पाँच प्रश्न और "आप"की पंचलकड़ी *
केजरीवाल एंड कंपनी और उनके "आप" के "पाप के भंडाफोड़" की शुरुआत उसी दिन से शुरू हो गई थी जब उन्होने पिछले महीने 23 अक्टूबर को डॉ राघवेंद्र कुमार ( https://www.facebook.com/Dr.Raghvendra.Kumar ) द्वारा पूछे गए 5 बेहद मौलिक, आसान किन्तु महत्वपूर्ण सवालों के जवाब देने से वो भागने लगे, उन पांचों प्रश्नो को डॉ राघवेंद्र कुमार ने उनकी वैबसाइट पर लोड पर तो किया ही था साथ ही "आम आदमी पार्टी" फ़ेसबुक अकाउंट पर भी शेयर किया था लेकिन उनके "आप" के फ़ेसबुक अकाउंट उन प्रश्नों को अनटैग कर दिया फिर भी उन सभी प्रश्नो को इस लिंक https://www.facebook.com/AamAadmiParty/posts/424336560999443?ef=notif¬if_t=like पर अभी भी देखा जा सकता है। उन पाँच प्रश्नो के कारण "आम आदमी पार्टी" मे खलबली सी मच गई थी। डॉ राघवेंद्र के वो पाँच प्रश्न ऐसे थे कि उसे फॉलो करने वालों को स्पष्ट लगने लगा कि कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ जरूर है फिर उसके बाद जिस प्रकार से लोग "आप" की हकीकत जानने के लिए आतुर हुए उसका नतीजा आज सबके सामने है। हालाँकि केजरीवाल एंड कंपनी ने अपने वेबबसाइट से उन सभी प्रश्नो को स्थिति बहुत ज्यादा खराब होने पर कुछ दिनो बाद डिलीट कर दिया, लेकिन नाम के मेनशन होने के कारण और उनके अब भी होने से ये साफ पता चलता है कि केजरीवाल से कुछ पूछा गया था। उसे इस लिंक पर देखा जा सकता है http://www.aamaadmiparty.org/page/PolKhol ।
इस घटना बाद तो जैसे प्रश्न पूछने का सिलसिला ही चल पड़ा खुद "आम आदमी पार्टी" के वैबसाइट पर बहुत से लोग सवाल पूछने लगे। मध्य प्रदेश और बिहार भाजपा ने भी राहुल गांधी और काँग्रेस से पाँच सवाल उसी तर्ज पर पूछ डाले और तो और उन प्रश्नो के प्रभाव को देखते हुए टीवी चैनल भी टीआरपी बढ़ाने के लिए 5 सवाल पूछने लगे। IBN 7 पर शाम के शाम के सामय प्रसारित होने वाला "बड़ा सवाल", कार्यक्रम इसका प्रमाण है। उन प्रश्नो के तेजी से वाइरल हो जाने का प्रभाव के कारण केजरीवाल एण्ड कंपनी की लोकप्रियता मे तेजी से गिरावट आई जिसके चलते कंपनी को साफ-साफ लगने लगा कि बचा-खुचा वोट बैंक भी बचाना बहुत जरूरी है लिहाजा वो बरेली तौकीर रजा से समर्थन तक मांगने जा पहुंचे।
अभी 27 नवंबर को एबीपी न्यूज़ और आजतक चैनल पर दिखाए गए ओपेनियन पोल के मुताबिक केजरीवाल की लोकप्रियता अच्छी ख़ासी घटी। एबीपी न्यूज़ का सर्वेक्षण 14 नवंबर तक का है तबतक अन्ना की दोनों चिट्ठियाँ और सीडी नहीं आई थी जिसे न्यूज़ एंकर नेहा ने कई बार ज़ोर देकर दोहराया। ABP न्यूज़ का "ओपेनियन पोल" डॉ कुमार के पाँच प्रश्नो के जबरदस्त प्रभाव की पुष्टि करता है, वहीं आजतक चैनल द्वारा भाजपा को 40 सीटें देना भी इस तथ्य को प्रमाणित करता है हालांकि उसका सर्वेक्षण 24 नवंबर तक का है।
भाजपा की लोकप्रियता मे वृद्धि के लिए भाजपा के लोगों ने जितनी मेहनत की है वो अपने आप मे सराहनीय है निःसन्देह उससे दिल्ली मे भाजपा की राह बहुत आसान हो गई है। नरेंद्र भाई मोदी के जादू का तो कहना ही क्या सारा देश ही उसका कायल है। लेकिन "आप" की ईंट से ईंट बजाने की शुरुआत जो डॉ राघवेंद्र ने की वो अद्भुत, अनोखा है और अतिप्रभावशाली है। रही सही कसर अन्ना की दोनों चिट्ठियाँ और स्टिंग ऑपरेशन और सामूहिक सोशल मीडिया कैम्पेन ने पूरी कर दी। अब तो कहा ये भी जा रहा है की "आप" का दिल्ली विधान सभा चुनाव मे खाता खुलना भी मुश्किल लग रहा है। राष्ट्र के मुख्य धारा के तीन - तीन मीडिया समूह "आप" के पक्ष मे होने के बावजूद सोशल मीडिया के समूहिक कुशल प्रबंधन ने "आप" को खत्म ही कर दिया। सोशल मीडिया का यदि बेहतर, सटीक और पूरी मानसिक क्षमता से प्रयोग हो तो बाजी रातों - रात पलटी जा सकती है चाहे वो राजनीति हो, कॉर्पोरेट हो या कोई और क्षेत्र।
डॉ राघवेंद्र कुमार की अतिउन्नत मनोवैज्ञानिक पद्धति परंपरागत मनोविज्ञान और मनोचिकित्सा (Traditional Psychology & Psychiatry) से इतना अधिक विकसित और उन्नत है कि किसी भी मानसिकता को इतना सशक्त किया जा सकता है कि व्यक्ति बहुत कुछ कर सकता है, बड़े से बड़े उद्देश्य को भी आसानी से प्राप्त कर सकता है। डॉ राघवेंद्र कुमार के 5 प्रश्न, अन्ना के दोनों पत्र व सीडी, स्टिंग ऑपरेशन और सोशल मीडिया के समूह ने "आप" का अंतिम संस्कार कर ही दिया।
* नोट- पंचलकड़ी पूर्वाञ्चल मे व्यक्ति के अंतिम संस्कार की सबसे अंतिम क्रिया होती है।
केजरीवाल एंड कंपनी और उनके "आप" के "पाप के भंडाफोड़" की शुरुआत उसी दिन से शुरू हो गई थी जब उन्होने पिछले महीने 23 अक्टूबर को डॉ राघवेंद्र कुमार ( https://www.facebook.com/Dr.Raghvendra.Kumar ) द्वारा पूछे गए 5 बेहद मौलिक, आसान किन्तु महत्वपूर्ण सवालों के जवाब देने से वो भागने लगे, उन पांचों प्रश्नो को डॉ राघवेंद्र कुमार ने उनकी वैबसाइट पर लोड पर तो किया ही था साथ ही "आम आदमी पार्टी" फ़ेसबुक अकाउंट पर भी शेयर किया था लेकिन उनके "आप" के फ़ेसबुक अकाउंट उन प्रश्नों को अनटैग कर दिया फिर भी उन सभी प्रश्नो को इस लिंक https://www.facebook.com/AamAadmiParty/posts/424336560999443?ef=notif¬if_t=like पर अभी भी देखा जा सकता है। उन पाँच प्रश्नो के कारण "आम आदमी पार्टी" मे खलबली सी मच गई थी। डॉ राघवेंद्र के वो पाँच प्रश्न ऐसे थे कि उसे फॉलो करने वालों को स्पष्ट लगने लगा कि कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ जरूर है फिर उसके बाद जिस प्रकार से लोग "आप" की हकीकत जानने के लिए आतुर हुए उसका नतीजा आज सबके सामने है। हालाँकि केजरीवाल एंड कंपनी ने अपने वेबबसाइट से उन सभी प्रश्नो को स्थिति बहुत ज्यादा खराब होने पर कुछ दिनो बाद डिलीट कर दिया, लेकिन नाम के मेनशन होने के कारण और उनके अब भी होने से ये साफ पता चलता है कि केजरीवाल से कुछ पूछा गया था। उसे इस लिंक पर देखा जा सकता है http://www.aamaadmiparty.org/page/PolKhol ।
इस घटना बाद तो जैसे प्रश्न पूछने का सिलसिला ही चल पड़ा खुद "आम आदमी पार्टी" के वैबसाइट पर बहुत से लोग सवाल पूछने लगे। मध्य प्रदेश और बिहार भाजपा ने भी राहुल गांधी और काँग्रेस से पाँच सवाल उसी तर्ज पर पूछ डाले और तो और उन प्रश्नो के प्रभाव को देखते हुए टीवी चैनल भी टीआरपी बढ़ाने के लिए 5 सवाल पूछने लगे। IBN 7 पर शाम के शाम के सामय प्रसारित होने वाला "बड़ा सवाल", कार्यक्रम इसका प्रमाण है। उन प्रश्नो के तेजी से वाइरल हो जाने का प्रभाव के कारण केजरीवाल एण्ड कंपनी की लोकप्रियता मे तेजी से गिरावट आई जिसके चलते कंपनी को साफ-साफ लगने लगा कि बचा-खुचा वोट बैंक भी बचाना बहुत जरूरी है लिहाजा वो बरेली तौकीर रजा से समर्थन तक मांगने जा पहुंचे।
अभी 27 नवंबर को एबीपी न्यूज़ और आजतक चैनल पर दिखाए गए ओपेनियन पोल के मुताबिक केजरीवाल की लोकप्रियता अच्छी ख़ासी घटी। एबीपी न्यूज़ का सर्वेक्षण 14 नवंबर तक का है तबतक अन्ना की दोनों चिट्ठियाँ और सीडी नहीं आई थी जिसे न्यूज़ एंकर नेहा ने कई बार ज़ोर देकर दोहराया। ABP न्यूज़ का "ओपेनियन पोल" डॉ कुमार के पाँच प्रश्नो के जबरदस्त प्रभाव की पुष्टि करता है, वहीं आजतक चैनल द्वारा भाजपा को 40 सीटें देना भी इस तथ्य को प्रमाणित करता है हालांकि उसका सर्वेक्षण 24 नवंबर तक का है।
भाजपा की लोकप्रियता मे वृद्धि के लिए भाजपा के लोगों ने जितनी मेहनत की है वो अपने आप मे सराहनीय है निःसन्देह उससे दिल्ली मे भाजपा की राह बहुत आसान हो गई है। नरेंद्र भाई मोदी के जादू का तो कहना ही क्या सारा देश ही उसका कायल है। लेकिन "आप" की ईंट से ईंट बजाने की शुरुआत जो डॉ राघवेंद्र ने की वो अद्भुत, अनोखा है और अतिप्रभावशाली है। रही सही कसर अन्ना की दोनों चिट्ठियाँ और स्टिंग ऑपरेशन और सामूहिक सोशल मीडिया कैम्पेन ने पूरी कर दी। अब तो कहा ये भी जा रहा है की "आप" का दिल्ली विधान सभा चुनाव मे खाता खुलना भी मुश्किल लग रहा है। राष्ट्र के मुख्य धारा के तीन - तीन मीडिया समूह "आप" के पक्ष मे होने के बावजूद सोशल मीडिया के समूहिक कुशल प्रबंधन ने "आप" को खत्म ही कर दिया। सोशल मीडिया का यदि बेहतर, सटीक और पूरी मानसिक क्षमता से प्रयोग हो तो बाजी रातों - रात पलटी जा सकती है चाहे वो राजनीति हो, कॉर्पोरेट हो या कोई और क्षेत्र।
डॉ राघवेंद्र कुमार की अतिउन्नत मनोवैज्ञानिक पद्धति परंपरागत मनोविज्ञान और मनोचिकित्सा (Traditional Psychology & Psychiatry) से इतना अधिक विकसित और उन्नत है कि किसी भी मानसिकता को इतना सशक्त किया जा सकता है कि व्यक्ति बहुत कुछ कर सकता है, बड़े से बड़े उद्देश्य को भी आसानी से प्राप्त कर सकता है। डॉ राघवेंद्र कुमार के 5 प्रश्न, अन्ना के दोनों पत्र व सीडी, स्टिंग ऑपरेशन और सोशल मीडिया के समूह ने "आप" का अंतिम संस्कार कर ही दिया।
* नोट- पंचलकड़ी पूर्वाञ्चल मे व्यक्ति के अंतिम संस्कार की सबसे अंतिम क्रिया होती है।