आज पटना की शानदार हुंकार रैली के माध्यम से जनता ने नरेन्द्र भाई मोदी के प्रचण्ड नेतृत्व मे न सिर्फ आतंकवादियों को मुहतोड़ जवाब दिया बल्कि उन्हें भी तगड़ा तमाचा मारा जो वास्तव मे बहुत अनिष्ट की उम्मीद पाले हुए थे। 8 से 10 लाख की भीड़ अकल्पनीय रूप से न सिर्फ उस अनिष्ट को दरकिनार करते हुए नरेन्द्र भाई को सुना बल्कि शानदार और अतिसंयम का परिचय देते हुए कोई प्रतिक्रिया नहीं दी ये उन लोगों के मुंह पर करारा और जोरदार जूतेदार तमाचा है जो गुजरात दंगों के बहाने मोदी जी विरुद्ध अनिष्ट करने का सपना देखते हैं। ऐसा शानदार और प्रभावी नेतृत्व जिसे देखकर आँखें भर जाएँ कि यदि नेता डटा रहे तो जनता जान देने को भी तैयार...वंदन करने का मन करता है ऐसे नेतृत्व को जो लगातार विस्फोटों के बाद भी डटी रही ... मोदी जी और उनकी टीम चाहती तो भीड़ को भड़का कर बहुत कुछ कर सकती थी लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं हुआ। क्या ये मात्र संयोग ही है कि कल ही श्रीमती जनार्दन द्विवेदी ने मोदी जी को धमकी दी और आज ये लोकतन्त्र का पहला काला कारनामा हो गया। वैसे अभी-अभी खबर मिली है कि कुछ समय पहले यानि करीब एक से डेढ़ घण्टा पहले मोदी जी के मंच के नीचे से भी कुछ बरामद हुआ है जहां से मोदी जी ने पूरे एक घंटा भाषण दिया। पता नहीं क्यों नितीश बाबू इशरत जहां के शौक को चिपकाकर बाहर निकलते हुए ये कहना ही भूल गए कि "शौक बड़ी चीज है " प्रेस से बात करते हुए बार-बार कह रहे थे कि कोई सूचना नहीं थी लेकिन उसी के आधे घण्टे बाद ही आईबी ने कहा कि उसने इनपुट दिया था रैली मे अनिष्ट हो सकता है ठीक उसी के बाद गुजरात पुलिस के इनपुट की भी खबर आ गई। पता नहीं नितीश बाबू आईबी और गुप्तचर संस्थाओं के इनपुट को शादी का निमंत्रण क्यों समझते हैं ... एक बहुत ज्यादा खोपड़ी के जदयू नेता तो ऐसे सनपात गए हैं कि उनकी खोपड़ी मे चल कुछ रहा है मुंह से निकल कुछ रहा है...बोलती है कि बंद ही नहीं होते ...उधर श्रीमान असत्यव्रत चतुरबेडी ने भी व्यापक तौर पर बेहद असंतुलित नजर आए जो भी उधार की खोपड़ी थी ने काम करना शायद बंद कर दिया और बक-बक करने लगे ....। रैली मे लगातार 6 विस्फोट बहुत बड़ी और भयानक घटना है जिसे उसे उस संदर्भ मे भी देखा जाना चाहिए जब 18 अप्रैल 2013 को जानी - मानी राष्ट्रीय स्तर की मोदी विरोधी मानी जाने वाली पत्रकार मधु किश्वर ने गृह मंत्रालय के अधिकारियों के हवाले से दावा करते हुए बेहद सनसनीखेज बयान दिया था। जिसपर अच्छा - खासा बवाल मचा था।
वास्तव मे आज बिहार की जनता को देख ऐसा लगा कि वास्तव मे मोदी जी के नेतृत्व मे जनता जान भी दे सकती है ...ऐसे नेतृत्व और जनता दोनों के लिए बड़ी से बड़ी प्रशंसा भी कम ही लगती है ...श्रद्धा से जी भर उठता है ...
वास्तव मे आज बिहार की जनता को देख ऐसा लगा कि वास्तव मे मोदी जी के नेतृत्व मे जनता जान भी दे सकती है ...ऐसे नेतृत्व और जनता दोनों के लिए बड़ी से बड़ी प्रशंसा भी कम ही लगती है ...श्रद्धा से जी भर उठता है ...