काँग्रेस कुमार केजरीवाल
कल यानी 28 दिसम्बर को काँग्रेस कुमार केजरीवाल रामलीला मैदान मे कसम खाने वाले हैं वैसे भी काँग्रेस कुमार केजरीवाल अभी कुछ दिन पहले ही बच्चों की "शपथ" लेते हुए कहा था कि सरकार बनाने के लिए वो न तो किसी का समर्थन लेंगे और न ही किसी को समर्थन देंगे। खैर एक "आपाई" मुझे बता रहे थे कि वो उनके अपने ही बच्चे थे तो मेरे भी सामने कॉंग्रेस कुमार केजरीवाल के "शपथ ग्रहण" पर विश्वास करने के अलावा कोई चारा नहीं था। "आपाई" बड़ा ही अपने गुमान मे थे बता रहे थे "...भारत के इतिहास मे ऐसा पहली बार हो रहा है..." मैंने कहा "... हाँ वो तो है कोई बच्चों की शपथ लेने के बाद कसम खाने रामलीला मैदान मे आने वाले हैं ..." आपाई थोड़ा गुस्से मे बोले "...देखिये आप हर बात मे नुक्ता चीनी न करें ..." मैंने उल्टे सवाल दागते हुए कहा "... भले ही आप भूँकता - भेली करते फिरें ...!!!" आपाई बोले "...आपको मालूम हमने राजनीति को बदल कर रख दिया..." मैंने पलट कर पूछा " ... फिलहाल तो शपथ मे ही अदला - बदली हो रही हैं लोग बाग समझ ही नहीं पा रहे हैं टूट क्या रहा है..." आपाई बोले "... पहली बार किसी ने सरकारी सुरक्षा और बंगला लेने से इंकार किया है ..." मैंने पलट कर पूछा "...तो इसके लिए इतना भूँकता-भेली करने क्या जरूरत है ..." आपाई बोले " ...क्यों नहीं आखिर हम लोग यहाँ लोगों को राजनीति सीखाने आए हैं ..." मैंने पलट कर पूछा " ... तो इसके लिए चीखने की क्या जरूरत है ...?" आपाई बोले "... डेमोक्रेसी है ..." मैंने कहा "... आप लोगो ने तो डेमोक्रेसी को बिलकुल डोमोक्रेसी बना के रख दिया है ..." आपाई अपना आपा खोने लगे और पूछा "...आपके कहने का मतलब क्या है ..." मैंने शांति से उत्तर देते हुए कहा "... मेरे कहने का मतलब वही है जो आपके समझ आ रहा है ... चारो ओर डेमोक्रेसी के नाम पर डोमकच मचा रखा है...." आपाई का गुस्सा बढ़ने लगा बोले "... आपको ऐसा कहने का कोई हक नहीं..." मैंने उसी गुस्से मे पूछा "... क्यों भाई ..." आपाई बोले "... आपके खिलाफ भी जांच करवा सकते हैं ..." मैंने पलट कर पूछा "...डी॰ कोली जी भी कसम खाने वाले थे क्या ..." आपाई बोले " ... मैं समझा नहीं ..." मैंने कहा "...जैसे बिन्नी का शपथ टूटा डी॰ कोली का भी शपथ टूटना चाहिए ..." आपाई ने आश्चर्य जताते हुए पूछा "... वो क्यों भला ..." मैंने उत्तर देते हुए कहा "... भाई डोमोक्रेसी मचा रही है आपने ... पूरी आपा डोमकच करने मे व्यस्त है ..." आपाई ने आपा खोते हुए मुझसे निवेदन किया "...आप साफ - साफ कहिए ..." मैंने स्पष्ट करते हुए कहा "... भाई साधारण सी बात है काँग्रेस के इशारे पर वही लोग बढ़िया डोमकच करते हैं जो शपथ - कसम को तोड़-मरोड़ कर वादाखिलाफी करने मे माहिर होते हैं ..." आपाई का दिमाग फिर भी आपे मे नहीं था बोले "... मैं अभी भी समझा नहीं ..." मैंने उत्तर देते हुए कहा "...डी॰ कोली ही कायदे का आम आदमी है ... कसम तो उसे लेना चाहिए है रामलीला मैदान मे ...!!!" आपाई को फिर भी शायद कुछ समझ मे नहीं आ रहा था ...वो धीरे-धीरे खिसकने लगे थे ....
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