"ग्राफोलोजी & ग्राफोथिरेपी" द्वारा "नेतृत्व क्षमता" का विकास
"ग्राफोलोजी & ग्राफोथिरेपी" इतना उन्नत और विकसित विज्ञान है इससे किसी भी प्रकार के प्रतिभा का विकास बिलकुल नए सिरे से किया जा सकता है। चूंकि प्रत्येक व्यक्ति का व्यक्तित्व अद्वितीय (unique) होता है अतः अत्यंत सूक्ष्म स्तर (micro level) पर किसी के व्यक्तित्व को डायग्नोज़ कर लेते हैं तो सरलता से मात्र 28 दिनों में ही "नेतृत्व क्षमता" का विकास किया जा सकता है। प्रत्येक व्यक्ति का व्यक्तित्व अद्वितीय होने के कारण विकास की विधि व्यक्ति व्यक्ति के अनुसार बदलती रहती है। एक ही विधि को हम दुसरे व्यक्ति पर लागू नहीं कर सकते। चूंकि व्यक्तित्व को सूक्ष्म स्तर पर डायग्नोसिस की क्षमता केवल "ग्राफोलोजी" में ही है लिहाजा इससे, "नैदानिक व्यक्तित्व शोध रिपोर्ट"और "ग्राफोथिरेपी" के माध्यम से इस क्षमता का स्वभाविक विकास किया जाना सरलता से संभव है। वैसे सामान्य तौर पर किसी भी अच्छे, योग्य और इमानदार "नेता" में 13 प्रवृत्तियों का होना बहुत आवश्यक है जैसे ऐतिहासिक पृष्ठभूमि व दृष्टिकोण, अध्ययनशीलता, आत्मविश्वास, प्रचंड तार्किक शक्ति, प्रबल समाजिकता, उन्नतिशील दृष्टिकोण, काल्पनिकता, योजना शक्ति, प्रचंड दायित्वबोध, आशावादिता, प्रचंड धैर्य, संचारी प्रवृत्ति और श्रवणशीलता और गर्व। यदि किसी के "नेता" के अन्दर ये 13 प्रवृत्तियां प्रबल अवस्था में है तो उसे पराजित कर पाना लगभग असंभव है। इसके साथ-साथ ये भी एक तथ्य है कि इन सभी 13 प्रवृत्तियों का विकास एक साथ होना बहुत आवश्यक है नहीं तो एक प्रवृत्ति दुसरे को कमजोर करती रहेगी और पूरी "नेतृत्व क्षमता" का विकास कभी नहीं हो सकेगा। अतः व्यतित्व के स्पष्ट स्वरुप के आधार पर ही ऐसा किया जाना संभव है।
वैसे यदि कोई पहले से ही नेतृत्व के क्षेत्र में है और वो समस्याग्रस्त है तो उसे "ग्राफोलोजी & ग्राफोथिरेपी" के माध्यम से ठीक कर उस व्यक्ति मानसिकता को प्रबल "नेतृत्व क्षमता" हेतु सरलता से सशक्त किया जा सकता है जो पारंपरिक मनोविज्ञान और मनोचिकित्सा से बिलकुल ही संभव नहीं। ये तय है कि उपरोक्त 13 प्रवृत्तियां यदि अपने सही और प्रबल स्वरुप में व्यक्ति के व्यक्तित्व के अनुरूप हैं तो निश्चित रूप से उसे पराजित कर पाना सामान्य "नेता" करीब-करीब नामुमकिन होगा।
"ग्राफोलोजी & ग्राफोथिरेपी" इतना उन्नत और विकसित विज्ञान है इससे किसी भी प्रकार के प्रतिभा का विकास बिलकुल नए सिरे से किया जा सकता है। चूंकि प्रत्येक व्यक्ति का व्यक्तित्व अद्वितीय (unique) होता है अतः अत्यंत सूक्ष्म स्तर (micro level) पर किसी के व्यक्तित्व को डायग्नोज़ कर लेते हैं तो सरलता से मात्र 28 दिनों में ही "नेतृत्व क्षमता" का विकास किया जा सकता है। प्रत्येक व्यक्ति का व्यक्तित्व अद्वितीय होने के कारण विकास की विधि व्यक्ति व्यक्ति के अनुसार बदलती रहती है। एक ही विधि को हम दुसरे व्यक्ति पर लागू नहीं कर सकते। चूंकि व्यक्तित्व को सूक्ष्म स्तर पर डायग्नोसिस की क्षमता केवल "ग्राफोलोजी" में ही है लिहाजा इससे, "नैदानिक व्यक्तित्व शोध रिपोर्ट"और "ग्राफोथिरेपी" के माध्यम से इस क्षमता का स्वभाविक विकास किया जाना सरलता से संभव है। वैसे सामान्य तौर पर किसी भी अच्छे, योग्य और इमानदार "नेता" में 13 प्रवृत्तियों का होना बहुत आवश्यक है जैसे ऐतिहासिक पृष्ठभूमि व दृष्टिकोण, अध्ययनशीलता, आत्मविश्वास, प्रचंड तार्किक शक्ति, प्रबल समाजिकता, उन्नतिशील दृष्टिकोण, काल्पनिकता, योजना शक्ति, प्रचंड दायित्वबोध, आशावादिता, प्रचंड धैर्य, संचारी प्रवृत्ति और श्रवणशीलता और गर्व। यदि किसी के "नेता" के अन्दर ये 13 प्रवृत्तियां प्रबल अवस्था में है तो उसे पराजित कर पाना लगभग असंभव है। इसके साथ-साथ ये भी एक तथ्य है कि इन सभी 13 प्रवृत्तियों का विकास एक साथ होना बहुत आवश्यक है नहीं तो एक प्रवृत्ति दुसरे को कमजोर करती रहेगी और पूरी "नेतृत्व क्षमता" का विकास कभी नहीं हो सकेगा। अतः व्यतित्व के स्पष्ट स्वरुप के आधार पर ही ऐसा किया जाना संभव है।
वैसे यदि कोई पहले से ही नेतृत्व के क्षेत्र में है और वो समस्याग्रस्त है तो उसे "ग्राफोलोजी & ग्राफोथिरेपी" के माध्यम से ठीक कर उस व्यक्ति मानसिकता को प्रबल "नेतृत्व क्षमता" हेतु सरलता से सशक्त किया जा सकता है जो पारंपरिक मनोविज्ञान और मनोचिकित्सा से बिलकुल ही संभव नहीं। ये तय है कि उपरोक्त 13 प्रवृत्तियां यदि अपने सही और प्रबल स्वरुप में व्यक्ति के व्यक्तित्व के अनुरूप हैं तो निश्चित रूप से उसे पराजित कर पाना सामान्य "नेता" करीब-करीब नामुमकिन होगा।