Monday, 29 July 2013

सेन साहब

इस उमस भरी गर्मी में शशि थरूर के कैटल क्लास जिसे उनकी पार्टी बिना गुठली का आम आदमी समझती है, का पसीना छूटा जा रहा है। वो तो खैर कुक्कुरमुत्ता-पुत्र (पाटलीपुत्र की तर्ज पर) बने घूम रहे हैं लेकिन उनके ही लोग बताते हैं कि उनकी पार्टी का गर्मी के मारे कैटल क्लास से कहीं ज्यादा बुरा हाल है। यही कारण है कि ठन्डे देश के रहने वाले खानाबदोश अर्थशास्त्री जो बकलोल ददुआ छाप ही लगते हैं, बुलाया है। अब बेचारे उनसे कहा गया कि इस उमस भरी गर्मी में गर्मी कम करने का ठोस उपाय करें अब ददुआ छाप नोबेल पुरस्कार विजेता पकड़ लाए कुत्ता और कुत्ते की पूंछ पकड़ कर उसी से हवा झलने लगे, पूरी की पूरी कांग्रेस उनके प्रयास से ही हवा खा रही है फिर भी पार्टी है कि ठंडी होने का नाम नहीं ले रही। बड़ी परेशानी है इतने प्रयास के बाद भी गर्मी बढ़ती ही जा रही है।  मुसीबत तो तब और खड़ी हो गयी जब उस गर्मी की आंच खुद ददुआ छाप अर्थशास्त्री पर पड़ने लगी बहुत-बहुत कल्याणकारी बौछार उस कुत्ते के माध्यम से करने का प्रयास किया लेकिन सब पश्चिम बंगाल की तर्ज पर गाल बजाने जैसा ही था सो नया कल्याणकारी बौछार करने के लिए उस कुत्ते को फिर तैयार किया गया अब बगल के बिहार की सिंचाई हो रही है लेकिन गर्मी है कि फिर भी कम नहीं होने का नाम ही नहीं ले रही। कांग्रेसी भाई लोग बैठना तो कहीं और चाहते थे लेकिन मजबूरी में बैठना पड़ा वहां जहाँ वो किसी भी कीमत जाना ही नहीं चाहते थे। ददुआ छाप अर्थशास्त्री के आने के पहले से ही यह सब हो रहा है या उनके आने के बाद पता नहीं लेकिन पूरी की पूरी कांग्रेस नरेन्द्र भाई मोदी के अंगीठी पर बैठ कर बकलोल बबुआ की तरह अंगूठा चूस रही है। कुत्ते की पूंछ से कांग्रेस पार्टी के लिए हवा झलने वाले ददुआ छाप अर्थशास्त्री ने पूछा कि तैयारी क्यों नहीं करते तो उसी बकलोल बबुआ के आदेश पर पूरी कांग्रेस ने दोहराया कि तैयारी तो कर रहे हैं पूरी कांग्रेस पानी, दूध, चीनी, चायपत्ती और भी बहुत कुछ घोंट कर (सभी लोग इसे भी घोंटाला भी कह रहे हैं ) नरेन्द्र भाई मोदी के अंगीठी पर बैठ गयी है। सभी को ये पूरी उम्मीद है पेट में ही चाय जरूर बन जाएगी क्योंकि बकलोल बबुआ का डरावना आदेश है सो अग्नि देवता को भी अपना नियम बदलना पड़ेगा। अब पता नहीं अग्नि देवता अपना नियम बदलेंगे, नहीं बदलेंगे या फिर पता नहीं क्या करेंगे लेकिन ये तो तय है कि कांग्रेसी घपले के लिए पिछली बार की तरह इस बार कोई नियम नहीं बदलने वाला सो  ददुआ बिरादरी के अर्थशास्त्री के भी पेट में ही चाय जरूर बन जाएगी। बड़ी उम्मीद है कुत्ते की पूँछ की हवा से बकलोल बबुआ और उनकी मम्मी के पक्ष में हवा बनेगी, लहर चलेगी और न जाने क्या - क्या लेकिन ऐसा कुछ होना तो दूर उलटे और हवा खराब हो गई नरेन्द्र भाई मोदी के लहर में ऐसा फंसे हैं कि येन - सेन - प्रकारणेन जान बचाने के लाले पड़ने लगे हैं।  भारत रत्न वैसे तो योग्य लोगों को ही मिलना चाहिए लकिन ठीक है ये एक ऐसा रतन है जिसके बारे में दावा किया जाता रहा है कि ये कुत्ते की पूँछ हिलाकर तूफ़ान खड़ा कर सकता है। देखते रहिये ये मेरा दावा है कि मोदी के अंगीठी पर बैठी बुर्कानशीं कांग्रेस के पेट चाय जरूर खौलेगी साथ ही कुत्ते की पूंछ से काग्रेस को हवा देने वाले ददुआ छाप नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री के पेट में भी … पता नहीं उनके पेट राजनीति का कूदता चूहा जिन्दा बचेगा या नहीं ….

Saturday, 27 July 2013

कैटल क्लास

कुक्कुरमुत्ता ( मशरूम ) खा कर खुद को कैटल क्लास से ऊपर उड़ने वाले शशि थरूर के पार्टी की इकॉनमी का हाल ठीक वैसे ही है जैसे किसी बकलोल के हाथ सांड़ का पगहा पकड़ा दिया जाए। वैसे सांड़ के सींग भी काफी बड़े - बड़े है लिहाजा डर तो स्वाभविक ही है। वैसे तो दो बकलोल है जो सांड़ को सँभालने की कोशिश कर रहे है एक बकलोल "बबुआ बिरादरी" का है जो अंतिम बार स्कूल कब गया था किसी को याद नहीं बताते हैं कि उस समय मिड-डे-मील नहीं मिलता था लिहाजा स्कूल जाने का प्रश्न ही नहीं उठता, दूसरा बकलोल "ददुआ बिरादरी" का है जिसके बारे में कहा जाता है कि वो बेचारे स्कूल में कभी सकून से रहे ही नहीं। उघटापैंची वाला हिसाब किताब हमेशा से रहा है उनका इसीलिए जब बकलोल ददुआ को नरसिंघा जी राव ले के आए तो इनके हल्के कण्ट्रोल वाला सांड़ ने देश पर घोटाला छाप डकैती फिर शुरू कर दिया फिर तो सिलसिला ही चल पड़ा यूरिया डकैती, चीनी डकैती, गेहूं डकैती … आदि आदि।  अब "बकलोल ददुआ" फुल फ्लेज़ में कुक्कुरमुत्ता (मशरूम) खा के 9 साल से हैं, इस 9 साल में तो बकलोल ददुआ ने देश को बिलकुल कैटल क्लास बना के रख दिया है। बकलोल बबुआ के मम्मी के नेतृत्व में इनके सांड़ ने जो घोटालों के नाम पर जो डकैती मचाई है उसे तो देख कर बड़े-बड़े अहिसक भी हिंसा पर उतारू हो जाएँ जैसे महाभारत में भगवान् कृष्ण ने प्रतिज्ञा करने बावजूद भीष्म पितामह के विरुद्ध सुदर्शन चक्र उठा लिया था। खैर बात वही है कि कैटल क्लास खाता क्या है, कितना खर्च करता है अपनी खुराकी पर …? वैसे तो सैटेलाइट का जमाना है जो धरती पर खड़े हो कर नहीं दिखत वो अंतरिक्ष से साफ दिख जाता है शायद इसीलिए "बकलोल ददुआ" के सांड़ ने घोटाले के माध्यम से यहाँ भी डकैती डाली कि लोगों को वास्तविकता ही न दिखे कि लोग क्या खाते हैं और उस पर कितना खर्च करते हैं। लेकिन भला हो थरूर जी का जो समाज सेवा के नाम अंतरिक्ष में न जा कर वायुमंडल से ही कम से कम कैटल क्लास का मुद्दा तो उठाया अब "बकलोल बबुआ" और "बकलोल ददुआ" के भेजे में कुछ घुसे तबतो लम्पट का तीर दिल पर लगे।  पता नहीं कैसे लोग इस सनकी सांड़ के घोटाला छाप डकैती के बाद कुछ बचने की उम्मीद करते हैं इसीलिए इस सनकी सांड़ के एक और पगहेदार ने कहा कि 5 रूपया में भी खाना मिलाता है मुझे तो बड़ा अच्छा लगा कि चलो कम से कम लोगो के लिए पार्लियामेंट के कैंटीन में खाने की व्यवस्था हो गयी लेकिन सत्यानाश जाए उसका जिसने नियत का "हवाला" दे दिया और कह दिया मने कैटल तो चरते ही रहते है अब चरने में कुक्कुरमुत्ता (मशरूम) भी मिल सकता है और कुक्कुर की हड्डी भी कई पैसा थोड़े न मांगता है फ़ोकट में चरते है कैटल क्लास वाले। उनको 5 रूपया मिले तो अमीर 35 मिले तो इतना अमीर कि यकीन मानिये वो किसी बोफोर्स, 2जी, कोयला, हेलीकाप्टर आदि के आदर्श घोटाला छाप डकैती के खजाने से कम नहीं, वो तो इतना पैसा देख के ही पगला जाएगा फिर खाएगा क्या …पागल बन के घूमेगा …या खाए बौराए जग या पाए बौराए …। घूमेगा तो सनकी सांड़ फिर उसके पीछे पड़ेगा …जिसको दो-तीन बकलोल बबुआ-ददुआ और … सँभालने की कोशिश करेंगे …तमाशा देखने लायक चीज है क्या ???? 

Thursday, 25 July 2013

ऐसे कुत्ते को

ऐसे कुत्ते को क्या कहा जाए जो नरेन्द्र भाई मोदी के कार के नीचे आ कर आत्महत्या करने को आतुर हो किसको दोष देंगे लेकिन ये तो अपना फर्ज ही है कि दुःख होता है  लेकिन दुःख से जिन्दगी नहीं चलती। कहते है तिलचट्टे की मौत आती है तो वो उड़ने लगता है भ्रष्ट खटारा कांग्रेस की दिग्गी में उड़ने वाले तिलचट्टों को ही पनाह मिलती रहती है। पनाह पाने वालों तिलचट्टों को भी वही गन्दगी बड़ी रास आती है जब उल्टा लोटे से पानी पीने वाले पानी पी हुआँ-हुआँ की भयानक आवाज सिर्फ इसलिए निकालते हैं कि दुर्गन्ध के साथ ध्वनि के प्रभाव को भी मिश्रित किया जा सके। वैसे भी भ्रष्ट खटारा कांग्रेस से धुआं के बजाय हुआँ-हुआँ ही अधिक निकाल रहा है। कुछ लोग जब आपत्ति करते हैं तो खटारा कांग्रेस के दिग्गी से भयानक बास छोड़ दिया जाता है लोग तो अपनी नाक तो बंद कर लेते हैं लेकिन तिलचट्टे खुश हो जाते हैं चलो कोई तो है जहाँ पनाह मिल सकती है। लेकिन हद तो तब हो जाती है जब इसी भयानक दुर्गन्ध से नाक से खून निकलने लगता है। मैंने इस पर खांटी भाई कांग्रेसी से पूछा तो कहने लगे "…लोगों को बुर्का पहन कर आना चाहिए …" मैंने कहा "… जैसाकि आप हमेशा करते रहते है … " खांटी भाई ने कहा "… सवाल ये है लोगों को बुरी चीज़ दिखनी नहीं चाहिए … " मैंने आश्चर्य से पूछा "… बुरी चीज बुर्के में छिप तो जाएगी लेकिन लेकिन दिग्गी की भयानक बदबू …" खांटी भाई बोले "…लगता है आपको मोबाइल में कॉल डाइवर्ट करना नहीं आता …" मैंने कहा "… आपके बकलोल बबुआ यही सब हाई टेक उघटापैंची सीखने हमेशा के लिए विदेश के दौरे पर रहते हैं …" खांटी भाई बोले "…आपको उनके बारे में नहीं पता …" मैंने कहा "…अब पता चल गया है कि उनके क्लास लेने के बाद उनके इशारे पर कुत्ते भी बैक गियर में दौड़ने लगते हैं…." खांटी भाई को मेरा उत्तर थोड़ा नागवार गुजरा कहा "…वो बैक गियर नहीं होता … " मैंने पूछा "…फिर …" खांटी भाई बोले "… उनकी क्षमता बढ़ जाती है … " मैंने कहा "…भयानक दुर्गन्ध छोड़ कर तिलचट्टे पकड़ने की बड़ी नायब टेक्नोलाजी … इटली की है क्या …" खांटी भाई थोड़ा भड़क गए बोले "…आप लोग हर चीज़ में इटली क्यों दिखाई देता है … ?" मैंने उत्तर देते हुए कहा "…आपकी भ्रष्ट खटारा कांग्रेसी ब्रिटिश गाड़ी को भी दौडाने के लिए बहुत जबरदस्त लल्लनटॉप एक्सपर्ट की जरूरत होती है …वैसे भी रेसर करों के लिए इटली मशहूर है … " खांटी भाई बोले "…इससे क्या साबित होता है … ?" मैंने कहा "…वही चाहे जैसे भी हो बास मार के तिलचट्टों को इकठ्ठा करो …" खांटी भाई बोले "…आप लोगों को हर चीज में नुक्ताचीनी करते की आदत है … " मैंने कहा "…आपकी भ्रष्ट खटारा ब्रिटिश कांग्रेसी गाड़ी के में दिग्गी के नुक्ते को …" खांटी भाई बीच में ही बात काटते हुए बोले "…आप लोग जिस चीज की उम्मीद करते हैं वो होने वाला नहीं है …" मैंने कहा "…क्यों आपके बकलोल बबुआ उसी दिग्गी में बैठ कर तिलचट्टों को भी ट्रेनिंग देंगे क्या …?" खांटी भाई कपार खाजुआने लगे कुछ बोले नहीं …मैंने भूलवश बिना नमस्कार किये विदा लिया …       

Wednesday, 24 July 2013

टोपोरी भाई की लुगाई

सेकुलर टोपोरी भाई की लुगाई भाग गयी और टोपोरी भाई पहुँच गए हलवाई के पास शिकायत करने … गाँव वाले बताते हैं कि सेकुलर टोपोरी भाई ने बड़ी मुश्किल से किसीसे अंडा उधार में खाया था जिसके बलबूते लुगाई को हथिया पाए थे लेकिन हथियाई हुई प्राणी भी अक्सर हाथा-पाई पर उतारू हो जाती है सो सेकुलर टोपोरी भाई बहुत संभल कर चलने की कोशिश कर रहे थे लेकिन लुगाई के दिल जीतना तो दूर उलटे टोपोरी भाई लुगाई के आँखों का कांटा बन चुके थे सो जब उनकी लुगाई भाग गयी तो पहलवान छाप हलवाई से शिकायत करने लगे। खैर टोपोरी भाई के पास कुछ खास तो बचा नहीं था लिहाजा अपना मुह ऊपर करके हुआं-हुआं करके चिल्ल पों मचाए हुए हैं। और हलवाई है कि शुद्ध व्यापारी जहाँ से उसे मुनाफा दिखेगा वो वहां पर जाएगा चाहे कोई कुछ भी कर ले कितना भी चिल्ल पों मचा ले। लेकिन सेकुलर टोपोरी भाई हैं कि कहते हैं कि तुम्हारी मिठाई वही खरीदेगा और खाएगा जिसको हम चाहेंगे। अब वो हलवाई न हुआ सेकुलर टोपोरी भाई का लुगाई हो गया। मैंने सेकुलर टोपोरी भाई से उसकी लुगाई के बारे में पूछा तो कहने लगे "...लुगाई ने हमारी इज्जत और जिन्दगी पर ही बट्टा लगा दिया …" मैंने कहा "… इसमें तो गलती आपकी ही है …" टोपोरी भाई चीखते हुए बोले "… जिसने भी ऐसा किया है उसको हम कहीं का नहीं छोड़ेंगे …" मैंने शांति से कहा "… आपके कहने मतलब क्या है …?" टोपोरी भाई उसी चीखती हवेली वाले अंदाज में कहा "…जिसने भी ऐसा किया है उसको दुनिया में कहीं भी शांति नहीं मिलेगी …" मैंने फिर पूछा "…आप साफ-साफ़ कहिये कहना क्या चाहते है आप … ?" टोपोरी भाई ने उसी गुस्से में कहा "… उसको दुनिया में कहीं का भी वीसा नहीं मिलेगा …" मैंने ठीक उसी विषय पर सवाल करते हुए पूछा "… अगर कही मिल गया तो …!" टोपोरी भाई ने उत्तर देते हुए कहा "…हम ऐसा कभी होने नहीं देंगे …" मैंने फिर पूछा "… अगर कहीं हो गया तो …" टोपोरी भाई उलटे मुझसे ही पूछते हुए बोले "…आपका क्या इरादा है ऐसे व्यक्ति को चैन मिलना चाहिए …?" मैंने कहा "…बात वीसा की नहीं आपके लुगाई की है जो आपके करतूतों से बहुत दुखी थी …" टोपोरी भाई बोले "…आपको उसका पक्ष लेने का कोई हक़ नहीं है …" मैंने पूछा "… वो क्यों भला…?" टोपोरी भाई बोले "…उसपर मेरा हक़ था…" मैंने कहा "…तो इससे वीसा से क्या लेना-देना …?" टोपोरी भाई ने उत्तर देते हुए बोला "…आपको नहीं पता लुगाईयों के बारे में वो बहुत चालबाज होती हैं …" मैंने आश्चर्य से पूछा "… इस जुमले का क्या मतलब … ?" टोपोरी भाई ने बड़ी बेचैनी से जवाब दिया "…यही तो एक सहारा था लेकिन अब उसका सहारा हो गया …" मैंने चुटकी लेते हुए कहा "…और इसी के सहारे उसने आपको लात मार के चल दिया …" टोपोरी भाई थोड़ा रुआंसा हो कर बोले "… इसके लिए मैंने पहले से व्यवस्था कर रही थी …" मैंने कहा "…उधार की पहलवानी हमेशा धोखा देती है …" टोपोरी भाई ने कहा "…अगर कही वीसा मिल गया तो बड़ी मुसीबत हो जाएगी …" मैंने जिज्ञासावश पूछा "… वो कैसे …?" सेकुलर टोपोरी भाई बोले "…मेरे जैसे सभी लोगों की लुगाइयां पता नहीं क्या करेंगी …?" मैंने भी दुखी आत्मा सेकुलर टोपोरी भाई से कुछ पूछा नहीं …नमस्कार करके चल दिया।                 

Thursday, 18 July 2013

कांग्रेस बगावत के बारूद पर

कांग्रेस बगावत के बारूद पर

क्या आपको लगता है कि खांटी कांग्रेसी नेता जयराम रमेश ने यूँ ही या स्वस्थ विश्लेषण करते हुए नरेन्द्र भाई मोदी की तारीफ करने के बाद आलोचना करते हुए उन्होंने भास्मसुर कहा था ? शायद आपको ये विश्वास करना मुश्किल हो लेकिन ये सच है कि इस समय कांग्रेस बहुत बड़ी मुसीबत में है इस समय कांग्रेस बगावत के बारूद पर है जिसमे कभी भी विस्फोट हो सकता है। आधे से अधिक कांग्रेसी सांसद दरअसल अपनी मानसिकता बना चुके हैं कि किसी सम्मानजनक तरीके से कांग्रेस को नेहरू परिवार से मुक्त कर दिया जाए लेकिन मुसीबत ये है कि फिर ये लोग जाएँगे कहाँ ? जयराम रमेश ने नरेन्द्र मोदी को भस्मासुर अपने काग्रेस के ही सन्दर्भ में कहा था उनका सीधा मतलब था कि जिस कांग्रेस ने पिछले दस वर्षों से मोदी की आलोचना कर-कर उनको हीरो बना दिया पता नहीं उस समय कांग्रेस किस रणनीति के तहत ऐसा किया था लेकिन नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस के सभी हमलों को अपने लिए अवसर में न सिर्फ बदला बल्कि गुजरात में कांग्रेस को जमीदोज भी कर दिया। वास्तव में जयराम रमेश अपने कांग्रेस को ही कह रहे थे कि मोदी के खिलाफ ये रणनीति ही खुद कांग्रेस के लिए भस्मासुर है जो साबित भी गया।

ये बहुत बड़े बगावत का संकेत है कि कांग्रेस के अन्दर ही खाद्य सुरक्षा बिल को लेकर असहमति है उसके पीछे कारण ये है कि खुद कांग्रेसी नेता ही नहीं चाहते कि ये बिल पास हो कारण साफ़ है यदि ये बिल पास हो जाता है तो उसे लागू करवा पाना नामुमकिन है जिसका खामियाजा कांग्रेस को लोकसभा चुनावों में भुगतना निश्चित है लेकिन कांग्रेस आलाकमान की मजबूरी ये है यदि इसे बढ़ा-चढ़ा गेम चेंजर बता कर पेश नहीं किया गया तो बगावत निश्चित है लिहाजा आध्यादेश का सहारा लिया गया। आध्यादेश का सहारा वोट लेने के उद्देश्य से नहीं बल्कि बगावत रोकने के उद्देश्य से लिया गया है। खुद कांग्रेस के 20 मुख्यमंत्रियों ने इसे लागू करने से इनकार कर दिया है। वो दरअसल एक तीर से दो निशाने करना चाहते हैं एक तो इसका बोझ नहीं उठाना चाहते दूसरे वो कांग्रेस को सोनिया-राहुल परिवार से मुक्त भी करना चाहते हैं उनको पता है कि इस समय राहुल और सोनिया का करिश्मा समाप्त ही नहीं हो गया है बल्कि एक बहुत बड़े और खतरनाक खलनायक के रूप में भी देखा जा रहा है प्रचार में कहीं भी जाएँगे तो मिलने वाले वोट भी शयद न मिलें। यही कारण है राहुल गांधी को कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री पद उम्मीदवार घोषित नहीं किया जा रहा है। वास्तव में बड़ी संख्या में कांग्रेसी ही नहीं चाहते कि अब इस परिवार का सहारा लेना कहीं से भी उचित है। इस सन्दर्भ में तो कुछ कांग्रेसी नेता तो ऑफ़ दी रिकॉर्ड खुल के कहने भी लगे हैं।

हालाँकि नितीश कुमार का एनडीए से अलग होना उनका मकसद नहीं था मकसद सिर्फ इतना था कि मोदी को किसी भी तरह रोको लेकिन वो सफल नहीं हुए दरअसल इसके पीछे भी कांग्रेस की ही चाल थी मोदी के लोकप्रिय होने का सीधा मतलब ये भी है कांग्रेस में बगावत जो अभी तो धीरे-धीरे सामने आ रहा है लेकिन विस्फोट कभी भी हो सकता है। नितीश कुमार ने अपने कदम कांग्रेस की ओर बढाने से पहले इसलिए रोक लिए क्योंकि कांग्रेस पार्टी के भविष्य को लेकर ही बहुत बड़ा संशय खड़ा हो गया है सरकार बनाना न बनाना अलग बात है। यही कारण कि  नितीश के एनडीए से अलग होने से पहले तीसरे मोर्चे का मुद्दा जानबूझ कर उछाला गया था कि यदि कांग्रेस में बगावत होती है तो मजबूत विकल्प के रूप में तीसरा मोर्चा सामने दिखे लेकिन फिलहाल कांग्रेस आलाकमान ने सीबीआई का डर दिखा कर इस बगावत को किसी तरह रोका हुआ है। इसीलिए इस समय तीसरे मोर्चे का मुद्दा परिदृश्य से गायब है।

कांग्रेस में बगावत के सुर इतने प्रखर होते जा रहे हैं कि अब इसे दबा पाना भी कांग्रेस के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है इसलिए किसी भी प्रकार कांग्रेस की ओर ये प्रयास किया जा रहा है कि मीडिया और लोगों का ध्यान कही से भी इस ओर न आने पाए। इसी कड़ी में उन्होंने भाजपा के उस मुस्लिम नेता आमिर रजा हुसैन को तोड़ लिया जिसने मात्र दो महीने पहले ही भाजपा की सदस्यता ली थी और बकायदे इसे मीडिया पर प्रमुखता से प्रचारित किया गया था।

वैसे जानकार बताते हैं कि कांग्रेस के लिए अब बगावत को रोक पाना बहुत मुश्किल है क्योंकि मोदी को किसी भी स्तर पर कम से कम अब रोक पाना संभव नहीं लगता दंगों वाले मामलों में तो मुँह की खा चुकने के बाद बड़ी कोशिश की गयी कि इशरतजहाँ मामले में फ़साने की लेकिन इसमें भी मोदी को फसा पाना नामुमकिन ही है क्योंकि जो पेंच फंस रहा है उसमे पहले चिदम्बरम और प्रधानमंत्री कार्यालय ही फंसता नजर आ रहा है कानून के जानकारों के मुताबिक ये बिलकुल स्पष्ट है किसी खास और गंदी मंशा के तहत हलफनामा बदला गया और फिर आईबी ने नोट भी लीक कर दिया है जिससे इशरतजहाँ के आतंकवादी होने के प्रमाण को छिपा पाना असंभव हो गया है। इससे चिदंबरम के खिलाफ दोहरा तिहरा मामला भी बनता दिख रहा है। कांग्रेस के लिए ये मुसीबत अलग से है।

अब ये देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस आलाकमान अपनी पार्टी में बगावत को रोकने कैसे सफल होती हैं सीबीआई के डर से या किसी और डर से ....               

Wednesday, 17 July 2013

नितीश बाबू मिड-डे-मील

पता नहीं कैसे इस भीषण उमस भरी गर्मी में भी टोपोरियत के सेक्युलर उस्ताद टोपी ओढ़ के खुद रजाईदार बुर्के में छुपा कर कायदे आजम के ज़माने की खटिया पर बैठ कर ओठंग लेते हैं, लोग बाग बताते हैं कि नए-नए टोपोरी बने नितीश बाबू पाकिस्तान केवल टोपी और बुर्के की दीक्षा लेने ही नहीं गए थे बल्कि कायदे आजम की खटिया भी उठा लाए थे। उनके पाकिस्तानी चाहूकारों ने बड़े लगन से कायदे आजम की खटिया को रीप्रोड्यूस किया था। कैसे किया था भले ही ये रहस्य हो लेकिन काम बड़ा बढ़िया करता है। उनके अपने लोग ही बताते हैं कि वो विशेष खटिया बड़े काम की चीज है हराम नीद को भी हलाल में बदल देती है और ओठंग लेने की बाद तो वोट बैंक के ऐसे-ऐसे सपने आते हैं मानो उनको जन्नत की हूर मिल गयी हो। पता नहीं वो जन्नत की हूरें मिड-डे-मील खायी होंगी या नहीं लेकिन इतना तो तय है नितीश बाबू जैसे टपोरियों की सेवा करने में उनको भी बड़ा मजा आता होगा आखिर ए.के. 47 भी कोई चीज होती है ये रहस्य कहीं खुल न जाए इसीलिए गयाजी में 5 किलउवा एलपीजी सिलेंडर का इस्तेमाल किया गया था और यकीन मानिये ये रहस्य रहस्य तब तक रहेगा जबतक कि अणें मार्ग पर हूरें मिड-डे-मील खा कर रजाईदार बुर्के में दनादन सीरियल विस्फोट नहीं कर देंगी। खैर कायदे आजम की खटिया पर ओठंगने के बाद तो मौत भी नहीं दिखाई देती भले ही भगवान के स्वरुप माने जाने वाले 10-15 साल के छोटे-छोटे बच्चे ही क्यों न हों क्या फर्क पड़ता है जन्नत तो वोट से खरीदा जाता है लिहाजा ये मरने वाले बच्चे क्या कर सकते हैं सिवाय इनके टोपोरियत सेकुलर भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ने के। बिहार का इतिहास भी ऐसा है कि वहां मृत्यु से अधिक सर्वदा सैद्धांतिक पक्ष को तवज्जो दी जाती रही है गौतम बुद्ध ने भी इसी सन्दर्भ ज्ञान प्राप्त किया था लेकिन टोपोरियत के सेक्युलर उस्ताद तो टोपी-बुर्का पहन के वोट-ज्ञान प्राप्ति की साधना में ऐसे लीन हैं कि देख लीजिये उनको फुर्सत का अकाल है। ये इसी  टोपोरियत-साधना की बिलकुल नयी खोज का ही कमाल है कि कोई विस्फोट में मरा नहीं लेकिन भोजन करने से लोग मर जा रहे हैं वो भी बच्चे। पता नहीं नितीश बाबू ने कैसे इसकी खोज टोपी-बुर्का ओढ़ कायदे आजम की खटिया पर बैठ कर डाली। उनकी पार्टी जद यू में इस बात अच्छी खासी चर्चा है कि नितीश बाबू कभी जिन्दगी में गलत काम नहीं करते लोग अगर उनको जूता-चप्पल दिखाते है या उनपर फेंकते तो ये सब उनके अच्छे कामों के लिए ही होता है लिहाजा बिहार कुछ भी हो जाए बि(काऊ)-हार उनके गले में ही जाना चाहिए इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वो किसी भी रूप में और कैसे भी हड्डी है या हड्डा, किसी को नुकसान होता है या फायदा। वैसे इसके लिए उनको कुछ तो मिलना ही चाहिए पुरस्कार के रूप में भी भले ही वो ख़ास वर्ग का वोट ही क्यों न हो।        

Monday, 15 July 2013

कुत्ता रोची

नरेन्द्र भाई मोदी के कार के नीचे आखिरकार कुत्ता (रोची) आ ही गया सभी लोग सोच रहे थे कि पिल्ला आएगा लेकिन 74 का बूढ़ा कुत्ता आ गया लेकिन मजा देखिये वो कार के नीचे तो आया जरूर लेकिन बेचारे की मौत नीचे आते ही उसका हार्ट अटैक हो गया बेचारा कुत्ता(रोची) आदमी की मौत मरा । वो ऐसा धोबी का कुत्ता था जो घाट का तो नहीं हुआ लेकिन 10 जनपथ (घर) का जरूर हो गया था, बड़े इत्मीनान से उस कुत्तारोची को सरकारी मेहमान बना के मोटी-मोती हड्डियाँ खिलाईं जाती थीं लोग भूख से मरते रहे लेकिन उस कुत्ते के हूक के आगे बड़े - बड़े लोग भी खांटी आलाकमान के आदेश पर अपने ही तन की हड्डियाँ निकाल के उसके सामने डालने को मजबूर हो जाते थे। बड़े - बड़े पहलवानों को लगाया गया उस कुत्ते के पेट से चबाई गयी हड्डियों को निकलवाने के लिए लेकिन वो बेचारे पहलवान के लगोंटियों की डोर उस कुत्ते के रखवालों के हाथ में थीं लिहाजा इज्जत का खतरा अलग से था इसीलिये वो कुत्ता अपने घर में नकली शेर बना फिरता था लेकिन जब जब नरेन्द्र भाई की चेतावनी आई और जैसी ही कार के नीचे आया बेचारे का दिल हमेशा के लिए बैठ गया। वैसे तो "क" का महत्व कभी कम नहीं था लेकिन आजकल कुछ ज्यादा ही महत्वपूर्ण हो गया है क से कुत्ता, क से कमीशन, क से कोयला, क से काला धन, क से कामन वेल्थ यानी जितने लोग उस गैंग में थे सबकी हिस्सेदारी, क से कनीमोझी, कलमाड़ी, इन सबसे क से कलंक और भी बहुतकुछ लेकिन सवाल उठता है क्या ये सभी क वाले मोदी के कार के नीचे कुत्ते की मौत मरेंगे या आने से पहले ही कुत्ता(रोची) की तरह हार्ट अटैक हो जाएगा? वैसे गुजरात में तो क से एक एक पार्टी मोदी की कार के नीचे आ कर इतिहास बन ही चुकी है। मैंने कुत्ता(रोची) की मौत पर एक खांटी भाई कांग्रेसी से पूछा तो कहने लगे "...आप लोग बेवजह इसे तूल दे रहे हैं ..." मैंने खांटी भाई से फिर पूछा "...कहीं ऐसा तो नहीं उस कुत्ता(रोची) को नरेन्द्र मोदी के सन्देश का अंतिम तार भेज दिया गया था ...?" खांटी भाई ने उलटे मुझसे ही सवाल कर दिया "...भारत से उसे क्यों तार भेजा जाएगा ...?" मैंने उत्तर देते हुए कहा "...नहीं मैंने तो ऐसे ही ...वैसे कुत्ता(रोची) भाई आप लोगों के बड़े ही घरेलू थे ..." खांटी भाई बोले "...ऐसा कुछ नहीं है ..." मैंने कहा "...ऐसा कुछ नहीं है तो बयान के तुरंत बाद उसे हार्ट अटैक क्यों हो गया ...?" खांटी भाई बोले "...ये एक संयोग भी तो हो सकता है ..." मैंने कहा "...भी तो हो सकता है न पता नहीं है या नहीं ..."खांटी भाई बोले "...आप लोग बेवजह बात का बतंगड़ बनाते हैं ..." मैंने खांटी भाई से कहा "...आपके आलाकमानो की पतंगड़ी भी कम नहीं ...जब ऐसा है बतंगड़ बनना तो जरूरी हो जाता है और बनना भी चाहिए ..." खांटी भाई बोले "...देखिये वो मामला ख़त्म हो गया है अब तो उनकी मौत भी हो चुकी है ..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...कुत्ता (रोची) के लिए इतना सम्मान जैसे कुत्ता (रोची) न हुआ हाफिज साहब और लादेन जी हो गया ..." खांटी भाई कुछ बोले नहीं .....

Tuesday, 9 July 2013

कांग्रेसी दिग्गी

पंचर कौन कहे बर्स्ट यानी भ्रष्ट होती कांग्रेसी खटारा के दिग्गी के सड़ी बास अक्सर आती रहती है और कांग्रेस के लोग उसी बास को गुलाब का गंध समझ कर उसे जनता के बीच फेकते रहते हैं लेकिन इस बार तो उस दिग्गी से कुछ ज्यादा सड़ी हुई और दुर्गन्ध वाली बास आई तो कुछ टोपोरी छाप सेकुलरों को बड़ा अच्छा लगा शायद उन वोट बैंक के भुखारियों ने सोचा चलो कुछ तो व्यवस्था हो गयी। दरअसल वो वही लोग हैं जो वोट के लिए कुत्ते के मुँह से हड्डी भी छीन कर खा जाने की महारत रखते हैं। ये लोग ऐसे मौत के सौदागर हैं कि जिन्दगी भी मौत से पनाह मांगती रहती है। खैर दिग्गी से आने वाली सड़ी और बदबूदार बास पर मैंने एक खांटी भाई कांग्रेसी से पूछा तो कहने लगे "...कांग्रेस सबसे पुरानी पार्टी है ..." मैंने कहा "...इसका क्या मतलब आपके खटारा के दिग्गी से हमेशा बदबूदार बास ही निकलेगी ...?" खांटी भाई बोले "...आपकी दृष्टि में वो दुर्गन्ध हो सकती है..." मैंने कहा "...दुर्गन्ध दृष्टि में होती है ये तथ्य पहली बार मेरे संज्ञान में आ रहा है ..." खांटी भाई थोड़ा तमतमा गए बोले "...आपके कहने क्या मतलब ...?" मैंने कहा "...सीधा सा मतलब है सभी लोगों को आप अपने युवराज की तरह बकलोल बबुआ क्यों समझते हैं ...?" खांटी भाई ने गुस्से में पूछा "...आपका इशारा किस तरफ है ..." मैंने उत्तर देते हुए कहा "...जिन्दगी दांव पर लगी है उधर बबुआ लन्दन में बन्दर नचाते रहे ..." खांटी भाई का गुस्सा थोड़ा और बढ़ गया  बोले "...आप लोग कहना चाहते हैं कि हर समय एक ही जैसा होना चाहिए ..." मैंने पूछा "...तो क्या इसी परिवर्तन के लिए आप अपने खटारा के दिग्गी से समय-समय पर बास छोड़ते रहते हैं ...?" खांटी भाई बोले "...वो बास नहीं वास्तविकता है ..." मैंने कहा "...बिलकुल मौत वास्तविकता है सो उसका सौदा करने में आपको कोई हर्ज दिखाई नहीं देता ..." खांटी भाई का गुस्सा शांत नहीं हुआ बोले "...आपका आरोप सही नहीं है ..." मैंने कहा "...लगता है आपके खटारा दिग्गी में हमेशा शव-साधना होती रहती है और वहां से दिव्य ज्ञान मिलता रहता है ..." खांटी भाई उसी गुस्से में बोले "...जिन्दगी और मौत हमारे हाथ में नहीं है ..." मैंने कहा "...इसीलिए आपको उसका भी सौदा करने में कोई हर्ज नहीं लगता ..." खांटी भाई का गुस्सा शांत नहीं हो रहा था वो बोले "...आपको तथ्यों का ज्ञान नहीं है ..." मैंने उनसे पूछा "...आपके खटारा के दिग्गी से जो बास निकलेगी वही ज्ञान है ..." खांटी भाई बोले "...हर पहलू को देखना जरूरी है..." मैंने कहा "...आप द्विअर्थी बात मत कीजिये ..." खांटी भाई बोले "...ओल्ड इस गोल्ड ...लिहाजा कांग्रेस हमेशा से सही तथ्य रखती है ..." मैंने कहा "...इसीलिए ओल्ड आतंकवादियों को कब्रें खोद-खोद कर निकाल रहे हैं और अपने खटारा के दिग्गी में उसे लेकर बास मारते फिर रहे हैं ..." खांटी भाई बोले "...बास आपको लगता होगा ..." मैंने कहा "...जी अब भारत के लोग भी आपके ओल्ड और भयानक दुर्गन्ध को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं ..." खांटी भाई बोले "...ये तो समय ही बताएगा फिलहाल .." मैंने कहा मुझे भी समय का इन्तजार है ...नमस्कार     

Thursday, 4 July 2013

नरेन्द्र भाई मोदी से जो टकराया

नरेन्द्र भाई मोदी से जो टकराया नष्ट हो गया ठीक वैसे ही जैसे सिकंदर नष्ट हो कर चुकंदर बन गया तो अपनी बेटी को चन्द्रगुप्त मौर्य को सौंप कर गया। पूरी की पूरी खांटी कांग्रेस यही गलती कर के झूठा इतिहास लिखने का छिछोर प्रयास कर रही है। नूरजहाँ के नाम पर शाहजहाँ ने तेजोमहालय हड़प लिया जिसे ताजमहल के फर्जी नाम से जाना जाता है ताजमहल का उल्लेख मुग़ल इतिहास में कहीं भी नहीं मिलता ठीक वैसे ही एक चिरकुटजहाँ  इशरतजहाँ के नाम पर हमारे खांटी भाई कांग्रेसी फिर से शाहजहाँ बनने की कोशिश  कर रहे हैं। अब उनको कोई कैसे समझाए कि असली इतिहास और नकली इतिहास में काफी फर्क होता है  चिरकुटजहाँ  इशरतजहाँ अब मर चुकी है उसके लिए कोई तेजोमहालय खाली नहीं है जिसे उसके नाम पर उसे हड़प कर शाहजहाँ की उपाधि पर कब्ज़ा किया जा सके। इसी खुन्नस में बेचारे पता नहीं कहाँ-कहाँ उटपटांग हरकतें करते फिर रहे हैं। खांटी भाई लोगों को शाहजहाँ बनने इतना फितूर सवार है कि एक चिरकुटजहाँ  इशरतजहाँ को नूरजहाँ जैसा ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। सब जगह से हार गए तो चिरकुटजहाँ बम से चले हैं भौकाल खड़ा करने। यही  चिरकुटजहाँ  इशरतजहाँ वाला बम जब अपनी असली औकात में आया तो बन गए भीगी बिल्ली वैसे भी चिरकुटजहाँ  बम की असली औकात तो बहुत पहले ही पता चल चुकी थी लेकिन  बाद में उसे बदल दिया गया। क्या करियेगा जब इंस्पिरेशन बकलोल से लिया जा रहा हो तो ऐसा ही होता है। लेकिन बात वहीं आकर फंस जाती है कि जब सब कुछ इनके माफिक नहीं होता तो ये लोग उसी डकैती पर उतारू हो जाते हैं जैसा शाहजहाँ और इस देश के नकली और मूर्ख इतिहास्यकारों ने नेहरू के नेतृत्व में किया था ये ठीक वैसा ही था जैसा कि आज दिख रहा है मामला इंस्पिरेशन का ही है। ये बहुत बड़ी सच्चाई है कि  चिरकुटजहाँ  इशरतजहाँ को नूरजहाँ बना कर शाहजहाँ नहीं बना जा सकता लेकिन पता नहीं किस इटैलियन दिमाग से ये खांटी भाई कांग्रेसी लोग बार-बार  चोखा बनाने के लिए गोईठा में बैगन डाल रहे और और पूरा का पूरा बैगन बार-बार फुंका जा रहा है। खांटी भाई लोगों को किसी इटैलियन दिमाग के बकलोल ने समझाया कि ये सब नरेन्द्र भाई मोदी का जादू है कि सब कुछ आग के हवाले भस्म होने के कगार पर है और चोखा है कि बनने का नाम ही नहीं ले रहा है। जब दिमाग नाम के चीज होगी तब तो ठिकाने आएगी।  चिरकुटजहाँ  इशरतजहाँ के नाम पर गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अन्य तेजोमहालयों पर कब्ज़ा करना संभव ही नहीं है शाहजहाँ का समय और था आज का समय और है। एक खांटी भाई तो उल्टा लटक कर मोदी जी के खिलाफ हो गए पता चला कि जिसके सहारे वो लटके हैं वो सहारा ही नरेन्द्र भाई मोदी के हाथ में है पूरी की पूरी हस्ती ही बेचारे की  चिरकुटजहाँ  इशरतजहाँ की भेंट चढ़ गयी। बेचारे गली-गली घूम रहे हैं चादर-चढ़ावा ले कर कि कोई तो मिले जिसके नाम पर नकली इतिहास लिख कर शाहजहाँ बन सकें लेकिन यकीन मानिये ये सब करना उन खांटी भाईयों के लिए मजबूरी बन चुकी है इसलिए नहीं कि वो लोग खांटी भाई कांग्रेसी हैं बल्कि इसलिए कि ऐसा बहुत कम होता है कि इनकाउंटर का तर्जुमा गलत हो। इसीलिए ट्यूब ब्लास्ट के बाद टोनी ब्लेयर ने कहा था "मै सिर्फ शक होने पर खोपड़ी में गोली मार दूंगा" उन्होंने वैसा ही किया। नतीजा सबके सामने है फिर कोई वारदात नहीं हुई। खांटी भाई कांग्रेसी लोगों का यही रवैया रहा तो वो दिन दूर नहीं जब इन लोगों को "बकलोलजहाँ" के नाम की उपाधि से नवाज दिया जाएगा।

Wednesday, 3 July 2013

मामू अपने बकरे के साथ

मामू अपने बकरे के साथ हाथ में तोते मय पिजरा लिए कुतुबमीनार पर चढ़ कर लगे गवनई करने "...आज मै ऊपर आसमां नीचे ...आज मै आगे जनाना है पीछे ..." मजे की बात ये कि पिंजरे में बंद तोता भी उनके गाने को दोहरा रहा था। उनको देख कर न जाने कितने ही खांटी भाई कांग्रेसी कबूतर उड़ाने की तैयारी करने में जुट गए हैं मैंने एक खांटी भाई से पूछा तो कहने लगे "...खुशी में कोई उल्लू थोड़े ही उड़ाता है ..." मैंने कहा "...हाँ उल्लू उडाएँगे बड़ी समस्या ये है कि एक तो देखेगा कौन दूसरे उसी रूप आपके नजर में बहुत बड़ी पूंजी भी है कहीं उड़ गया तो ..." खांटी भाई गुस्से में आ गए और डांटने के अंदाज में पूछा "...आपका मतलब क्या है ..." मैंने उन्हें शांत करते हुए कहा "...आप गुस्सा क्यों होते हैं अरे भाई उल्लू ही लक्ष्मीजी की सवारी है ..." शायद उनका गुस्सा फिर भी शांत नहीं हुआ उन्होंने फिर पूछा "...आप साफ-साफ कहिये ..?" मैंने भी तैश में साफ करते हुए कहा "...उल्लू नहीं रहेगा तो लक्ष्मी कैसे आएंगी ...बात साफ़ है!" खांटी भाई ने कहा "...हाँ वो बात तो है इसीलिए हम  शांतिप्रिय लोग हैं ..." मैंने उपेक्षा के लहजे में कहा "...वो तो ठीक है लेकिन मामू गाने में गा रहे थे जनाना है पीछे ...इसका मतलब ..." खांटी भाई बोले "...वो उनकी पर्सनल लाइकिंग है ..." मैंने चुटकी लेते हुए कहा "...मुझे लगा कि आपकी प्रेसीडेंट मैडम ..." खांटी भाई भड़क कर बीच में ही बात काटते हुए बोले "....हमारी प्रेसीडेंट मैडम से ऊपर कोई नहीं हो सकता ..." मैंने कहा "...लेकिन तोते का पिंजरा और बकरा दोनों उनके हाथ में है फिर ये आप लोगों का 50% आरक्षण...?" खांटी भाई ने उत्तर देते हुए कहा "...ये सब तो हमारी प्रेसीडेंट मैडम की ही मेहबानी से है ..." मैंने उनसे सवाल करते हुए पूछा "....बड़ा अजीब संयोग है कि इधर मामू अपने बकरे और पिंजरे के साथ गाना गाते हैं और उधर मुंबई में नोट भरे ट्रक बरामद होते हैं ..." इसपर खांटी भाई भड़क गए और बोले "...आप लोगों को शक करने की बीमारी हो गयी है ..." मैंने उन्हें शांत करते हुए कहा "...नहीं मैंने तो ऐसे ही कहा था क्योंकि उनको रेलगाडी से ही भेजा जाना था ..." खांटी भाई बोले "...इसका उनसे कोई लेना देना नहीं है ..." मैंने कहा "...क्यों आपके सीबीआई की जांच-रिपोर्ट आ गयी क्या ..." खांटी भाई ने कोई उत्तर नहीं दिया तो मैंने फिर उनसे पूछा "...खैर छोड़िये ...मामू पिंजरे में बंद तोते को हरी मिर्ची खिलते हैं या लाल ..." खांटी भाई से रहा नहीं गया उन्होंने उलटे मुझे ही डांटते हुए कहा "...क्या फालतू सवाल है आपको कुछ अच्छी बातें करनी नहीं आती क्या ...?" मैंने भी उन्हें उसी टोन में उत्तर देते हुए कहा "...जब आप लोग मिर्ची के रस में डमरू डूबा के वोट बैंक का नंगा नाच करेंगे तो ऐसे सवाल तो उठेंगे ही ..." खांटी भाई मुझे समझाते हुए बोले "...देखिये आप समझा कीजिये राजनीति में ये सब चलता है ..." मैंने कहा "...हाँ ये सब तो आप लोगों की पुश्तैनी विरासत है ..." खांटी भाई पलट कर पूछा "...आपका मतलब क्या है ..." मैंने स्पष्ट करते हुए कहा "....आपका उल्लू लक्ष्मी जी की सवारी करने के पूरी दुनियां में उड़ान भरता है ..." खांटी भाई को गुस्सा आ गया बोले "...आपका मतलब क्या है ..." मैंने कहा "...मेरा मतलब ठीक वही है जो आपके समझ में आ रहा है ..." खांटी भाई ने सफाई देते हुए कहा "... इसका कोई प्रमाण आपके पास है ..." मैंने कहा तोते को मुक्त कीजिये फिर देखिये तोता आप लोगों के मुँह में कैसे मिर्ची ठूंसता है ..." खांटी भाई कांग्रेसी चुप हो गए ....मैंने भी उनसे विदा लिया ..... 

Monday, 1 July 2013

बकलोल बबुआ

बकलोल बबुआ लन्दन से आये तो खांटी भाई लोग वोट बैंक के हेलीकाप्टर से राहत उड़ाने में मस्त थे उनको तो लगा जैसे मुँह मांगी मुराद ही मिल गयी। बबुआ को ट्रक चलाने आता है या नहीं मुझे नहीं पता लेकिन ट्रक पर फोटो लगा कर चलना जरूर आता है। एक खांटी भाई मुझे बता रहे थे कि "...देखिये उनके लन्दन से आते ही कैसे माहौल बदल गया .." मैंने कहा "...हाँ बदल तो गया बकलोल बबुआ इतना शुभ है कि आते ही बेचारे 20 देवदूतों को आहुति देनी पड़ी ... हेलीकाप्टर ही क्रैश हो गया ..." खांटी बोले "...देखिये वो तकनीकि खराबी के कारण हुई थी ..." मैंने भी थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए कहा "...लेकिन विशेषज्ञों की राय में तो वो काफी नीची उड़ान थी मौसम खराब हो गया था ..." खांटी साहब बोले "...वही तो पायलट को ठीक से उडाना चाहिए था ..." मैंने कहा "...बकलोल बबुआ जिस समय थे उस समय तो मौसम साफ़ था वो नहीं आया होता तो क्रैश नहीं हुआ होता ..." खांटी बोले "...देखिये उनका जाना जरूरी था इसलिए सारे हेलीकाप्टरों की उड़ान रोक दी गयी थी ..." मैंने उन्हें सुझाव देते हुए कहा "...उनको राहत सामग्री लेकर जाना चाहिए था ..." वो तड़ाक से उत्तर देते हुए बोले "...वो रैम्बो थोड़े ही हैं जो रहत सामग्री लेकर जाएँगे ..." मैंने कहा "...ठीक है तो फिर देश को भी रैम्बो लोगों के हवाले ही कर देना चाहिए ..." उन्होंने तपाक से पूछा "...वो क्यों भला ..." मैंने उत्तर देते हुए कहा "....कम से कम लोग बेमौत मरेंगे तो नहीं ..." वो थोड़ा गुस्से में बोले "....आपका मतलब ये प्राकृतिक आपदा नहीं थी ...?" मैंने बिलकुल ठन्डे दिमाग से उत्तर देते हुए कहा "...बिलकुल नहीं जी ये विशुद्ध रूप से सरकारी आपदा थी जिसे प्रायोजित किया गया था ..." वो मुझे समझाते हुए बोले "...देखिये आपका गुस्सा जायज है लेकिन ..." मैंने बीच में ही बात काटते हुए कहा "...लेकिन क्या ...आपको तो आपदा, विपदा और त्रासदी में फर्क भी नहीं पता ..." वो अटकते हुए बोले "...हम लोगों को राहुल जी के मार्गदर्शन की बहुत जरूरत है ..." मैंने गंभीरता से कहा "...इसी लिए 50% आरक्षण की बात की जा रही है ..." वो बोले "...ये पार्टी का नीतिगत मामला है ..." मैंने कहा "....आपके बकलोल बबुआ कब से नीतिगत मामलों में दिलचस्पी दिखने लगे वैसे किस नीति के तहत 135 ट्रकों के साथ भूखे-प्यासे ड्राईवर ऋषिकेश में कई दिनों से मर रहे हैं ..." वो बोले "...देखिये उनके लिए भी राहत सामग्री भेजने का बंदोबस्त किया जा रहा है ..." मैंने उनसे सवाल किया "...ये भी बकलोल बबुआ का ही नीतिगत मामला है और ट्रक-ड्राईवरों उनका मार्गदर्शन मिला ही नहीं ..." उन्होंने उत्तर देते हुए कहा "...आपका आरोप बेबुनियाद है ..." मैंने कहा "...हाँ इसीलिए 6 दिनों तक उन ड्राईवरों के आँख पर पट्टी बांध कर दिल्ली में रोक कर रखा गया था कि बकलोल बबुआ जब लन्दन से आवेंगे मार्गदर्शन देंगे तो ये ट्रक वाले राहत ले कर जाएँगे ..."वो बोले "...आप समझा कीजिये मार्गदर्शन बहुत जरूरी है ..." मैंने खांटी साहब से पूछा "...उनके आते ही चीयर लीडरई क्यों शुरू हो गयी ...?" उन्होंने उत्तर देते हुए कहा "...लोकसभा चुनाव भी सर पर हैं क्या करें ..." मेरे पास खांटी साहब से कुछ और पूछना जरूरी नहीं लगा सो मैंने उन्हें नमस्कार करके विदा लिया .....