बकलोल बबुआ लन्दन से आये तो खांटी भाई लोग वोट बैंक के हेलीकाप्टर से राहत उड़ाने में मस्त थे उनको तो लगा जैसे मुँह मांगी मुराद ही मिल गयी। बबुआ को ट्रक चलाने आता है या नहीं मुझे नहीं पता लेकिन ट्रक पर फोटो लगा कर चलना जरूर आता है। एक खांटी भाई मुझे बता रहे थे कि "...देखिये उनके लन्दन से आते ही कैसे माहौल बदल गया .." मैंने कहा "...हाँ बदल तो गया बकलोल बबुआ इतना शुभ है कि आते ही बेचारे 20 देवदूतों को आहुति देनी पड़ी ... हेलीकाप्टर ही क्रैश हो गया ..." खांटी बोले "...देखिये वो तकनीकि खराबी के कारण हुई थी ..." मैंने भी थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए कहा "...लेकिन विशेषज्ञों की राय में तो वो काफी नीची उड़ान थी मौसम खराब हो गया था ..." खांटी साहब बोले "...वही तो पायलट को ठीक से उडाना चाहिए था ..." मैंने कहा "...बकलोल बबुआ जिस समय थे उस समय तो मौसम साफ़ था वो नहीं आया होता तो क्रैश नहीं हुआ होता ..." खांटी बोले "...देखिये उनका जाना जरूरी था इसलिए सारे हेलीकाप्टरों की उड़ान रोक दी गयी थी ..." मैंने उन्हें सुझाव देते हुए कहा "...उनको राहत सामग्री लेकर जाना चाहिए था ..." वो तड़ाक से उत्तर देते हुए बोले "...वो रैम्बो थोड़े ही हैं जो रहत सामग्री लेकर जाएँगे ..." मैंने कहा "...ठीक है तो फिर देश को भी रैम्बो लोगों के हवाले ही कर देना चाहिए ..." उन्होंने तपाक से पूछा "...वो क्यों भला ..." मैंने उत्तर देते हुए कहा "....कम से कम लोग बेमौत मरेंगे तो नहीं ..." वो थोड़ा गुस्से में बोले "....आपका मतलब ये प्राकृतिक आपदा नहीं थी ...?" मैंने बिलकुल ठन्डे दिमाग से उत्तर देते हुए कहा "...बिलकुल नहीं जी ये विशुद्ध रूप से सरकारी आपदा थी जिसे प्रायोजित किया गया था ..." वो मुझे समझाते हुए बोले "...देखिये आपका गुस्सा जायज है लेकिन ..." मैंने बीच में ही बात काटते हुए कहा "...लेकिन क्या ...आपको तो आपदा, विपदा और त्रासदी में फर्क भी नहीं पता ..." वो अटकते हुए बोले "...हम लोगों को राहुल जी के मार्गदर्शन की बहुत जरूरत है ..." मैंने गंभीरता से कहा "...इसी लिए 50% आरक्षण की बात की जा रही है ..." वो बोले "...ये पार्टी का नीतिगत मामला है ..." मैंने कहा "....आपके बकलोल बबुआ कब से नीतिगत मामलों में दिलचस्पी दिखने लगे वैसे किस नीति के तहत 135 ट्रकों के साथ भूखे-प्यासे ड्राईवर ऋषिकेश में कई दिनों से मर रहे हैं ..." वो बोले "...देखिये उनके लिए भी राहत सामग्री भेजने का बंदोबस्त किया जा रहा है ..." मैंने उनसे सवाल किया "...ये भी बकलोल बबुआ का ही नीतिगत मामला है और ट्रक-ड्राईवरों उनका मार्गदर्शन मिला ही नहीं ..." उन्होंने उत्तर देते हुए कहा "...आपका आरोप बेबुनियाद है ..." मैंने कहा "...हाँ इसीलिए 6 दिनों तक उन ड्राईवरों के आँख पर पट्टी बांध कर दिल्ली में रोक कर रखा गया था कि बकलोल बबुआ जब लन्दन से आवेंगे मार्गदर्शन देंगे तो ये ट्रक वाले राहत ले कर जाएँगे ..."वो बोले "...आप समझा कीजिये मार्गदर्शन बहुत जरूरी है ..." मैंने खांटी साहब से पूछा "...उनके आते ही चीयर लीडरई क्यों शुरू हो गयी ...?" उन्होंने उत्तर देते हुए कहा "...लोकसभा चुनाव भी सर पर हैं क्या करें ..." मेरे पास खांटी साहब से कुछ और पूछना जरूरी नहीं लगा सो मैंने उन्हें नमस्कार करके विदा लिया .....
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