बानर चान्स और बनाना जर्नलिज़्म
म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) मे एक लोकोक्ति है Once is chance, Twice is coincident, Third time is Pattern मीडिया वाले जिस तरह काँग्रेस कुमार केजरीवाल के "चांस" पर डोमकच "डांस" करते फिर रहे हैं उससे तो यही लगता है केजरीवाल को समाप्त करने के लिए मोदी जी समर्थकों को ज्यादा मेहनत शायद ही करनी पड़े। बड़े - बड़े "नाई - खलनाई" फिल्म के ट्रेलर चलाए जा रहे न्यूज़ चैनलों पर ... मैंने एक "सुपारी पत्रकार" से इस बारे मे पूछा तो कहने लगे "...हम नायक को दिखा रहे हैं ..." मैंने पलट कर पूछा " ... वो नायक है या नाई ...?" पत्रकार खुद को बहुत बड़ा ज्ञानी दर्शाते हुए कहा "...आपको शायद नायक का अर्थ नहीं पता ..." मैंने कहा "... जिसे खलनाई को आप नाई के रूप मे दिखाना चाहते हैं वो दरअसल नाई भी नहीं है ..." ज्ञानी पत्रकार भड़क कर पूछे " ... आपके कहने का मतलब क्या है ..." मैंने आराम से उत्तर देते हुए कहा "...मेरे कहने का मतलब है जैसे आप अपने चैनल मे हैं वैसे काँग्रेस कुमार केजरीवाल राजनीति मे हैं ..." ज्ञानी छाप सुपारी पत्रकार को फिर भी समझ मे नहीं आया पूछा "... मैं अभी भी समझा नहीं ..." मैंने उन्हें समझाते हुए कहा "...जैसे आप किसी काम के नहीं हुए तो पत्रकार बन गए ... ठीक वैसे भी नहीं उससे भी गए गुजरे ..." ज्ञानी छाप सुपारी पत्रकार को गुस्सा आने लगा था बोले "...आप सपष्ट कीजिये ..." मैंने स्पष्ट करते हुए कहा "...मैंने शुरू मे कहा जिसे आप खलनाई को नाई के रूप मे दिखा रहे हैं वो नाई भी नहीं है ..." ज्ञानी छाप सुपारी पत्रकार गुस्से मे बोले "... आगे बोलिए ...क्या है वो ...?" मैंने उत्तर देते हुए कहा "...निरा बंदर है वो जिसके हाथ मे उस्तारा है ..." ज्ञानी छाप सुपारी पत्रकार का गुस्सा कम नहीं हुआ था "....देखिये उसने राजनीति बादल दी ..." मैंने कहा "...उससे ज्यादा और बेहतर बदलाव गोरखपुर मे आशा देवी, जबलपुर मे शबनम मौसी, सागर मे शबनम बुआ और भोपाल मे भी ऐसे बदलाव हो चुके हैं ...इस बार दिल्ली की बारी थी ..." ज्ञानी छाप सुपारी पत्रकार बोले "...ये उनसे बेहतर है ..." मैंने सहमति जताते हुए कहा "... हाँ वो तो है कम से कम बंदर के हाथ मे उस्तरा है..." ज्ञानी छाप सुपारी पत्रकार बोले "...आपको राजनीति के बारे मे बहुत कुछ नहीं पता... " मैंने कहा "...हो सकता है लेकिन इतना जरूर पता है कि एक ही सन्दर्भ मे दो बार शपथ ग्रहण नहीं होता ..." ज्ञानी छाप सुपारी पत्रकार फिर कन्फ्युज हो गए और पूछा "...क्या मतलब ..." मैंने उत्तर देते हुए कहा "... एक बार बच्चों की शपथ दूसरी बार रामलीला मैदान ईश्वर की कसम दोनों का सन्दर्भ एक ही है ..." मैंने आगे जोड़ते हुए कहा "...अच्छा बदलाव है राजनीति मे ...वैसे भी भारत के इतिहास मे ऐसा पहली बार हुआ है ...." ज्ञानी छाप सुपारी पत्रकार सफाई देते हुए बोले "...रजनीति मे ये सब चलता है ..." मैंने आश्चर्य से कहा "...लेकिन वो तो सिखाने आए थे ...सफाई करने आए थे ?" ज्ञानी छाप सुपारी पत्रकार कुछ बोल नहीं रहे थे ... मैंने कहा "...बंदर कभी भी खुद को साबित नहीं करता हमेशा चान्स पर हाथ मारता है ठीक आपके खलनाई काँग्रेस कुमार केजरीवाल की तरह ..." ये कह कर मैंने सुपारी पत्रकार को नमस्कार कहा....
No comments:
Post a Comment