Thursday, 18 July 2013

कांग्रेस बगावत के बारूद पर

कांग्रेस बगावत के बारूद पर

क्या आपको लगता है कि खांटी कांग्रेसी नेता जयराम रमेश ने यूँ ही या स्वस्थ विश्लेषण करते हुए नरेन्द्र भाई मोदी की तारीफ करने के बाद आलोचना करते हुए उन्होंने भास्मसुर कहा था ? शायद आपको ये विश्वास करना मुश्किल हो लेकिन ये सच है कि इस समय कांग्रेस बहुत बड़ी मुसीबत में है इस समय कांग्रेस बगावत के बारूद पर है जिसमे कभी भी विस्फोट हो सकता है। आधे से अधिक कांग्रेसी सांसद दरअसल अपनी मानसिकता बना चुके हैं कि किसी सम्मानजनक तरीके से कांग्रेस को नेहरू परिवार से मुक्त कर दिया जाए लेकिन मुसीबत ये है कि फिर ये लोग जाएँगे कहाँ ? जयराम रमेश ने नरेन्द्र मोदी को भस्मासुर अपने काग्रेस के ही सन्दर्भ में कहा था उनका सीधा मतलब था कि जिस कांग्रेस ने पिछले दस वर्षों से मोदी की आलोचना कर-कर उनको हीरो बना दिया पता नहीं उस समय कांग्रेस किस रणनीति के तहत ऐसा किया था लेकिन नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस के सभी हमलों को अपने लिए अवसर में न सिर्फ बदला बल्कि गुजरात में कांग्रेस को जमीदोज भी कर दिया। वास्तव में जयराम रमेश अपने कांग्रेस को ही कह रहे थे कि मोदी के खिलाफ ये रणनीति ही खुद कांग्रेस के लिए भस्मासुर है जो साबित भी गया।

ये बहुत बड़े बगावत का संकेत है कि कांग्रेस के अन्दर ही खाद्य सुरक्षा बिल को लेकर असहमति है उसके पीछे कारण ये है कि खुद कांग्रेसी नेता ही नहीं चाहते कि ये बिल पास हो कारण साफ़ है यदि ये बिल पास हो जाता है तो उसे लागू करवा पाना नामुमकिन है जिसका खामियाजा कांग्रेस को लोकसभा चुनावों में भुगतना निश्चित है लेकिन कांग्रेस आलाकमान की मजबूरी ये है यदि इसे बढ़ा-चढ़ा गेम चेंजर बता कर पेश नहीं किया गया तो बगावत निश्चित है लिहाजा आध्यादेश का सहारा लिया गया। आध्यादेश का सहारा वोट लेने के उद्देश्य से नहीं बल्कि बगावत रोकने के उद्देश्य से लिया गया है। खुद कांग्रेस के 20 मुख्यमंत्रियों ने इसे लागू करने से इनकार कर दिया है। वो दरअसल एक तीर से दो निशाने करना चाहते हैं एक तो इसका बोझ नहीं उठाना चाहते दूसरे वो कांग्रेस को सोनिया-राहुल परिवार से मुक्त भी करना चाहते हैं उनको पता है कि इस समय राहुल और सोनिया का करिश्मा समाप्त ही नहीं हो गया है बल्कि एक बहुत बड़े और खतरनाक खलनायक के रूप में भी देखा जा रहा है प्रचार में कहीं भी जाएँगे तो मिलने वाले वोट भी शयद न मिलें। यही कारण है राहुल गांधी को कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री पद उम्मीदवार घोषित नहीं किया जा रहा है। वास्तव में बड़ी संख्या में कांग्रेसी ही नहीं चाहते कि अब इस परिवार का सहारा लेना कहीं से भी उचित है। इस सन्दर्भ में तो कुछ कांग्रेसी नेता तो ऑफ़ दी रिकॉर्ड खुल के कहने भी लगे हैं।

हालाँकि नितीश कुमार का एनडीए से अलग होना उनका मकसद नहीं था मकसद सिर्फ इतना था कि मोदी को किसी भी तरह रोको लेकिन वो सफल नहीं हुए दरअसल इसके पीछे भी कांग्रेस की ही चाल थी मोदी के लोकप्रिय होने का सीधा मतलब ये भी है कांग्रेस में बगावत जो अभी तो धीरे-धीरे सामने आ रहा है लेकिन विस्फोट कभी भी हो सकता है। नितीश कुमार ने अपने कदम कांग्रेस की ओर बढाने से पहले इसलिए रोक लिए क्योंकि कांग्रेस पार्टी के भविष्य को लेकर ही बहुत बड़ा संशय खड़ा हो गया है सरकार बनाना न बनाना अलग बात है। यही कारण कि  नितीश के एनडीए से अलग होने से पहले तीसरे मोर्चे का मुद्दा जानबूझ कर उछाला गया था कि यदि कांग्रेस में बगावत होती है तो मजबूत विकल्प के रूप में तीसरा मोर्चा सामने दिखे लेकिन फिलहाल कांग्रेस आलाकमान ने सीबीआई का डर दिखा कर इस बगावत को किसी तरह रोका हुआ है। इसीलिए इस समय तीसरे मोर्चे का मुद्दा परिदृश्य से गायब है।

कांग्रेस में बगावत के सुर इतने प्रखर होते जा रहे हैं कि अब इसे दबा पाना भी कांग्रेस के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है इसलिए किसी भी प्रकार कांग्रेस की ओर ये प्रयास किया जा रहा है कि मीडिया और लोगों का ध्यान कही से भी इस ओर न आने पाए। इसी कड़ी में उन्होंने भाजपा के उस मुस्लिम नेता आमिर रजा हुसैन को तोड़ लिया जिसने मात्र दो महीने पहले ही भाजपा की सदस्यता ली थी और बकायदे इसे मीडिया पर प्रमुखता से प्रचारित किया गया था।

वैसे जानकार बताते हैं कि कांग्रेस के लिए अब बगावत को रोक पाना बहुत मुश्किल है क्योंकि मोदी को किसी भी स्तर पर कम से कम अब रोक पाना संभव नहीं लगता दंगों वाले मामलों में तो मुँह की खा चुकने के बाद बड़ी कोशिश की गयी कि इशरतजहाँ मामले में फ़साने की लेकिन इसमें भी मोदी को फसा पाना नामुमकिन ही है क्योंकि जो पेंच फंस रहा है उसमे पहले चिदम्बरम और प्रधानमंत्री कार्यालय ही फंसता नजर आ रहा है कानून के जानकारों के मुताबिक ये बिलकुल स्पष्ट है किसी खास और गंदी मंशा के तहत हलफनामा बदला गया और फिर आईबी ने नोट भी लीक कर दिया है जिससे इशरतजहाँ के आतंकवादी होने के प्रमाण को छिपा पाना असंभव हो गया है। इससे चिदंबरम के खिलाफ दोहरा तिहरा मामला भी बनता दिख रहा है। कांग्रेस के लिए ये मुसीबत अलग से है।

अब ये देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस आलाकमान अपनी पार्टी में बगावत को रोकने कैसे सफल होती हैं सीबीआई के डर से या किसी और डर से ....               

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