले भारत को सवा शेर मानने ही लगे। क्या मजेदार पल होगा जब कल भारत के प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र भाई भाई मोदी अमेरिका से हाथ मिलाएंगे। हमारा हाथ बिलकुल मंगल का होगा लेकिन अमेरिका के हाथ मे 7 - 7 चोट के निशान जिसे ठीक वही मंगल ने दिये जिसने भारतीय वैज्ञानिकों का पालक पावड़े बिछाए जैसे इंतजार कर रहा था। मंगल यान की सफलता ऐसी सफलता है जिसने भारत के लिए अमेरिका जैसों के लिए सोच हमेशा के लिए बदल देने के लिए पर्याप्त है। अभी तो चीन वैसे ही परेशान था जापान-भारत-अमेरिका के बेहद मजबूत अक्ष से इसीलिए वो परेशान है और किसी भी कीमत पर सीमा पर स्थानीय युद्ध जैसी स्थिति पैदा करना चाहता है ताकि प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा मे खलल डाला जा सके। उसे पता है कि कारगिल मे पाकिस्तान से युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने अमेरिका की यात्रा रद्द कर दी थी। कहीं न कहीं चीन वैसी ही स्थिति बनाना चाहता है ताकि मोदी जी को अमेरिका यात्रा रद्द करनी पड़े लेकिन चीन की दाल कहीं से भी गलती दिखाई नहीं दे रही है। वैसे भी चीन पहले 100 लाख करोड़ के निवेश का वादा किया था लेकिन किया 20 लाख करोड़ वो ऐसे सैक्टर में कर रहा है जिसमे उसे उम्मीद है भारत का भ्रष्टाचार उसे सफल नहीं होने देगा। शायद उसे ये पता नहीं है कॉंग्रेस जैसे अब तेल लेने जा चुके हैं जल्दी ही निजाम सहित जेल मे तेल पेरेंगे लिहाजा भ्रष्टाचार तो अब गुजरे जमाने की बात है। मंगल की सफलता ने चीन को जैसे कोमा में ही भेजने का रास्ता दिखा दिया है हालाँ चीनी मीडिया अभी इस मुद्दे पर चुप ही है लेकिन उम्मीद है जब इस विषय कुछ बकेंगे तो वही बकेगे जो भारत के लिए समस्या परक ही होगा। लिहाजा अब चीन किसी भी स्थिति में भारत को परोक्ष रूप से उलझाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगा ये तय है। अतः भारत बेहद चौकन्ना रहने की जरूरत है पाकिस्तानी आतंकवादियों से क्यों कि भारत की शांति में जितना अधिक खलल पड़ेगा निवेश पर उतना ही अधिक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और अब मंगल यान की सफलता ने शोध और विकास के लिए बहुत बड़ी संभावनाओं के द्वार खोल दिये हैं अगर ये हो गया तो आने वाले निकट भविष्य में विश्व में केवल दो धुव दिखेंगे जापान और भारत और दोनों ही चीन के कट्टर दुश्मन। अमेरिका के मजबूरी यही है कि उसे दोनों के साथ जुड़कर रहना ही होगा नहीं तो मुसीबत ही खड़ी हो जाएगी। खबर तो यहाँ तक मिलने शुरू हो चुके हैं एयरबस जैसी कंपनी भी भारत में प्रत्यक्ष निवेश की संभावनाएं शिद्दत से तलाश रही है बोइंग लॉकहीड मार्टिन जैसे कंपनियों की बात छोड़ दीजिये। अगर ऐसा हुआ तो चीन खड़े - खड़े दिवालिया होने की कगार पर खड़ा होगा क्योंकि ऐसे कंपनियों के लिए आपूर्ति भी इस कंपनी के प्रत्यक्ष रोजगार की तुलना कई गुना और उच्चतकनीकि वाला होते हैं लिहाजा रोजगार और उत्पाद के लिए बहुत बड़ी संभावनाओं का सृजन इसे आप ऐसे समझिए कि आपकी कार का अलाय व्हील टाइटेनियम धातु का बना होता है जो सीधे-सीधे हवाई जहाज की टेक्नोलोजी से लिया गया है। अतः चीन तो किसी भी कीमत पर चुप नहीं बैठेगा उल्टे भारत के लिए नई मुसीबत खड़ी करने की पूरी कोशिश करेगा। एक बार भारतीय वैज्ञानिकों को कोटि-कोटि नमन और धन्यवाद हमें सपने देखने के का अवसर प्रदान केरने के लिए साथ ही प्रधानमंत्री मोदी जी को भी बहुत शुभकामनाएँ अमेरिका यात्रा के लिए ....     

Saturday, 16 August 2014

पाले जीजी जंजाल... लटके खाँटी झंखाड़ पर...

आज कल गदहे भी ऊंचे-ऊंचे झंखाड़ पुलुई पर चढ़ कर हवा का रूख भापने की कोशिश कर रहे हैं ...ये सब किसके निर्देशन में हो रहा है कहने की जरूरत नहीं। कुछ गधे चने की झाड़ जैसे झंखाड़ पर चढ़ भी गए और जब वाकई उन्होने हवा का रूख भाँप ही लिया तो उन्हें अनुशासन के नाम पर गधे के पिछले दोनों पैरों को बांध कर दूसरे गधे से दुलत्ती मरवाई गई फिर अधमरा करके छोड़ दिया गया। लेकिन मुसीबत ये है झाड़ पर चढ़ना भी है, गिरना भी है और वही देखना है जो दिखता ही नहीं खाँटी भाईयों के गैंग में यही सब चलता है राजमा-ता के नाम में "ता" जोड़कर टल्ली पीटनी ही है लेकिन अब टल्ली की आवाज भी आनी ही बंद हो चुकी है जो बहुत बड़ी मुसीबत है तब जीजी ने टल्ली की आवाज सुनाने का बीड़ा उठाया है। कहा जा रहा है कि ये खाँटी भाइयों का "ट्रम्प कार्ड" है जो अब तब तक पता नहीं किस "ट्रंक यार्ड" में इस "ट्रम्प कार्ड" तेल सोखनी का काम चलाया जा रहा था। लेकिन जीजी ने तेल सोखनी का काम छोड़ कर जंजाल पालने की ज़िम्मेदारी उठा रही हैं। एक खाँटी भाई कांग्रेसी जीजी के नाम पर अपना गाल बजते हुए कह रहे थे "...अब तो हम सत्ता में जरूर वापसी करेंगे ..."  मैंने चुटकी लेते हुए पूछा "...क्यों कचौड़ी से तेल कुछ ज्यादा सोख लिए हैं क्या...?" खाँटी भाई इस पर भन्ना गए बोले "...कचौड़ी खाने के लिए होती है उस पर बैठ के तेल सोखने के लिए नहीं ..." मैंने फिर सवाल दागा "...तो काहें जीजी को परेशान कर रहे हैं ...?" खाँटी भाई बोले "...हम कहाँ ऐसा कर रहे हैं ...वो तो खुद ही ..." मैंने बीच में बात काटते हुए कहा "...नहीं चवन्नी को अठन्नी की तरह आप ही लोग उछाल रहे हैं ..." खाँटी भाई भड़क गए बोले "...वो लोग चवन्नी अठन्नी नहीं हैं ..." मैंने आराम से कहा "...यही तो मेरा भी कहना है चवन्नी को तेल में डुबा कर उछालने से उसकी औकात नहीं बढ़ती ...." खाँटी भाई को कुछ समझ में नहीं आया तो पूछा "...आपके कहने का मतलब क्या है ..." मैंने उनको उत्तर देते हुए कहा "...लैला पहलवान के भरोसे अब कौन सी कुश्ती जीतेंगे ...?" खाँटी भाई का गुस्सा भड़क रहा था उसी गुस्से मे उन्होने मुझसे पूछा "...आप साफ-साफ कहिए जो भी आपको कहना है ..." मैंने साफ-साफ कहा "...एक पहलवान के भरोसे 44 के आंकड़े की झाड़ी पर अटक गए ...कहीं आगे कप्तानी बदली तो कहीं आपिया का दस्तूर न हो जाए ..." खाँटी भाई बोले "...हम आपिया नहीं हैं ..." मैंने कहा "...जैसे आपका जंजाल जीजी को खाए जा रहा है उससे तो ..." खाँटी भाई बोले "...बोलिए बोलिए उससे तो ...का क्या मतलब ...?" मैंने कहा "...जब जीजाजी का तोप अब चूहे के बिल में भी फायर करने लायक नहीं बचा...जीजाजी समेत बाकी लोग का भी कचहरी में कचूमर निकल ही रहा है तो जीजी कैसे ताकत का आशीर्वाद बरसाएंगी खाँटी भाई लोगों पर  ..." खाँटी भाई बोलते बोलते रूंआसे होने लगे तो मैंने विदा ले लिया ....           

Friday, 15 August 2014

जय हो .....

आज लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी का ओजस्वी, तेजस्वी और उत्साहपूर्ण सम्बोधन सुन के ऐसा लगा जैसे माँ भारती साक्षात अपने वीर पुत्रों का आह्वान करते हुए विश्वविजय के लिए प्रेरित करने लगी हो। जीवंतता ऐसा प्रस्फुटन स्वतत्न्त्र भारत में कभी देखने को नहीं मिला। युवा पूरे उत्साह से भरपूर दिख रहे थे ऐसा उत्साह का संचार इसके पहले कभी किसी ने नहीं किया जवाहर लाल नेहरू या इन्दिरा गांधी ने भी ने नहीं। कैसे कर कर पाते वो ऐसा जब मन में सिर्फ सेवा भाव के बजाय केवल शासन करने की इच्छा हो तो ! अब देखिये खाँटी भाई कोंग्रेसियों तक को जोश आ गया मोदी जी का ओजस्वी सम्बोधन सुन के ऐसे एक जोश से भरे हुए खाँटी भाई से जब मैंने पूछा तो कहने लगे "...मोदी जी को चुनावी मोड से बाहर निकालना चाहिए ..." इसपर मैंने उनसे पूछा "...भाषण सुन के आपका उत्साह इतना बढ़ गया कि फिर से चुनाव की बात कर रहे हैं अभी बहुत दिन बाकी है ..." खाँटी भाई बोले "...मोदी तो हमेशा वन स्टेप फॉरवर्ड क्यों चलते हैं... ?" मैंने कहा "..यही तो गनीमत है खाँटी भाई लोगों की कि कभी मनमोहन सिंह भाषण देते हुए गश खा कर लाल किले प्राचीर से गिरे नहीं ..." खाँटी भाई को कुछ समझ मे नहीं आया तो पूछा "...आपके कहने का मतलब क्या है ..." मैंने उनका उत्तर देते हुए कहा "...यही तो इतिहास रहा है कॉंग्रेस का कि हमेशा वन स्टेप फॉरवर्ड के चक्कर में खाँटी भाई लोग गश खा के गिर जाते रहे हैं ..." खाँटी भाई थोड़ा अपसेट हो गए बोले "...ऐसा कभी नहीं हुआ ..." मैंने उनका उत्तर देते हुए कहा "...इसीलिए तो खाँटी भाई लोगों को भ्रष्टाचार की चर्बी पीने की आदत पड़ी है कि गश खा कर गिरे नहीं ...ईमानदारी की ताकत तो है नहीं ..." खाँटी भाई उखड़ गए और गुस्से में बोले "... आपके कहने का मतलब है कि कॉंग्रेस केवल भ्रष्टाचार की ताकत पर खड़ी है ...?" मैंने उनका उत्तर देते हुए कहा "...हाँ बिल्कुल आज तो ये साबित भी हो गया ..." खाँटी भाई बोले "...क्या साबित हो गया ...?" मैंने कहा "...क्यों उत्तर अपने बकलोल बबुआ से पूछिए कि कितनी बार उसने अपने अपने प्रधानमंत्री का लिखा भाषण फाड़ -फाड़ के उसमे अपनी मनमानी की है और मनमानी भी ऐसी कि मनमोहन सिंह हमेशा 15 अगस्त के बाद पूरे साल भर बेचारे चुप ही रहते थे ..." खाँटी भाई अब रहा नहीं जा रहा था तो गुस्से मे उन्होने पूछा "...आपके कहने का मतलब उनका भाषण भी राहुल गांधी ही लिखते थे ...?" मैंने बड़े आराम से उत्तर देते हुए कहा "...लिखते ही नहीं थे भ्रष्टाचार की रोटी भी वो अपने हाथ से ही खिलते थे लेकिन खिलाने से पहले वो रोटी को भी फाड़-फाड़ के टुकड़े-टुकड़े कर देते थे ..." खाँटी भाई हताशा में बोले "...खैर जो भी मोदी जी को चुनावी मोड से बाहर निकाल ही जाना चाहिए ..." मैंने कहा "...अरे काहें घबरा रहे हैं अभी पूरे पाँच साल बाकी हैं इतना उत्साह भी ठीक नहीं ...रोज ब रोज महंगाई घटती जा रही है तो सांप्रदायिकता को भाड़े पर ले लिए उस पर भी वन स्टेप फॉरवर्ड के बजाय वापस बैक टू चूहे वाला बिल ..."   खाँटी भाई का उत्साह इतना बढ़ गया था कि अब शायद उनको अंतरात्मा की आवाज सुनाई देने लगी थी ...लिहाजा वो चुप हो गए ...         

Monday, 11 August 2014

मन चंगा तो....पटना में दरभंगा ...

पटना का घटना आ हाजीपुर में सटना...तीजन बाई ने अपनी पंडवानी गायकी से तहलका मचा दिया था...वैसा ही कुछ नमूना जीतन राम मांझी पेश करने फिराक में हैं ...वैसे मांझी की करामात है की दोनों टोपोरियात के सिक-उल्लर उस्ताद टोपी ओढ़ने के बावजूद गंगा पर कर ही लिए...मजे से दोनों आपस में गर्दन भी मिले लेकिन पता नहीं किसी ने जीतन राम माझी को धन्यवाद दिया या नहीं...लेकिन दोनो के दोनों बड़े खुश थे आज। एक राजद्दू नेता चिल्ला रहे थे "...देखियेगा बिहार में सेकुलर ताकतों की ही जीत होगी ..." मैंने इस पर उल्टे सवाल किया "...मांझी साहब मजे हुए नहीं हैं क्या...." राजद्दू नेता उत्तर देते हुए बोले "...वो महादलित हैं आपको पता होना चाहिए..." मैंने उनकी बात बीच में ही काटते हुए टोका "...मतलब अब महाभारत मांझी गाएँगे ..." राजद्दू नेता थोड़ा गुस्से में आ गए बोले  "...आपको क्या वो गवनिया लगते हैं ..." मैंने शांत स्वभाव से उत्तर देते हुए कहा "...नहीं नहीं गवनियाँ नहीं ...वो हाजीपुर के सटना में उनका नाम तारीफ में किसी ने नहीं लिया न इसीलिए ..." राजद्दू नेता फिर उखड़ गए और गुस्से में बोले "...बिहार की जनता सब देख रहा है ..." मैंने जवाब मे प्रतिप्रश्न पूछा "...क्या ये चरवाहा विश्वविद्यालय मे हुए शोध का निष्कर्ष है ...? " राजद्दू नेता से रहा नहीं गया वो उसी खीज में बोले "...यहाँ अब मौसम वैज्ञानिकों को दिन में तारे दिखेंगे ..." मैंने उनके इस वक्तव्य का मज़ाक उड़ाते हुए कहा "...सबको अपने जैसा ही समझते हैं क्या ..." राजद्दू नेता बोले "...सब लोग हमारे जैसा कहे नहीं हैं ..." मैंने उनका उत्तर देते हुए कहा "...क्योंकि किसी को जंगल प्यारा नहीं है..." राजद्दू नेता को शायद कुछ समझ में नहीं आया तो पूछा "...आपके कहने का क्या मतलब है ...?" मैंने सीधा और सपाट उत्तर दिया "...उड़ि - उड़ि जहाज का पंछी पुनि - पुनि जहाज पर आवे ..." शायद ये राजद्दू नेता को समझ में नहीं आया बोले "...आप साफ - साफ कहिए ..." मैंने उन्हें स्पष्ट करते हुए कहा "...नितीश नाम का पंछी पुनः अपने जहाज पर लौट आया ..." राजद्दू नेता बोले "...वो तो होना ही था ..." मैंने कहा "...लेकिन ये जहाज तो जंगल मे खड़ा है ..." राजद्दू नेता फिर अपना आपा खोने लगे बोले "...आपको जंगल-झाड़ी के अलावा कुछ दिखाता नहीं ..." मैंने कहा "...उसका शौक तो आपके दुःशासन सारी सुशासन बाबू तो कम लेकिन लालू के  चरवाहा विश्वविद्यालय के छात्र कुछ ज्यादा ही पालते हैं ..." राजद्दू नेता बोले "...अब सब ठीक हो गया है ..." मैंने उन्हें उत्तर में कहा "...हाँ इसीलिए अब नीतीश बाबू और लालू बाबू को गोदी-गोदी खेलने में कोई दिक्कत नहीं है भले ही मौसम कितना ही खराब क्यों न हो ..." राजद्दू नेता बोले "...ये तो वक्त ही बताएगा ..." मैंने कहा "...वक्त बताएगा नहीं बता रहा है ...आपके लिए मोदी जी ने मौसम इतना खराब कर दिया है कि जीतन राम मांझी को लाना पड़ा ...नाम की व्यख्या ही पर्याप्त है ...लेकिन केवल व्याख्या से क्या होता है जब आख्या ही ढ़ोल पीट रही हो ...राजद्दू नेता को फिर कुछ समझ मे नहीं आया शायद...वो कुछ बोल नहीं रहे थे ... 

Wednesday, 6 August 2014

"प्राण" गए पर ...जान न जाई ...

प्राण कुमार शर्मा का आज 5 अगस्त को निधन हो गया मैंने उन्हें भावभीनी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि दी मन बड़ा ही उदास था बचपन मे रंग भरने वाला वो चितेरा अब नहीं रहा। खैर ये दुनिया की रीति है कि हर कोई मरने के लिए ही पैदा हुआ है स्वीकार तो करना ही पड़ेगा लेकिन "हंस कर व्यंग मे" शायद यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी प्राण साहब को। मैंने तो मन को समझा लिया लेकिन बकलोल बबुआ जो युवराज के नाम से भी मशहूर है बेचैन हो उठा उसे इतना गुस्सा आया कि बजाय श्रद्धांजलि देने के कुएं में कूद गया और लगा ढेंचू-ढेंचू करने पीछे - पीछे सारे खाँटी भाई कोंग्रेसी भी ढेंचू-ढेंचू करने लगे। ये बहुत कम लोग जानते हैं कि प्राण कुमार शर्मा की मृत्यु 1 बजकर 44 मिनट पर हुई थी और लोग बताते हैं कि उनके जीवन के यही 44 मिनट बेहद महत्वपूर्ण थे जिसमे उनकी मृत्यु हुई। अब 44 के साथ बकलोल बबुआ यानी युवराज का क्या नाता है ये कहने की जरूरत नहीं... यकीनन युवराज भी यही चाहेगा कि ये 44 का आंकड़ा उसकी पार्टी के भी "प्राण" का जंजाल न बन जाए इसीलिए वो आज बहुत गुस्से मे था और कुएं में कूद गया। वैसे भी वो तो अभी तक प्राण कुमार शर्मा का वैसा ही फैन है जैसा 40 साल पहले हुआ करता था लेकिन आज भी वो सोचता है कि काँग्रेस पार्टी तो साबू है जैसा कि दादी जी कहानियों मे सुनाया करती थीं। लेकिन अब इसपर तो साबूदाने के पेड़ उग गए हैं जिन्हें म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) में साईकस कहा जाता है और उसके आगे गाईगांटिया जोड़ दीजिये तो "वैज्ञानिक अंधविश्वास" का वो नमूना सामने आता है कि आज इसी विज्ञान के नाते मानव जाति ही खतरे में है...वैसे साबूदाने के पेड़ का फूल कभी चड्डी नहीं पहनता तो वैसे ही बहुत से खाँटी भाई लोग जोकर की उपाधि दे चुके हैं और वही जोकर आज उन खाँटी भाई कोग्रेसियों को मोगली बन के नचा रहा है ...यकीन मानिए इस नाच का जब 44 चक्कर पूरा हो जाएगा तो सभी को मुक्ति मिल जाएगी ठीक वैसे ही जैसे कपिला पशु वाले अलवी जैसे बहुत से लोगों को मिल गई। वैसे प्राण साहब की मृत्यु 01॰44 पर हुई थी लिहाजा बकलोल बबुआ का 10.44 बजे ही फार्म मे आना शुरू हो गया था और 11.44 बजे वो कुएं मे कूद चुका था ...बहुत से लोग इसे दिखावा कह रहे हैं उनको ऐसा नहीं करना चाहिए आखिर एक बच्चे की भावना की बात है जिसका ख्याल रखा जाना चाहिए ..."प्राण कुमार शर्मा" आज भी बच्चों के उतने ही चहेते हैं जितना वे 40 साल पहले थे ...ये अच्छा हुआ कि प्राण साहब ने 5 तारीख को दुनिया से विदा लिया अगर कहीं एक दिन पहले 4 तारीख को विदा लिए होते तो आपियों को का क्या हाल होता ??? सोचिए जरा कॉंग्रेस कुमार केजरीवाल को तो प्राण साहब के मृत्युशैय्या पर ही जौहर करने नौबत आ जाती ...यकीनन मूर्ख आपिए और  महामूर्ख कॉंग्रेस कुमार केजरीवाल सकते से बाहर निकल कर चैन की सांस ले रहे हैं...लेकिन चाणक्य ने उनकी नींद ही हराम कर दी ये बोल के कि भाजपा ही दिल्ली मे सरकार बनाएगी ...साबू के कंधे पर दुनिया देखने का शौक रफूचक्कर हो गया ...वैसे अभी भी चाचा चौधरी डांडा लिए बैठे है जिसमे अभी बहुत "प्राण" बाकी है आपियों ... 

Sunday, 3 August 2014

छ्छुन्नर के चिल्लपों...तेल मारे लंगड़

One life is not enough नाम की अल्प मश-हूर किताब के जवाब में किताब लिखा जाएगा। वाकई कितना सुखद अनुभव होगा नटवर सिंह को उनकी हैसियत दिखाई जाएगी... क्यों भाई आखिर नटवर सिंह की सिर्फ यही गलती है कि उनके नाम के आगे लाल के बजाय सिंह लगा हुआ है या फिर कुछ और ? ...वैसे भी उनकी 10 जनपथ से घनिष्ठता आज भी उतना ही बड़ा रहस्य है जितनी बड़ी दुश्मनी ...खैर मेंने एक खाँटी कोंग्रेसी से पूछा तो बताने लगे "...ये सब हथकंडा है चर्चा मे आने के लिए..." मैंने इसपर उनसे पूछा "...लेकिन सिंह साहब के साथ तो ऐसा व्यवहार किया जा रहा है मानो हथगोला फेंक दिये हों 10 जनपथ पर ..." खाँटी कोंग्रेसी बोलते पूछे "...ये कब से राजनीतिज्ञ हो गए ...?" मैंने उनसे शालीनता से पूछा "...वैसे आपके युवराज हथकंडा और हथगोला मे अंतर जानते हैं ...?" खाँटी भाई उखड़ गए और कड़े हो कर पूछे "...क्यों इसमे भी कोई शक है क्या ...?" मैंने बिल्कुल ठंडे दिमाग से कहा "...नहीं भाई नहीं मुझे तो पूरा विश्वास है ..." खाँटी भाई बोले "...देखिये भले ही नटवर सिंह आज कुछ भी हों आज भी वो हमारे अपने ही हैं ..." मैंने कहा "...हाँ वो तो है ही किताब से ही लगता है ..." खाँटी भाई बोले "...वही तो ..." मैंने कहा "...सही कहा आपने सुब्रमनियन स्वामी के प्रयास मे पलीता लगाने की असफल कोशिश ही है ..." खाँटी भाई इस बार स्वामी का नाम सुनते ही पूरी तरह उखड़ गए बोले "...आप लोगो भी बात का बतंगड़ बनाने मे बहुत मजा आता है ..." मैंने शालीनता से पूछा "...क्यों स्वामी ने श्री एपीजे अबुल कलाम से मिलकर कानून का हवाला देते हुए 10 जनपथ को प्रधानमंत्री बनने नहीं रोका था ...और उसके बाद स्वामी ने कई बार कहा है आपने युवराज भी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते ...क्या ये सत्य नहीं है ..." खाँटी भाई को कुछ बोले "...अगर उनको तारीफ ही करनी थी तो बुराई क्यों की ...? मैंने आश्चर्य दर्शाते हुए कहा "...वाह पहलवान को भी बुद्धि ...!" खाँटी भाई खुश हो गए बोले "...और क्या ...पहलवान के पास बुद्धि नहीं होगी तो क्या आप जैसे ढांचे मे होगी ...?" मैंने उत्तर देते हुए कहा "...हाँ वो तो है ...इसीलिए नटवर जी भी खुद को पहलवान ही समझते हैं ...शायद कुछ ज्यादा ही ..." खाँटी भाई और खुश हो गए बोले "... बहुत सही कहे हैं राहुल बाबा ने ही सोनिया जी पीएम बनने नहीं दिया ..." मैंने पूछा  "...तो मतलब बाकी सब झूठ है किताब में..." खाँटी भाई बोले "...जी बिलकुल इसीलिए सोनिया जी बहत आहात हैं ..." मैंने अनमने मन से जवाब दिया "...तो क्या हुआ ...दुनियाँ बहुत से लोग आहात और मर्माहत हैं ...इनके खून लोहा के बजाय सोना बहता है क्या ...?" खाँटी भाई बोले "...नटवर जी को पूरा सच लिखना चाहिए था ..." मैंने कहा "...सही कहा एक किताब से सारे देश को स्वामी के मुद्दे पर भरमाया नहीं जा सकता ...इसीलिए One Book is not Enough ...."  खाँटी भाई फिर उखड़ने लगे "...अजी लानत है आप पर ...वैसे मैं आपको बता दूँ कि सोनिया जी भी किताब लिखने वाली हैं ..." मैंने कुछ बोला नहीं सिवाय इसके "...उस किताब का नाम है A Penny in Bar is not Enough..." इतिहास खुद को दोहराता है ...शायद शुरुआत भी ...दोहरा ही दे...A Penny in a Bar.... पता नहीं किताब मश-हूर होगी या नहीं ...

Sunday, 27 July 2014

सी-सैट विवाद का सीधा और सरल समाधान

म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) में अभिव्यक्ति पर रोक लगा देनी चाहिए इसके निमित्त सभी प्रकार की परीक्षाएं मात्र हिन्दी व अन्य भारतीय भाषाओं के माध्यम से ही लिया जाना चाहिए। तमिलनाडु का तमिल में परीक्षा दे, कर्नाटक का कन्नड मे, गुजरात का विद्यार्थी गुजराती में बंगाली बांग्ला की तर्ज पर सभी मातृभाषी अपनी भाषा मे परीक्षा दे सकें इसकी व्यवस्था करनी चाहिए। म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) की परीक्षा, अंगरेजी माध्यम से परीक्षा व साक्षात्कार लेने पर सख्त प्रतिबंध लगा देना चाहिए। ये व्यवस्था केजी से लेकर परास्नातक, मेडिकल, इंजीन्यरिंग, प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा (सिविल सेवा सहित) सभी स्तरों पर सख्ती से लागू कर देना चाहिए क्योंकि यदि किसी को म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) नहीं आती तो वो हीन भावना का शिकार नहीं होगा जो किसी भी स्तर पर राष्ट्र के लिए बेहद हानिकारक है दूसरे म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) आवे या न आवे कम से कम मातृभाषा तो अवश्य ही सबको आती है और कायदे से आती है तो मेरे समझ से कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की परीक्षाएँ भी इसका अपवाद नहीं होनी चाहिए। शोध तो अनिवार्य रूप से मातृभाषा मे ही होने चाहिए जिससे मौलिक सोच के प्रतिभाशाली लोगों को ही अवसर मिल सके मूर्खों को नहीं जो रट्टा मार कर कुटिलयुक्ति से परीक्षा पास करने में विशवास करते हैं बजाय ज्ञान और प्रतिभा के आधार पर।

ऐसी व्यवस्था आवश्यक इसलिए है क्योंकि म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) मे व्यक्ति की बुद्धि नष्ट हो जाती है और वो 2-3% से अधिक सक्रिय हो ही नहीं सकती (मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र, नई दिल्ली के अनुसार) लिहाजा छात्र विषय को समझने के बजाय उसे रटने पर ज़ोर देता है जिससे उसकी सोच बिलकुल कुंद हो जाती है और जहां नवीनता और प्रवर्तन की बात आती है तो वे मूर्ख नकल मारने पर उतारू हो जाते हैं अमेरिका, ब्रिटेन, जापान और न जाने क्या - क्या चिल्लाने लगते हैं और वहीं मातृभाषा मे व्यक्ति मस्तिष्क पूरे 100% सक्रिय रहता है लिहाजा नवीनता और प्रवर्तन युक्त प्रतिभा के संदर्भ में मातृभाषा का कोई विकल्प नहीं है। कुछ लोग ये आपत्ति कर सकते हैं की यहाँ हर 4 कोस पर वाणी बादल जाती है तो इसका उत्तर ये है की वाणी बदलती है तो अपनी मौलिकता के आधार पर बदलती है जिसके मूल में संस्कृत है, अतः शैली वही है जो आसामी और गुजराती की है डोंगरी और मलयालम की है....आदि अतः एक भारतीय के लिए सभी स्थानीय भाषाएँ मातृभाषाएँ ही हैं और ये परिवर्तन संस्कृत-तमिल के साथ हमारे मानसिक आयाम को बढ़ा कर हमारे मस्तिष्क को विश्व मे सबसे प्रबल और शक्तिशाली बना देता हैं ठीक वैसे ही भगवान राम की चार माताएँ थीं इस कारण से भाषा मे प्राकृतिक विभिन्नता हम भारतीयों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है यही कारण है कि विश्व के सर्वश्रेष्ठ ज्ञान और आध्यात्म का केन्द्र भारतवर्ष ही है। लेकिन म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) इसमे विष घोल कर उत्तरोत्तर नष्ट करती जा रही है।

म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) का उच्चारण ही मानसिक बीमारी है और शारीरिक बीमारियों का भी घर है। मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति कभी भी अपने को बीमार नहीं मानता और वो अपनी मूर्खता का प्रदर्शन करता रहता है। इसका प्रत्यक्ष भीषण लोमहर्षक उदाहरण बीपीओ (कॉल सेंटर) मे काम करने वाले कर्मचारी हैं जिनको मात्र म्लेच्छ बोलियों (अंगरेजी व अन्य यूरोपीय बोलियाँ) मे काम करना पड़ता है, पूरे के पूरे 100% कर्मचारी भयानक मानसिक बीमारियों और हार्मोनल असंतुलन की चपेट में हैं (इंडिया टुडे, 8 अगस्त 2007) जिसका कोई इलाज एलोपैथी मे है ही नहीं (cchr.org)। वर्तमान सामय मे म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) का उपयोग अपना प्रभुत्व जमाने (आम भाषा में भौकाल मारने), अज्ञानता और मूर्खता को छिपाने के लिए ही अधिक किया जाता है। हमारे एक मित्र जो यूजीसी नेट हैं  बहुत ज्ञानी हैं किन्तु म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) मे बेहद कमजोर। उन्होने नौकरी हेतु दिल्ली के बहुत से महाविद्यालयों नौकरी के लिए साक्षात्कार दिया किन्तु सफल नहीं हुए मात्र म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) के कारण। उनको लगभग सभी जगह से यही कहा गया "...आपको भले ही विषय की कामचलाऊँ जानकारी हो कोई बात नहीं किन्तु म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) तो फर्राटे से आनी ही चाहिए ..." उनसे बहुत कम योग्यता वाले लोग दिल्ली के महाविद्यालयों म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) के नाम पर लोगों को बेवकूफ़ बना कर पैसा ऐंठ रहे हैं। म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) के नाम पर ठगई का गोरखधंधा चारो ओर व्याप्त है इसीलिए उच्चशिक्षा सहित सभी प्रकार की शिक्षा का स्तर ही लगभग समाप्त हो चुका है।

म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) इस शोध कार्यों की स्थिति और भी बुरी है क्रोनिकल पत्रिका के आंकड़े के अनुसार भारत मे 01% शोध भी किसी काम का नहीं है। कारण म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) जो सोचने ही नहीं देती समझने की तो बात ही भूल जाईए यही कारण है कि अभी तक भारत में एक भी नोबल पुरस्कार विज्ञान मे नहीं आ सका है। अतः भारत सरकार को चाहिए कि सी-सैट ही समाप्त न करे बल्कि हर स्तर (निजी व सरकारी दोनों) परीक्षा का माध्यम म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) पर भी तत्काल प्रतिबंध लगाए यदि भारत को स्वस्थ, प्रतिभा सम्पन्न, सर्वशक्तिमान और विकसित होना है तो। क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही शक्तिशाली मस्तिष्क रह सकता है।

Friday, 25 July 2014

लुआठी दुन्नों पूंछ मे ...सवार बकलोल बजावे बीन

बिहार की स्थिति ऐसी हो गई है कि दो बहरे गदहे आपस मे पूंछ बांध उसमे लुआठी फंसा के राजनीति मे नया रास्ता खोजने निकल वाले हैं। मजे की बात ये है ये दोनों गदहे अभी हाल तक एक दूसरे को खूब दुलत्ती मारते थे। दोनों जानी दुश्मन अब जानी दोस्त बनने जा रहे हैं। एक वैज्ञानिक बिहारी बता रहे थे अब दोनों मिलके फिर से बिहार मे आग लगाएंगे। तो मैंने उनके वक्तव्य पर टिप्पणी की थी कि पूंछ तो मोदी की आग मे कबकी जल चुकी है फिर ये नकली पूंछ मे लुआठी कब तक टिकेगी ये पूंछ भी जल जाएगी। तो वैज्ञानिक ने कहा था कि शायद इसीलिए एक और बकलोल गदहा का इन दोनो गदहों जिनके दोनों आगे वाले पैर मोदी-बेड़ी बंधे हुए है, की सवारी करने को आतुर दिख रहा है सवारी की सवारी, पूंछ की देखभाल भी। खैर एक बकलोल गदहे द्वारा दो गदहों की सवारी करते देखना कितना सुखद अनुभव होगा ये कल्पना ही अपने आप मे ही अद्भुत है। वैसे सबसे बड़ा सवाल ये भी है कि वो बकलोल गदहा अपने आप को बकलोल समझता ही नहीं और तो और ये दोनों जानी नवीन दोस्त गदहे उसे अपना युवराज भी मानते हैं। सवाल उठता है जिस गधों के पुंछ मे लुआठी बंधी है और दोनों गदहों की सवारी एक तीसरा बकलोल कर रहा है तो रास्ता कैसे दिखेगा?  इस सवाल जवाब देते हुए जदयू नेता बोल रहे थे "...बिहार मे सेकुलरिज़्म का उजाला हमेशा रहा है और रहेगा ..." मैंने पूछा "...तो पूंछ मे लुआठी क्यों बांध रहे हैं ..." जदयू नेता उत्तर देते हुए प्रतिप्रश्न मे बोले "...दिन मे टेल लाइट नहीं जलती है क्या ..." मुझे अच्छा लगा उनकी बुद्धिमत्तापूर्ण उत्तर सुन के विश्वास कीजिये जिंदगी मे पहली बार किसी जदयू नेता ने बुद्धिमानी वाली बात की, खैर मैंने कहा "..लुआठी तो आपने साथ-साथ अपने विरोधी के पूंछ मे भी बांधने की तैयारी कर रहे हैं ..." जदयू नेता उत्तर देते हुए बोले "...वो विरोधी नहीं रहे अब ..." मैंने कटाक्ष करते हुए उनसे पूछा '..ठीक है लेकिन लुआठी वाली हेड लाइट पूंछ में...?" उनको कुछ समझ मे नहीं आया तो स्पष्टीकरण के पूछा "...मैं समझा नहीं ..." मैंने उनको समझाते हुए कहा "...भाई हेड लाइट पूंछ आप दोनों पर तीसरा गदहा सवर ...रास्ता कैसे दिखेगा ...?" जदयू नेता उखाड़ गए थोड़ा गुस्से मे बोले "...देखिये आप वो हमारी सवारी नहीं कर रहे हैं ..." मैंने भी उसी टोन मे जवाब देते हुए कहा "...बकलोल गदहा तो सवारी का ही बहाना खोज रहा है ...मय खाँटी कग्रेसिए जोकर और पता नहीं क्या - क्या बोल रहे हैं ..." जदयू नेता थोड़ा अनमने मन से बोले "...देखिये हम लोगो को सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए जो करना पड़े करेंगे ..." मैंने कहा "...लेकिन आप लोगों को तो मोदी जी ने बिलकुल ताकत विहीन कर दिया और खुद इतने ताकतवर हो गए कि आप लोग ताकते रह गए ..." जदयू नेता बोले "...हम ताकतहीन बिलकुल नहीं हुए है ..." मैंने कटाक्ष करते हुए कहा "...मैंने कब कहा अब ताक नहीं सकते ...ताकिये चरो ओर ताकिए ...मोदी ने आप लोगों का अस हाल किया है कि अब पूंछ मे लुआठी बांध के रास्ता खोजना पड़ रहा है...ऊपर से बकलोल का खाज अलग से ..." जदयू नेता कुछ बोल नहीं रहे थे ...  

Tuesday, 22 July 2014

MH-17 मामले मे जांच के बजाय कुटिल रवैया....

MH 17 हादसे के मामले मे आज फिर अमेरिका ने बेबुनियाद और बे सिर पैर का आरोप लगाया कि यूक्रेन के विद्रोही जांच मे सहयोग नहीं कर रहे हैं। आखिर वो जांच एजेंसियां ऐसा क्या खोज रही हैं जो उनको मिलेगा तभी वो मानेंगी कि जांच मे सहयोग हुआ अन्यथा नहीं। कितना बेहूदा तर्क और उम्मीद है कि जांच भी चल रही है और वो भी इस उम्मीद में कि कुछ ऐसा मिले कि जानबूझ कर रूस को बदनाम किया जा सके। तो क्या इन जांच एजेंसियों के अधिकारियों को खुश करने के लिए विद्रोही जानबूझ कर बुक मिसाईल का मलबा कहीं से लाकर वहाँ रख दें ? जबकि अबतक के जांच मे ऐसा कुछ भी नहीं मिला है जिससे ये साबित होता हो कि इस हादसे मे रूस का हाथ है।

तो प्रश्न ये है कि आखिर अचानक अनेरिका चीन का बचाव क्यों कर रहा है ? जबकि सारे तथ्य स्पष्ट रूप से इस हादसे मे चीन का हाथ होने का इशारा कर रहे हैं। इसका पहला कारण है ये है कि अमेरिका मे लोकप्रिय सरकार के बजाय कारपोरेट सरकार का महत्व है मतलब ये वहाँ जो भी सरकार होती है उसका पहली प्राथमिकता कॉर्पोरेट हित होती है क्यों 96% अमेरिकी जनता सीधे-सीधे कार्पोरेट पर निर्भर है और चीन ने अपने यहाँ 1 करोड़ 15 लाख 17 हजार 858 बिज़नस वेब साईटों को ब्लॉक कर रखा है जिसमे गूगल, याहू, अमेजान और अनेकों अमेरिकी कंसल्टेंसी कंपनियों की साईटें हैं। मतलब ये कम्पनियाँ चीन मे बिज़नस नहीं कर सकतीं और चीन अमेरिका के लिए भारत के बाद सबसे बड़ा बाजार है इसीलिए अमेरिका की मजबूरी है कि वो चीन का साथ दे।

दूसरा कारण ये है पहले ही चीन अमेरिका का प्रतिद्वंदी हो गया है अगर कहीं रूस भी हो गया तो अमेरिका के लिए बहुत बड़ी मुसीबत हो जाएगी साथ ही भारत मे मोदी जैसा बेहद मजबूत इरादों वाले व्यक्ति का प्रधानमंत्री बनना अपने आप मे अमेरिका के लिए बहुत बड़ी मुसीबत है। इधर रूस और भारत के बीच सामरिक-तकनीकी सहयोग की संभावना बनने के कारण भी अमेरिका बहुत ज्यादा चिंतित है क्योंकि उसका मुख्य और बहुत बड़ा खरीदार हाथ से निकलता दिख रहा है। ध्यान देने वाला तथ्य ये है कि चीन भारत के लिए हमेशा से मुसीबत खड़ी करता रहा है कभी सीमा विवाद से, पूर्वोत्तर मे आतंकवादियों को सहयोग के माध्यम से और पाकिस्तान के सहयोग के माध्यम से भी। लिहाजा अमेरिका तो चाहेगा ही भारत-रूस कभी एक साथ न हों पाएँ। इसीलिए वो किसी भी तरह रूस को बदनाम करने पर उतारू है भले ही इसमे चीन का हित सधता हो।

इस हादसे मे कैसे-कैसे बेहूदे  बे सिर-पैर के तर्क गढ़े जा रहे कि गले से नीचे उतरता ही नहीं। कहा जा रहा है बुक मिसाईल को दागने के लिए बहुत उच्चस्तर की विशेषज्ञता की जरूरत होती है तो अभी ये विद्रोह इसी वर्ष मार्च से ही शुरू हुआ तो क्या यूक्रेन के विद्रोही रूसी सैनिक हैं या फिर यूक्रेन की सेना ने ही इस दुखद घटना को अंजाम दिया ? स्पष्ट है ये दोनों संभनाएँ लगभग नही हो सकतीं तो फिर ये काम तो सेना के स्तर की विशेषज्ञता का है तो वहाँ सेना तो चीन की है और फिर ये बुक मिसाईल अनेक बालक्तिक राज्यों आसानी से उपलब्ध है लिहाजा रूसी मिसाईल का मलबा खोजना वो भी सिर्फ रूस को बदनाम करने के लिए अपने आप मे बहुत बड़ी बेवकूफी तो है ही एक बाहर बहत गंभीर और कुटिल चाल की ओर इशारा करती है जिससे भारत को सावधान रहने की सख्त जरूरत है ...भारत को रूस के साथ मजबूती से खड़ा रहना चाहिए    

Sunday, 20 July 2014

MH-17 हादसा चीन की चाल ....

हमारे खाँटी भाई कोंग्रेसी और नौटंकीबाज आपिए गाजा पर संसद मे बहस करवाना चाहते हैं पता नहीं सेकुलरिज़्म के गाँजा का नशा कब उतरेगा उनपर से। इधर मलेशियाई विमान को निशाना बनाया गया इस पर उन लोगों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी जबकि वास्तविकता ये है हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा जुड़ा ये सीधा मामला है। आखिर मूर्खता और पागलपन की भी हद होती है।

आप जरा ध्यान दीजिये जब MH 17 को यूक्रेन के दमेतस्क मे दो दिन पहले मार गिराया गया था तभी भारत के प्रधानमंत्री भी इसी रूट से 90 मिनट पहले लौटे थे और फिर जिस समय ये हादसा हुआ उसके ठीक 90 मिनट की दूरी पर एक एयरइंडिया का विमान भी उड़ रहा था। जब ये हादसा हुआ उसके कुछ घंटों के बाद ही विरोधियों ने जांच मे सहयोग का वादा किया लेकिन अब ये कहा जा रहा है कि विरोधियों ने सुबूत नष्ट कर दिये है जो समझ से परे है आखिर ब्लैक-बॉक्स तो मिल ही गया जो सबसे बड़ा सुबूत होता है। तो कहीं ये एक अंतर्राष्ट्रीय साजिश तो नहीं थी भारत के भी खिलाफ मतलब एक तीर से कई निशाने ? वैसे जिस प्रकार ब्रिक्स सम्मेलन में बिक्स बैंक के मुद्दे पर चीन से भारत का जो भी विवाद हुआ और उसमे पहले अध्यक्ष के तौर पर चीन को भारत के आगे झुकना पड़ा, संदेह उत्पन्न करता है। आखिर क्या कारण है कि उधर चीन के राष्ट्रपति जी जीनपिंग भारत के प्रधानमंत्री से हाथ मिला रहे थे और इधर चीनी सेना भारत मे घुसपैठ करने की कोशिश कर रही थी ?

शक का कारण ये भी है कि चीन ने यूक्रेन में 3 मिलियन एकड़ ( हांगकांग से भी बड़ा क्षेत्र ) जमीन खरीद रखी है। ये ख़रीदारी उसके यूक्रेन के केजीएस एग्रो के साथ सितंबर 2013 मे की थी ये चीन की विस्तारवादी नीति का ही हिस्सा है उसके बाद चीन ने उस जमीन पर अपनी सेना तैनात करना शुरू कर दिया। जिसपर रूस को आपत्ति थी। क्रीमीया का रूस मे शामिल होना भी चीन पचा नहीं पा रहा है उसे डर है कि उसके 3 मिलियन जमीन हाथ से निकल भी सकती है। अपने एक चाल से चीन किसी भी तरह रूस को पस्त करना चाहता ताकि वो इस क्षेत्र मे हस्तक्षेप बंद करे। अब सवाल उठता है कि मलेशियाई विमान ही निशाना क्यों बना ? कारण साफ है चीन पश्चिमी फिलीपीन्स सागर पर अपना दावा जताता है और इसके विरोध के निमित्त फिलीपींस के राष्ट्रपति जेजोमार बिनय और विएतनाम के राजदूत तुरुङ्ग तीयू डुओंग के बीच सार्थक बैठक 6 मार्च 2014 को चुकी थी जिसका समर्थन मलेशिया ने भी किया था। मतलब मलेशिया ने सीधा-सीधा चीन का विरोध किया था। आप ध्यान दीजिये एक मलेशियाई विमान MH-370 जो मलेशिया से बीजिंग की उड़ान पर था, का अपरण ठीक उसी समय हुआ था जिसका आजतक पता नहीं चला।

भारत सरकार को चाहिए कि चीन विस्तारवादी नीति पर रोक लगाने के लिए पूरे मनोयोग से रूस के साथ न सिर्फ खड़ा रहे बल्कि उसे सहयोग भी करे और उधर आतंकवाद पर प्रभावी मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए इसराईल के साथ खड़ा तो रहे ही फिलिस्तीन की राष्ट्र के रूप में मान्यता भी समाप्त करे। कॉंग्रेस-कम्युनिस्ट चिल्लाते हैं तो चिल्लाते रहें ।

Saturday, 19 July 2014

वाह चंद्रिका जी, इसे कहते हैं राजनीति को अपने उँगलियों पर नचाना, इधर आपने मनीष सिसोदिया की चाल का खुलासा किया नहीं कि उधर आसिफ खान को वास्तविकता बतानी पड़ी। हालाँकि वो एक दिन पहले ही ये बयान दे रहे थे कि कुछ आम आदमी पार्टी के नेता उनसे संपर्क कर किसी भी तरह सरकार के लिए कॉंग्रेस के समर्थन का जुगाड़ करने को कह रहे थे, लेकिन नाम बताने से कतरा रहे थे अगर उनको नाम बताना ही था तो उसी दिन बता दिये होते लेकिन आपने सब भंडा फोड़ दिया और आसिफ साहब ये बताने पर मजबूर होना पड़ा कि मनीष सिसोदिया खुद दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने की जुगाड़ मे हैं। ये तय है कि यदि आपने अपने इस पोस्ट से सिसोदिया की चाल का खुलासा नहीं किया होता तो आसिफ खान सिसोदिया का नाम नहीं लेते ये शकील अहमद के बयान से सिद्ध होता है। आपकी कमाल की विश्लेषण क्षमता ने दिल्ली के राजनीति की दिशा ही बदल के रख दी।

इसके पहले भी मैंने कई बार राजनीति को आपके विलक्षण उँगलियों पर नाचते हुए देखा है जिसका प्रमाण आपके टाइमलाइन वाल पर मौजूद है और आसानी से उन सभी का अवलोकन किया जा सकता है। वास्तव मे मैं तो कायल हूँ आपके अद्भुत और विलक्षण विश्लेषण क्षमता का जो पत्रकारिता जगत मे कहीं दिखती ही नहीं।      

Friday, 18 July 2014

यूं ही नहीं आपियों को मूर्ख केजरीवाल को महामूर्ख कहा जाता है ....

मैंने पहले कई बार ये सिद्ध किया है और एक लेख भी लिखा है कि जनांदोलनों से उपजी पार्टियां आला दर्जे की अनैतिक, भ्रष्ट, सत्ता की लालची और मूर्खों का जमावड़ा रही हैं। ये सत्ता के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं इसी का नमूना है मनीष सिसोदिया का केजरीवाल को ठिकाने लगाते हुए दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने का प्रयास करना। मैंने 20 घंटे पहले ही इसका खुलासा कर दिया था  कि सिसोदिया केजरीवाल को ठीक उसी तरह लात मार कर मुख्यमंत्री बनने का ख्वाब देख रहे हैं जैसे केजरीवाल ने अन्ना को लात मारी थी। मेरे उस खुलासे को आज ABP News के बड़ी बहस ने पुष्टि कर दी। खाँटी कोंग्रेसी आसिफ मोहम्म्द खान ने साफ-साफ कहा कि मनीष सिसोदिया खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं जिसे बाद मे संजय सिंह ने भी खान साहब से मुलाक़ात करके केजरीवाल के विकल्प की बात की थी।

इसके पहले भी मैंने कई बार इन मूर्ख और भ्रष्ट आपियों की पोल सिरे से खोली है जिसका प्रभाव है कि इनकी दुकान बिलकुल बंद होने के कगार पर है इसीलिए ये अस्तित्व बचाने के लिए किसी भी तरीके से कम से कम दिल्ली मे सत्ता हथियाना चाहते हैं। सवाल ये है कि जब मनीष और अन्य मूर्ख आपिए किसी तरह सत्ता हथियाना चाह रहे हैं तो छोटे आपिया विधायक ऐसा क्यों नहीं करेंगे ? आखिर उनको भी सत्ता सुख चाहिए ही चाहे जैसे भी हो भले ही आपिया का ठप्पा मिटा कर किसी और का ठप्पा लगाना पड़े। किस मुंह से ये मूर्ख आपिए ये कह सकते कि उनके विधायक अनैतिकता का रास्ता नहीं अपना रहे हैं। शायद महामूर्ख  केजरीवाल को ये आश्चर्य लगे लेकिन ये सत्य है कि 19 विधायक आपिया पार्टी तोड़ कर नयी पार्टी बनाने के लिए एकदम तैयार हैं और सभी बिन्नी के संपर्क में हैं।

वैसे मूर्ख आपिए ईमानदारी का चोला ओढ़ कर ईमानदारी का दिखावा भी नहीं कर पा रहे। नीति शास्त्र मे लिखा है "अतिविनयम महाधूर्तस्य लक्षणम"। ये सूक्ति मूर्ख आपियों पर अक्षरशः लागू होती है। केजरीवाल, योगेंद्र यादव और अन्य आपियों के अतिविनयशीलता से सभी परिचित हैं। अतः इन महाभ्रष्ट, लालची और हमेशा झूठ बोलने वाले नौटंकीबाज आपियों की महाधूर्तता से बचने की जरूरत है।  

Thursday, 17 July 2014

देख धुरंधर पाजी काम, पीए शिकंजी बतावे जाम ...

भारतीय सिनेमा मे सन्नी लियॉन को सभ्य नारी का दर्जा मिलने के बाद ठीक केजरीवाल के तर्ज पर सौ चूहे खा कर भी आज बॉलीवुड मे हज करती फिर रही है ठीक वैसे ही भारतीय राजनीति के आईटम गर्ल केजरीवाल हजरात बने फिर रहे हैं और उल्टे भाजपा पर इल्जाम लगा रहे हैं कि वो इनके सड़े चूहे खा रही है। सबेरे से ही वो इसकी चूसना दे रहे थे दिल्ली वालों को...लेकिन दिल्ली वालों ने उस चूसना को लेने से इनकार कर दिया। सन्नी लियॉन तो फिर भी महिला है लेकिन केजरीवाल तो अस पुरुष हैं कि उन्हें न तो कॉंग्रेस और बीजेपी मे फर्क पता है, न गाय और भैंस मे अंतर कर पाते हैं, न अपनी पत्नी और बहन मे और न ही शीला दीक्षित और नरेन्द्र भाई मोदी में अंतर कर पाने के उनके अंदर क्षमता है। सन्नी लियॉन की तर्ज  पर अपने आईटम से सबका मनोरंजन करने वाले मूर्ख आपिया की पोल जब खाँटी भाई कोंग्रेसी आसिफ मोहम्मद खान ने खोली तभी एक मूर्ख आपिया अपना आपा खोते हुए चीखने लगा तो मैंने उससे उसी अंदाज में पूछा "...ऐ चिल्ला क्यों रहा है ...?" मूर्ख आपिया बोला "...ये सब चाल है बीजेपी - कॉंग्रेस की ..." मैंने उसे डांटते हुए कहा "...अरे मूर्ख तुम्हारा मनीष सिसोदिया गया है जोड़ - तोड़ कर सरकार बनाने के संदर्भ में बात करने के लिए इसमे बीजेपी कहाँ से आ गई ...?" मूर्ख आपिया बोला "...ये सब चाल है ...सब मिले हुए हैं ..." मैंने कहा "...पहले शांत हो जा फिर बताते हैं चाल किसकी है ..." मूर्ख आपिया शांत हो गया फिर बोला "...बताओ ..." मैंने उसे समझाते हुए कहा "..आसिफ खान से तुम्हारा केजरीवाल क्यों नहीं गया बात करने के लिए ...? मूर्ख आपिया अपना कपार खजुआने लगा खूब खजुआने के बाद भी जब उसे समझ में नहीं आया तो उसने पूछा "...बताओ क्यों ...? मैंने उसे थोड़ा झेलाने के अंदाज मे कहा "...सन्नी लियॉन को देखो उसकी कोई दोस्त या रिश्तेदार उसका बिज़नस डील करने जाती है ...?" आपिया फिर अपना आपा खोते हुए ज़ोर से बोला "...इसमे सन्नी लियॉन कहाँ से आ गई ...?" मैंने कहा "...बात वही है चेतन भगत ने बिलकुल सही कहा था महामूर्ख केजरीवाल और मूर्ख आपियों के बारे में ..." मूर्ख आपिया को संभवतः  कुछ समझ में नहीं आया इसलिए शायद वो चुप रहा तो मैंने कहा "... जैसे सन्नी लियॉन किसी दोस्त या रिश्तेदार से बिज़नस डील कराने के बजाय वो खुद ही डील करती है वैसे सिसोदिया भी अपना बिज़नस खुद ही डील कर रहे हैं ...समझ मे आया कुछ ...?"  मूर्ख आपिया फिर से अपने कपार के पश्चिमोत्तर प्रांत मे खजुआने लगा थोड़ी देर बाद बोला "...मतलब मनीष खुद ही ..." मैंने बीच मे ही बात काट कर उसकी पीठ ठोकते हुए कहा "...शाब्बास समझ मे तो आ गया तुझे बिल्कुल सही पकड़ा ...मनीष ही मूर्खाधिराज केजरीवाल को बाइपास करके दिल्ली का मुख्यमंत्री बनना चाहता है ..." मूर्ख आपिया का चेहरा अब देखने लायक था मनीष सिसोदिया के खिलाफ लगा बड़बड़ाने...उसी बड़बड़ाहट मे वो बोला "...लेकिन हमे तो केजरीवाल ही चाहिए ..." मैंने उससे कहा "...जनलोकपाल नहीं तो महामूर्ख केजरीवाल नहीं ..." मूर्ख आपिया फिर फंस गया और ज़ोर-ज़ोर से अपने दोनों हाथ से कापार खजुआने लगा ...बहुत देर तक खजुआता ही रहा .........  

Wednesday, 16 July 2014

मौजि अधेली - घंटाल खियावे कुक्कुर भिंडी....

बकलोल बबुआ के लिए हमेशा गुरु - घंटाली दिखाने वाले दिग्गी राज्जा ने जब अपनी असली रूप दिखाया तो किसी खाँटी भाई कोंग्रेसी ने चू तक नहीं की उल्टे अपनी ही मस्ती मे मगन रहे। मस्ती का आलम ये था कि बस "बेगानी शादी मे अब्दुल्ला दीवाना"। अपने ही नाज-नखरों से खाँटी भाईयों ने पाकिस्तान को खड़ा किया, आतंकवाद को खड़ा किया लेकिन अब जब सदमा लगा तो दिग्गी राज्जा के हनीमून के लिए परेशानी खड़ी हो गई। तब दिग्गी राज्जा गुरु - घंटाल से अधेली - घंटाल हो गए इसलिए बेचारे कई अब्दुल्ला पाकिस्तान पंहुच गए लेकिन उन्हीं का पालतू हाफिज़ सईद कहाँ मानने वाला था सो उसे मनाने के लिए पुराने खाँटी भाई कोंग्रेसी "भेद प्रकाश भैदिक" को वहीं पाकिस्तान में रुकना पड़ा। हाफिज़ सईद तो पूरी तरह दिग्गी राज्जा की भूमिका निभाना चाह रहा था ठीक दिग्गी राज्जा के ही खिलाफ। अब पता नहीं मामला सल्टा की नहीं लेकिन ये तो तय है कि दिग्गी राज्जा बुढ़ौती मे बियाह के बाद हनीमून पाकिस्तान मे ही मनाएंगे। इस पर कोई खाँटी भाई कोंग्रेसी कुछ बोलने को तैयार नहीं था। बड़ी मुश्किल से एक खाँटी भाई तैयार हुए तो मैंने पूछा "...स्विट्ज़रलैंड मे कोई परेशानी है क्या दिग्गी राज्जा को ...?" खाँटी भाई बोले "...वैसे तो कोई खास नहीं लेकिन अब सोचना पड रहा है ..." मैंने उसी जिज्ञासा से पूछा "...क्यों...?" खाँटी भाई उत्तर देते हुए बोले "...काले धन पर SIT ..." मैंने कहा "...हाँ वो तो है मतलब तब तो चीन भी नहीं जा सकते वो ..." खाँटी भाई बोले "...चीन पंचशील का पालन नहीं करता ..." मुझे उनके इस उत्तर से थोड़ी भी संतुष्टि नहीं हुई सो मैंने पूछा "...काले धन और पंचशील मे क्या समानता है ...?" खाँटी भाई उत्तर देते हुए बोले "...ब्राज़ील मे चीन से प्रधानमंत्री की बात हो रही है ..." मेरी असंतुष्टि कायम रही तो मैंने प्रतिप्रश्न किया "...मामला उस मुलाक़ात का है या सुब्रमनियन स्वामी के खुलासे का ...?" इस पर खाँटी को थोड़ा गुस्सा आ गया बोले "...देखिये वो सब आरोप झूठे हैं ..." मैंने कहा "...लेकिन वो तो न्यायालय में हैं ..." खाँटी भाई मामले को रफा-दफा करने के अंदाज मे बोले "...छोड़िए वो सब पाकिस्तान सबसे सुरक्षित है ..." मैंने इस पर पूछा "...भैदिक जी ने हाफिज़ सईद को मना लिया क्या ...?" खाँटी भाई बोले "...हाँ लगता तो है वैसे हमारा प्रयास ये भी है वो कश्मीर मे भी परेशानी न खड़ी करे ..." मैंने कहा "...हाँ दिग्गी राज्जा हनीमून के लिए न तो स्विट्ज़रलैंड जा सकते हैं, न यूरोप जा सकते हैं, न अमेरिका जा सकते हैं, न आस्ट्रेलिया, न न्यूजीलैंड..." तभी खाँटी को कोई होश आया बोले "...अमेरिका तो जा ही सकते थे लेकिन डर ये कि कहीं अमेरिका वाले पकड़ कर उनके और उनके श्रीमती जी के गुप्त बीमारी का आपरेशन न करने लगें ..." मैंने सहमति जताते हुए कहा "...हाँ वो तो है ..." मैंने आगे जोड़ते हुए कहा "...अगर हाफिज़ सईद दिग्गी राज्जा के लिए पाकिस्तान और कश्मीर परेशानी न खड़ी करने लिए तैयार हो जाता है भले ही उसकी आजादी की बात जैसी घिनौनी हरकत के नाम पर तो आप खाँटी भाई लोगों भैदिक जी का अहसानमंद होना चाहिए ..." खाँटी भाई ये सुन कर अंदर चले गए बिना नमस्कार किए ही ।  

Saturday, 24 May 2014

चमकावे करैली आपिया, खाए धोबी पाट...

अपनी जेब से हमेशा करैली निकाल चमकाने वाले आपियों के मुंह में जब भाजपईयों ने मिर्ची ठूँसी तो आपिए करैली अपने जेब में रख के भाग खड़े हुए। आलम ये है भागते आपिए भूत की लंगोटी भी नीलाम होने के कगार पर है। इसी निलामी को टालने के लिए आपियों ने नौटंकी करने की सोची। कहा जाता है कि मूर्ख हमेशा दूसरों को महामूर्ख ही समझता है सामने वाला चाहे कोई भी हो। इसीलिए मूर्ख आपियों के बास केजरीवाल न्यायालय के सामने ही करैली चमकने लगे बस उसके बाद जो होना था वो सबके सामने ही है। लेकिन अफसोस इस हाई वोल्टेज ड्रामे में कोई आइटम नहीं है हालाँकि इसके लिए प्रयास आपियों ने बहुत किया लेकिन तभी कुछ लोगों ने पार्टी छोड़ दिया। उनका मन अब करैलीबाजी करने का नहीं करता। एक मूर्ख आपीया मुझसे पूछ रहा था "...केजरीवाल का दोष क्या है ..." मैंने उससे कहा '...ये आप न्यायालय से पूछिए ..." वो मूर्ख आपिया फिर लगा करैली चमकाने और बोला "...भ्रष्टाचारी बाहर हैं और आवाज उठाने वाला अंदर, चोर को चोर कहना कहाँ का गुनाह है ..." मैंने उसे समझाते हुए कहा "...बिलकुल गलत नहीं है लेकिन पहले चोर को चोर तो साबित करो ..." मूर्ख आपिया बोला "...अब भी सुबूत चाहिए क्या ये सबको पता है ..." मैंने उससे कहा "... लेकिन न्यायालय को नहीं पता है कृपया उसे बताईए..." आपिया बोला "...इसमे भी चाल है काँग्रेस भाजपा की..." मैंने उसे उत्तर देते हुए कहा "...चाल कम से कम भाजपा की तो नहीं है कॉंग्रेसी माता जी सदमे में हैं हाँ आपके वकील साहब की चाल जरूर है लेजरीवाल को जेल में सड़ाने का ..." मूर्ख आपीया आगबबूला होते हुए कहा "...ये नहीं हो सकता..." मैंने पूछा "...काहें नहीं हो सकता .. 56 मूर्ख आपिए जमानत लेकर जेल से बाहर आ गए केजरीवाल क्यों नहीं ..." मूर्ख आपीया बोला "...ये पार्टी के सिद्धान्त के खिलाफ है ..." मैंने पूछा "...फिर 56 पर वो सिद्धान्त लागू नहीं होता ...? मूर्ख आपीया ज़ोर - ज़ोर से अपना कापार खजुआने लगा काफी देर तक खजुआता रहा तो मैंने उसे समझते हुए कहा "...देखो जो वकील केजरीवाल का केस लड़ रहे हैं उन्होने ही कहा है बेल न लेने के लिए ये समझाते हुए कि इससे सहानुभूति की लहर उठेगी और विधान सभा चुनाव में जीत सकते हैं ..." आपिया बोला "...हाँ तो इसमे चाल कहाँ से आ गई ..." मैंने उसे समझाते हुए कहा "...जब अपना जूता अपने गाल पर मारने मतलब झांपड खाने के बाद भी कोई सहानुभूति नहीं उपजी तो इससे क्या खाक उपजेगी सोचो जरा..." मूर्ख आपिया वाकई सोचने लगा तो मैंने फिर कहा "...अगर यही बात होती तो बाकी 56 आपिए भी जेल मे रह के सहानुभूति लेते ..." मूर्ख आपिया चुप हो कर मेरी बात सुनने लगा तो मैंने आगे कहा "...मामला ये है कि वकील साहब पार्टी पर कब्जा करना चाहते हैं और केजरीवाल के बाहर रहते ये संभव नहीं था ...आप देखिये कि हर पोस्टर पर केवल केजरीवाल की फोटो लगी थी किसी और पदाधिकारी की क्यों नहीं ...? " आपिया फिर अपना सिर खजुआने लगा बोला "...मुझे भी कुछ शक हुआ था..." मैंने कहा "...पूरे चुनाव में कहीं वकील साहब दिखे नहीं न ... दरअसल केजरीवाल इगनोर कर रहे थे ...उसी का बदला वकील साहब ले रहे हैं ...समझे ..." आपिया मुझसे पूछा "...लेकिन आप पर विश्वास कैसे किया जाए ..." मैंने कहा "...जो लोग पार्टी छोड़ रहे हैं उनसे पूछो और जो जमानत पर बाहर आ गए उनसे भी पूछो ..." आपिया शांति से सोचने लगा तो मैंने फिर कहा "...वकील साहब को कुछ लोग चाहिए सिवा केजरीवाल के सो उन लोगों से जमानत लेने को कह दिया ..."  आपिया मन ही मन केजरीवाल का नाम लेकर बुदबुदाने लगा तो मैंने भी नमस्कार कर के राह पकड़ ली ।           

Thursday, 22 May 2014

लिये लुआठी बगावत वीर, हड़कावे आला कमान

काँग्रेस में आलाकमान के विरुद्ध बगावत अब सतह पर आ गया है और ज़ोर से सा गया है। घोर खाँटी कोंग्रेसी मिलिंद देवड़ा ने राहुल गांधी और उनकी टीम के खिलाफ खुल के बोला है। आज से करीब 9 महीने पहले ही मैंने 18 जुलाई 2013  को अपने एक "काँग्रेस बगावत के बारूद पर" लेख मे कारण सहित साफ-साफ कह दिया था काँग्रेस बगावत के मुहाने पर खड़ी है जो कभी भी फट सकता है मैंने उसी समय ये कहा था काँग्रेस में एक वर्ग ऐसा भी है जो पार्टी को सोनिया-राहुल-प्रियंका और उस परिवार से मुक्त करना चाहता है। उस समय से लेकर काँग्रेस के शर्मनाक पराजय तक किसी भी प्रिंट मीडिया या चैनल चाहे वो राष्ट्रीय हो स्थानीय में इस तरह की कोई खबर नहीं चली। उसके बाद से ही जगदंबिका पाल सहित करीब दो दर्जन सांसदों ने काँग्रेस छोड कर भाजपा में आने का प्रयास शुरू कर दिया था जो चुनाव की अधिसूचना के बाद तक भाजपा मे शामिल हो चुके थे। मेरे उस लेख को मेरे टाइमलाइन पर उक्त तिथि की पोस्ट में देखा जा सकता है। मेरे इस लेख पर एक राष्ट्रीय स्तर बहुत बड़े अखबार के संपादक ने खिल्ली भी उड़ाई थी और मेरा मज़ाक भी बनाया था। क्या मीडिया कोई ऐसा है ही नहीं जो जन मनोभावों (Public Attitude) को पढ़ने की थोड़ी भी क्षमता रखता हो ? वैसे उन संपादक की प्रोफ़ाइल और पोस्टिंग से ऐसा बिलकुल नहीं लगता को काँग्रेस समर्थक हैं फिर भी पता नहीं क्यों मेरे आलेख पर उनको विश्वास ही नहीं हो रहा था। मेरे हिसाब से यदि भारत की पत्रकारिता निर्भीक और जीवंत है तो ऐसे लेख और इससे संबन्धित समाचार साल भर पहले ही मीडिया में प्रमुखता से चलने चाहिए थे। आज की तारीख में भी राष्ट्रीय स्तर पर बहुत से ऐसे पत्रकार भी हैं जिनको इस चुनाव परिणाम से बहुत दुख है और वे अपनी पीड़ा छिपा नहीं पा रहे हैं। इसी से पता चलता है मीडिया में पत्रकारों का स्तर क्या है ऐसे लोग पत्रकारिता के नाम पर जो कर रहे हैं वो किसी से छिपा नहीं है। इसीलिए ज़्यादातर विश्लेषण और उनके निष्कर्ष सिरे से गलत साबित होते हैं और वे निरंतर अपनी विश्वसनीयता खोते जा रहे हैं। पुष्टि के लिए मेरे टाइमलाइन पर 18 जुलाई 2013 की मेरी "काँग्रेस बगावत के बारूद पर" शीर्षक की पोस्ट देखें ....

Wednesday, 21 May 2014

रेंगत सैम करे मनुहार...

पिछले वर्ष 6 फरवरी 2013 को जब मैंने पहली बार श्रीराम कालेज, नई दिल्ली में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी को विशुद्ध नीतिगत मामलों पर बोलते हुए सुना था तभी मैंने सर्वप्रथम अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा से उनकी तुलना करते हुए कहा था कि नरेन्द्र भाई मोदी कई मामलों में बराक ओबामा से काफी बेहतर हैं यद्यपि इसके लिए मैंने सिर्फ 5 मौलिक बिन्दु ही लिए थे तुलना करने के लिए जिसे मेरे टाइमलाइन पर 8 फरवरी 2013 की तिथि को देखा जा सकता है। वैसे ऐसे दर्जनो बिन्दु हैं जिन पर मोदी जी के आगे बराक ओबामा कहीं ठहरते ही नहीं। कमाल देखिये जब केवल मामूली से धन्यवाद ट्वीट के मामले में जब ओबामा को मोदी जी ने प्राथमिकता नहीं दी और काफी नीचे रखा तो उसी पर पूरा अमेरिकी प्रशासन हिल गया। अभी तो मोदी जी सरकार भी नहीं बनी है और प्रचंड और आक्रामक विदेश नीति के संकेत मिलने लगे हैं। अमेरिकी सीनेटर जॉन मैक्केन ने प्रधानमंत्री मोदी को बधाई देते हुए सम्बन्धों को पुनर्जीवित की गुहार लगाई है। वहीं उधर अमेरिका के विदेश जॉन एफ॰ केर्री भी मोदी की मनुहार करने में रेगते नजर आ रहे हैं बार - बार दुहाई दे रहे हैं कि मोदी जी वीजा प्रकरण को अतीत मान कर भूल जाएँ। क्या इसके पहले किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रशासन ने कभी भी किसीकी ऐसी मनुहार करते देखा या पढ़ा ? अभी तो ये आलम है मामूली से मात्र ट्वीट के मुद्दे पर ही मोदी ने पूरे ओबामा प्रशासन हिला के रख दिया जब बड़े मुद्दे आएंगे तब ओबामा क्या करेंगे ? देखने वाली बात होगी ओबामा या अमेरिकी प्रशासन भारत के प्रधानमंत्री मोदी का कैसे सामना करता है। वैसे भी मोदी के रूप में जैसा शक्तिशाली प्रधानमंत्री मिला है उससे अमेरिका और चीन का चिंतित होना अप्रत्याशित बिलकुल नहीं लग रहा है। जैसा मैंने फरवरी 2013 में नरेन्द्र भाई मोदी को विश्वनेता कहा था प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी को विश्वनेता के रूप मे स्थापित करने से कोई रोक सकता है कम से कम आज के तारीख में तो किसी भी देश में कोई भी मुझे तो नहीं दिखता।

Monday, 12 May 2014

मारे त्रिपुंड मूंढ़िया, चियारे दाँत बकलोल...

जैसे छछूंदर अपने सर पर चमेली का तेल लगा कर निकलता है ठीक वैसे ही काँग्रेस कुमार केजरीवाल अपने माथे पर त्रिपुंड लगाए बनारस में घूम रहे हैं। जैसे छछूंदरों को हमेशा भोजन की तलाश रहती है वैसे ही तलाश केजरीवाल को वोटों की है छछूंदर अपने सर पर चमेली का तेल लगा लेता है तो उसे लगता है भोजन स्वादिष्ट मिलेगा ठीक यही उम्मीद केजरीवाल को भी है कि कम से कम वोट कायदे का मिल जाए। केजरीवाल ब्रांड एक बकलोल आपिया बता रहा था "...केजरीवाल के आने से राजनीति में परिवर्तन तो आया है ..." मुझे उस बकलोल की दलील बड़ी अजीब सी लगी मैंने कहा "...हाँ आया तो है केजरीवाल को त्रिपुंड लगा कर घूमना पड़ रहा है ...लानत है ऐसे परिवर्तन को आपिया जी ..." बकलोल आपिया थोड़ा तैश में आ और आपा खोते हुए ऊंची आवाज में बोलते हुए बोला "...आपको भ्रष्टाचार नहीं दिखता ..." मैंने उसका उत्तर देते हुए कहा "...चुनाव के दिन त्रिपुंड लगा कर तुम्हारा बॉस केजरीवाल घूम रहा है इससे बड़ा भ्रष्टाचार और क्या हो सकता है ...?" बकलोल आपिया बोला "...ये किसी का मौलिक अधिकार है इससे कोई वंचित नहीं कर सकता ..." मैंने कहा "...बिलकुल भ्रष्टाचार आपका अधिकार है और कोई आपको इससे वंचित नहीं कर सकता ...त्रिपुंड लगा कर घूमना उसी का नमूना है..." बकलोल आपिया और गुस्से मे आ गया और पूछा "...वो कैसे ..." मैंने उसे समझाते हुए कहा "...बकलोल दास आपिया ! तुमहरा बॉस तो तुम लोगों से भी गया -गुजारा बकलोल है उसे तो ये भी नहीं पता कि चुनाव के दिन त्रिपुंड लगा कर घूमने से लोग उसे ठग समझ लेंगे ..." बकलोल आपिये की जिज्ञासा बढ़ गई , पूछने लगा "...वो कैसे...?" मैंने उसका उत्तर देते हुए कहा "...जैसे छछूंदर सर पर तेल लगाता है वैसे केजरीवाल ने त्रिपुंड लगाया है आज..." बकलोल आपिया बोला "...तो इसमे ठगई वाली बात कहाँ से आ गई ...?" मैंने ज़ोर देते हुए उससे पूछा "... अरे बकलोल दास आपिया ! छछूंदर सर पर साल मे कितने दिन चमेली का तेल लगता है..." बकलोल आपिया बोला "...पता नहीं ..." मैंने उसपर तंज़ कसते हुए कहा "...इसीलिए तुम बकलोल हो और तुम्हारा बॉस महाबकलोल...लानत है तुम्हारी डिग्री पर..." बकलोल आपिया बोला "...देखिये हमको बकलोल मत कहिए ..." मैंने कहा "...आपसे ज्यादा बुद्धिमान तो वो छछूंदर है जो चमेली का तेल लगा कर निकलता है ..." बकलोल आपिया ने मुझे पूछा "...आपने बताया नहीं केजरीवाल के ठगई के बारे में ..." मैंने कहा "...जैसे तुमने जितनी बार छछूंदर को चमेली का तेल लगा के घूमते हुए देखा है उसी प्रकार केजरीवाल को भी दिखना चाहिए था ...महामूर्ख ठग...वैसे मैंने तो सुना था कि ठग बहुत बुद्धिमान होते हैं लेकिन केजरीवाल निरा महाँमूर्ख ठग निकला ..." बकलोल आपिया ज़ोर -ज़ोर से अपना कपार खजुआने लगा तो मैंने वहाँ से खिसक लिया ... 

Saturday, 10 May 2014

आँख देखावे ममता, छाती पीटे बंगाल ...

ममता जी नेरेन्द्र भाई मोदी को जेल मे बंद कर देतीं...अगर वो दिल्ली में होती ऐसे उन्होने कई बयान दिये ...क्या जमाना आ गया पता नहीं सारे अंडों की अकल कहाँ चली गई कि वे सब अपनी माँताओं को हड़काने पर उतारू दिखने लगे...अंडे हड़काते हुए कह रहे हैं "..चू-चू न कर..." बेचारी ममता तो ममता की भूखी हैं बंगाल की जनता की ममता भी मोदी की ओर मुड़ने लगे समझ लीजिये ममता को गमछा भी कम पड़ जाएगा पसीना पोछने के लिए। ममता भरी गमछा तो उसी दिन हवा हो गया जब दिल्ली मे वो अन्ना बाबा के साथ रैली रामलीला मैदान मे करने वाली थीं लेकिन मोदिमय जनता और अन्ना बाबा ने जब ठेंगा दिखा दिखा दिया तो सारी उनकी सारी ममता मातम मनाने लगी और उद्गार निकले वो भारतीय लोकतन्त्र पर ढेला और पत्थर फेंकेने जैसा ही है जैसा आपिए कर रहे हैं। उनके एक पुराने त्रिमूक्का नेता बता रहे थे "...बंगाल में तो ममता ही हैं ..." मैंने पूछा "...फिर उनको गरियाने की क्या जरूरत है ..." त्रिमूक्का नेता उत्तर देते हुए बोले "...वो गाली नहीं ममता की ममता है ..." "...अगर यही ममता है तो निर्ममता क्या है ...?" त्रिमूक्का नेता अचकचाते हुए बोले "... बंगाल की जनता अपनी ममता और निर्ममता दिखा देगी ..." मैंने फिर "...आपको इतना कॉन्फ़िडेंस कैसे है ...?" त्रिमूक्का नेता उत्तर देते हुए बोले "...बंगाल की जनता बहुत बुद्धिजीवी है ..." मैंने प्रश्न पूछते हुए कहा "...इसीलिए ममता जी को गाली की भाषा का इस्तेमाल करना पड़ रहा है ...!" त्रिमूक्का नेता बोले "...वो गाली नहीं दे रही हैं ..." मैंने प्रतिप्रश्न मे कहा "...क्या बंगाल के जनता की यही बुद्धिजीविता है ...?" त्रिमूक्का नेता से अब रहा नहीं गया वो उन्होने सीधे मुझसे पूछा "...आपके कहने का क्या मतलब है...?" मैंने बड़ी सफाई और शांति से कहा "...मेरे कहने का वही मतलब है जो आपको समझ में आ रहा है ..." त्रिमूक्का नेता बोले "...क्या समझ मे आ रहा है ..." मैंने उत्तर देते हुए कहा "... बंगाल को कंगाल करें आप जेल जाएँ मोदी ...?" त्रिमूक्का नेता बोले "...हमने बंगाल की जनता को उसका हक दिया है ...?" मैंने कहा "...अच्छा ! तो हक देने के बाद गाली देने की कौन से बंगाल सी समृद्ध परंपरा का आप निर्वहन कर रहे हैं ..." त्रिमूक्का नेता तिलमिला कर बोले "...आपको अंदाजा नहीं है ..." मैंने पूछा "...क्या अंदाजा नहीं है ..." त्रिमूक्का नेता बोले "...ममता के खिलाफ कोई नहीं जा सकता ..." मैंने पूछा "...क्यों भाई ! ये धमकी किस लिए ...?" नेता अपने ओरिजनल अंदाज में आ गए "...जब दिल्ली में अन्ना धरना देने रामलीला मैदान नहीं आए तो आपने देख लिया न ..." मैंने उत्तर देते हुए कहा "...हाँ देखा तो आप लोग त्रिमूक्का नेताओं ने अन्ना बाबा की ऐसी-तैसी कर दी थी ..." नेता बोले उसी तरह ऐंठते हुए बोले "...हाँ अब कभी भी अन्ना हम लोगो से पंगा नहीं लेंगे ..." मैंने कहा "...एक बात बताईए उसका खुन्नस मोदी पर क्यों ..." नेता बोले "...क्योंकि सब एक ही हैं ..." मैंने त्रिमूक्का नेता को कहा नमस्कार आपकी बुद्धि को नमस्कार...बारंबार नमसकार  

Saturday, 3 May 2014

धूल उड़ावे धुरिया झारे, पाथर जीवै जान....... ?

जीजी को मोदी जी ने 'बेटी' कहा तो जीजी को बिलकुल अच्छा नहीं लगा। कॉंग्रेस मे कोई किसी का पुत्र, पुत्री, भाई, बहन, माता के रिश्ते नहीं बनते। ये कोंग्रेसी संस्कृति है जिसका नमूना आए दिन बुजुर्ग खाँटी भाई कोंग्रेसी लोग पेश करते जा रहे हैं। अब शहजादे के घोषित गुरु दिग्गी राजा को जरा लोक - लाज की दुहाई देंगे तो क्या होगा ? बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि दिग्गी राजा आपका मुंह नोच लेंगे ठीक उसी मूर्ख और पाजी बंदर की तरह जिसे किसी चिड़िया ने अपना घर बनाने को कहा तो बंदर न सिर्फ उसका घोसला नोच कर फेंक डाला बल्कि उस चिड़िया और उसके बच्चों को भी खा लिया। वैसे भी काँग्रेस के जीवित आदर्शों पुरुषों( लिविंग लेजेंड जैसे ना॰ द॰ तिवारी आदि ) ने  पिता होने बिलकुल प्रमाणिक और वैज्ञानिक आयाम प्रदान किया जिसे "जैविक पिता" की संज्ञा दी गई है। एक खाँटी भाई कोंग्रेसी ललकार रहे थे "...प्रियंका जी ने मोदी को बहुत सही जवाब दिया है ..." मैंने पूछा "...तो क्या पूरी काँग्रेस 'ना॰ द॰ तिवारी प्रोविटी थ्योरी' पर स्थापित कर चुकी है ..." खाँटी भाई बोले "...हम बेहद वैज्ञानिक लोग हैं प्रमाणिकता मे विश्वास करते हैं ..." मैंने ज़ोर देकर पूछा "...किसी भी मान्यता और विश्वास पर भी नहीं...?" खाँटी भाई बोले "...विश्वास का प्रामाणिक आधार होना चाहिए ..." मैंने कहा "...इसीलिए मोदी जी की मान्यता को जीजी ने सिरे से खारिज कर दिया...!" खाँटी भाई बोले "...हाँ बिलकुल..." मैंने जिज्ञासावश पूछा "...मतलब ये है की जीजी को ना॰ द॰ तिवारी, शाहजादे के गुरु दिग्गी राजा, प्रमाणिक कानूनची मनु सिंघवी आदि जैसे मूर्धन्य कोंग्रेसियों की ही मान्यता पसंद है...!" खाँटी भाई बोले "...नेहरू ने ही भारत की खोज की थी, राजीव गांधी ने कम्प्युटर की, मनमोहन सिंह ने मोबाईल की लिहाजा हमे तो प्रामाणिक और वैज्ञानिक तो होना ही होगा ..." मेरा सर चकराने लगा था खोजकर्ताओं के नाम सुन कर मैंने पूछा  "...आपकी काफी डिमांड है चुनाव प्रचार मे...?" खाँटी भाई सीना चौड़ा करते हुए बोले "...हाँ वो चुनाव मे जीजी के साथ - साथ रहना पड़ता है न ..." मैंने कहा "...हाँ वो तो है लेकिन आप काफी थक गए हैं ..." खाँटी भाई ज़ोर देकर बोले "...अरे नहीं नहीं! हम बिलकुल तरोताजा हैं चुनाव प्रचार अलग चीज है मानसिक और शारीरिक शक्ति बिलकुल अलग ..." मैंने कहा "...नहीं आपके ज्ञान को देखकर लगा था खैर छोड़िए ..." मैंने आगे पूछा "...तो पूरी कॉंग्रेस ना॰ द॰ तिवारी के बाद सिर्फ 'जैविक पिता' के सिद्धान्त पर एक मत से कायम है ...?" खाँटी भाई बोले "... कॉंग्रेस की ये समृद्ध परंपरा ही नहीं संस्कृति भी रही है कि हम हमेशा सत्य का साथ देते हैं असत्य का नहीं ...मोदी जीजी के पिता कैसे हो सकते हैं ...?" मैंने आश्चर्य से कहा "...हाँ ! हो तो नहीं सकते लेकिन मान तो सकते ही हैं ..." खाँटी भाई अपना प्रचंड तर्क देते हुए बोले "...जो है ही नहीं उसे मानने की क्या जरूरत है ...? बोलिए " मेरे पास उनके तर्क का कोई जवाब नहीं था ... 

Thursday, 1 May 2014

मंतर मारे मरघट , बुढ़ऊ करे बियाह...

बनारस के चचा चिरौंजी बताते हुए पूछ रहे थे "...अबकी बार दिग्गी बहार, तो अजय राय का क्या विचार ...?" खाँटी भाई कोंग्रेसी लोग तो आपिए बन नहीं सकते कि पथराव कर देंगे अपने ही गार्जियन पर लिहाजा खाँटी भाई लोग के मुंह से लुआठी पानी बन के बहता जा रहा है जिसे कुछ लोग काँग्रेस की फितरत ही बताते हैं एन॰ डी॰ तिवारी से लेकर अभिषेक मनु सिंघवी तक बिना अपवाद लंबी फेरहिस्त है। लगे हाथ चचा चिरौंजी से एक अति दुर्लभ बनारसी खाँटी भाई से पिल पड़े पूछने लगे "...का गुरु वर पक्ष के हौ कि कन्या पक्ष के ...?" खाँटी भाई  काफी असहज हो गए कुछ बोलते ही नहीं बन रहा था वो अस्सी घाट से मणिकर्णिका घाट की ओर निहारने लगे तो फिर चचा चिरौंजी चुटकी लेते हुए बोले "...गुरु बारात  मणिकर्णिका घाट से हरिश्चंद्र घाट जाई कि हरिश्चंद्र घाट घाट से मणिकर्णिका घाट...?" खाँटी भाई अपने चेहरा छुपाते हुए बोले "...चचा हम नारी सशक्तिकरण के बारे में सोचत रहली ...?" चचा चिरौंजी चुटकी लेते हुए बोले "...दिग्गी राजा के मोदी के डर से ऊहे सशक्त नारी बचाई का ...?" खाँटी भाई लज्जा से बोले "...अब का कहीं चचा कुच्छू समझ ना आवत हौ ..." चिरौंजी चचा ने पूछा "...कब्बो दिल्ली के मेट्रो मे बाईठल हौ गुरु ...?" खाँटी भाई उत्तर देते हुए बोले "...काहें उहसे एहसे का मतलब ...?" चिरौंजी चचा बोले "...मेट्रो मे कुल निर्लज्ज कुवांर जोड़ा बाईठले असामाजिक हरकत करेलन और अगर उनके बगल कौनों शरीफ आदमी या औरत बाईठल हौ त उनके सुत्ते के बहाना बानवे के पड़ेला मारे लाज के ..." चिरौंजी चचा ने आगे सहमति लेने के लिए पूछा "...सुनतहौ गुरु ...?" खाँटी भाई ने सहमति दर्शाई तो फिर चचा चिरौंजी बोले "...मने निर्लज्ज कुवांर जोड़वन के कौनों शरम लाज नहीं लेकिन देखे वालन के मारे लाजन आँख मूदे के बहाना करे के पडत हौ दिल्ली मेट्रो मे..." खाँटी भाई ने पूछा "...तो चचा...?" चचा बोले "...तौ माने ई कि दिग्गी राजा उहे हाल काईले हवन ऊ मेट्रो के निलज्ज जोड़ा हौ और बाकी सब देखे वाले अब सबके मारे लाज सुत्ते के बहाना करे के पड़ी आँख मूदे के पड़ी...!" खाँटी भाई चिरौंजी चचा से आग्रह करते हुए बोले "...चचा अब चुप्प हो जा ..." चचा बोले "...एन॰ डी॰ तिवारी, अभिषेक मनु सिंघवी ऊपर से लेके नीचे तक तू केहू के तब चुप ना कराईला अब हमसे चुप्पी साधे के कहथौ...!" खाँटी भाई अपना बचाव करते हुए बोले "...अब हमरे हाथ मे त कुछ हौ ना चचा ..." चिरौंजी चचा चुटकी लेते हुए बोले "...अब त लगत हौ कि मय काँग्रेस पार्टी नारी सशक्ति मे व्यस्त हौ ..." खाँटी भाई बोले "...दिग्विजय सिंह के छोड़ दिहाल जाऔ त राहुल जी का पसंदीदा प्रोजेक्ट हौ ..." चचा चिरौंजी कटाक्ष करते हुए बोले "...इसलिए बुढ़वन के भी युवा जोश चढ़ गईल हौ ..." ये सुन कर खाँटी भाई कोंग्रेसी वहाँ से जाने लगे...

Tuesday, 29 April 2014

'बानर' फाड़े 'बैनर' ममता बोले कांव...

कितने ही लोग ऐसे हैं जो जिस थाली मे खाते हैं उसी मे छेद करने से बाज नहीं आते, काँग्रेस कुमार केजरीवाल  भी उसके अपवाद नहीं है। वो बिलकुल अलग तरह की राजनीति करने का दावा करते हैं ईमानदारी के साथ भ्रष्टाचार करते हैं, दुराचार करते हैं आदि आदि ठीक उसी तर्ज पर 'वर्दी वाला गुंडा' जिससे वेद प्रकाश शर्मा मशहूर हो गए जो शायद किसी भ्रष्ट नेता के लिए भी उतना संभव न हो। खैर राजनीति बदल ही नही रही है गुलटिया भी मार रही है। बदलते राजनीति के दौर में एक बात बड़ी मौलिक हैं कुछ तो ऐसे भी हैं जो जिस बैनर के तले रहते हैं उसके प्रति थोड़ी ममता भी दिखाने के बजाय उसी 'बैनर' को फाड़ने पर उतारू हो जाते हैं इसमे गुलटिया वाला तथ्य भी जोड़ देते हैं दूसरों को कसाई बता कर। दीदी की ये दादागिरी कई मायनों 'बहनजी' जी बहकाऊ (बहक आऊ = कृपया एक ही में पढ़ें ) नीति से मेल भी खाती है। खैर अभी तो सब कुछ प्रक्रिया मे ही है लेकिन 'बैनर' फाड़ने के अपने अंदाज का उनका जबर्दस्त प्रगतिकरण है जो इस आशंका में बहुत अधिक सक्रिय हो गया है कि इस सुनामी में खुद उनका ही बैनर खतरे में है। जिसे उनके एक मशहूर दुश्मन जो मोदी को भी अपना दुश्मन मानते हैं हाल मे कह डाला "...अब मोदी और भाजपा को रोक पाना असंभव है ..." यही सुनते ही ममता जी अपने बैनर की लज्जा बचाने के लिए गुलटिया मारने लगीं। एक त्रिमूक्का नेता बता रहे थे "...दीदी का स्टैंड बिलकुल साफ है ..." तो मैंने तपाक से पूछा "...तो हर किसी का बैनर फाड़ डालने का माद्दा रखती हैं ...?" त्रिमूक्का नेता चीखते हुए बोले "... बंगाल के स्वाभिमान पर हम चोट नहीं होने देंगे ..." मैंने कहा "...दूसरे बंगाल के स्वाभिमानी नेता तो मोदी के नाम पर अपना गाल बाजा रहे हैं ..." त्रिमूक्का नेता बोले "...उन लोगों की दुकान बंद हो चुकी है ..." मैंने पूछा "...'बानर' बिना 'जी' वाला अंदाज कैसे लाते हैं आप लोग..." त्रिमूक्का नेता बोले "... आपको गलतफहमी है ..." मैंने उत्सुकतावश पूछा "...कैसे 'बानरजी' से आप लोग उत्पात मचवा लेते हैं ...?" त्रिमूक्का नेता मंद-मंद मूस-काटे हुए बोले "...यही तो राज है हमारी सफलता का ..." मैंने फिर उसी अंदाज में पूछा "...तो क्या आप लोग उसी 'बानरजी' पर पुनः दांव लगाना चाहेगे ..." त्रिमूक्का नेता बोले "...हाँ - हाँ बिल्कुल..." मैंने कहा "...लेकिन अभी तो मोदी जी पार्टी यहाँ है ही नहीं ..." त्रिमूक्का नेता बोले "...लेकिन सहयोग जरूरी है ..." मैंने कहा "...जब आप उससे लड़ रहे हैं जो आपका विपक्ष ही नहीं है ..." त्रिमूक्का नेता बोले "...आप घबराईए बिल्कुल मत कुछ जीतेंगे..." मैंने फिर पूछा "...हवा में तलवारबाजी करने से कहीं आपका आपका ही 'बैनर' फट गया और ममता गायब हो गई तो ...?"  त्रिमूक्का नेता उत्तर देते हुए बोले "...इसी हमलोग लोगों को सावधान कर रहे हैं ..." मैंने चुटकी लेते हुए कहा "....लेकिन मोदी तो चैन के विश्राम के साथ विकास की बात कर रहे हैं ..." उसी सामय 'बैनर' के साथ 'बानरों' की फौज भी आ गई जिसमे कोई ममता नहीं थी ...

Monday, 28 April 2014

ये चीलम है अलबेला, पीए गुरु मस्त रहे चेला ...

आखिर जीजी ने चीलम फूँक ही दिया दिया क्या करे बेचारी, जीजा जो पहले अलकतरा लिए बड़े शान से घूमते थे जहां मौका मिला निकाला अलकतरा और चिपका लिया जितना चाहा उतना। एक बिलायती  अखबार जिसके बारे मे लोगबाग बताते हैं उसकी बिल्ली जैसी आँखें हैं लिहाजा कोई भी 'चूहा' अलकतराबाजी करके यूं ही नहीं निकल सकता। फिर तो अखबार ने जीजाजी के लेखाजोखा का आंखो देखा हाल छाप डाला। जीजाजी ने भी बहुत अवसर बनाया खूब बनाया। बिल्लौरी आँखों वाला अखबार बताता है कि कोई यही 300 करोड़ मात्र 5 साल मे मात्र 1 लाख से बनाया जीजा जी ने। जब इसका धुआँ उठने लगा तो उसे दबाने के लिए जीजी ने चीलम फूँक दिया। एक खाँटी भाई कोंग्रेसी चीखते हुए दावा जता रहे थे "...कोई लहर नहीं है ..." मैंने प्रतिप्रश्न मे कहा "...किसने लहर की बात की ..." खाँटी भाई खुश हो गए बोले "...यही तो कोई लहर-वहर नहीं है ..." मैंने प्रतिप्रश्न मे कहा "...लहर नहीं है तो चिल्ला क्यों रहे हैं...?" खाँटी भाई बोले "... मैं नहीं विपक्ष के लोग चिल्ला रहे हैं ..." मैंने कहा "...तूफान आता है सजीव की तो छोड़िए निर्जीव चीजें भी ज़ोर-ज़ोर से आवाज करने लगती हैं..." खाँटी भाई गुस्से मे आ गए बोले "...आपका मतलब क्या है ...?" मैंने उत्तर देते हुए कहा "...जो तूफान को नहीं मानते उनको बड़ी तेज चोट लगती है ..." खाँटी भाई थोड़ा तैश मे बोले "...हम इस तूफान को रोक देंगे ..." मैंने चुटकी लेते हुए कहा "...तो क्या इसीलिए जीजी ने चीलम फूँक दिया ..." खाँटी बही बोले "...मैं फिर कह रहा हूँ कोई लहर नहीं है ..." मैंने कहा "...लेकिन जीजाजी का धुआँ तो है ही ..." खाँटी बही बोले "...आपको जो धुआँ -धुआँ दिख रहा है वो दरअसल हमारा प्रभाव है ..." मैंने उसी अंदाज मे कहा "...जब आपका प्रभाव है तो जीजी ने चीलम क्यों फूँक दिया ...." खाँटी भाई बोले "...हमारे काम करने की अपनी शैली है ..." मैंने उनसे पूछा "...तो क्या जीजी के चीलम से जीजाजी के  धुएं की दुर्गंध दाब जाएगी ...?" खाँटी भाई फिर चीखते हुए बोले "...हम मोदी की लहर को रोक देंगे ..." मैंने उन्हें टोकते हुए कहा "...कोई भी जानवर चाहे कितना भी पालतू क्यों न हो बैक गियर मे नहीं चलता ..." खाँटी भाई धमकी देते हुए बोले "...अगर मोदी प्रधानमंत्री बन गए तो देश जल उठेगा ..." मैंने फिर चुटकी लेते हुए पूछा "...क्या जीजी के चीलम में इतना दम है ...?" खाँटी भाई और तैश में बोले "....सारे अखबार वाले बिके हुए हैं, मीडिया को खरीद लिया गया है सब झूठ बोल रहे हैं ..." मैंने कहा "...जीजी से बोल दीजिये चीलम का धुआँ उधर भी फिरा दें ..." खाँटी भाई उसी धमकी वाले अंदाज में कहा "... सरकार काँग्रेस की ही बनेगी चाहे कुछ भी हो जाए आप देखिएगा ..." मैंने कहा "...लगता है जीजी के चीलम का असर खाँटी भाई कोंग्रेसियों पर हो रहा है ..." खाँटी भाई बोले "...देखिये जीजाजी ने कोई गलत काम नहीं किया ..." मैंने कहा "...बिलायती अखबार की बिल्लौरी काँखों से कोई भी चूहा बच नहीं सकता ...लिहाजा जीजी के चीलम का ही सहारा बचा है ...!" खाँटी भाई कोंग्रेसी केजरीवाल को फोन लगाने लगे तो मुझे वहाँ निकलना पड़ा...

Sunday, 13 April 2014

अतिबुद्धिजीवी और उनके जैसे लोग चीख-चीख कहते फिर रहे हैं "... मोदी की लहर नहीं है...कोई बताए कहाँ है मोदी की लहर ..." मैंने उनसे पूछा "...आप इतने चिल्ला क्यों रहे हैं ..." बुद्धिजीवी बोले "...नहीं जहां देखिये मोदी की लहर मोदी की लहर ...मैं पूछता हूँ कहाँ है लहर... " मैंने बुद्धिजीवी को समझते हुए कहा "...लहर है तभी तो आप इंकार कर रहे हैं ...नहीं क्या जरूरत थी इंकार करने की ..." बुद्धिजीवी जी की बुद्धि जवाब देने लगी बोले "...आप लोगों झूठ-मूठ मे हवा बना रखी है ... वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं है ..." मैंने कहा "...ऐसा कुछ नहीं है तो फिर क्या बात है ..आप क्यों इतना चिल्लपों मचाए हुए हैं ...."  बुद्धिजीवी जी बोले "...किसी अच्छे नेता की चर्चा नहीं हो रही है सारे मीडिया वाले बिक चुके हैं..." मैंने पूछा "...कौन से अच्छे नेता की चर्चा नहीं हो रही ...अभषेक मनु सिंघवी की चर्चा नहीं हो रही, एन॰डी॰ तिवारी की चर्चा नहीं हो रही, क्या राहुल बाबा चर्चे में नहीं है ...अब मुलाम सींग आदो भी जानबूझ कर कूद गए बिना किसी गलती के ...सबकी तो चर्चा तो रही है ..." बुद्धिजीवी थोड़ा चिढ़ गए बोले "...क्या मज़ाक है ..." मैंने कहा "...आपका कहना बिलकुल सही है, आपके हिसाब से जब लहर नहीं है तो ऐसे नेताओं की चर्चा मज़ाक ही तो है ..." बुद्धिजीवी ने पलट कर मुझसे पूछा "...क्या मतलब है तुम्हारे कहने है ..." मैंने कहा "...सीधा मतलब है लहर की आवाज में आपकी आवाज कोई कैसे सुनेगा..."    

Thursday, 10 April 2014

बिसुकत भैंस लटकत जान ...

खान साहब की बिसुकती भैंसें जब दूध देना बंद करने लगीं तो डांडा बरसाने लगे भैंसों पर, इससे भैंसें और नाराज हो गईं। भैंसों की नाराजगी के साथ-साथ मोदी नाम के भूत के डर का आलम ये था कि बड़े-बड़े उघटापैची करने वालों ने भी खान साहब का आपा बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे । लेकिन खान साहब की भैंसे कारगिल जैसी जगह में शानदार दूध देती है ये दिव्य ज्ञान उनको कैसे अचानक मिल गया ये अभी भी रहस्य ही है। एक सांपिया बता रहे कि सेकुलरिज़्म के बुर्के का कमाल है ये सब। ये बुर्का बड़े कमाल की चीज है बड़े - बड़े बलात्कारियों को भी मंत्री बनाने का माद्दा रखती है फिर क्या मजाल है भैंसों की। खान साहब भी बहुत पहुंचे फकीर हैं बिसुकी भैंसों से भी दूध बुर्का ओढ़ाकर दूह लेने का माद्दा रखते हैं। लेकिन वो इस बार भैंसों को कारगिल और द्रास जैसी जगह पर ले जाकर बुर्का ओढ़ाने की योजना है उनकी। वैसे इस बारे में किसी घोड़ा-डाक्टर ने बताया कि भैंसों का मूड चेंज करने के लिए कुछ तूफानी करना चाहिए। तो खान साहब को पता चला कि तूफानी तो कोई और करके जेल की हवा खा चुका है चुनावी दारोगा ने तूफानी करने वाले को मय जिंदा बोटी-बोटी सहित जेल मे डाल दिया था। लेकिन मजबूरी ये है कि खान साहब को भैंसो के लिए पहलवानी का डंका उसी के खिलाफ बजाना पड़ रहा है जिससे उनको बेपनाह मोहब्बत है और दोनों मिल कर भैंस की सवारी करते रहते हैं। इसी सवारी करने के चक्कर में तो कितनी भैंसें बिलकुल मरियल हो गईं दूध देना तो कबका बंद कर दिया लिहाजा उनको "पिंक रिवोलूशन" के लिए बूचड़खाना भेजने के बजाय कारगिल भेजना ज्यादा मुफीद और कारगर लग रहा है। बड़े - बड़े नाजायज कसीदे पढे जा रहे हैं लेकिन भैंसे हैं कि भैंसत्व छोडने का नाम ही नहीं ले रहीं, लिहाजा उसी के निमित्त आधिकारिक बयान जारी करना पड़ा जिसका सीधा मतलब यही था कि कोई भी बलात्कारी को जेल नहीं भेजा जाएगा लिहाजा भैंसों को भी तैयार रहना चाहिए। सांपियों के समझ में ही नहीं आ रहा है कि बचाव किसका करें बिसुकती भैंसों का, डांडा बरसाने वालों का, कारगिल का या फिर बलात्कारियों का। खैर एक सांपिया बता रहे थे "...देखिए हमारा स्टैंड बिलकुल साफ है कि नेता जी स्टैंड साफ कर दिया है ..." मुझे समझ में नहीं आया तो स्पष्ट करने का अनुरोध किया तो वे बोले "...हमारे सहयोग के बिना सरकार नहीं बनेगी ..." मुझे उनके उत्तर पर बहुत आश्चर्य हुआ फिर भी मैंने उनसे पूछा "...बिसुकती भैंसों का क्या होगा ...?" सापिए बोले "...हम कोशिश करेंगे कि वो अपना काम करें ..." मैंने कहा "...यानी अब भैंसों को आपकी चिंता बिल्कुल छोड़ देनी चाहिए ..." इस पर सांपिए सकते में आ गए और तिलमिला कर बोले "...हमने ही सब कुछ किया है वो जो भी हैं हमारी ही बदौलत हैं ..." मैंने बीच में ही बात काटते हुए पूछा "...लेकिन अब बदौलत का प्रश्न किधर है ...?"  वो कुछ बोल नहीं रहे थे ...कुछ भी नहीं बोल रहे थे ... 

Tuesday, 8 April 2014

बजावे जूता अपने हि गाल, देखि गदहवा हुआ निहाल ...

नरेन्द्र भाई मोदी का ऐसा डर कि काँग्रेस कुमार केजरीवाल समुद्र मंथन करवाने लगे।  जब उन्होने इसकी वाराणसी में घोषणा की थी तभी ये शंका हुई थी कि इस घोर कलियुग में शेषनाग कहाँ से लेके आएंगे? लेकिन कमाल देखिये एक कुटिल खाँटी भाई कांग्रेसी का गोवा के जेल में बंद भांजा जेल से ही कोबारा की व्यवस्था करवा दिया और समुद्र मंथन चालू हो गया और दस दिन के बाद मय काँग्रेस आपिए मंथन के बाद निकले जहर को छिड़कने निकल पड़े। कोई बता रहा था कि मंथन के लिए समुद्र भी तैयार नहीं हुआ था लिहाजा गटर में ही वह सब करना पड़ा जिसके छींटे केजरीवाल और अन्य आपियों पर समय-समय पड़ते रहते हैं जिसे स्याही, सड़ा अंडा, सड़ा टमाटर और न जाने क्या - क्या कहा जाता है। खैर एक आपिया बता रहा था कि समुद्र सॉरी गटर - मंथन में उसका और उसके जैसे लोगों का जम कर इस्तेमाल काँग्रेस कुमार केजरीवाल ने किया उसी का नतीजा है कि बहुत से आपियों में खून की खतरनाक कमी देखी जा रही है। ऐसे में गुस्सा तो वाजिब है अब वही आपिए काँग्रेस कुमार केजरीवाल को थूरने पर उतारू हैं जहां भी मौका मिलता हैं लात-घूंसा बरसाना शुरू कर देते हैं। मैंने एक आपिए से इस बारे में पूछा तो बताने लगा "...ये सब साजिश है ..." मैंने कहा "...जब गदहा अपनी पीठ पर से कपड़े का गट्ठर गिराएगा तो धोबी तो डांडा बरसाएगा ही ..इसमे साजिश वाली बात कहाँ से आ गई ...?"  आपिया थोड़ा ऊंची आवाज में बोला "...देखिये काँग्रेस और भाजपा दोनों बौखला गए हैं इसलिए ..." मैंने उत्तर देते हुए कहा "...गधे को धोबी का सम्मान करना आना चाहिए ..." आपिया बोला "...सब के सब चोर हैं भ्रष्ट हैं ..." मैंने आराम से शांति से उत्तर देते हुए कहा "...गीता में भगवान कृष्ण ने कहा है हर जीव अपनी करनी का फल भोग रहा है ..." आपिया और गुस्से में आ गया बोला "...केजरीवाल का क्या दोष है ...?" मैंने कहा "...चंदा उगलवाने के लिए ये सब नौटंकी है..." आपिया उसी गुस्से में बोला "...तो क्या केजरीवाल पैसा लेने के लिए ये सब कर रहे हैं ...?" मैंने कहा "...आंकड़े तो यही कहते हैं जब-जब वो अपना जूता अपने गाल पर मारते हैं चंदे की रकम बढ़ जाती है ..." आपिया और गुस्से में आ गया बोला "...वो ऐसा नहीं कर सकते ..." मैंने कहा "...काहे नहीं कर सकते ...?" आपिया बोला "...वो आईआईटी से बी टेक हैं आईआरएस कमिश्नर रहे हैं ..." मैंने कहा "...इसीलिए तो कर रहे हैं ..कांग्रेसी कोबारा के सहयोग से गटर-मंथन करवाने के बाद अपने जूते से अपना गाल बजाना ये काँग्रेस कुमार केजरीवाल की ही फितरत हो सकती है ..." आपिया अपना आपा खोने लगा था और लोगों को दनादन एसएमएस करने लगा और बहुत से लोग जब पत्थर ले कर जमा होने लगे तो मुझे वहाँ से भाग लेना बेहतर लगा ...        

Wednesday, 2 April 2014

मय चांपे हड्डी चाकर, भाईंस दधीचि बीन ?

दुःशासन बाबू अपनी भैंस की फोटो गाहे - बगाहे ये कह कर दिखते रहते रहे हैं कि देखिये हमारी भैंस भूखी है इसको खान चाहिए, इसपर किसी ने कहा था कि इसके लिए भैंस का एक्सरे लेकर चलने की क्या जरूरत है। लेकिन मोदी जी के प्रचंड करिश्माई जादू ने जब अपना असर दिखाया तो दुःशासन बाबू ने भैंस का एक्सरे दिखाना बंद कर दिया और अब चीख - चीख कह रहे हैं "...अब चाहे कुछ भी हो जाए हम भैंस को खाने नहीं देंगे ही नहीं ..." न जाने क्यों दुःशासन बाबू अपने सटकल दिमाग से ये सोचते हैं कि उनकी भैंस के लिए भटकल जैसे लोग ही पर्याप्त हैं। खैर वो अपने गोरू ब्रांड गुरु लालू प्रसाद से पता नहीं कौन सा गुरु-प्रसाद लिया था कि उनके खुद के मुजाहिद्दीनों ने उनका ही दाना-पानी सर पर उठा कर अपने तीरंदाजी करना शुरू किया तो वे आग-बबूला हो गए नरेन्द्र भाई मोदी पर। उनके आग-बबूलेपन पर एक जदयू नेता बोल रहे थे "...हम कुछ नहीं लेंगे कुछ लेबे नहीं करेंगे ...मोदी देंगे तब्बो कुछ नहीं लेंगे ..." मैंने कहा "...आपको कौन कुछ दे ही रहा है ...?" जदयू नेता बोले "...हमने अपनी संभावनाएं खुली रखी हैं ..." इस पर मैंने पूछा "...तो क्या आपकी भैंस की भूख मुजाहिद्दीन मिटाएँगे ...?" जदयू नेता थोड़ा भड़क गए और बोले "...ये बिहार के मानस पुत्र और मानस पुत्रियों का  अपमान है ..." मैंने भी कड़े आवाज में कहा "...सारे बिहार को मुजाहिद्दीन के भरोसे छोडना अपमान नहीं है ...?" जदयू नेता चीखते हुए बोले "... लेकिन हम किसी भी कीमत पर मोदी के भरोसे नहीं छोड़ेंगे ..." मैंने उसी टोन में पूछा "...किसी भी कीमत का क्या अर्थ है ...?" जदयू नेता बोले "...आप देखिये बिहार के लोग बहुत महान हैं त्याग करने में पीछे नहीं रहते ..." मैंने कहा "...तो सिर्फ लालू और दुःशासन बाबू जैसे लोगों की सुविधा के लिए बिहार के लोगों को मुजाहिद्दीनों को अपना सिर सौंप देना चाहिए त्याग के नाम पर ...?" जदयू नेता सकपकाते हुए बोले "...आपको तो बिहार का विकास दिखाता नहीं ..." मैंने कहा "...दुःशासन बाबू तो बिहार का चीरहरण करके ही विकास करना चाहते हैं और वही कर रहे हैं ..." जदयू नेता बोले "...लालू से तो ठीके है ..." मैंने कहा "...हाँ वो तो हालत ऐसी थी कि सवाल खड़ा हो गया ..." जदयू नेता ने पूछा "...कैसा सवाल ...?" मैंने उत्तर देते हुए कहा "...कि भैंसों का भी चीरहरण कैसे हो ...?" जदयू नेता ने उल्टे मुझसे पूछा "...इसका क्या मतलब ..." मैंने सपाट उत्तर देते हुए कहा "...अरे भाई जबतक चीरहरण करेंगे नहीं बिहार का विकास कैसे होगा ..." जदयू नेता बोले "...सब होगा और ठीक से होगा आप बस देखते रहिए ..." मैंने कहा "...हाँ जब आप लोग खुद ही मुजाहिद्दीनो से अपनी भैंस को सानी चलवा रहे हैं तो ठीके होना चाहिए ..."  जदयू नेता किसी के मिस्डकॉल का इंतजार करने लगे तो मैंने विदा ले लिया।