Saturday, 10 August 2013

चूहे के बिल में हाथ डाल कर चूहा खोजने वालों के लिए खुशखबरी का ये मतलब बिलकुल नहीं कि चूहा मिल ही गया, खुशखबरी का मतलब ये है कि खुद चूहा बिल्ली की सवारी करता फिर रहा है। लेकिन मजाल क्या कि बिल्ली उस पर झपट्टा मार कर हज करने चल दे। वैसे भले ही इस्लाम में सब्सिडी (हराम) के पैसे हज करना गुनाह हो लेकिन फिर भी …पैसा तो पैसा है चाहे किसी घोटाला छाप डकैती से आवे या हराम से। इधर 65 वर्षों से जिस तरह कांग्रेस ने देश में उल्टी गंगा बहा रखी है, ऐसा नजारा देख कर आश्चर्य नहीं होता उलटे नगाड़ा बजाने वाले बहुत मिल जाते हैं। खांटी भाईयों के जीजा जी भले ही बिल्ली की सवारी सीना तान के कर लें लेकिन बिल्ली तो बिल्ली है। लेकिन लोग-बाग बताते हैं बिल्ली शाकाहारी है लिहाजा क्लीन चिट मिल गयी मैंने इस पर एक खांटी भाई से पूछा तो कहने लगे "…कांग्रेस ने ही स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी …" इस पर मैंने उनसे पूछा "…अच्छा तो बताएये कि स्वतंत्रता की लड़ाई में कितने कांग्रेसियों को फांसी हुई …?" उन्होंने उत्तर देते हुए कहा "…ठीक है फांसी भले न हुई हो जेल तो हुई ही …" मैंने कहा "…अधिकांश खांटी भाई लोग तो जेल कसाब और अफजल गोरु की तरह बिरयानी खाने ही जाते थे …" इस पर उन्होंने कड़ाई से जवाब दिया "… आपका ये आरोप झूठा है… " मैंने कहा "…जी नहीं झूठा बिल्कुल ही नहीं है उसी परंपरा का ही निर्वहन आज भी आप लोग हर स्तर पर जेल के अन्दर और जेल के बाहर भी कर रहे है …" उन्होंने आश्चर्य से पूछा "…क्या मतलब है आपका … ?" मैंने कहा "…आपके जीजा जी को नोटों की बिरयानी कौन खिला रहा है …?" गुस्से में उखड़ते हुए उन्होंने मुझसे पूछा "… आपका मतलब कि हमारी पार्टी ऐसा कर रही है …?" मैंने उनसे कहा "…आपके हिसाब से आजादी की लड़ाई तो भाजपा ने लड़ी नहीं सो बिरयानी तो वो खिला नहीं सकते …!" खांटी भाई ने मुझसे पूछा "…आपका मतलब जेल में सबको बिरयानी मिलती है …?" मैंने कहा "…सबको तो नहीं लेकिन कुछ ख़ास किस्म के लोगों को तो मिलती ही है अन्दर भी बहार भी…" खांटी भाई बोले "…आपके कहने का मतलब मै समझा नहीं …" मैंने उनको समझाते हुए कहा "…वैसे खाद्य सुरक्षा बिल तो उन्ही लोगों के लिए है जो आपकी दृष्टि में भूखे हैं…" खांटी भाई बोले "… हाँ बिलकुल उन्ही लोगों के लिए है …" मैंने स्पष्ट करते हुए कहा "…आपके जीजा जी की कंपनी का अकाउंट भी भूखा था उसमे केवल 6000 रुपये थे जो केवल साल भर में ही बढ़कर 53 करोड़ हो गए…" खांटी भाई बोले "…इससे क्या साबित होता है …?" मैंने उनको उत्तर देते हुए कहा "…क्यों फ़ूड सिक्युरिटी बिल के पास होने से पहले उसका प्रोटोटाइप नहीं है ये …?" खांटी भाई बोले "…आप लोग जिस राजनीति से प्रेरित हैं वो सबको पता है …" मैंने कड़े हो कर उनसे पूछा "…जेल के भीतर सरकारी दामाद लोगों को और जेल के बाहर अपने दामादों को बिरयानी खिलाना ये कौन सी राजनीतिक प्रेरणा है …?" खांटी भाई बोले "…हम लोगों ने हमेशा स्वस्थ राजनीति की है …" मैंने उनसे पूछा "…अब तो देश स्वतंत्र है लिहाजा देश का स्वास्थ्य ठीक करने के लिए घोटाला छाप डकैती तो अब आतंकवाद की श्रेणी में रखा ही नहीं जाएगा …?" खांटी भाई ने बड़े आत्मविश्वास से उत्तर देते हुए कहा "…घोटाले और आतंकवाद में जमीन आसमान का अंतर है और हमारी सरकार पूरी संजीदा है इसपर …" मैंने भी उसी टोन में उत्तर देते हुए कहा "...हाँ भले ही भ्रष्टाचार के काले धन से आतंकवाद प्रायोजित किया जाता रहा हो ..." खांटी भाई कुछ बोल नहीं रहे थे तो मैंने आगे जोड़ते हुए कहा "…आपकी सरकार संजीदा है संभवतः इसीलिए बिल्ली भी शाकाहारी बन कर घूम रही है …!"  मैंने उनको धन्यवाद कहा और नमस्कार कर के विदा लिया।   

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