Friday, 3 May 2013

"ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" तथा विवाह
विवाह हर किसी के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण, सबसे खूबसूरत, सबसे दायित्वपूर्ण, सबसे अनंदायी और सम्पूर्णता भरी अनुभूति है। इसका महत्व इतना अधिक है कि इसे सोलह संस्कारों में से एक संस्कार के रूप में अंगीकार किया गया है। विवाह का अर्थ भी विशेष है  विवाह = वि + वाह, अत: इसका शाब्दिक अर्थ है - विशेष रूप से (उत्तरदायित्व का) वहन करना। अतः यह बहुत आवश्यक है कि विवाह को भी उतने ही महत्वपूर्ण, दायित्वपूर्ण, सौन्दर्यपूर्ण और हर प्रकार अनंदायी स्वरुप में स्वीकार किया जाए। जिससे विवाह के बाद  अनंत विश्वास, प्रेम, समर्पण, आनंदायी अनुभूतियों का स्वभाविक प्रवाह अपने जीवन में सुनिश्चित कर सकें। जिससे संबंधों में मिठास उत्तरोत्तर घुलती रहे और आपके सम्बन्ध उतने ही प्रगाढ़ होते चले जाएँ। विवाह मात्र दो व्यक्तित्वों के एक में परिवर्तित होने घटना नहीं है ये वो महत्वपूर्ण अवसर है जिससे दो तंत्रों (system) में मेल स्थापित होता है जिसमे अलग-अलग कई घटक होते हैं और सबमे अद्भुत सामजस्य स्थापित होना चाहिए वास्तव में यही आनंद और उन्नति है। उन्नत एवं अतिविकसित विज्ञान "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" के माध्यम से ऐसा से किया जाना सरलता से संभव है।
चूंकि लड़कियां कोमल स्वाभाव की होती हैं, उनको दूसरे घर में जाना होता है और घर का दायित्व उन्ही पर निर्भर करता है इसलिए ये आवश्यक है कि कन्याएं मानसिक रूप से सबल, सक्षम, संवेदनशील, देखभाल करनेवाली तथा चैतन्य हों जिससे वो अपने ससुराल में सबकी दुलारी और स्वयं को एक मानदंड स्थापित करने सफल हो सकें। उनका दाम्पत्य जीवन पूर्ण रूप से आनंदायी हो और हर प्रकार के दुखों और शारीरिक और मानसिक परेशनियों से दूर रहे। इसलिए विवाह से या तो 6 महीने पूर्व या वर ढूढने की  प्रक्रिया के आरंभ से ही कन्या को  "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" के माध्यम से "मानसिक और बौद्धिक रूप से सशक्त" बना देना बहुत लाभकारी रहता है। इसकी साथ-साथ जिन कन्याओं को किसी प्रकार की मानसिक परेशानी होती है जैसे विश्वास की कमी, विवाह से डर लगना, शारीरिक सम्बंधों के सन्दर्भ में मिथ्या अनुभूति आदि जैसी समस्या भी हो तो उसे "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" से दूर कर उन्हें मानसिक रूप से सक्षम और सशक्त बनाया जा सकता है और वे भी अन्य कन्याओं की भांति शानदार दाम्पत्य जीवन का आनंद उठाने सफल रहेंगी।
"ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" केवल लड़कियों के लिए ही उपयोगी नहीं है बल्कि उन लड़कों के लिए भी बहुत उपयोगी है जिनका विवाह होने जा रहा है अक्सर लड़के अपनी पत्नी के सन्दर्भ में कई प्रकार से अतिवादिता के शिकार रहते हैं चाहे वो सकारात्मक हो या नकारात्मक। इससे उनका दाम्पत्य जीवन और खुशिया दोनों प्रभावित होती हैं। सम्बन्धों के निर्वंहन और उसे आनंदपूर्ण बनाने का दायित्व केवल पत्नियों पर ही नहीं होता बल्कि पतियों पर भी होता है और इसके लिए भी "सशक्त मानसिकता" की जरूरत होती है। उनके लिए भी "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" बहुत मददगार साबित होती  है। उन्हें भी निश्चित रूप से इसका लाभ उठाना चाहिए। सशक्त, आनंदपूर्ण, चैतन्य और दायित्वपूर्ण जोड़े ही सबल, सक्षम और बुद्धिमान संतानों को जन्म दे सकते हैं यह वैज्ञानिक, धार्मिक और पौराणिक सत्य है। इस प्रकार हम न केवल अपनी सेवा करते हैं बल्कि आने वाली पीढी को भी सशक्त करेंगे।
लगभग 10 वर्ष पहले एक कन्या का सशक्तिकरण "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" से किया गया था जब उसकी शादी होने वाली थी। विवाह के उपरान्त उसने अपने सशक्त दिमाग का उपयोग करते हुए सभी का मन जीत लिया, आज अपने सुसराल में वो एक मानदंड के रूप में देखी जाती है, वो एक मानक है, उसको दो बच्चे है एक लड़का और एक लडकी लड़का चार भाषाएँ सामान अधिकार के साथ बोलता है, हर साल उसके बच्चे को बेस्ट स्टूडेंट का पुरस्कार मिलता है, विवाह के उपरान्त उसके पति को 6 प्रमोशन मिले आज वो अपने कंपनी में सबसे कम उम्र के GM हैं।
एक लडकी थी जिसे किसी कारणवश शादी के नाम से ही बहुत डर लगता था। एक प्रकार से उसे शादी से फोबिया हो गया था। उसका मनोचिकित्सकीय इलाज करीब 1.5 साल चला। कुछ लाभ होने के बजाय जा मामला बिगड़ गया तब उसने "ग्राफोलोजी एवं ग्राफोथेरेपी" की मदद ली। मात्र 15 दिनों में वो बिल्कुल ठीक हो गयी। अगले एक महीने में वो मानसिक स्तर पर बहुत सशक्त हो गयी। आज वो शानदार और बिल्कुल स्वस्थ और आनंदमयी जीवन व्यतीत कर रही है।

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