Saturday, 27 July 2013

कैटल क्लास

कुक्कुरमुत्ता ( मशरूम ) खा कर खुद को कैटल क्लास से ऊपर उड़ने वाले शशि थरूर के पार्टी की इकॉनमी का हाल ठीक वैसे ही है जैसे किसी बकलोल के हाथ सांड़ का पगहा पकड़ा दिया जाए। वैसे सांड़ के सींग भी काफी बड़े - बड़े है लिहाजा डर तो स्वाभविक ही है। वैसे तो दो बकलोल है जो सांड़ को सँभालने की कोशिश कर रहे है एक बकलोल "बबुआ बिरादरी" का है जो अंतिम बार स्कूल कब गया था किसी को याद नहीं बताते हैं कि उस समय मिड-डे-मील नहीं मिलता था लिहाजा स्कूल जाने का प्रश्न ही नहीं उठता, दूसरा बकलोल "ददुआ बिरादरी" का है जिसके बारे में कहा जाता है कि वो बेचारे स्कूल में कभी सकून से रहे ही नहीं। उघटापैंची वाला हिसाब किताब हमेशा से रहा है उनका इसीलिए जब बकलोल ददुआ को नरसिंघा जी राव ले के आए तो इनके हल्के कण्ट्रोल वाला सांड़ ने देश पर घोटाला छाप डकैती फिर शुरू कर दिया फिर तो सिलसिला ही चल पड़ा यूरिया डकैती, चीनी डकैती, गेहूं डकैती … आदि आदि।  अब "बकलोल ददुआ" फुल फ्लेज़ में कुक्कुरमुत्ता (मशरूम) खा के 9 साल से हैं, इस 9 साल में तो बकलोल ददुआ ने देश को बिलकुल कैटल क्लास बना के रख दिया है। बकलोल बबुआ के मम्मी के नेतृत्व में इनके सांड़ ने जो घोटालों के नाम पर जो डकैती मचाई है उसे तो देख कर बड़े-बड़े अहिसक भी हिंसा पर उतारू हो जाएँ जैसे महाभारत में भगवान् कृष्ण ने प्रतिज्ञा करने बावजूद भीष्म पितामह के विरुद्ध सुदर्शन चक्र उठा लिया था। खैर बात वही है कि कैटल क्लास खाता क्या है, कितना खर्च करता है अपनी खुराकी पर …? वैसे तो सैटेलाइट का जमाना है जो धरती पर खड़े हो कर नहीं दिखत वो अंतरिक्ष से साफ दिख जाता है शायद इसीलिए "बकलोल ददुआ" के सांड़ ने घोटाले के माध्यम से यहाँ भी डकैती डाली कि लोगों को वास्तविकता ही न दिखे कि लोग क्या खाते हैं और उस पर कितना खर्च करते हैं। लेकिन भला हो थरूर जी का जो समाज सेवा के नाम अंतरिक्ष में न जा कर वायुमंडल से ही कम से कम कैटल क्लास का मुद्दा तो उठाया अब "बकलोल बबुआ" और "बकलोल ददुआ" के भेजे में कुछ घुसे तबतो लम्पट का तीर दिल पर लगे।  पता नहीं कैसे लोग इस सनकी सांड़ के घोटाला छाप डकैती के बाद कुछ बचने की उम्मीद करते हैं इसीलिए इस सनकी सांड़ के एक और पगहेदार ने कहा कि 5 रूपया में भी खाना मिलाता है मुझे तो बड़ा अच्छा लगा कि चलो कम से कम लोगो के लिए पार्लियामेंट के कैंटीन में खाने की व्यवस्था हो गयी लेकिन सत्यानाश जाए उसका जिसने नियत का "हवाला" दे दिया और कह दिया मने कैटल तो चरते ही रहते है अब चरने में कुक्कुरमुत्ता (मशरूम) भी मिल सकता है और कुक्कुर की हड्डी भी कई पैसा थोड़े न मांगता है फ़ोकट में चरते है कैटल क्लास वाले। उनको 5 रूपया मिले तो अमीर 35 मिले तो इतना अमीर कि यकीन मानिये वो किसी बोफोर्स, 2जी, कोयला, हेलीकाप्टर आदि के आदर्श घोटाला छाप डकैती के खजाने से कम नहीं, वो तो इतना पैसा देख के ही पगला जाएगा फिर खाएगा क्या …पागल बन के घूमेगा …या खाए बौराए जग या पाए बौराए …। घूमेगा तो सनकी सांड़ फिर उसके पीछे पड़ेगा …जिसको दो-तीन बकलोल बबुआ-ददुआ और … सँभालने की कोशिश करेंगे …तमाशा देखने लायक चीज है क्या ???? 

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