Monday, 29 July 2013

सेन साहब

इस उमस भरी गर्मी में शशि थरूर के कैटल क्लास जिसे उनकी पार्टी बिना गुठली का आम आदमी समझती है, का पसीना छूटा जा रहा है। वो तो खैर कुक्कुरमुत्ता-पुत्र (पाटलीपुत्र की तर्ज पर) बने घूम रहे हैं लेकिन उनके ही लोग बताते हैं कि उनकी पार्टी का गर्मी के मारे कैटल क्लास से कहीं ज्यादा बुरा हाल है। यही कारण है कि ठन्डे देश के रहने वाले खानाबदोश अर्थशास्त्री जो बकलोल ददुआ छाप ही लगते हैं, बुलाया है। अब बेचारे उनसे कहा गया कि इस उमस भरी गर्मी में गर्मी कम करने का ठोस उपाय करें अब ददुआ छाप नोबेल पुरस्कार विजेता पकड़ लाए कुत्ता और कुत्ते की पूंछ पकड़ कर उसी से हवा झलने लगे, पूरी की पूरी कांग्रेस उनके प्रयास से ही हवा खा रही है फिर भी पार्टी है कि ठंडी होने का नाम नहीं ले रही। बड़ी परेशानी है इतने प्रयास के बाद भी गर्मी बढ़ती ही जा रही है।  मुसीबत तो तब और खड़ी हो गयी जब उस गर्मी की आंच खुद ददुआ छाप अर्थशास्त्री पर पड़ने लगी बहुत-बहुत कल्याणकारी बौछार उस कुत्ते के माध्यम से करने का प्रयास किया लेकिन सब पश्चिम बंगाल की तर्ज पर गाल बजाने जैसा ही था सो नया कल्याणकारी बौछार करने के लिए उस कुत्ते को फिर तैयार किया गया अब बगल के बिहार की सिंचाई हो रही है लेकिन गर्मी है कि फिर भी कम नहीं होने का नाम ही नहीं ले रही। कांग्रेसी भाई लोग बैठना तो कहीं और चाहते थे लेकिन मजबूरी में बैठना पड़ा वहां जहाँ वो किसी भी कीमत जाना ही नहीं चाहते थे। ददुआ छाप अर्थशास्त्री के आने के पहले से ही यह सब हो रहा है या उनके आने के बाद पता नहीं लेकिन पूरी की पूरी कांग्रेस नरेन्द्र भाई मोदी के अंगीठी पर बैठ कर बकलोल बबुआ की तरह अंगूठा चूस रही है। कुत्ते की पूंछ से कांग्रेस पार्टी के लिए हवा झलने वाले ददुआ छाप अर्थशास्त्री ने पूछा कि तैयारी क्यों नहीं करते तो उसी बकलोल बबुआ के आदेश पर पूरी कांग्रेस ने दोहराया कि तैयारी तो कर रहे हैं पूरी कांग्रेस पानी, दूध, चीनी, चायपत्ती और भी बहुत कुछ घोंट कर (सभी लोग इसे भी घोंटाला भी कह रहे हैं ) नरेन्द्र भाई मोदी के अंगीठी पर बैठ गयी है। सभी को ये पूरी उम्मीद है पेट में ही चाय जरूर बन जाएगी क्योंकि बकलोल बबुआ का डरावना आदेश है सो अग्नि देवता को भी अपना नियम बदलना पड़ेगा। अब पता नहीं अग्नि देवता अपना नियम बदलेंगे, नहीं बदलेंगे या फिर पता नहीं क्या करेंगे लेकिन ये तो तय है कि कांग्रेसी घपले के लिए पिछली बार की तरह इस बार कोई नियम नहीं बदलने वाला सो  ददुआ बिरादरी के अर्थशास्त्री के भी पेट में ही चाय जरूर बन जाएगी। बड़ी उम्मीद है कुत्ते की पूँछ की हवा से बकलोल बबुआ और उनकी मम्मी के पक्ष में हवा बनेगी, लहर चलेगी और न जाने क्या - क्या लेकिन ऐसा कुछ होना तो दूर उलटे और हवा खराब हो गई नरेन्द्र भाई मोदी के लहर में ऐसा फंसे हैं कि येन - सेन - प्रकारणेन जान बचाने के लाले पड़ने लगे हैं।  भारत रत्न वैसे तो योग्य लोगों को ही मिलना चाहिए लकिन ठीक है ये एक ऐसा रतन है जिसके बारे में दावा किया जाता रहा है कि ये कुत्ते की पूँछ हिलाकर तूफ़ान खड़ा कर सकता है। देखते रहिये ये मेरा दावा है कि मोदी के अंगीठी पर बैठी बुर्कानशीं कांग्रेस के पेट चाय जरूर खौलेगी साथ ही कुत्ते की पूंछ से काग्रेस को हवा देने वाले ददुआ छाप नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री के पेट में भी … पता नहीं उनके पेट राजनीति का कूदता चूहा जिन्दा बचेगा या नहीं ….

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