Friday, 7 June 2013

हमारे एक जानने वाले पहलवान छाप बीड़ी पीते हैं लेकिन ललकारते और दहाड़ते हैं एक साथ शीला दीक्षित वाले अंदाज में बड़े ही शालीनता से। शीला जी पता नहीं क्यों बार - बार केजरीवाल को भी कुछ सुलगाने के लिए या पता नहीं क्या करने के लिए हाई वोल्टेज बिजली  बड़े दिनों से केजरीवाल अपने ढोलक को तेल पिला रहे थे आखिरकार उन्होंने मुनादी करवा ही डाली कि वो  शीला दीक्षित के खिलाफ ढोल बजाएँगे उनकी मुनादी से दिल्ली वालों को बड़ी राहत मिली ऐसा "आप" बताते फिर रहे हैं। मेरे एक मित्र की पदोन्नति हुई और तो "तुम" से "आप" हो गए। चलिए अच्छा है दिल्ली में "आप" वाले "पाप" रोकेंगे ये समझना तो ठीक वैसा ही है जैसे गड़ही में कूद कर नाक बंद करके सांस लेना। खैर "आप" तो हर जरूरी मुद्दे पर अपनी नाक-कान-आँख और न जाने क्या क्या बंद कर लेते हैं ऐसा वो भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी कर चुके हैं कहते हैं केजेरीवाल जब कमिश्नर थे तो किसी को भी नहीं पकड़ा था जबकि पूरा तंत्र उनके साथ था पता नहीं नौकरी छोड़ने के बाद उनके पास दिव्य शक्ति कहाँ से आ गयी। मैंने एकध "आप" से इस बारे में पूछा तो कहने लगे "...कांग्रेस और भाजपा दोनों भ्रष्ट हैं ..." मैंने उनसे प्रतिप्रश्न पूछा "...लोमड़ी और शेर में आपको फर्क नहीं दिखता तो दोष किसका है ...?" वो भड़क कर बोले "...आपका मतलब क्या है ..." मैंने कहा "...भड़कते क्यों हैं ...मतलब तो आप अपने ढोलक से पूछिए ..." वो फिर भी असंतुष्टि भरे लहजे   

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