Wednesday, 21 August 2013

बिना प्याज का चोखा अब छछूंदर भी खाने से इनकार करते फिर रहे है बड़ी उम्मीद पाले बैठे थे खांटी भाई कांग्रेसी लोग कि कम से कम छछूंदर तो उनका चोखा खा ही लेंगे लिहाजा भारतीय वोटरों की क्या औकात कि उनको वोट न दें ! खैर चोखा अपनी जगह, प्याज अपनी जगह के बजाय दूसरे की जगह, अब भला कोई ये तो बताए किस पाजी ने ये अफवाह उड़ा दी कि छछून्दरों की दुनियां में रूपया नहीं महगा डॉलर चलता है तो फिर ये क्यों न कुछ ऐसा किया जाए कि भारतीय वोटरों को डॉलर की ही लत लग जाए। खांटी भाई कांग्रेसियों की दुनियां है लिहाजा हर प्रश्न का उत्तर मिल जाएगा चाहे मौन से आबरू बेचकर या बकलोल बबुआ की बकलोलई से। अलम्बरदारी करना मजबूरी है तो लाल किले की प्राचीर पर चढ़ना भी जरूरी है तो वहां से भी चोखा चमकाने से बाज नहीं आए, अलम्बरदारी में भूल गए कि लाल किले और तिरंगे की भी एक मर्यादा होती है कम से कुछ तो लिहाज करना चाहिए था। खैर बुढौती में दुनियां ज्यादा दिखाई देती है भले दुनियांदारी में पैजामे का नाडा ही खुला जा रहा हो।  मैंने खांटी भाई कांग्रेसी से पूछा तो कहने लगे "…देखिये वो बड़े अर्थशास्त्री हैं …" मैंने गुस्से में सवाल दागा "…तो इसका क्या मतलब अपनी तरह सभी के पैजामे का नाडा खोलावएंगे …? " खांटी भाई बोले मुझे शांत करते हुए बोले "…आपका गुस्सा जायज है…" मैंने कहा "…तो अब डॉलर के बाद प्याज को भी क्यों सेने लगे ?... लंगोटी भी नहीं सूख रही …?" खांटी भाई बोले "…मौसम की मार के आगे हम क्या कर सकते हैं…?" मैंने कड़े आवाज में कहा "…हाँ सही बात है जिनके पास डॉलर की छतरी नहीं है वो कर ही क्या सकते हैं…!" खांटी भाई बोले "…इंदिरा गाँधी ने गरीबी हटाओ का नारा दिया था…" मैंने पलटकर उनसे पूछा "… इसीलिए बोफर्स की तर्ज पर 20 अगस्त वाह! वैसे आपके बकलोल युवराज ने 'रूपया घटाओ' का नारा दिया है क्या … ?" खांटी भाई तमतमा कर बोले "… वो बकलोल नहीं हैं …" मैंने भी तमतमा कर पूछा "…तो फिर क्या हैं वो 'डॉलर' हैं, 'रूपया' हैं क्या हैं…? अपनी पहचान बताने में उनको शर्म …" खांटी भाई ने बीच में बात काटते हुए कहा "…पूरी दुनियां में मंदी है तो भारत पर भी प्रभाव पड़ेगा ही … " मैंने कहा "…अमेरिका और यूरोप तो आराम से चोखा में प्याज डाल के खा रहे हैं … फिर भारत को भी कायदे से खाना चाहिए … " खांटी भाई बोले "… सरकार उपाय कर रही है … " मैंने गुस्से से उनपर सवाल दागा "… पिछले 9 साल से आप और आपके तीनमूर्ति अपने पैजामे का नाडा नहीं बांध सकी …!" खांटी भाई थोड़ा कंफ्यूज हो गए बोले "…देखिये पैजामे का नाडा बांधना और उपाय करना दोनों अलग-अलग चीजें हैं …!" मैंने उनसे टिपण्णी करते हुए पूछा "…क्यों आप लोग वाजपेयी जी का भी एहसान भी नहीं मानेंगे … ?" उन्होंने पलट कर मुझसे पूछा "…किस बात का … " मैंने कहा "…उन्ही की बदौलत नाडा न बांध पाने के बावजूद आपका पैजामा अभी तक सरका नहीं … चोरी और सीना जोरी भी शान से करते रहे…" खांटी भाई ने कहा "…प्याज इतना बेरहम उन्हीं के बदौलत है…" मैंने पलटकर सवाल किया "…तो क्या इसीलिए आप खांटी भाई लोग हराम का वोट खरीदने के चक्कर में हैं…?" खांटी भाई थोड़ा उखड गए बोले "…आप लोगों को तो भारत की तरक्की देखी नहीं जाती …" मैंने पूछा "…खांटी भाई कांग्रेसी लोगों की तरक्की ही भारत की तरक्की है शायद …" खांटी भाई बोले "…आप देखिये खुशहाली बढी है …" मैंने सवाल दागा "…फिर छछून्दरों को भी क्या परेशानी हो गई भले-चंगे थे वो…?" खांटी भाई झल्लाते हुए बोले "…घबरईये नहीं सरकार उपाय कर रही है…" मैंने भी झल्लाते हुए कहा "…अपने पैजामे का नाडा तो बांध ही नहीं पा रहे हैं चले हैं उपाय करने…जो अपनी इज्जत ही नहीं बचा पा रहा उसका हर प्रयास दूसरों की इज्जत और जान के लिए खतरा ही होता है …" खांटी भाई कुछ बोले बगैर उठकर कहीं चले गए, मुझे लगा जल्दी से जल्दी वहां से फुट लेने में ही भलाई है … 

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