फर्जी का फर्ज, मर्जी का मर्ज फिर ...
मैंने उसी दिन, जिस दिन स्टिंग ऑपरेशन पर "आप" का पहला प्रेस कान्फ्रेंस हुआ था, कह दिया था चुनाव आयोग इस तरह के निर्णय कर ही नहीं सकता फिर भी उससे इस तरह के निर्णय की मांग करना जनता की आँखों मे धूल नहीं बल्कि मिर्ची झोंकने के समान था। वैसे उस प्रेस कान्फ्रेंस मे "काँग्रेस पार्टी" के दो सांसदों के भाई भी उपस्थित थे वो वहाँ पर किस लिए थे और क्या कर रहे थे ? ये एक ऐसा विदित रहस्य है जिस पर आसानी ये उम्मीद की जा सकती थी कि चुनाव आयोग का फैसला क्या होगा वो भी 48 घंटे के अंदर। "आम आदमी पार्टी" की उम्मीद के मुताबिक "आप" के पक्ष मे चुनाव आयोग ने अपना फैसला सुना दिया ये तो किसी को भी बहुत आश्चर्य नहीं हुआ। वैसे भी जब चुनाव आयोग ने "आप" के उम्मीदवारों का पर्चा खारिज ही नहीं किया तो फिर किस आधार पर वो फैसला सुना सकता है? जहां तक मेरी जानकारी है चुनाव आयोग न्यायाधिकरण संस्था है ही नहीं तो फिर उससे किसी निर्णय की मांग किस आधार पर किया गया ?
ध्यान दीजिये "आप" की ओर से कहा जा रहा है कि स्टिंग ऑपरेशन फर्जी है। ये बयान ही अपने आपमे फर्जी है क्योंकि ऑपरेशन तो हुआ ही है उसका विडियो भी सारे आम उपलब्ध है और उसे दिल्ली के ही नहीं बल्कि पूरे देश के करोड़ों लोगों ने देखा। तो करोड़ों लोगों का देखना भी फर्जी है क्या ? फर्जी कामों के लिए "आप" वैसे भी मशहूर हो चुकी है योगेंद्र यादव के नेतृत्व मे काँग्रेस के सहयोग से ही "आप" के पक्ष मे मशहूर फर्जी ओपेनियन पोल हो चुका है जिसकी पोल बड़ी आसानी से खुल गई, केजरीवाल कभी रेवेन्यू कमिश्नर थे ही नहीं फिर भी वो फर्जी बयान देते रहते हैं कि कि वो आईआरएस कमिश्नर थे और करोड़ों कमा सकते थे, लेकिन वो अपनी श्रीमती जी के ईमानदार कामों पर कोई बयान जारी नहीं करते, केजरीवाल जी फर्जी कमिश्नर होते हुए भी एक एनजीओ मे मे काम करते हुए 25000 रुपये मासिक का वेतन उठाया इस पर उनका कोई बयान नहीं आया। और भी बहुत कुछ है जिसपर उनको कुछ न कुछ तो कहना ही चाहिए फर्जी ही सही, साथ ही इस विषय पर भी कि तीन जगहों से मतदाता कैसे हैं ? क्या ये स्टिंग भी फर्जी ऑपरेशन है ?
परसों के नाच-गाने के समारोह मे "आप" के कर्मचारियों के बीच उनका उत्साहवर्धन करने के लिए डॉ कुमार विश्वास ने अपने कर्मचारियों को ये विश्वास दिलाते हुए कहा कि वो "आप" के "सांडक्य" हैं और उसी की भूमिका निभाते हैं पता नहीं वो किसको या किस वर्ग को ये विश्वास दिला रहे थे साथ ही उनका ये कथन कि वो पौरुषहीन नहीं हैं। खैर ये कितना फर्ज से जुड़ा मामला है ये पता नहीं चल पाया लेकिन ये जरूर पता चला कि "आप" मे "सांडक्यों" की पोस्ट भी है जिसके लिए अवसादी और मनोग्रस्त कविताओं का पाठ भी करना जरूरी है कम से कम इतनी योग्यता तो होनी ही चाहिए इस पद के लिए।
मैंने उसी दिन, जिस दिन स्टिंग ऑपरेशन पर "आप" का पहला प्रेस कान्फ्रेंस हुआ था, कह दिया था चुनाव आयोग इस तरह के निर्णय कर ही नहीं सकता फिर भी उससे इस तरह के निर्णय की मांग करना जनता की आँखों मे धूल नहीं बल्कि मिर्ची झोंकने के समान था। वैसे उस प्रेस कान्फ्रेंस मे "काँग्रेस पार्टी" के दो सांसदों के भाई भी उपस्थित थे वो वहाँ पर किस लिए थे और क्या कर रहे थे ? ये एक ऐसा विदित रहस्य है जिस पर आसानी ये उम्मीद की जा सकती थी कि चुनाव आयोग का फैसला क्या होगा वो भी 48 घंटे के अंदर। "आम आदमी पार्टी" की उम्मीद के मुताबिक "आप" के पक्ष मे चुनाव आयोग ने अपना फैसला सुना दिया ये तो किसी को भी बहुत आश्चर्य नहीं हुआ। वैसे भी जब चुनाव आयोग ने "आप" के उम्मीदवारों का पर्चा खारिज ही नहीं किया तो फिर किस आधार पर वो फैसला सुना सकता है? जहां तक मेरी जानकारी है चुनाव आयोग न्यायाधिकरण संस्था है ही नहीं तो फिर उससे किसी निर्णय की मांग किस आधार पर किया गया ?
ध्यान दीजिये "आप" की ओर से कहा जा रहा है कि स्टिंग ऑपरेशन फर्जी है। ये बयान ही अपने आपमे फर्जी है क्योंकि ऑपरेशन तो हुआ ही है उसका विडियो भी सारे आम उपलब्ध है और उसे दिल्ली के ही नहीं बल्कि पूरे देश के करोड़ों लोगों ने देखा। तो करोड़ों लोगों का देखना भी फर्जी है क्या ? फर्जी कामों के लिए "आप" वैसे भी मशहूर हो चुकी है योगेंद्र यादव के नेतृत्व मे काँग्रेस के सहयोग से ही "आप" के पक्ष मे मशहूर फर्जी ओपेनियन पोल हो चुका है जिसकी पोल बड़ी आसानी से खुल गई, केजरीवाल कभी रेवेन्यू कमिश्नर थे ही नहीं फिर भी वो फर्जी बयान देते रहते हैं कि कि वो आईआरएस कमिश्नर थे और करोड़ों कमा सकते थे, लेकिन वो अपनी श्रीमती जी के ईमानदार कामों पर कोई बयान जारी नहीं करते, केजरीवाल जी फर्जी कमिश्नर होते हुए भी एक एनजीओ मे मे काम करते हुए 25000 रुपये मासिक का वेतन उठाया इस पर उनका कोई बयान नहीं आया। और भी बहुत कुछ है जिसपर उनको कुछ न कुछ तो कहना ही चाहिए फर्जी ही सही, साथ ही इस विषय पर भी कि तीन जगहों से मतदाता कैसे हैं ? क्या ये स्टिंग भी फर्जी ऑपरेशन है ?
परसों के नाच-गाने के समारोह मे "आप" के कर्मचारियों के बीच उनका उत्साहवर्धन करने के लिए डॉ कुमार विश्वास ने अपने कर्मचारियों को ये विश्वास दिलाते हुए कहा कि वो "आप" के "सांडक्य" हैं और उसी की भूमिका निभाते हैं पता नहीं वो किसको या किस वर्ग को ये विश्वास दिला रहे थे साथ ही उनका ये कथन कि वो पौरुषहीन नहीं हैं। खैर ये कितना फर्ज से जुड़ा मामला है ये पता नहीं चल पाया लेकिन ये जरूर पता चला कि "आप" मे "सांडक्यों" की पोस्ट भी है जिसके लिए अवसादी और मनोग्रस्त कविताओं का पाठ भी करना जरूरी है कम से कम इतनी योग्यता तो होनी ही चाहिए इस पद के लिए।
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