स्टिंग सीडी, बहुत बड़ी गंदगी को छोटी गंदगी से ढकने की कोशिश
केजरीवाल कितना बड़ा फर्जीवाड़ा कर सकते हैं इसे समझने के लिए दिमाग को थोड़ा उलटा करना पड़ता है फिर "आप" की गंदी और फर्जी दुनियाँ का वास्तविक स्वरूप और कायदे से दिखने लगता है। इतने बड़े - बड़े खुलासे होने के बावजूद कुछ खास मीडिया चैनलों पर उसका खबर न बनना अपने आप मे बहुत आश्चर्यजनक तो लग ही रहा है साथ ही उन खास चैनलों के महत्वपूर्ण पत्रकारों द्वारा केजरीवाल और "आप" का निहायत ही बेहूदे तरीके से बचाव करना भी खटक रहा है। इससे मुझे लगा कि इसकी भी थोड़ी छान-बीन करनी चाहिए वैसे तो ये पहले से ही विदित है कि मुख्य धारा के तीन बड़े मीडिया समूह केजरीवाल और "आप" के समर्थन मे हैं उसमे से एक तो पूरी तरह से है। अभी तक किसी भी मीडिया समूह ने इस तथ्य को प्रकाश मे लाने जहमत नहीं उठाई है कि वास्तव मे केजरीवाल और "आप" के पीछे का वो वास्तविक सच क्या है कि अन्ना को अचानक केजरीवाल को चिट्ठी लिख कर उनसे पूछ - ताछ करनी पड़ी। सभी मीडिया समूहों ने अपना रंग ठीक उसी अंदाज मे बादल लिया जिस अंदाज मे केजरीवाल एंड कम्पनी चाहती थी।
जरा याद कीजिये 17 नवंबर की तारीख जब अन्ना ने दूसरी बार अरविंद केजरीवाल को पत्र लिख कर उनसे चंदे का हिसाब मांगा था जिससे पूरी की पूरी "आप" और केजरीवाल भड़क गए थे और केजरीवाल को सफाई देना पड़ी थी प्रेस कान्फ्रेंस कर के । वैसे अन्ना उनकी सफाई से थोड़ा भी संतुष्ट नहीं थे फिर उनसे जबरदस्ती केजरीवाल के समर्थन मे बयान दिलवाया गया था जो दूसरे दिन सुबह आया था। खैर ये सब याद दिलाना इसलिए आवश्यक है कि एक तो थोड़ी याद ताजा हो जाए दूसरे इन घटनाक्रमों के सामयिकी के संदर्भ मे मानसिकता के लिए पृष्ठभूमि तैयार हो जाए। अन्ना ने दो चिट्ठियाँ केजरीवाल को लिखीं थे दूसरी "पाकिस्तान के इस्लामिस्ट" से हो रहे फंडिंग के बारे मे थी जो बेहद गंभीर मामला हो सकता था खास राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ मे लेकिन ये खबर किसी भी मीडिया पर बिल्कुल ही नहीं चली और इसे दबा दिया गया। आप ये तय मानिए यदि अन्ना की दोनों चिट्ठियाँ और सीडी नहीं आई होती तो स्टिंग ऑपरेशन का ये खुलासा बिल्कुल ही नहीं होता।
एक बात तो तय है कि अन्ना केजरीवाल और "आप" के लिए किसी प्राधिकरण से कम नहीं हैं लिहाजा उनका समर्थन और विरोध "आप" के लिए बहुत मायने रखता है। जब दूसरे दिन 19 नवम्बर को अन्ना ने वो सीडी जारी की जो सीधे - सीधे केजरीवाल एंड कंपनी पर सीधा हमला था और केजरीवाल एंड कम्पनी उससे बहुत आहत भी थी। दरअसल उस सीडी ने केजरीवाल एंड कंपनी की पोल सिरे से खोल के रख दी थी जो "आप" और केजरीवाल के लिए बहुत बड़ा झटका था "आम आदमी पार्टी" के सारे के सारे पदाधिकारी सकते मे थे। ऊपर कोढ़ मे खाज ये कि "आप" के वेतनभोगी कर्मचारियों ने अन्ना खिलाफ सोशल मीडिया पर ऐसा मोर्चा खोला और ऐसी भद्दगी की कि अन्ना से समझौते और वापसी की सारी संभावनाएँ समाप्त हो गईं। इस नई मुसीबत का ठोस उपाय करना बहुत जरूरी था।
केजरीवाल और उनकी टीम ने कांटे को कांटे से निकालने का प्रयास किया। सूत्रों से ऐसी खबर मिली है कि इस स्टिंग ऑपरेशन की सीडी काँग्रेस ने खुद "आप" के खास पदाधिकारियों के सहयोग से ही बनवाई थी जिसका प्रमाण है अनुरंजन झा और डॉ कुमार विश्वास के बेहद करीबी रिश्ते जिसे खुद डॉक्टर साहब ने इसे स्वीकार भी किया है और अब जरा ध्यान दीजिये डॉ कुमार विश्वास के प्रति इस सीडी मे बहुत "सॉफ्ट स्टिंग" है। जिसे बड़ी आसानी से खुद उनके द्वारा ही मैनेज कर लिया गया और खुलासे के बाद केवल उन्होने ही टीवी पर बयान दिया, बाकी किसी ने भी नहीं। केजरीवाल सहित "आप" का कोई भी पदाधिकारी स्टिंग सीडी मे कहीं भी नहीं है। ये कहा जा रहा है कि ये ऑपरेशन नवंबर के पहले सप्ताह मे किया गया था। कुछ सूत्रों का ये भी कहना है कि उम्मीदवारों को काबू मे रखने के लिए उनकी सीडी बनवाई गई थी और सभी के खिलाफ ऐसे सुबूत हैं केजरीवाल के बयानों का जरा विश्लेषण कीजिये तो पता चल जाएगा। ये ठीक वही चाल है जैसा कि अन्ना के पूर्व ब्लॉगर राजू पारुलकर ने खुलासा किया था कि केजरीवाल के पास अन्ना के साथ नोकझोंक की सीडी है जिससे वो अन्ना को ब्लैकमेल करते हैं। लेकिन अन्ना के खुलासे की मजबूरी मे इस स्टिंग ऑपरेशन की सीडी को सार्वजनिक करना पड़ा।
अन्ना के के दोनों पत्र और सीडी बाद जिस तरह से "आप" के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा था उसे ढंकने के लिए उससे बहुत छोटे खतरे या यूं कहे कि "आप" की गंदगी को देश के सामने प्रस्तुत कर दिया गया ठीक दूसरे ही दिन ताकि नुकसान ज्यादा न हो मीडिया तो केजरीवाल और "आप" के पक्ष मे है ही इसी आधार पर इसे विरोधियों की चाल बताकर सहानुभूति बटोरी जाएगी। आप देखिये मीडिया मे वही हो रहा है और अन्ना का मुद्दा बिलकुल नेपथ्य मे है। आज तक किसी भी ऐसे मामले मे किसी भी सीडी का रॉ फुटेज नहीं मांगा गया था चाहे मामला कितना भी गंभीर क्यों न हो ऐसा पहली बार एक सोची-समझी साजिश के तहत ऐसा किया गया। फिर अनुरंजन झा से भी चुनाव आयोग ने तो रॉ फुटेज मांगा नहीं था उन्होने स्वेच्छा से दिया था क्यों ? यदि स्वेच्छा से चुनाव आयोग को दे सकते हैं तो उसी स्वेच्छा से "आप" को भी तो दे सकते थे ! ये सब सोची समझी चाल के तहत अन्ना वाले मुद्दे को दबाने के लिए किया गया खास कर पाकिस्तान से हो रहे फंडिंग के मामले को।
स्टिंग ऑपरेशन की सीडी के संदर्भ मे हुए दोनों प्रेस कांफ्रेंसों मे अरविंद केजरीवाल की अनुपस्थित रहना अपने आप मे बहुत रहस्यमयी था, आखिर उनकी पार्टी पर इतना बड़ा खतरा था और उनका ही नदारद रहना आश्चर्यजनक था। उस प्रेस कान्फ्रेंस मे काँग्रेस के दो सांसदों के भाईयों का उपस्थित रहना इस शक को विश्वास मे बादल देता है। दरअसल केजरीवाल सोची समझी चाल के तहत प्रेस कान्फ्रेंस मे नहीं आए थे उसके पीछे कारण ये था कि कहीं अन्ना के दोनों पत्रों और सीडी का मामला कहीं फिर से न उछल जाए और और सारे डैमेज कंट्रोल पर सिरे से पानी फिर जाए।
लेकिन "आप" के कुछ महत्वपूर्ण सूत्र बता रहे हैं कि ये चाल भी कहीं न कहीं से उल्टी पड़ती दिखाई दे रही है क्योंकि केजरीवाल के बारे मे कुछ और खुलासे अन्य माध्यमों से भी हो रहे हैं। जैसेकि वो कमिश्नर थे ही नहीं आदि आदि। इस सीडी मे कुछ - कुछ जगहों कठोर मुद्दों के आ जाने के कारण भी मुश्किलें बढ़ गईं हैं लेकिन ये तो तय है कि सीडी मे जो कुछ भी है वो बिलकुल सत्य है जिसे काँग्रेस के कुछ लोग, अनुरंजन झा और केजरीवाल ने शायद हलके मे लिया था। संभावना ये भी जताई जा रही है कि चुनाव के बाद अनुरंजन झा के खिलाफ मामले को वापस ले लिया जाएगा।
केजरीवाल कितना बड़ा फर्जीवाड़ा कर सकते हैं इसे समझने के लिए दिमाग को थोड़ा उलटा करना पड़ता है फिर "आप" की गंदी और फर्जी दुनियाँ का वास्तविक स्वरूप और कायदे से दिखने लगता है। इतने बड़े - बड़े खुलासे होने के बावजूद कुछ खास मीडिया चैनलों पर उसका खबर न बनना अपने आप मे बहुत आश्चर्यजनक तो लग ही रहा है साथ ही उन खास चैनलों के महत्वपूर्ण पत्रकारों द्वारा केजरीवाल और "आप" का निहायत ही बेहूदे तरीके से बचाव करना भी खटक रहा है। इससे मुझे लगा कि इसकी भी थोड़ी छान-बीन करनी चाहिए वैसे तो ये पहले से ही विदित है कि मुख्य धारा के तीन बड़े मीडिया समूह केजरीवाल और "आप" के समर्थन मे हैं उसमे से एक तो पूरी तरह से है। अभी तक किसी भी मीडिया समूह ने इस तथ्य को प्रकाश मे लाने जहमत नहीं उठाई है कि वास्तव मे केजरीवाल और "आप" के पीछे का वो वास्तविक सच क्या है कि अन्ना को अचानक केजरीवाल को चिट्ठी लिख कर उनसे पूछ - ताछ करनी पड़ी। सभी मीडिया समूहों ने अपना रंग ठीक उसी अंदाज मे बादल लिया जिस अंदाज मे केजरीवाल एंड कम्पनी चाहती थी।
जरा याद कीजिये 17 नवंबर की तारीख जब अन्ना ने दूसरी बार अरविंद केजरीवाल को पत्र लिख कर उनसे चंदे का हिसाब मांगा था जिससे पूरी की पूरी "आप" और केजरीवाल भड़क गए थे और केजरीवाल को सफाई देना पड़ी थी प्रेस कान्फ्रेंस कर के । वैसे अन्ना उनकी सफाई से थोड़ा भी संतुष्ट नहीं थे फिर उनसे जबरदस्ती केजरीवाल के समर्थन मे बयान दिलवाया गया था जो दूसरे दिन सुबह आया था। खैर ये सब याद दिलाना इसलिए आवश्यक है कि एक तो थोड़ी याद ताजा हो जाए दूसरे इन घटनाक्रमों के सामयिकी के संदर्भ मे मानसिकता के लिए पृष्ठभूमि तैयार हो जाए। अन्ना ने दो चिट्ठियाँ केजरीवाल को लिखीं थे दूसरी "पाकिस्तान के इस्लामिस्ट" से हो रहे फंडिंग के बारे मे थी जो बेहद गंभीर मामला हो सकता था खास राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ मे लेकिन ये खबर किसी भी मीडिया पर बिल्कुल ही नहीं चली और इसे दबा दिया गया। आप ये तय मानिए यदि अन्ना की दोनों चिट्ठियाँ और सीडी नहीं आई होती तो स्टिंग ऑपरेशन का ये खुलासा बिल्कुल ही नहीं होता।
एक बात तो तय है कि अन्ना केजरीवाल और "आप" के लिए किसी प्राधिकरण से कम नहीं हैं लिहाजा उनका समर्थन और विरोध "आप" के लिए बहुत मायने रखता है। जब दूसरे दिन 19 नवम्बर को अन्ना ने वो सीडी जारी की जो सीधे - सीधे केजरीवाल एंड कंपनी पर सीधा हमला था और केजरीवाल एंड कम्पनी उससे बहुत आहत भी थी। दरअसल उस सीडी ने केजरीवाल एंड कंपनी की पोल सिरे से खोल के रख दी थी जो "आप" और केजरीवाल के लिए बहुत बड़ा झटका था "आम आदमी पार्टी" के सारे के सारे पदाधिकारी सकते मे थे। ऊपर कोढ़ मे खाज ये कि "आप" के वेतनभोगी कर्मचारियों ने अन्ना खिलाफ सोशल मीडिया पर ऐसा मोर्चा खोला और ऐसी भद्दगी की कि अन्ना से समझौते और वापसी की सारी संभावनाएँ समाप्त हो गईं। इस नई मुसीबत का ठोस उपाय करना बहुत जरूरी था।
केजरीवाल और उनकी टीम ने कांटे को कांटे से निकालने का प्रयास किया। सूत्रों से ऐसी खबर मिली है कि इस स्टिंग ऑपरेशन की सीडी काँग्रेस ने खुद "आप" के खास पदाधिकारियों के सहयोग से ही बनवाई थी जिसका प्रमाण है अनुरंजन झा और डॉ कुमार विश्वास के बेहद करीबी रिश्ते जिसे खुद डॉक्टर साहब ने इसे स्वीकार भी किया है और अब जरा ध्यान दीजिये डॉ कुमार विश्वास के प्रति इस सीडी मे बहुत "सॉफ्ट स्टिंग" है। जिसे बड़ी आसानी से खुद उनके द्वारा ही मैनेज कर लिया गया और खुलासे के बाद केवल उन्होने ही टीवी पर बयान दिया, बाकी किसी ने भी नहीं। केजरीवाल सहित "आप" का कोई भी पदाधिकारी स्टिंग सीडी मे कहीं भी नहीं है। ये कहा जा रहा है कि ये ऑपरेशन नवंबर के पहले सप्ताह मे किया गया था। कुछ सूत्रों का ये भी कहना है कि उम्मीदवारों को काबू मे रखने के लिए उनकी सीडी बनवाई गई थी और सभी के खिलाफ ऐसे सुबूत हैं केजरीवाल के बयानों का जरा विश्लेषण कीजिये तो पता चल जाएगा। ये ठीक वही चाल है जैसा कि अन्ना के पूर्व ब्लॉगर राजू पारुलकर ने खुलासा किया था कि केजरीवाल के पास अन्ना के साथ नोकझोंक की सीडी है जिससे वो अन्ना को ब्लैकमेल करते हैं। लेकिन अन्ना के खुलासे की मजबूरी मे इस स्टिंग ऑपरेशन की सीडी को सार्वजनिक करना पड़ा।
अन्ना के के दोनों पत्र और सीडी बाद जिस तरह से "आप" के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा था उसे ढंकने के लिए उससे बहुत छोटे खतरे या यूं कहे कि "आप" की गंदगी को देश के सामने प्रस्तुत कर दिया गया ठीक दूसरे ही दिन ताकि नुकसान ज्यादा न हो मीडिया तो केजरीवाल और "आप" के पक्ष मे है ही इसी आधार पर इसे विरोधियों की चाल बताकर सहानुभूति बटोरी जाएगी। आप देखिये मीडिया मे वही हो रहा है और अन्ना का मुद्दा बिलकुल नेपथ्य मे है। आज तक किसी भी ऐसे मामले मे किसी भी सीडी का रॉ फुटेज नहीं मांगा गया था चाहे मामला कितना भी गंभीर क्यों न हो ऐसा पहली बार एक सोची-समझी साजिश के तहत ऐसा किया गया। फिर अनुरंजन झा से भी चुनाव आयोग ने तो रॉ फुटेज मांगा नहीं था उन्होने स्वेच्छा से दिया था क्यों ? यदि स्वेच्छा से चुनाव आयोग को दे सकते हैं तो उसी स्वेच्छा से "आप" को भी तो दे सकते थे ! ये सब सोची समझी चाल के तहत अन्ना वाले मुद्दे को दबाने के लिए किया गया खास कर पाकिस्तान से हो रहे फंडिंग के मामले को।
स्टिंग ऑपरेशन की सीडी के संदर्भ मे हुए दोनों प्रेस कांफ्रेंसों मे अरविंद केजरीवाल की अनुपस्थित रहना अपने आप मे बहुत रहस्यमयी था, आखिर उनकी पार्टी पर इतना बड़ा खतरा था और उनका ही नदारद रहना आश्चर्यजनक था। उस प्रेस कान्फ्रेंस मे काँग्रेस के दो सांसदों के भाईयों का उपस्थित रहना इस शक को विश्वास मे बादल देता है। दरअसल केजरीवाल सोची समझी चाल के तहत प्रेस कान्फ्रेंस मे नहीं आए थे उसके पीछे कारण ये था कि कहीं अन्ना के दोनों पत्रों और सीडी का मामला कहीं फिर से न उछल जाए और और सारे डैमेज कंट्रोल पर सिरे से पानी फिर जाए।
लेकिन "आप" के कुछ महत्वपूर्ण सूत्र बता रहे हैं कि ये चाल भी कहीं न कहीं से उल्टी पड़ती दिखाई दे रही है क्योंकि केजरीवाल के बारे मे कुछ और खुलासे अन्य माध्यमों से भी हो रहे हैं। जैसेकि वो कमिश्नर थे ही नहीं आदि आदि। इस सीडी मे कुछ - कुछ जगहों कठोर मुद्दों के आ जाने के कारण भी मुश्किलें बढ़ गईं हैं लेकिन ये तो तय है कि सीडी मे जो कुछ भी है वो बिलकुल सत्य है जिसे काँग्रेस के कुछ लोग, अनुरंजन झा और केजरीवाल ने शायद हलके मे लिया था। संभावना ये भी जताई जा रही है कि चुनाव के बाद अनुरंजन झा के खिलाफ मामले को वापस ले लिया जाएगा।
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