Sunday, 27 October 2013

आज पटना की शानदार हुंकार रैली के माध्यम से जनता ने नरेन्द्र भाई मोदी के प्रचण्ड नेतृत्व मे न सिर्फ आतंकवादियों को मुहतोड़ जवाब दिया बल्कि उन्हें भी तगड़ा तमाचा मारा जो वास्तव मे बहुत अनिष्ट की उम्मीद पाले हुए थे। 8 से 10 लाख की भीड़ अकल्पनीय रूप से न सिर्फ उस अनिष्ट को दरकिनार करते हुए नरेन्द्र भाई को सुना बल्कि शानदार और अतिसंयम का परिचय देते हुए कोई प्रतिक्रिया नहीं दी ये उन लोगों के मुंह पर करारा और जोरदार जूतेदार तमाचा है जो गुजरात दंगों के बहाने मोदी जी विरुद्ध अनिष्ट करने का सपना देखते हैं। ऐसा शानदार और प्रभावी नेतृत्व जिसे देखकर आँखें भर जाएँ कि यदि नेता डटा रहे तो जनता जान देने को भी तैयार...वंदन करने का मन करता है ऐसे नेतृत्व को जो लगातार विस्फोटों के बाद भी डटी रही ... मोदी जी और उनकी टीम चाहती तो भीड़ को भड़का कर बहुत कुछ कर सकती थी लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं हुआ। क्या ये मात्र संयोग ही है कि कल ही श्रीमती जनार्दन द्विवेदी ने मोदी जी को धमकी दी और आज ये लोकतन्त्र का पहला काला कारनामा हो गया। वैसे अभी-अभी खबर मिली है कि कुछ समय पहले यानि करीब एक से डेढ़ घण्टा पहले मोदी जी के मंच के नीचे से भी कुछ बरामद हुआ है जहां से मोदी जी ने पूरे एक घंटा भाषण दिया। पता नहीं क्यों नितीश बाबू इशरत जहां के शौक को चिपकाकर बाहर निकलते हुए ये कहना ही भूल गए कि "शौक बड़ी चीज है " प्रेस से बात करते हुए बार-बार कह रहे थे कि कोई सूचना नहीं थी लेकिन उसी के आधे घण्टे बाद ही आईबी ने कहा कि उसने इनपुट दिया था रैली मे अनिष्ट हो सकता है ठीक उसी के बाद गुजरात पुलिस के इनपुट की भी खबर आ गई। पता नहीं नितीश बाबू आईबी और गुप्तचर संस्थाओं के इनपुट को शादी का निमंत्रण क्यों समझते हैं ... एक बहुत ज्यादा खोपड़ी के जदयू नेता तो ऐसे सनपात गए हैं कि उनकी खोपड़ी मे चल कुछ रहा है मुंह से निकल कुछ रहा है...बोलती है कि बंद ही नहीं होते ...उधर श्रीमान असत्यव्रत चतुरबेडी ने भी व्यापक तौर पर बेहद असंतुलित नजर आए जो भी उधार की खोपड़ी थी ने काम करना शायद बंद कर दिया और बक-बक करने लगे ....। रैली मे लगातार 6 विस्फोट बहुत बड़ी और भयानक घटना है जिसे उसे उस संदर्भ मे भी देखा जाना चाहिए जब 18 अप्रैल 2013 को जानी - मानी राष्ट्रीय स्तर की मोदी विरोधी मानी जाने वाली पत्रकार मधु किश्वर ने गृह मंत्रालय के अधिकारियों के हवाले से दावा करते हुए बेहद सनसनीखेज बयान दिया था। जिसपर अच्छा - खासा बवाल मचा था।
वास्तव मे आज बिहार की जनता को देख ऐसा लगा कि वास्तव मे मोदी जी के नेतृत्व मे जनता जान भी दे सकती है ...ऐसे नेतृत्व और जनता दोनों के लिए बड़ी से बड़ी प्रशंसा भी कम ही लगती है ...श्रद्धा से जी भर उठता है ...

Wednesday, 23 October 2013

"आप" के श्री अरविन्द केजरीवाल जी अनुरोध है कि  वो कृपया डॉ. राघवेन्द्र कुमार ( https://www.facebook.com/Dr.Raghvendra.Kumar ) द्वारा पूछे गए पाँच (5 ) बेहद मौलिक एवं अतिमहत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर देने का कष्ट करें जिससे उनके "ईमानदारी" सन्दर्भ में जो भी संदेह जनता और विशेष जनता में है वो दूर हो सके। ये सभी प्रश्न श्री केजरीवाल जी के "आप" के पेज पर भी है जिसका लिंक है https://www.facebook.com/AamAadmiParty/posts/424336560999443?ref=notif&notif_t=like इसके साथ साथ उनके वेबसाइट के "पोलखोल" पेज पर भी ये प्रश्न उपलब्ध हैं जिसका लिंक http://www.aamaadmiparty.org/page/PolKhol# है। वे सभी प्रश्न पुनः विस्तार पूर्वक नीचे दिए जा रहे हैं कृपया अवलोकन करें और श्री केजरीवाल जी पर दबाव बनाएं कि वो इनका उत्तर दें -

DrRaghvendra Kumar 
मैंने अभी कुछ दिन पहले अपने भूतपूर्व मित्र धानी नरेश जी के फेसबुक आईडी पर कुछ लोगों से बहस हो गई तो किसी के पास भी मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं था उल्टे कुछ लोगों ने अपनी अवस्था का भी लिहाज न करते हुए अभद्र भाषा का भी प्रयोग किया लेकिन मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं दिया जो केवल एक ही था जिसका अवलोकन धानी नरेश जी के आईडी पर किया जा सकता है यदि उन्होने पोस्ट डिलीट न किया हो तो। खैर, मेरे कुछ प्रश्न श्री अरविंद केजरीवाल जी से यदि वो इनका उत्तर दे पाएँ तो थोड़ा और बेहतर होगा -
1॰ "आप"ने अपने सरकारी कार्यकाल के दौरान कितने भ्रष्टाचारियों या अपराधियों जो आपने कार्यक्षेत्र मे आते थे पकड़ कर जेल मे डाला ? आपके सेवाकाल के विपरीत अशोक खेमका जी, किरण बेदी जी, गोविंद राघो खैरनार जी, दुर्गा शक्ति नागपाल जी, विनोद राय जी, टी एन शेषन जी आदि के सेवाकाल अदम्य निर्भीकता वाले सेवाकाल हैं जिनका अपना ही इतिहास है और तो और बहुत से तो ईमानदारी के नाम पर अपनी जान तक गवां बैठे। आपका भी ऐसा कुछ हो तो कृपया बताएं।
2॰ गुजरात को छोड़ कर भारत मे सभी जगह सभी विभागों (जहां भी हो सकता है) मे रूटीन ट्रांसफर होता है लेकिन आप उस रूटीन ट्रांसफर से बचे रहे जैसा कि मुझे पता चला ? गुजरात मे एक अवधारणा के तहत ट्रान्सफर नहीं होते जिसे मोदी जी कई बार स्पष्ट कर चुके हैं तो क्या इस तरह की अवधारणा आपके विभाग मे भी थी ? यदि नहीं तो क्यों आपका ट्रांसफर नहीं होता था ?
3॰ आप दावा करते हैं कि भ्रष्टाचार समाप्त कर देंगे या बहुत कम कर देंगे इसके लिए आप जनलोकपाल का सहारा लेंगे ठीक है ये एक पक्ष है जनलोकपाल से मै सहमत हूँ होना भी चाहिए, लेकिन किसी भी तंत्र के संदर्भ मे उसके वैज्ञानिक तथ्यपरक होने की बहुत जरूरत होती है जिससे उसे सार्वभौमिकता के स्तर पर सफलतापूर्वक लागू किया जा सके तो क्या आपने अपराध विज्ञान, भ्रष्टाचार विज्ञान आदि जैसे विषयों का जनलोकपाल के ड्राफ्टिंग से पहले अध्ययन किया था ? यदि किया था उसके संबंध मे आपके किसी शोधपत्र का प्रकाशन कहीं भी हुआ ? यदि हुआ है कृपया लिंक उपलब्ध कराएं ! यदि नहीं तो तो फिर आप या किस तार्किक आधार पर दावा कर रहे हैं कि आप भ्रष्टाचार समाप्त या बहुत कम कर देंगे ? हो सकता है आपके जनलोकपाल के लागू होने के बाद भ्रष्टाचारी कोई नया रास्ता खोज ले और भ्रष्टाचार बहुत बढ़ जाए जो नियंत्रण से परे हो !
4॰ जब आपके पास सरकारी शक्तियाँ थीं तो आपने उनका उपयोग भ्रष्टाचार पर प्रहार करने मे नहीं किया जैसा कि मुझे पता चला है फिर इस संदर्भ मे आपके दावे पर विश्वास कैसे किया जाए? जैसा कि आपके टिकट वितरण मे ही आपके जनलोकपाल फ़ेल होते नजर आ रहे हैं, यदि 70 मे से 5 भी असफल होते हैं तो आपके असफलता का दर 7.14% है जो 1 करोड़ की जनसंख्या मे 71400 लोग स्वाभाविक रूप से भ्रष्ट रहेंगे ही जो बहुत बड़ी संख्या है ये इस मायने मे भी बहुत महत्वपूर्ण है कि भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति विस्तार करने की होती है एक बात, दूसरी बात ये कि "भ्रष्टाचार या अपराध की प्रवृत्ति" पर आपकी कोई अवधारणा नहीं दिखती यदि हो तो कृपया बताएं।
5॰ आप बार - बार ये दावा करते क्यों करते हैं कि आप आईआरएस की शानदार नौकरी छोडकर आए हैं? जबकि आपकी श्रीमती जी नौकरी कर रही हैं, यदि आप स्वयं को बहुत बड़ा त्यागी साबित करना चाहते हैं तो आप अपनी अपनी पत्नी से तलाक ले लें या फिर अपनी पत्नी से भी त्यागपत्र दिलवा कर "आप" ज्वाईन करवाएँ। क्या आपका ये दावा कुछ इस प्रकार का नहीं लगता कि महिसासुर, हिरणकश्यपु, आसाराम बापू आदि जैसे लोग जो खुद को ही भगवान या भगवान का अवतार मानने लगते हैं और लोगों से ये कहने लगते हैं कि सिर्फ वे ही भगवान हैं दूसरा कोई नहीं लिहाजा लोग उनकी ही पूजा करेंगे तो वो ही उनका उद्धार करेंगे जैसा कि आप ईमानदारी के संदर्भ मे कर रहे हैं ? जो संभवतः संविधान की दृष्टि मे अपराध न हो किन्तु जघन्य "पाप" जरूर माना जाता है !

Sunday, 20 October 2013

"कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय या खाए बौराए जग वा पाए बौराए" एक सोना दूसरा धतूरा लेकिन विश्लेषक बताते हैं सोने मे धतूरे से सौगुनी अधिक मादकता होती है...कांग्रेछिः सरकार को जिस प्रकार घोटालों का धतूरा खाते-खाते धूर्तई पर उतारू है उससे तो ये होना ही था। जब सामने सोने का सपना हो तो धतूरे    

Tuesday, 15 October 2013

वैसे तो हर साल दशहरा आता है इस वर्ष भी आया और चला गया लेकिन ये दशहरा कुछ खास इसलिए भी था कि रावण जैसे कुछ लोग ही रावण का पुतला फूंकने का प्रयास कर रहे थे। वैसे रावण तो महाज्ञानी और महापंडित भी था लेकिन था बिलकुल अंडरएचीवर मनमोहन सिंह की तरह। रावण ने भी बहुत से असफलताओं पर इस्तीफा नहीं दिया था दे दिया होता तो कम से कम ईमानदार और ज्यादा कार्यकुशल राजा विभीषण हो गया होता और उसकी सोने की लंका तो बची होती, प्रभु श्रीराम को इतनी    
बकलोल बबुआ ने जिद्द पकड़ ली थी अब कुछ न कुछ तो करेंगे ही ठीक वैसे ही कुक्कुरविलासी अंदाज मे ...बड़े ताव मे आए थे बेचारे मकान साहब पता नहीं कहाँ से मकुनी लेकर आए थे और पतराहुंकार लोगों के सामने चबाने बैठे ही थे कि बकलोल बबुआ अपने चचा लोगों की 

Friday, 11 October 2013

पता नहीं दिल्ली की जनता धारकोसवा से परिचित है कि नहीं मुझे नहीं पता लेकिन एक दिल्लीवासी हमारे मित्र बता रहे थे कि बच्चों के मामले मे धरकोसवा की नादानी बड़ी कारगर है। इसीलिए कुछ लोग इसी आधार पर खुद को भुनाने जंतर-मंतर पर लोगों को ताबीज बांटने के लिए अनशन पर बैठ गए थे बाद मे पता चला था कि अनशन का मंत्र उसी बुजुर्ग से उधार लिया था जिसने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध मे खुद के जान की बाजी लगा दी थी । खैर एक धरकोसवा से मैंने पूछा तो उल्टे वो मुझसे ही पूछने लगा "...आपको क्या लगता है ...?" मैंने कहा "...मुझे तो 'आप' आप लगते हैं ..." धरकोसवा गुस्से मे आ गया बोला "...देखिये हम भले ही धरकोसवा हैं लेकिन बड़े-बुजुर्ग की इज्जत करना जानते हैं और कभी जनता को घोखा नहीं देते ..." मैंने सफाई देते हुए कहा "...मैंने तो कभी ऐसा नहीं कहा ..." धरकोसवा कहने लगा "...लेकिन आपने जिससे मेरी तुलना की है उसपर मुझे घोर आपत्ति है ..." मैंने उससे क्षमा मांगते हुए कहा "...अच्छा भाई क्षमा करो मैंने मान लिया कि 'आप' वास्तव मे 'आप' नहीं हो ..." मैंने थोड़ा आश्चर्य से पूछा "...लेकिन तुमको समस्या क्या है ..." धरकोसवा ने कहा "...हम नहीं चाहते कि जैसे अन्ना बाबा की नकल करके उघटापैची किया गया उसी तरह हमारी भी नकल करके को वही सब करे ..." मैंने स्पष्ट करते हुए कहा "...लेकिन ये तो राजनीति है ..." धरकोसवा ने उल्टे मुझसे पूछा"...तो फिर 'आप' के लोगों हमारी नकल करने की क्या जरूरत है ...?" मैंने उत्तर देते हुए कहा "...इसमे समस्या क्या है फिर ..." धरकोसवा ने कहा "...समस्या है लोग हमको केजरीवाल और न जाने क्या - क्या समझ लेते है ..." मैंने कहा "... इससे तो तुम्हारी इज्जत बढ़ जानी चाहिए ..." धरकोसवा ने कहा "...हम लोग 'आप' की तरह चप्पल पहन कर पलंग नहीं चढ़ते..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...क्या मतलब...?" धरकोसवा ने उत्तर देते हुए कहा "...केजरीवाल और उनके 'आप' लोग तो वही बड़ी सफाई से वो करते हैं कि लोग देख के ही शर्मा जाएँ..." मैंने फिर पूछा "...थोड़ा स्पष्ट कीजिये ..." धरकोसवा ने स्पष्ट करते हुए कहा "...कुमार विश्वास जी का चश्मा देखिये 11000 से कम का नहीं है नौकरी छोडने के बाद ये आलम है ...प्रशांत भूषण के बिजली का बिल देख लीजिये, अंजलि दामनिया, शाजिया इल्मी की आपनो के खिलाफ सारे आम नौटंकी, उनके नक्सलियों को देखिये जो उनके आंतरिक लोकपाल मे हैं, खुद केजरीवाल जब नौकरी मे थे तब तक कुछ नहीं किया निकलते ही पता नहीं किस बुर्के से उनको दिव्य शक्तियाँ मिले लगीं और पहले तो अन्ना बाबा का नकल किया अब लोगों की नकल कर रहे हैं लोगों को बेवकूफ़ बनाने के लिए ..." मुझे कुछ कहने मे दिक्कत हो रही थी तो उसी धरकोसवा ने कहा "...देखिये अगर 'आप' का बस चले न भारत को पाकिस्तान बनते बिलकुल देर नहीं लगेगी ..." मैंने उससे पूछा "...लेकिन किसी वकील के ऑफिस मे घुस कर उसे थप्पड़ मारना वो भी सरे आम ...कहाँ तक सही है ...?"  धरकोसवा ने उत्तर देते हुए कहा "...आप थप्पड़ की बात न करो जी 'आप' के लोगों को तो सजा ऐसी मिलनी चाहिए कि जूता भी शर्मा जाए खास कर नकलची बंदर बनने पर, कश्मीर के मुद्दे पर हर बार बुर्कानशीं होने पर..." अंत मे धरकोसवा ने कहा "...देखिये हमे भी इज्जत के साथ जीने का हक़ है ...कम से कम केजरीवाल और उनके 'आप' से मेरी तुलना न करें तो बेहतर होगा ..." ये कह के धरकोसवा चला गया ...  

Wednesday, 9 October 2013

ये जादू है नरेंद्र भाई मोदी का कि नितीश बाबू को दिल्ली को अमेरिका बनाना पड़ा जिससे युद्ध करने के लिए हथियार का उधार ले सकें। हलन कि उनके गोश्त-गुरु कोई-कोई दोस्त-दारू भी कहते हैं, लालू तो जेल मे घोटाला मैनेजमेंट पढ़ा रहे हैं वैसे ये बहुत कम लोगों को पता है उनका पहला चेला नितीश कुमार ही थे शरद यादव को को तो सर्दी हो गई थी तो उन्होने ने आगे चल कर अपना सर्दी जुकाम ठीक करने के लिए बहुत बड़ी मात्रा मे गोरू-बछरू का खरी-खुद्दी खा गए थे लेकिन नेतृत्व नितीश कुमार का ही था। मैनेजमेंट के मामले मे हड़पने की कला के उस्ताद लालू का नितीश छाप करामाती व्यक्तित्व इस मामले मे नितीश से बेहतर है कि उनको पहले ही हड़प कर घोटने कला बढ़िया आती है लेकिन बेचारे नितीश जब लालू जेल मे हैं तो उन्ही के तर्ज पर खुद को छुट्टा सांड घोषित करना ही पड़ेगा सो उन्होने कर दिया। मैंने एक टोपोरी छाप सिक-उल्लर जदयू नेता से पूछा तो कहने लगे "...नितीश सांड नहीं हैं ..." मैंने कहा "...नोबल पुरस्कार की घोषणा तो हो चुकी ..." जदयू नेता ने कहा "...हमे किसी भी चीज का लोभ नहीं हैं ..." मैंने पूछा "...तो फिर राजनीति मे क्या झख मारने आए हैं ..." जदयू नेता ने उत्तर देते हुए कहा "...हम बिहार की सेवा के लिए आए हैं ..." मैंने उनसे पूछा "...सेवा तो जेल मे रह कर बेहतर तरीके से हो सकती है ..." अब जदयू नेता चौंक गए बोले "...आपका क्या मतलब है ..." मैंने आराम से उत्तर देते हुए कहा "...आपके गुरु बाबा तो जेल से ही सेवा कर रहे हैं मैनेजमेंट पढ़ा कर ..." जदयू नेता बोले "...आप क्या बात करते है उनके गुरु तो नितीश कुमार हैं ..." मैंने आश्चर्य दर्शाते हुए हुए कहा "...तब तो मोदी अपने जगह सही हैं ..." जदयू नेता कोंफ्यूज हो गए "...नेरेन्द्र मोदी वो नहीं कर सकते जो वो बिहार मे करना चाहते हैं ..." मैंने भी सोचा चलो अब इनहोने नरेंद्र भाई मोदी का नाम ले ही लिया तो पेंच कसा जाए मैंने पूछा "...कौन रोकेगा उनको ...?" जदयू नेता मुसकुराते हुए बोले "...देख लीजिये यहाँ की जनता ने बुलाया और राष्ट्रपति आने को तैयार हो गए ..." मैंने कहा '..धन्य हो बुद्धिमान टोपोरी नेता अपनी अकल बुर्के मे छिपा के रखते हैं क्या ...?" जदयू नेता ने आश्चर्य से पूछा "...क्या मतलब ...?" मैंने कहा "...बहुत सही किया है बिहार को स्पेशल दर्जा दिलवा के ...दर्जा के साथ-साथ बकलोल युवराज ने आपको अपनी बकलोलई भी उपहार मे दे दिया और आप लोगों ने ले भी लिया ..." अभी भी जदयू नेता का आश्चर्य कम नहीं हुआ था सो उन्होने पूछा "...हमरा को समझ मे नहीं आया ..." मैंने ताना मरते हुए कहा "....अरे बकलोल के चेला जहां अभी कुछ लोग समर्थन मे हैं अगर नरेन्द्रभाई मोदी को तुम लोग रोक लिए तो सारा बिहार ही उनका समर्थक हो जाएगा ...चारा के साथ लगता भैंस का अकाल भी खा गए..." ये सुन के जदयू नेता को तो जैसे साँप सूंघ गया मारे गुस्से मे नितीश को कोसते हुए बोले "...हम कहते थे नितीश बाबू लालू को अपना गुरु मत बनाओ ...लेकिन बुद्धि होगी तब न सुनेंगे ..." मैंने कहा "...नितीश बाबू अभी भी लालू को गुरु मानते हैं ..." वो सोचते हुए थोड़ा भरोसे से उन्होने पूछा "...वो आपको कैसे पता ..." मैंने उत्तर देते हुए कहा "...नितीश बाबू को बिहार की जनता जूता और काला झण्डा दिखा रही है ..." जदयू नेता ने हामी  भरते हुए कहा "...हाँ वो तो है ..." मैंने कहा "...लेकिन लालू भले हार गए लेकिन जनता ने उनको कभी जूता नहीं दिखाया और न ही चलाया ..." उन्होने पूछा "...तो ..." मैं थोड़ा गुस्सा दिखते हुए कहा "...क्या तो तो करता है बकलोल.." वो अनुरोध करते हुए बोले "...तो बताईए न ..." मैंने कहा "....जैसे लालू ने आडवाणी को गिरफ्तार किया था उसी तर्ज पर नितीश भी नरेंद्र भाई मोदी को गिरफ्तार करना चाहते हैं ..." जदयू नेता अपना सिर पकड़ कर बैठ गए ....बहुत देर तक बैठे ही रहे .....

Sunday, 6 October 2013

जलन का नाती जब अपनी औकात मे आता है तो यकीन मानिए अच्छे-अच्छे अंडरअचिएवर की भी पगड़ी तेल लेने चली जाती है। फिर वही पगड़ी तेल मे अंगरेजी धुन पर नाचते अपने बेइज्जती का गुणगान करती है अजी लानत है ऐसी हरकट्टों पर। लेकिन उनके समूह के ही लोग बाग बताते हैं कि जमाना खराब है नाती अपनी बेइज्जती को दूसरों की बेइज्जती समझने की हमेशा होशियारी करता है। नतीजा पेड़ पर उल्टा लटकने की शर्त पर अपना कुल कपड़ा फाड़-फूड़ के बुर्का खोजने चल देता हैं। जमाना खराब है ही तो मने अपने कौन बढ़िया हैं? बड़े बुजुर्ग भी इस नाती का गोड़ धोते नजर आते हैं जैसे इस उम्मीद मे कि नाती का पनाती कुछ तो उल्टी करबे करेगा। जय हो जलन महराज अपने तो लुटिया डुबाए ही ऐसा दमड़नोची खनदान छोड़ गए कि जनता जब उल्टी करती है तो उसकी पसलियाँ ही बाहर आ जाती हैं। इसपर उन जलन का नाती कहता फिरता है कि ये तो देश के जीन मे है पता नहीं नाती कहना क्या चाहता है अपने बुजुर्गों की तरह जीन कहना चाहता है, जिन्न कहना चाहता है कि जिन्ना कहना चाहता है कुछ भी पता नहीं चलता। इन्ही के समूह के एक बुजुर्गवार बता रहे थे कि  बड़े बड़े सीताराम को भी यहाँ तीताराम बन कर घूम-घूम के चक्करघिरनी खेलना पड़ता है जिससे तीताराम को आगे चल कर तोताराम मे बदलने मे कोई परेशनी न हो। ये सब सहर्ष प्रक्रिया होनी चाहिए नहीं तो वही हश्र होता है जो कभी धोती फाड़ के रुमाल कर दिया जाता है। वैसे जिन्न लोगों की इज्जत बच जाती है तो ऐसे लोग बाग सीनाजोरी करते हुए सीने पर ताल थूककर हीरा पदक (Diamond Medal) धारण करके घूमते हैं। ऐसे ही एक तीताराम तोताराम मे धर्मांतरित हो कर अपनी इज्जत बचा चुके हमारे सामने बक-बक करते हुए कह रहे थे कि अपना देश गोरे लोगों का नहीं है इसलिए जो काला है इसी देश मे है कहीं और नहीं। बड़ा हुरपेटने पर उन्होने अपनी मीठी जुबान को कष्ट देते हुए कहा कि देश का काला देश के बाहर कैसे जा सकता है ? ये सुन के मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ क्यों कि मुझे पता है कि निःशब्द तोताराम की तोतागिरी से ज्यादा कुछ नहीं है लिहाजा लानत भेजने के लिए सिर्फ इतना ही कहना जरूरी था कि जैसे कोई भी ऐरा-गैरा इस देश का पहला दूसरा तीसरा या चौथा प्रधानमंत्री बन सकता है तो ठीक उसी तरह इस देश का काला बाहर भी जा सकता है भले इस देश की आम जनता आम आदमी  अपनी पसलियों की उल्टी करता फिरे। एक अन्य समूह के किसी ने नाती को नहीं पुचकारा को उसकी अम्मा को को बहुत बुरा लगा था उनके समूह लोग बताना शुरू कर दिये थे कि कानून को अपना काम करने के बजाय दूसरों का काम ही ज्यादा करना चाहिए ठीक वैसे ही जैसे सीबीआई करती है और कर के दिखने की कोशिश भी कर रही है। नाती को भरोसा है कि कुछ न कुछ तो होगा लेकिन उनके ही समूह के एक और तोताराम बता रहे थे कि जमाना ऐसा है कि अगर बाहर हुए तो बाहर नहीं भीतर हो सकते हैं इसलिए परिक्रमा करना बहुत जरूरी है भले ही पेट साफ हो या न हो, कब्जियत किसे नहीं है प्रधानमंत्री की कुर्सी के पेट मे कब्जा जमाए बैठे क्या उस कुर्सी के लिए ही कब्जियत नहीं हैं बल्कि देश के लिए भी बहुत बड़े कब्ज बन चुके है जिसका स्थाई निस्तारण बहुत जरूरी है ...