किश्तवाड़ के बाद मुजफ्फरनगर में दंगे हुए लेकिन किसी टोपोरी छाप सेकुलर ने बुर्का उठा के झांकने की कोशिश नहीं की उनपर प्रवचन देना तो दूर की बात है, लेकिन यही लोग जब दंगाविजय सिंह की तर्ज पर आ-उल गधी पर बैठ कर लुआठी चमकाते हैं ऊपर से प्रवंचना करते हुए चोरी ऊपर से सीनाजोरी करते हैं तो जाहिर सी बात है सेकुलर बुर्के मे आग तो लगेगी ही। कोई भी प्रवंचना के अलावा कुछ करता तो गनीमत थी लेकिन सब के सब उसी गधी के मुंह पर हाथ रख कर उसी की आवाज मे ढेंचू-ढेंचू करने के सिवा कुछ नहीं कर रहे। बड़ी मुश्किल एक खाँटी भाई कोंग्रेसी मिले तो मैंने उनसे पूछा "...उत्तर प्रदेश मे विधान सभा चुनाव की उम्मीद कब-तक है ...?" खाँटी भाई चौंक कर बोले "...क्यों आपको ऐसा क्यों लगता है ...?" मैंने आश्चर्य जताते हुए कहा "...अरे भाई यू॰पी॰ मे केवल डेढ़ साल मे ही 100 से ऊपर दंगे हो चुके हैं ..." खाँटी भाई ने बड़े भोले अंदाज मे उत्तर दिया "...तो क्या हुआ ! वैसे हम लोग भी अपनी बात रख कूके हैं ...?" मैंने फिर उसी आश्चर्य से पूछा "...क्यों ? प्रदेश मे कानून व्यवस्था की स्थिति दिन पर दिन खराब होती जा रही है ...!" खाँटी भाई ने कहा "...हम लोग धर्म निरपेक्ष हैं ..." मैंने उनसे पूछा "...तो क्या दंगा भी धर्म निरपेक्ष था ..." खाँटी भाई ने कहा "...हम लोग धर्म निरपेक्षता की रक्षा के लिए कुछ भी कर सकते हैं ..." मैंने कहा "...इसीलिए तो लोग सकते मे हैं..." खाँटी भाई ने थोड़ा दिलचस्पी लेते हुए मुझसे पूछा "...सकते मे किस लिए ...?" मैंने उन्हें उत्तर देते हुए कहा "...कि आप और आप जैसे लोग लोग सांप्रदायिक दंगे नहीं करवा पाते ..." उनके हाथ मूछों पर चली गईं खुशमिजाजी से कहा "...यही तो काँग्रेस की पालिसी है ..." मैंने कहा "...हाँ सही बात है आप लोगों ने सिर्फ धर्मनिरपेक्ष दंगे करवाए हैं ..." वो थोड़ा गुस्से मे आ गए बोले "...भाजपा के लोगों ने सांप्रदायिक दंगे करवाए हैं वोट के लिए ..." मैंने शांत स्वभाव से कहा "...मेरा भी वही कहना है काँग्रेस ने वोट के लिए 600 से अधिक धर्म निरपेक्ष महादंगे करवाए हैं छोटे - छोटे दंगों को जोड़ लिया जाए तो संख्या 65 वर्षों मे 80,000 से अधिक पहुँच जाती है..." खाँटी भाई बोले "... देखिये हमे धर्म निरपेक्षता का धर्म निभाना पड़ता है...!" मैंने थोड़ा गुस्से मे उनसे पूछा "...तो क्या इसके लिए बहुसंख्यकों की हत्या जरूरी है ...?" खाँटी भाई बोले "...देश को सही रास्ते पर ले जाने के लिए सत्ता मे रहना जरूरी है ...!" मुझे बहुत अजीब सा लगा पूछा "...मौत का सौदा करते समय आपकी अंतरत्मा कांपती नहीं ...?" खाँटी भाई बेपरवाही से बोले "...हमारे कॉंग्रेस पार्टी देशी-विदेशी सभी तरह के त्यागी हैं ..." मुझे दुख भी हुआ और आश्चर्य भी सो पूछा "...तो क्या सभी के लिए खून और काला धन जरूरी है ..." खाँटी भाई इत्मीनान उत्तर देते हुए बोले "...वैसे तो ये त्याग की कीमत नहीं है लेकिन सांप्रदायिकता के खिलाफ जंग मे पैसा तो लगता ही है ..." मैंने गुस्से से कहा "...गुजरात मे गोधरा की प्रतिक्रिया पर किसी भी स्तर पर किसी की संलिप्तता नहीं मिली, लेकिन आप लोगों ने आसमान सर पर उठा लिया था ...लेकिन यहाँ तो पूरी की पूरी सरकार ही शामिल थी दंगे के प्रयोजन मे ..." खाँटी भाई बोले "...आप समझने की कोशिश कीजिये हम धर्मनिरपेक्ष लोग हैं ..." मैंने गुस्से से तर्क रखा "...मतलब दंगा धर्म निरपेक्ष था ..." खाँटी भाई बोले "...हाँ आप ऐसा ही कुछ समझ लीजिये ..." मैंने उनसे कड़े स्वर मे पूछा "...आप कार्यवाही सिर्फ सांप्रदायिक दंगे के खिलाफ करते हैं धर्मनिरपेक्ष दंगों के खिलाफ नहीं ..!" खाँटी भाई कुछ बोल नहीं रहे थे ....
आनंद का जुगाड़ मने Pleasure Technology जैसे Talking Crows Sitting on Buffalo's Back
Thursday, 19 September 2013
Tuesday, 17 September 2013
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