वैसे तो हर साल दशहरा आता है इस वर्ष भी आया और चला गया लेकिन ये दशहरा कुछ खास इसलिए भी था कि रावण जैसे कुछ लोग ही रावण का पुतला फूंकने का प्रयास कर रहे थे। वैसे रावण तो महाज्ञानी और महापंडित भी था लेकिन था बिलकुल अंडरएचीवर मनमोहन सिंह की तरह। रावण ने भी बहुत से असफलताओं पर इस्तीफा नहीं दिया था दे दिया होता तो कम से कम ईमानदार और ज्यादा कार्यकुशल राजा विभीषण हो गया होता और उसकी सोने की लंका तो बची होती, प्रभु श्रीराम को इतनी
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