सेकुलर टोपोरी भाई की लुगाई भाग गयी और टोपोरी भाई पहुँच गए हलवाई के पास शिकायत करने … गाँव वाले बताते हैं कि सेकुलर टोपोरी भाई ने बड़ी मुश्किल से किसीसे अंडा उधार में खाया था जिसके बलबूते लुगाई को हथिया पाए थे लेकिन हथियाई हुई प्राणी भी अक्सर हाथा-पाई पर उतारू हो जाती है सो सेकुलर टोपोरी भाई बहुत संभल कर चलने की कोशिश कर रहे थे लेकिन लुगाई के दिल जीतना तो दूर उलटे टोपोरी भाई लुगाई के आँखों का कांटा बन चुके थे सो जब उनकी लुगाई भाग गयी तो पहलवान छाप हलवाई से शिकायत करने लगे। खैर टोपोरी भाई के पास कुछ खास तो बचा नहीं था लिहाजा अपना मुह ऊपर करके हुआं-हुआं करके चिल्ल पों मचाए हुए हैं। और हलवाई है कि शुद्ध व्यापारी जहाँ से उसे मुनाफा दिखेगा वो वहां पर जाएगा चाहे कोई कुछ भी कर ले कितना भी चिल्ल पों मचा ले। लेकिन सेकुलर टोपोरी भाई हैं कि कहते हैं कि तुम्हारी मिठाई वही खरीदेगा और खाएगा जिसको हम चाहेंगे। अब वो हलवाई न हुआ सेकुलर टोपोरी भाई का लुगाई हो गया। मैंने सेकुलर टोपोरी भाई से उसकी लुगाई के बारे में पूछा तो कहने लगे "...लुगाई ने हमारी इज्जत और जिन्दगी पर ही बट्टा लगा दिया …" मैंने कहा "… इसमें तो गलती आपकी ही है …" टोपोरी भाई चीखते हुए बोले "… जिसने भी ऐसा किया है उसको हम कहीं का नहीं छोड़ेंगे …" मैंने शांति से कहा "… आपके कहने मतलब क्या है …?" टोपोरी भाई उसी चीखती हवेली वाले अंदाज में कहा "…जिसने भी ऐसा किया है उसको दुनिया में कहीं भी शांति नहीं मिलेगी …" मैंने फिर पूछा "…आप साफ-साफ़ कहिये कहना क्या चाहते है आप … ?" टोपोरी भाई ने उसी गुस्से में कहा "… उसको दुनिया में कहीं का भी वीसा नहीं मिलेगा …" मैंने ठीक उसी विषय पर सवाल करते हुए पूछा "… अगर कही मिल गया तो …!" टोपोरी भाई ने उत्तर देते हुए कहा "…हम ऐसा कभी होने नहीं देंगे …" मैंने फिर पूछा "… अगर कहीं हो गया तो …" टोपोरी भाई उलटे मुझसे ही पूछते हुए बोले "…आपका क्या इरादा है ऐसे व्यक्ति को चैन मिलना चाहिए …?" मैंने कहा "…बात वीसा की नहीं आपके लुगाई की है जो आपके करतूतों से बहुत दुखी थी …" टोपोरी भाई बोले "…आपको उसका पक्ष लेने का कोई हक़ नहीं है …" मैंने पूछा "… वो क्यों भला…?" टोपोरी भाई बोले "…उसपर मेरा हक़ था…" मैंने कहा "…तो इससे वीसा से क्या लेना-देना …?" टोपोरी भाई ने उत्तर देते हुए बोला "…आपको नहीं पता लुगाईयों के बारे में वो बहुत चालबाज होती हैं …" मैंने आश्चर्य से पूछा "… इस जुमले का क्या मतलब … ?" टोपोरी भाई ने बड़ी बेचैनी से जवाब दिया "…यही तो एक सहारा था लेकिन अब उसका सहारा हो गया …" मैंने चुटकी लेते हुए कहा "…और इसी के सहारे उसने आपको लात मार के चल दिया …" टोपोरी भाई थोड़ा रुआंसा हो कर बोले "… इसके लिए मैंने पहले से व्यवस्था कर रही थी …" मैंने कहा "…उधार की पहलवानी हमेशा धोखा देती है …" टोपोरी भाई ने कहा "…अगर कही वीसा मिल गया तो बड़ी मुसीबत हो जाएगी …" मैंने जिज्ञासावश पूछा "… वो कैसे …?" सेकुलर टोपोरी भाई बोले "…मेरे जैसे सभी लोगों की लुगाइयां पता नहीं क्या करेंगी …?" मैंने भी दुखी आत्मा सेकुलर टोपोरी भाई से कुछ पूछा नहीं …नमस्कार करके चल दिया।
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