Tuesday, 9 July 2013

कांग्रेसी दिग्गी

पंचर कौन कहे बर्स्ट यानी भ्रष्ट होती कांग्रेसी खटारा के दिग्गी के सड़ी बास अक्सर आती रहती है और कांग्रेस के लोग उसी बास को गुलाब का गंध समझ कर उसे जनता के बीच फेकते रहते हैं लेकिन इस बार तो उस दिग्गी से कुछ ज्यादा सड़ी हुई और दुर्गन्ध वाली बास आई तो कुछ टोपोरी छाप सेकुलरों को बड़ा अच्छा लगा शायद उन वोट बैंक के भुखारियों ने सोचा चलो कुछ तो व्यवस्था हो गयी। दरअसल वो वही लोग हैं जो वोट के लिए कुत्ते के मुँह से हड्डी भी छीन कर खा जाने की महारत रखते हैं। ये लोग ऐसे मौत के सौदागर हैं कि जिन्दगी भी मौत से पनाह मांगती रहती है। खैर दिग्गी से आने वाली सड़ी और बदबूदार बास पर मैंने एक खांटी भाई कांग्रेसी से पूछा तो कहने लगे "...कांग्रेस सबसे पुरानी पार्टी है ..." मैंने कहा "...इसका क्या मतलब आपके खटारा के दिग्गी से हमेशा बदबूदार बास ही निकलेगी ...?" खांटी भाई बोले "...आपकी दृष्टि में वो दुर्गन्ध हो सकती है..." मैंने कहा "...दुर्गन्ध दृष्टि में होती है ये तथ्य पहली बार मेरे संज्ञान में आ रहा है ..." खांटी भाई थोड़ा तमतमा गए बोले "...आपके कहने क्या मतलब ...?" मैंने कहा "...सीधा सा मतलब है सभी लोगों को आप अपने युवराज की तरह बकलोल बबुआ क्यों समझते हैं ...?" खांटी भाई ने गुस्से में पूछा "...आपका इशारा किस तरफ है ..." मैंने उत्तर देते हुए कहा "...जिन्दगी दांव पर लगी है उधर बबुआ लन्दन में बन्दर नचाते रहे ..." खांटी भाई का गुस्सा थोड़ा और बढ़ गया  बोले "...आप लोग कहना चाहते हैं कि हर समय एक ही जैसा होना चाहिए ..." मैंने पूछा "...तो क्या इसी परिवर्तन के लिए आप अपने खटारा के दिग्गी से समय-समय पर बास छोड़ते रहते हैं ...?" खांटी भाई बोले "...वो बास नहीं वास्तविकता है ..." मैंने कहा "...बिलकुल मौत वास्तविकता है सो उसका सौदा करने में आपको कोई हर्ज दिखाई नहीं देता ..." खांटी भाई का गुस्सा शांत नहीं हुआ बोले "...आपका आरोप सही नहीं है ..." मैंने कहा "...लगता है आपके खटारा दिग्गी में हमेशा शव-साधना होती रहती है और वहां से दिव्य ज्ञान मिलता रहता है ..." खांटी भाई उसी गुस्से में बोले "...जिन्दगी और मौत हमारे हाथ में नहीं है ..." मैंने कहा "...इसीलिए आपको उसका भी सौदा करने में कोई हर्ज नहीं लगता ..." खांटी भाई का गुस्सा शांत नहीं हो रहा था वो बोले "...आपको तथ्यों का ज्ञान नहीं है ..." मैंने उनसे पूछा "...आपके खटारा के दिग्गी से जो बास निकलेगी वही ज्ञान है ..." खांटी भाई बोले "...हर पहलू को देखना जरूरी है..." मैंने कहा "...आप द्विअर्थी बात मत कीजिये ..." खांटी भाई बोले "...ओल्ड इस गोल्ड ...लिहाजा कांग्रेस हमेशा से सही तथ्य रखती है ..." मैंने कहा "...इसीलिए ओल्ड आतंकवादियों को कब्रें खोद-खोद कर निकाल रहे हैं और अपने खटारा के दिग्गी में उसे लेकर बास मारते फिर रहे हैं ..." खांटी भाई बोले "...बास आपको लगता होगा ..." मैंने कहा "...जी अब भारत के लोग भी आपके ओल्ड और भयानक दुर्गन्ध को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं ..." खांटी भाई बोले "...ये तो समय ही बताएगा फिलहाल .." मैंने कहा मुझे भी समय का इन्तजार है ...नमस्कार     

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